छत्तीसगढ़ के धरसींवा में छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ (CPM) के बैनर तले पत्रकारों ने कथित फर्जी मुकदमों, झूठी एफआईआर और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में पैदल मार्च निकाला। इस विरोध मार्च के बाद, उन्होंने थाना प्रभारी के माध्यम से पुलिस महानिदेशक और प्रदेश के गृहमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों, विशेषकर बस्तर और बिलासपुर संभाग में, उनके विरुद्ध लगातार झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस प्रकार की कार्रवाई से पत्रकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मार्च के दौरान, पत्रकारों ने माँग की कि उन्हें निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए और बिना किसी ठोस आधार के दर्ज किए जाने वाले मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए। CPM के सदस्यों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से टेलीफोन पर चर्चा कर पत्रकार सुरक्षा विधेयक को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकारों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पत्रकार महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएँ नहीं रुकीं और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के सदस्यों ने यह भी बताया कि वे जल्द ही प्रदेश के गृहमंत्री से मुलाकात कर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की अपनी माँग रखेंगे।
छत्तीसगढ़ के धरसींवा में छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ (CPM) के बैनर तले पत्रकारों ने कथित फर्जी मुकदमों, झूठी एफआईआर और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में पैदल मार्च निकाला। इस विरोध मार्च के बाद, उन्होंने थाना प्रभारी के माध्यम से पुलिस महानिदेशक और प्रदेश के गृहमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों, विशेषकर बस्तर और बिलासपुर
संभाग में, उनके विरुद्ध लगातार झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस प्रकार की कार्रवाई से पत्रकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मार्च के दौरान, पत्रकारों ने माँग की कि उन्हें निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए और बिना किसी ठोस आधार के दर्ज
किए जाने वाले मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए। CPM के सदस्यों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से टेलीफोन पर चर्चा कर पत्रकार सुरक्षा विधेयक को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकारों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करना
सरकार की जिम्मेदारी है। पत्रकार महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएँ नहीं रुकीं और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के सदस्यों ने यह भी बताया कि वे जल्द ही प्रदेश के गृहमंत्री से मुलाकात कर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की अपनी माँग रखेंगे।
- 25 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा के ग्राम कुंदरु में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया महिला क्रांति सेना द्वारा एक "जबर सदस्यता अभियान" का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, युवाओं एवं महिलाओं ने भाग लेकर इन संगठनों की सदस्यता ग्रहण की। बैठक के दौरान क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं और लंबित आवेदनों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें प्रमुख रूप से किसानों को समय पर खाद और कृषि संसाधन उपलब्ध नहीं होने, औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत ठेका मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिलने, तथा श्रमिकों के अधिकारों एवं हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। उपस्थित पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों ने इन समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों एवं प्रबंधन तक आवाज पहुंचाने का संकल्प लिया। साथ ही, किसानों, मजदूरों एवं कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आगामी दिनों में जनआंदोलन एवं संघर्ष की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा कर उसकी रूपरेखा तैयार की गई। कार्यक्रम में सामाजिक एकता, छत्तीसगढ़ी अस्मिता एवं जनहित के मुद्दों पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने "जात-पात के करव बिदाई, छत्तीसगढ़िया भाई-भाई" का संदेश देते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर छत्तीसगढ़ के हित में कार्य करने की अपील की।3
