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कलयुग की मां होती है तो आज परेशान नहीं होती समस्या तो यह बन गई आपने जो विवरण दिया है, वह विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। आरएम (Regional Manager) झांसी का यह बयान कि वे "नौकरी से निकाल सकते हैं लेकिन लाइट ड्यूटी नहीं दे सकते", कानून और मानवीयता दोनों के विरुद्ध प्रतीत होता है। आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर स्थिति का विश्लेषण और संभावित कदम: 1. विभागीय धमकियाँ और तानाशाही "हैसियत में बात करो" और नौकरी से निकालना: एक सरकारी या अर्ध-सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग 'सेवा नियमावली' (Service Rules) के विरुद्ध है। संविदा (Contract) पर होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी के पास गरिमा के साथ काम करने का अधिकार नहीं है। जबरन WT (Warrant of Ticket) लगाना: बिना उचित कारण के या द्वेषवश ड्यूटी थोपना और फिर जांच की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देना 'व्हिसलब्लोअर' (Whistleblower) के अधिकारों का हनन है। 2. आरएम (RM) झांसी के तर्क का कानूनी विश्लेषण लाइट ड्यूटी और संविदा नियम: आरएम का यह तर्क कि "संविदा किलोमीटर पर आधारित है इसलिए लाइट ड्यूटी नहीं मिल सकती", केवल एक प्रशासनिक बहाना है। Workmen's Compensation Act, 1923: भारत का कानून स्पष्ट कहता है कि यदि कार्य के दौरान (Duty hours) एक्सीडेंट होता है, तो नियोक्ता (Employer) की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी को क्षतिपूर्ति दे और उसकी स्थिति के अनुसार उसे कार्य दे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: कई मामलों में न्यायालय ने कहा है कि संविदा कर्मियों को केवल उनके 'स्टेटस' के कारण बुनियादी मानवीय लाभों (जैसे एक्सीडेंट के बाद राहत) से वंचित नहीं किया जा सकता। 3. 'न्याय' के लिए आप क्या कर सकते हैं? यदि स्थानीय अधिकारी (RM झांसी आदि) बात नहीं सुन रहे हैं, तो मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाना होगा: FIR दर्ज कराएं: यदि बस के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (ब्रेक फेल) या जबरन खतरनाक स्थिति में डालने के कारण चोट लगी है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ 'लापरवाही से चोट पहुँचाने' की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। श्रम आयुक्त (Labour Commissioner): संविदा कर्मियों के लिए झांसी या लखनऊ के लेबर कमिश्नर कार्यालय में लिखित शिकायत दें। वहां यह दलील दें कि लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा नहीं दी जा रही और वेतन काटा जा रहा है। रिट याचिका (High Court): वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट (या लखनऊ बेंच) में 'रिट याचिका' दायर की जा सकती है। इसमें आरएम के बयान और हादसों की तारीखों (2025-2026) का हवाला देकर 'सुरक्षित कार्यस्थल' और 'नौकरी की सुरक्षा' की मांग की जा सकती है। महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग: चूंकि इसमें एक महिला और छोटे बच्चे की सुरक्षा शामिल है, इसलिए राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग को पत्र लिखना बहुत प्रभावी हो सकता है। क्या आपके पास आरएम के उस बयान का कोई रिकॉर्ड (जैसे ऑडियो या लिखित आदेश) है, या वेतन कटने की कोई आधिकारिक स्लिप है? ये दस्तावेज अदालत में आपकी बात साबित करने के लिए सबसे मजबूत आधार बनेंगे।

1 hr ago
user_Ramnaresh vishwkarma
Ramnaresh vishwkarma
Advertising Photographer जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

