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लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में प्रॉमिनेंट मॉल में AC ना चलने पर लोगों की कड़ी कारवाही लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र स्थित प्रॉमिनेंट मॉल में AC की सुविधा ठीक से संचालित नहीं हो रही है। मॉल में आने वाले ग्राहकों को गर्मी और उमस के कारण काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मॉल जैसी सार्वजनिक सुविधा वाली जगह पर उचित तापमान और वातानुकूलन की व्यवस्था सुचारु रहना आवश्यक है। और इस मॉल का जो मैनेजर है वह भी कोई रेस्पॉन्स नहीं कर रहा है।
प्रथमेश सिंह चौहान
लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र में प्रॉमिनेंट मॉल में AC ना चलने पर लोगों की कड़ी कारवाही लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र स्थित प्रॉमिनेंट मॉल में AC की सुविधा ठीक से संचालित नहीं हो रही है। मॉल में आने वाले ग्राहकों को गर्मी और उमस के कारण काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मॉल जैसी सार्वजनिक सुविधा वाली जगह पर उचित तापमान और वातानुकूलन की व्यवस्था सुचारु रहना आवश्यक है। और इस मॉल का जो मैनेजर है वह भी कोई रेस्पॉन्स नहीं कर रहा है।
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- इटौंजा में गोमती का कहर जारी प्रशासन अलर्ट मोड पर, डीएम विशाख जी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण लखनऊ/इटौंजा। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते बख्शी का तालाब तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुल्तानपुर, बहादुरपुर, हीरापुरवा लासा, अकडरिया, करौंदी,आदि दर्जनों गांव बाढ़ प्रभावित बताए जा रहे हैं।बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज की मांग पर जिलाधिकारी लखनऊ विशाख जी (आईएएस) ने गोमती नदी के किनारे स्थित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान एडीएम राकेश सिंह सीडीओ डाक्टर सुरेश कुमार एसडीएम बीकेटी, आकाश कुमार तहसीलदार, शरद सिंह सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, पशुपालन, स्वास्थ्य, ब्लॉक, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इटौंजा थाना प्रभारी सोबरन सिंह मय पुलिस बल के साथ सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था संभालते रहे। *किसानों के सामने फसल बर्बादी का संकट* तिरंगा महराज के अनुसार बाढ़ के पानी से बड़े क्षेत्र में धान, उड़द और सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर खेत पूरी तरह जलमग्न हैं। किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का सर्वे कराकर मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है। इसके अलावा कई गांवों में आवागमन प्रभावित है। सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग पर पानी भरने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। *स्वास्थ्य और पशुओं को लेकर भी चिंता* जलभराव के कारण ग्रामीणों में बुखार, डायरिया, त्वचा संबंधी बीमारी समेत अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ गया है। वहीं पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित स्थान की समस्या भी सामने आई है। पानी बढ़ने के कारण जहरीले जीव जंतुओं के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की आशंका से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कुछ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति और शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित होने की जानकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को दी।