- छत्तीसगढ़ के धरसींवा में छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ (CPM) के बैनर तले पत्रकारों ने कथित फर्जी मुकदमों, झूठी एफआईआर और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में पैदल मार्च निकाला। इस विरोध मार्च के बाद, उन्होंने थाना प्रभारी के माध्यम से पुलिस महानिदेशक और प्रदेश के गृहमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों, विशेषकर बस्तर और बिलासपुर संभाग में, उनके विरुद्ध लगातार झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस प्रकार की कार्रवाई से पत्रकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। मार्च के दौरान, पत्रकारों ने माँग की कि उन्हें निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए और बिना किसी ठोस आधार के दर्ज किए जाने वाले मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए। CPM के सदस्यों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से टेलीफोन पर चर्चा कर पत्रकार सुरक्षा विधेयक को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकारों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पत्रकार महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएँ नहीं रुकीं और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं किया गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के सदस्यों ने यह भी बताया कि वे जल्द ही प्रदेश के गृहमंत्री से मुलाकात कर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की अपनी माँग रखेंगे।4
- छत्तीसगढ़ राज्य के धरसींवा में पत्रकारों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। यह शक्ति प्रदर्शन पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू करने की तेज होती मांग के बीच किया गया है। इस प्रदर्शन के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह केवल न्याय की मांग है या फिर यह एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है। पत्रकारों की ओर से उठाई गई इस पुकार के बाद, यह देखना होगा कि क्या सरकार उनकी मांगों को सुनेगी।1
- जनपद अभनपुर की ग्राम पंचायत जौंदी में आयोजित ग्राम सभा की बैठक के दौरान उपसरपंच के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का गंभीर मामला सामने आया है। उपसरपंच पोखन लाल यदु ने इस संबंध में थाना गोबरा नवापारा में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें सरपंच पुत्र टोमन साहू सहित सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, यह घटना 24 जून को ग्राम सभा की बैठक के दौरान हुई, जब प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर चर्चा चल रही थी। इस दौरान सूची में कुछ नामों के शामिल न होने को लेकर विवाद शुरू हो गया। उपसरपंच का आरोप है कि इसी विवाद के बीच सरपंच पुत्र और उसके साथियों ने उनका कॉलर पकड़ा, गाली-गलौज की और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए गए और उन्हें चोटें भी आईं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना का वीडियो भी बनाया गया है। उपसरपंच ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।3
- बुआई के महत्वपूर्ण सीजन में छत्तीसगढ़ के किसानों को खाद की भारी किल्लत, सोसायटियों में जबरन लिंकिंग और खुलेआम कालाबाजारी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के विरोध में 'जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी' (JCP) ने आज राजधानी रायपुर में एक अनोखा प्रदर्शन किया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने 'खाद की बोरी की शवयात्रा' निकाली। प्रदर्शन के बाद, महामहिम राज्यपाल के नाम रायपुर जिलाधीश के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें सरकार के कुप्रबंधन पर जमकर निशाना साधा गया। पार्टी के रायपुर जिला अध्यक्ष गोपी साहू, महिला जिला अध्यक्ष लक्ष्मी नाग और जिला उपाध्यक्ष ऋचा वर्मा ने आरोप लगाया कि अन्नदाता सोसायटियों के चक्कर काटने पर मजबूर है, जबकि सरकार सोई हुई है। नेताओं ने चिंता व्यक्त की कि खाद न मिलने से फसलें चौपट होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। ज्ञापन में बताया गया है कि सोसायटियों में खाद का कोटा आधा कर दिया गया है – जहाँ पहले प्रति एकड़ 2 बोरी डीएपी और 4 बोरी यूरिया मिलता था, उसे घटाकर अब 1 बोरी डीएपी और 2 बोरी यूरिया कर दिया गया है, जिससे धान की फसल को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा। किसानों को खरपतवार नाशी डालने के बाद भी खाद न मिलने से फसलें बैठ रही हैं और कल्ले पीले पड़ रहे हैं। लंबी कागजी कार्रवाई और 15-20 दिनों के इंतजार के कारण खाद डालने का सही समय निकल जाता है। रायपुर समेत कई जिलों में किसानों को खाद के साथ नैनो यूरिया, सल्फर या अन्य बायो-फर्टिलाइजर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे गरीब किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। सरकारी सोसायटियों में खाद न मिलने के कारण किसान मजबूरन प्राइवेट दुकानों से ऊंचे दामों पर (ब्लैक में) खाद खरीद रहे हैं और कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने मांग की है कि सोसायटियों में खाद की कटौती तुरंत बंद की जाए और पहले की तरह पूरा कोटा (2 बोरी DAP और 4 बोरी यूरिया) बहाल किया जाए। उन्होंने कागजी कार्रवाई को सरल बनाकर किसानों को 2 से 3 दिनों के भीतर खाद उपलब्ध कराने, सोसायटियों में नैनो यूरिया और अन्य दवाइयों की जबरन लिंकिंग पर तत्काल रोक लगाने, और खाद की कालाबाजारी करने वाले तथा तय दाम से अधिक पर बेचने वाले प्राइवेट दुकानदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है। पार्टी ने महामहिम राज्यपाल से इस संवेदनशील मामले में तुरंत संज्ञान लेने और छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में राज्य सरकार को उचित कदम उठाने हेतु कड़े निर्देश देने की विनती की है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।4