प्रशासन ने तेज किए राहत एवं बचाव के प्रयास निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी नेअधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा ग्रामीणों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव की व्यवस्था शुरू करने पशुओं के लिए चिकित्सा शिविर लगाने, चारे की व्यवस्था करने तथा ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। *सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग का भी डीएम ने जायजा लिया। इस दौरान तिरंगा महाराज ने डाट-पुलिया और सड़क की समस्या जिलाधिकारी के सामने रखी*। जिलाधिकारी ने बारिश के बाद लासा गांव की तर्ज पर सड़क को ऊंचा कराने तथा उपलब्ध प्रशासनिक प्रावधानों के तहत निर्माण की संभावना पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। *फसल बीमा को लेकर भी उठी मांग* बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसल बीमा संबंधी समस्या भी निरीक्षण के दौरान उठाई गई। तिरंगा महाराज ने किसानों के हित में फसल बीमा कराने की मांग रखी। प्रशासन की ओर से सोमवार तक संबंधित किसानों के दस्तावेज जुटाने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। *पुलिस प्रशासन ने भी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है* थाना प्रभारी सोबरन सिंह ने बताया अराजक तत्वों पर नजर रखने के साथ ओवरलोडिंग जोखिमपूर्ण आवागमन को रोकने के लिए पेट्रोलिंग की जा रही है ड्यूटी लगा दी गई है *ग्रामीणों ने जताया आभार* प्रशासनिक टीम के गांवों में पहुंचने और समस्याओं का मौके पर जायजा लेने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी समेत अधिकारियों और तिरंगा महाराज के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति में प्रशासन की सक्रियता से राहत एवं बचाव कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।तिरंगा महाराज ने कहा, आपदा की इस घड़ी में हम, हमारा भाजपा परिवार और समस्त पत्रकार बंधु पीड़ित किसानों और ग्रामीणों के साथ खड़े हैं। यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल पेश करने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का है। हमारी प्राथमिकता है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों, किसानों और पशुपालकों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचें और उनका यथासंभव शीघ्र समाधान हो।प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम न लेने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की है।1
- किसान बाजार में कथित अवैध हुक्का बार, प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल लखनऊ। थाना विभूतिखंड क्षेत्र के किसान बाजार स्थित Abongzaa Cafe को लेकर कथित तौर पर अवैध रूप से हुक्का परोसने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पहले कैफे के बाहर बैठाकर हुक्का पिलाया जाता था, जबकि प्रशासन की सख्ती के बाद अब कथित तौर पर कैफे के अंदर बैठाकर हुक्का परोसा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच मांग की जा रही है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच करे और यदि आरोप सही पाए जाएं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सवाल यह भी है कि प्रतिबंध के बावजूद कथित रूप से हुक्का परोसे जाने पर जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करेगा?1
- सच्चाई, साहस और एकता का पैगाम लेकर आगे बढ़ेगा पत्रकार संवाद मंच लखनऊ। पत्रकार संवाद मंच की ओर से सआदतगंज स्थित दरगाह हज़रत अब्बास में नवघोषित प्रदेश पदाधिकारियों के सम्मान में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दोनों नवनियुक्त पदाधिकारियों द्वारा दरगाह हज़रत अब्बास की ज़ियारत से हुई। इसके उपरांत पत्रकार साथियों ने फूल-मालाओं से उनका पुरजोर इस्तकबाल कर मुबारकबाद पेश की। पत्रकार संवाद मंच द्वारा मोहम्मद सिराज को प्रदेश अध्यक्ष तथा आमिर अब्बास को कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद दोनों पदाधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसी क्रम में प्रदेश कमेटी के उपाध्यक्ष अरशद रजा तथा संगठन सचिव शाहरुख पठान की घोषणा भी की गई, जिनका भी फूल-मालाओं से इस्तकबाल किया गया। स्वागत समारोह में उत्सव सिंह भी अपने साथियों के साथ विशेष रूप से पहुंचे और नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान मौजूद पत्रकारों एवं संगठन के सदस्यों ने नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी को दिल खोलकर बधाइयां दीं। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष सईद खान. ताजू ने कहा कि पत्रकार संवाद मंच किसी एक व्यक्ति का संगठन नहीं, बल्कि हर उस पत्रकार का मंच है जो सच्चाई, ईमानदारी और अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह संगठन जितना मेरा है, उतना ही आप सभी पत्रकार भाइयों का है। हम इसके मालिक नहीं, बल्कि इसके सेवक हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व महज़ खबर लिखना नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ को बुलंद करना और भ्रष्टाचार तथा जनसमस्याओं को सामने लाना भी है। संगठन का प्रयास रहेगा कि समाज में जहां कहीं भी भ्रष्टाचार, अन्याय या जनहित से जुड़ा कोई विषय सामने आए, उसे पूरी निर्भीकता के साथ जिम्मेदारों और सरकार के संज्ञान तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार संवाद मंच की असली ताकत उसकी एकता, साहस और सच के प्रति प्रतिबद्धता है। संगठन हर उस आवाज़ का मंच बनेगा, जो ईमानदारी और हक़ की बात करती है।1
- Agarwal Tringel News Lucknow 8574663222 हिन्दी दिवस एवं गणपति जन्मोत्सव पर डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो कृतियों का भव्य लोकार्पण लखनऊ, 14 सितंबर। हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और मानवीय संदर्भों के साथ समाज के सामने पुनः उपस्थित करता है, तो वह उन्हें जनस्मृति में पुनर्जीवित करने का कार्य करता है। पेशवा ने इस बात के लिए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया कि उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से उनके पूर्वजों और पेशवा परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक पात्रों को वर्तमान समाज के सामने पुनः प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. उपाध्याय की दोनों कृतियों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी लेखनी इतिहास और संस्कृति के उन पक्षों को समाज के सामने लाने का कार्य कर रही है, जिन पर आज गंभीर और व्यापक संवाद की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता एवं आलोचक डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ ने डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के ऐतिहासिक कथा-लेखन की प्रक्रिया, उनकी रचनात्मक दृष्टि और लेखकीय साधना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐतिहासिक लेखन केवल घटनाओं और तिथियों को क्रमबद्ध कर देने का नाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों का अध्ययन, ऐतिहासिक स्रोतों की खोज और पड़ताल, संदर्भों का सूक्ष्म परीक्षण, पात्रों की मानसिकता को समझना, तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिवेश का पुनर्निर्माण और इन समस्त तथ्यों को साहित्यिक संवेदना में रूपांतरित करने की कठिन साधना होती है। उन्होंने कहा कि ‘संक्रान्ति का संहार’ के पीछे डॉ. उपाध्याय की दीर्घकालिक अध्ययनशीलता, शोध-दृष्टि और लेखकीय परिश्रम स्पष्ट दिखाई देता है। ऐतिहासिक उपन्यास की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इतिहास की तथ्यात्मक विश्वसनीयता अक्षुण्ण रखते हुए कथा में ऐसा प्राण फूँका जाए कि पाठक केवल इतिहास पढ़े नहीं, बल्कि उसे घटित होते हुए अनुभव करे। डॉ. उपाध्याय इतिहास और साहित्य के बीच इसी जीवंत सेतु का निर्माण करते दिखाई देते हैं। ख्यातिलब्ध कथाकार महेन्द्र भीष्म ने विशेष रूप से आचार्य चतुरसेन शास्त्री की ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य में इतिहास को विराट कथात्मकता, शोध और मानवीय संवेदना के साथ प्रस्तुत करने की जिस समृद्ध परंपरा को आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने ऊँचाई प्रदान की, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय उसी परंपरा को अपने समय की आवश्यकताओं और अपनी विशिष्ट वैचारिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का गंभीर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चतुरसेन की परंपरा को आगे बढ़ाने का अर्थ केवल ऐतिहासिक विषयों को चुन लेना नहीं है। इसके लिए इतिहास के भीतर छिपे मनुष्य, समाज, सत्ता, संस्कृति, सभ्यता और संघर्ष के प्रश्नों को साहित्यिक गहराई के साथ पकड़ना आवश्यक है। डॉ. उपाध्याय की रचनाओं में यह