- बलौदाबाजार में जिला कांग्रेस कमेटी बलौदाबाजार-भाटापारा ने गुरुवार को नीट (NEET) पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों को लेकर एक जिलास्तरीय पत्रकारवार्ता और विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रव्यापी अभियान तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा कोटा (राजस्थान) में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ रैली के तहत किया गया। कार्यक्रम के दौरान एनएसयूआई बलौदाबाजार विधानसभा अध्यक्ष सूर्यकांत वर्मा के नेतृत्व में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसमें युवाओं ने राहुल गांधी के कोटा संबोधन और ‘द फैक्ट्री : कोटा – छात्रों की गूंज’ प्रस्तुति को देखा और सुना। उपस्थित विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था की खामियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की। पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों के सपनों को साकार करने के बजाय उन्हें लगातार असफलता और तनाव की ओर धकेल रही है और यह एक तरह का ‘रिजेक्शन सिस्टम’ बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं ने मेधावी छात्रों का मनोबल तोड़ा है और युवाओं में हताशा बढ़ाई है, साथ ही कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था को ‘वसूली तंत्र’ का रूप लेने का आरोप लगाते हुए परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ पर चिंता जताई। कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी का संदेश दोहराया कि युवाओं को बेहतर और सुलभ शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि प्रत्येक छात्र को अपने सपनों को पूरा करने का समान अवसर मिले। जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से पेपर लीक मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित रहे, जिनमें पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष परमेश्वर यदु, प्रभारी महामंत्री रामकुमार साहू (छल्ला), जिला महामंत्री जितेंद्र नवरत्न, सिद्धांत मिश्रा, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष प्रवीण सेन, ग्रामीण अध्यक्ष दीपक साहू, सुखदेव साहू, जनपद सदस्य रामकुमार टंडन, संजय सोनी, नीरज बांधे, विजय साहू, मोहन साहू, कमलेश्वर यदु और जतिराम साहू शामिल थे।1
- उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग पर बुलेट मोटरसाइकिलों की खरीद में ₹8 लाख के बड़े घोटाले का आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, विभाग ने ₹3 लाख की वास्तविक कीमत वाली बुलेट को ₹11 लाख में खरीदा है, जिसके चलते प्रत्येक बुलेट की खरीद में ₹8 लाख का कथित घोटाला हुआ है। यह गंभीर आरोप फायरमैन जितेंद्र राठौर ने लगाए हैं। उन्होंने लखनऊ में एक अग्निकांड स्थल पर पहुँचकर इस घोटाले का पर्दाफाश किया, जो अग्निशमन विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।1
- छत्तीसगढ़ के गोबरा नवापारा नगर में विद्युत विभाग द्वारा गंज रोड पर चलाए जा रहे मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी का मामला सामने आया है। व्यस्त मुख्य मार्ग पर बिजली लाइन बंद करके किए जा रहे इस कार्य में कई फीट की ऊंचाई पर श्रमिक बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों, जैसे सुरक्षा बेल्ट और हेलमेट, के काम करते देखे गए। इस दृश्य को देखकर राहगीरों और स्थानीय नागरिकों में गहरी चिंता फैल गई और मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे श्रमिकों की जान जोखिम में डालने वाला कार्य बताया, यह सवाल उठाते हुए कि यदि कोई अप्रिय घटना घटती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। लोगों ने विद्युत विभाग के इस कार्यप्रणाली को 'जोखिम वाला सर्कस' करार देते हुए विभाग पर सवाल खड़े किए। नागरिकों ने यह भी कहा कि विभाग आम उपभोक्ताओं की छोटी-मोटी गलतियों पर तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन अपने स्वयं के कार्यों में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करता है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग से कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी संभावित हादसे से बचने के लिए बिना सुरक्षा उपकरणों के श्रमिकों से जोखिमपूर्ण कार्य न कराने की मांग की है।2