प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बीज वक्ता डॉ. जयप्रकाश तिवारी ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का उपन्यास ‘संक्रांति का संहार’ केवल पानीपत के तृतीय युद्ध की ऐतिहासिक गाथा नहीं, बल्कि इतिहास का सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन है। उन्होंने विट्ठल, कल्याणी, माधव और वेणी जैसे पात्रों को इतिहास के उन गुमनाम नायकों का प्रतीक बताया, जिनके त्याग, व्रत, कला, संस्कार और बलिदान से राष्ट्र और स्वराज्य की नींव निर्मित होती है। उन्होंने ‘तमस’ और ‘उसने कहा था’ के युगबोध से इसकी तुलना करते हुए कहा कि जहाँ ‘तमस’ तटस्थता और सांस्कृतिक विघटन की चेतावनी देता है तथा ‘उसने कहा था’ वचन और व्यक्तिगत त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है, वहीं ‘संक्रांति का संहार’ सामूहिक राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वराज्य के लिए व्रत एवं बलिदान का संदेश देता है। डॉ. तिवारी के अनुसार पानीपत यहाँ अंत नहीं, बल्कि एक युग की संक्रांति और नए युग के जन्म का प्रतीक है; इसलिए यह कृति साहित्यिक उपन्यास से आगे बढ़कर सांस्कृतिक चेतना, इतिहास-बोध और राष्ट्रधर्म का पुनर्स्मरण कराने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उन्होंने इसे प्रत्येक घर में पढ़े और मनन किए जाने योग्य बताते हुए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस उच्चकोटि की साहित्यिक सृष्टि के लिए बधाई और साधुवाद दिया। पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. अनिल मिश्र ने ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ को भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विश्व के बीच का सेतु बताते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक लेखन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतिहास को न तो रूखा अकादमिक विवरण बनने देना है और न ही उसे कल्पना का ऐसा आख्यान बना देना है जिसमें इतिहास की विश्वसनीयता ही समाप्त हो जाए। इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना ऐतिहासिक साहित्य की वास्तविक कसौटी है और डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की लेखकीय दृष्टि इस चुनौती को साधने की दिशा में गंभीर एवं उल्लेखनीय प्रयास है। डॉ. उपाध्याय अतीत को वर्तमान से काटकर नहीं देखते। उनकी दृष्टि में अतीत केवल बीता हुआ समय नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा को समझने का आधार है। साहित्य उस अतीत और वर्तमान के बीच संवाद स्थापित करने का सबसे संवेदनशील माध्यम है। ‘संक्रान्ति का संहार’ और ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ दोनों कृतियाँ अलग-अलग विधागत धरातल पर इसी वैचारिक दृष्टि को अभिव्यक्त करती हैं। डॉ. उपाध्याय की लेखन-पद्धति में इतिहास महज पृष्ठभूमि बनकर नहीं रहता, बल्कि कथा का सक्रिय और जीवंत तत्व बन जाता है। घटनाओं के साथ तत्कालीन राजनीतिक मनःस्थिति, सामाजिक संरचना, मानवीय मनोविज्ञान, सत्ता-संघर्ष और सभ्यतागत द्वंद्व को समझने की उनकी कोशिश उनकी रचनात्मक दृष्टि को विशिष्ट बनाती है। यही वह बिंदु है जहाँ इतिहास महज विवरण न रहकर साहित्य में रूपांतरित होता है। डॉ नरेन्द्र भूषण ने हिन्दी दिवस को लक्षित करते हुए हिन्दी को बोलने व लेखन में प्राथमिकता के साथ अपनाने पर बल दिया कार्यक्रम में उमेश चन्द्र दुबे, सुशील कुमार वर्मा, कुमार तरल, राजेश सिंह 'श्रेयश', डॉ इंद्रजीत तिवारी निर्भीक, डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी, राजीव वत्सल, करुणानिधि तिवारी, डॉ विजय प्रताप आर्य, डॉ आर वी एन पाण्डेय, डॉ अनिल कुमार तिवारी, विनोद शंकर शुक्ल, देवकीनन्दन शान्त, डॉ स्मिता मिश्रा, बलवन्त सिंह, केशरी प्रसाद शुक्ल, पंकज कृष्ण, सरोज आर्यावर्ती, मन मोहन बाराकोटी, सुरभि सिंह, पी एस सुनील अय्यर, कन्हैया लाल, सोनी शुक्ल, कुॅंवर वीर सिंह मार्तण्ड, डॉ योगेश, मंजू सक्सेना, विनय कुमार मिश्र, संजीव श्रीवास्तव, जलदूत नन्द किशोर वर्मा, रविशंकर श्रीवास्तव, प्रमोद श्रीवास्तव, आनंद सिंह, राहुल पाण्डेय, शिव नाथ सिंह, वेद प्रकाश द्विवेदी, राम लखन वर्मा, वीरेंद्र प्रताप यादव, जितेंद्र शर्मा, हिमांशु सक्सेना, राजेश यादव, रामसुतार सिंह, रोनित पाण्डेय आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्त द्वारा अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ विद्या सागर उपाध्याय की कृतियों को साहित्य की उपलब्धि बताते हुए ऐतिहासिक तथ्यों को जनमानस के सम्मुख लाने पर बल दिया। उन्होंने साहित्यकारों का आह्वान किया कि आज साहित्य को लोक मंगल एवं राष्ट्र मंगल के भावों के साथ सृजित किये जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन विदुषी डॉ. ममता पंकज ने किया। अंत में सुप्रसिद्ध साहित्यकार सीमा मधुरिमा ने समस्त अभ्यागतों के प्रति आभार व्यक्त किया। Sanjay Agarwal Tringel News Lucknow 8574663222 Sanjay Agarwal Tringel News Lucknow 8574663222 हिन्दी दिवस एवं गणपति जन्मोत्सव पर डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो कृतियों का भव्य लोकार्पण लखनऊ, 14 सितंबर। हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग, लखनऊ में 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में इतिहास, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक विश्व के संदर्भ में साहित्य की भूमिका पर गंभीर विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के खचाखच भरे हाल में पेशवा बाजीराव के वंशज एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने ‘संक्रान्ति का संहार’ के माध्यम से इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे पेशवा परिवार और उनके पूर्वजों की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के किसी व्यक्तित्व या वंश का उल्लेख इतिहास-ग्रंथों में होना एक बात है, लेकिन साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से जब उन पात्रों को संवेदना, संघर्ष और मानवीय संदर्भों के साथ समाज के सामने पुनः उपस्थित करता है, तो वह उन्हें जनस्मृति में पुनर्जीवित करने का कार्य करता है। पेशवा ने इस बात के लिए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया कि उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से उनके पूर्वजों और पेशवा परंपरा से जुड़े ऐतिहासिक पात्रों को वर्तमान समाज के सामने पुनः प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. उपाध्याय की दोनों कृतियों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनकी लेखनी इतिहास और संस्कृति के उन पक्षों को समाज के सामने लाने का कार्य कर रही है, जिन पर आज गंभीर और व्यापक संवाद की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता एवं आलोचक डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ ने डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के ऐतिहासिक कथा-लेखन की प्रक्रिया, उनकी रचनात्मक दृष्टि और लेखकीय साधना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐतिहासिक लेखन केवल घटनाओं और तिथियों को क्रमबद्ध कर देने का नाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों का अध्ययन, ऐतिहासिक स्रोतों की खोज और पड़ताल, संदर्भों का सूक्ष्म परीक्षण, पात्रों की मानसिकता को समझना, तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिवेश का पुनर्निर्माण और इन समस्त तथ्यों को साहित्यिक संवेदना में रूपांतरित करने की कठिन साधना होती है। उन्होंने कहा कि ‘संक्रान्ति का संहार’ के पीछे डॉ. उपाध्याय की दीर्घकालिक अध्ययनशीलता, शोध-दृष्टि और लेखकीय परिश्रम स्पष्ट दिखाई देता है। ऐतिहासिक उपन्यास की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इतिहास की तथ्यात्मक विश्वसनीयता अक्षुण्ण रखते हुए कथा में ऐसा प्राण फूँका जाए कि पाठक केवल इतिहास पढ़े नहीं, बल्कि उसे घटित होते हुए अनुभव करे। डॉ. उपाध्याय इतिहास और साहित्य के बीच इसी जीवंत सेतु का निर्माण करते दिखाई देते हैं। ख्यातिलब्ध कथाकार महेन्द्र भीष्म ने विशेष रूप से आचार्य चतुरसेन शास्त्री की ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य में इतिहास को विराट कथात्मकता, शोध और मानवीय संवेदना के साथ प्रस्तुत करने की जिस समृद्ध परंपरा को आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने ऊँचाई प्रदान की, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय उसी परंपरा को अपने समय की आवश्यकताओं और अपनी विशिष्ट वैचारिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का गंभीर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चतुरसेन की परंपरा को आगे बढ़ाने का अर्थ केवल ऐतिहासिक विषयों को चुन लेना नहीं है। इसके लिए इतिहास के भीतर छिपे मनुष्य, समाज, सत्ता, संस्कृति, सभ्यता और संघर्ष के प्रश्नों को साहित्यिक गहराई के साथ पकड़ना आवश्यक है। डॉ. उपाध्याय की रचनाओं में यह प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बीज वक्ता डॉ. जयप्रकाश तिवारी ने कहा कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का उपन्यास ‘संक्रांति का संहार’ केवल पानीपत के तृतीय युद्ध की ऐतिहासिक गाथा नहीं, बल्कि इतिहास का सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन है। उन्होंने विट्ठल, कल्याणी, माधव और वेणी जैसे पात्रों को इतिहास के उन गुमनाम नायकों का प्रतीक बताया, जिनके त्याग, व्रत, कला, संस्कार और बलिदान से राष्ट्र और स्वराज्य की नींव निर्मित होती है। उन्होंने ‘तमस’ और ‘उसने कहा था’ के युगबोध से इसकी तुलना करते हुए कहा कि जहाँ ‘तमस’ तटस्थता और सांस्कृतिक विघटन की चेतावनी देता है तथा ‘उसने कहा था’ वचन और व्यक्तिगत त्याग का आदर्श प्रस्तुत करता है, वहीं ‘संक्रांति का संहार’ सामूहिक राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वराज्य के लिए व्रत एवं बलिदान का संदेश देता है। डॉ. तिवारी के अनुसार पानीपत यहाँ अंत नहीं, बल्कि एक युग की संक्रांति और नए युग के जन्म का प्रतीक है; इसलिए यह कृति साहित्यिक उपन्यास से आगे बढ़कर सांस्कृतिक चेतना, इतिहास-बोध और राष्ट्रधर्म का पुनर्स्मरण कराने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उन्होंने इसे प्रत्येक घर में पढ़े और मनन किए जाने योग्य बताते हुए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस उच्चकोटि की साहित्यिक सृष्टि के लिए बधाई और साधुवाद दिया। पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. अनिल मिश्र ने ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ को भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विश्व के बीच का सेतु बताते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक लेखन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतिहास को न तो रूखा अकादमिक विवरण बनने देना है और न ही उसे कल्पना का ऐसा आख्यान बना देना है जिसमें इतिहास की विश्वसनीयता ही समाप्त हो जाए। इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना ऐतिहासिक साहित्य की वास्तविक कसौटी है और डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की लेखकीय दृष्टि इस चुनौती को साधने की दिशा में गंभीर एवं उल्लेखनीय प्रयास है। डॉ. उपाध्याय अतीत को वर्तमान से काटकर नहीं देखते। उनकी दृष्टि में अतीत केवल बीता हुआ समय नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा को समझने का आधार है। साहित्य उस अतीत और वर्तमान के बीच संवाद स्थापित करने का सबसे संवेदनशील माध्यम है। ‘संक्रान्ति का संहार’ और ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ दोनों कृतियाँ अलग-अलग विधागत धरातल पर इसी वैचारिक दृष्टि को अभिव्यक्त करती हैं। डॉ. उपाध्याय की लेखन-पद्धति में इतिहास महज पृष्ठभूमि बनकर नहीं रहता, बल्कि कथा का सक्रिय और जीवंत तत्व बन जाता है। घटनाओं के साथ तत्कालीन राजनीतिक मनःस्थिति, सामाजिक संरचना, मानवीय मनोविज्ञान, सत्ता-संघर्ष और सभ्यतागत द्वंद्व को समझने की उनकी कोशिश उनकी रचनात्मक दृष्टि को विशिष्ट बनाती है। यही वह बिंदु है जहाँ इतिहास महज विवरण न रहकर साहित्य में रूपांतरित होता है। डॉ नरेन्द्र भूषण ने हिन्दी दिवस को लक्षित करते हुए हिन्दी को बोलने व लेखन में प्राथमिकता के साथ अपनाने पर बल दिया कार्यक्रम में उमेश चन्द्र दुबे, सुशील कुमार वर्मा, कुमार तरल, राजेश सिंह 'श्रेयश', डॉ इंद्रजीत तिवारी निर्भीक, डॉ ओमप्रकाश द्विवेदी, राजीव वत्सल, करुणानिधि तिवारी, डॉ विजय प्रताप आर्य, डॉ आर वी एन पाण्डेय, डॉ अनिल कुमार तिवारी, विनोद शंकर शुक्ल, देवकीनन्दन शान्त, डॉ स्मिता मिश्रा, बलवन्त सिंह, केशरी प्रसाद शुक्ल, पंकज कृष्ण, सरोज आर्यावर्ती, मन मोहन बाराकोटी, सुरभि सिंह, पी एस सुनील अय्यर, कन्हैया लाल, सोनी शुक्ल, कुॅंवर वीर सिंह मार्तण्ड, डॉ योगेश, मंजू सक्सेना, विनय कुमार मिश्र, संजीव श्रीवास्तव, जलदूत नन्द किशोर वर्मा, रविशंकर श्रीवास्तव, प्रमोद श्रीवास्तव, आनंद सिंह, राहुल पाण्डेय, शिव नाथ सिंह, वेद प्रकाश द्विवेदी, राम लखन वर्मा, वीरेंद्र प्रताप यादव, जितेंद्र शर्मा, हिमांशु सक्सेना, राजेश यादव, रामसुतार सिंह, रोनित पाण्डेय आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्त द्वारा अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ विद्या सागर उपाध्याय की कृतियों को साहित्य की उपलब्धि बताते हुए ऐतिहासिक तथ्यों को जनमानस के सम्मुख लाने पर बल दिया। उन्होंने साहित्यकारों का आह्वान किया कि आज साहित्य को लोक मंगल एवं राष्ट्र मंगल के भावों के साथ सृजित किये जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन विदुषी डॉ. ममता पंकज ने किया। अंत में सुप्रसिद्ध साहित्यकार सीमा मधुरिमा ने समस्त अभ्यागतों के प्रति आभार व्यक्त किया। Sanjay Agarwal Tringel News Lucknow 85746632224
- लखनऊ के माल इलाके में एक युवक का अवैध असलहे से फायरिंग करते हुए वीडियो हुआ वायरल , वायरल वीडियो में दिख रहा युवक संतोष रावत बताया जा रहा है 📍 लखनऊ के माल इलाके में एक युवक का अवैध असलहे से फायरिंग करते हुए वीडियो हुआ वायरल , वायरल वीडियो में दिख रहा युवक संतोष रावत बताया जा रहा है 📍1
- लखनऊ: दुबग्गा में ‘मिट्टी का खेल’ बंद… अब LDA से बड़ा सवाल—खोदे गए प्लॉट का क्या होगा? लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र में जॉगर्स चौराहे के पास, विकल्प हॉस्पिटल के सामने आवासीय प्लॉटों पर कथित तौर पर बिना अनुमति मिट्टी खोदने का मामला सामने आया था। मामले की वीडियो फुटेज के साथ खबर प्रकाशित की गई और प्रशासन को भी सूचना दी गई। इसके बाद मौके पर चल रहा मिट्टी का काम बंद हो गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सवाल अब यह है कि जो प्लॉट आधा-अधूरा खोद दिया गया, उसका क्या होगा? 👉 क्या LDA मौके पर जांच करेगा? 👉 बिना अनुमति खुदाई हुई थी तो जिम्मेदार कौन है? 👉 मिट्टी किसने निकलवाई और किसके कहने पर निकलवाई गई? 👉 खोदे गए प्लॉट को सुरक्षित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? 👉 क्या LDA यह भी जांच करेगा कि इतनी बड़ी खुदाई के लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं? 👉 मिट्टी से भरे वाहनों की भी जांच होगी या मामला सिर्फ काम बंद होने तक ही रहेगा? काम बंद होना कार्रवाई नहीं है। असली सवाल अब कार्रवाई का है। मामले से जुड़े वीडियो साक्ष्य, मिट्टी ले जाने वाली गाड़ियों के वीडियो और उनके नंबर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर सके। अब देखना होगा कि LDA, खनन विभाग और पुलिस प्रशासन सिर्फ मिट्टी का काम बंद करवाकर चुप बैठते हैं या बिना अनुमति खुदाई करने वालों और करवाने वालों की जिम्मेदारी भी तय करते हैं। अगर अनुमति थी तो सामने आए। अगर अनुमति नहीं थी तो कार्रवाई कब होगी?1
- जिलाधिकारी महोदय लखनऊ विशाख जी पहुंचे ग्राउंड जीरो पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र इटौंजा जिलाधिकारी महोदय लखनऊ विशाख जी पहुंचे ग्राउंड जीरो पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र इटौंजा1
- मल्हा माल में खनन माफिया बेलगाम: बिना रवन्ना के सुबह 4 बजे से दौड़ रहे ओवरलोड डंपर, प्रशासन मौन *ब्रेकिंग न्यूज़ लखनऊ मल्हा माल* माल-मल्हां रोड पर सुबह 4 बजे से बिना रवन्ना दौड़ रहे मिट्टी भरे डंपर, हादसे को न्योता *मल्हां-माल।* माल-जेहटा रोड पर आज सुबह 4 बजे से ही मिट्टी से भरे तेज रफ्तार डंपर सूत्र बिना रवन्ना के दौड़ रहे हैं। ओवरलोड डंपरों से सड़कों पर मिट्टी गिर रही है, जिससे राहगीरों में हड़कंप मचा है। *वहीं सूत्रों की जानकारी के अनुसार रनियामऊ माल थाना क्षेत्र के अंतर्गत अवैध खनन हुआ*1