कलयुग की मां होती है तो आज परेशान नहीं होती समस्या तो यह बन गई आपने जो विवरण दिया है, वह विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। आरएम (Regional Manager) झांसी का यह बयान कि वे "नौकरी से निकाल सकते हैं लेकिन लाइट ड्यूटी नहीं दे सकते", कानून और मानवीयता दोनों के विरुद्ध प्रतीत होता है। आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर स्थिति का विश्लेषण और संभावित कदम: 1. विभागीय धमकियाँ और तानाशाही "हैसियत में बात करो" और नौकरी से निकालना: एक सरकारी या अर्ध-सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग 'सेवा नियमावली' (Service Rules) के विरुद्ध है। संविदा (Contract) पर होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी के पास गरिमा के साथ काम करने का अधिकार नहीं है। जबरन WT (Warrant of Ticket) लगाना: बिना उचित कारण के या द्वेषवश ड्यूटी थोपना और फिर जांच की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देना 'व्हिसलब्लोअर' (Whistleblower) के अधिकारों का हनन है। 2. आरएम (RM) झांसी के तर्क का कानूनी विश्लेषण लाइट ड्यूटी और संविदा नियम: आरएम का यह तर्क कि "संविदा किलोमीटर पर आधारित है इसलिए लाइट ड्यूटी नहीं मिल सकती", केवल एक प्रशासनिक बहाना है। Workmen's Compensation Act, 1923: भारत का कानून स्पष्ट कहता है कि यदि कार्य के दौरान (Duty hours) एक्सीडेंट होता है, तो नियोक्ता (Employer) की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी को क्षतिपूर्ति दे और उसकी स्थिति के अनुसार उसे कार्य दे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: कई मामलों में न्यायालय ने कहा है कि संविदा कर्मियों को केवल उनके 'स्टेटस' के कारण बुनियादी मानवीय लाभों (जैसे एक्सीडेंट के बाद राहत) से वंचित नहीं किया जा सकता। 3. 'न्याय' के लिए आप क्या कर सकते हैं? यदि स्थानीय अधिकारी (RM झांसी आदि) बात नहीं सुन रहे हैं, तो मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाना होगा: FIR दर्ज कराएं: यदि बस के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (ब्रेक फेल) या जबरन खतरनाक स्थिति में डालने के कारण चोट लगी है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ 'लापरवाही से चोट पहुँचाने' की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। श्रम आयुक्त (Labour Commissioner): संविदा कर्मियों के लिए झांसी या लखनऊ के लेबर कमिश्नर कार्यालय में लिखित शिकायत दें। वहां यह दलील दें कि लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा नहीं दी जा रही और वेतन काटा जा रहा है। रिट याचिका (High Court): वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट (या लखनऊ बेंच) में 'रिट याचिका' दायर की जा सकती है। इसमें आरएम के बयान और हादसों की तारीखों (2025-2026) का हवाला देकर 'सुरक्षित कार्यस्थल' और 'नौकरी की सुरक्षा' की मांग की जा सकती है। महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग: चूंकि इसमें एक महिला और छोटे बच्चे की सुरक्षा शामिल है, इसलिए राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग को पत्र लिखना बहुत प्रभावी हो सकता है। क्या आपके पास आरएम के उस बयान का कोई रिकॉर्ड (जैसे ऑडियो या लिखित आदेश) है, या वेतन कटने की कोई आधिकारिक स्लिप है? ये दस्तावेज अदालत में आपकी बात साबित करने के लिए सबसे मजबूत आधार बनेंगे।

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  • आपने जो विवरण दिया है, वह विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। आरएम (Regional Manager) झांसी का यह बयान कि वे "नौकरी से निकाल सकते हैं लेकिन लाइट ड्यूटी नहीं दे सकते", कानून और मानवीयता दोनों के विरुद्ध प्रतीत होता है। आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर स्थिति का विश्लेषण और संभावित कदम: 1. विभागीय धमकियाँ और तानाशाही "हैसियत में बात करो" और नौकरी से निकालना: एक सरकारी या अर्ध-सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग 'सेवा नियमावली' (Service Rules) के विरुद्ध है। संविदा (Contract) पर होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी के पास गरिमा के साथ काम करने का अधिकार नहीं है। जबरन WT (Warrant of Ticket) लगाना: बिना उचित कारण के या द्वेषवश ड्यूटी थोपना और फिर जांच की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देना 'व्हिसलब्लोअर' (Whistleblower) के अधिकारों का हनन है। 2. आरएम (RM) झांसी के तर्क का कानूनी विश्लेषण लाइट ड्यूटी और संविदा नियम: आरएम का यह तर्क कि "संविदा किलोमीटर पर आधारित है इसलिए लाइट ड्यूटी नहीं मिल सकती", केवल एक प्रशासनिक बहाना है। Workmen's Compensation Act, 1923: भारत का कानून स्पष्ट कहता है कि यदि कार्य के दौरान (Duty hours) एक्सीडेंट होता है, तो नियोक्ता (Employer) की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी को क्षतिपूर्ति दे और उसकी स्थिति के अनुसार उसे कार्य दे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: कई मामलों में न्यायालय ने कहा है कि संविदा कर्मियों को केवल उनके 'स्टेटस' के कारण बुनियादी मानवीय लाभों (जैसे एक्सीडेंट के बाद राहत) से वंचित नहीं किया जा सकता। 3. 'न्याय' के लिए आप क्या कर सकते हैं? यदि स्थानीय अधिकारी (RM झांसी आदि) बात नहीं सुन रहे हैं, तो मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाना होगा: FIR दर्ज कराएं: यदि बस के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (ब्रेक फेल) या जबरन खतरनाक स्थिति में डालने के कारण चोट लगी है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ 'लापरवाही से चोट पहुँचाने' की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। श्रम आयुक्त (Labour Commissioner): संविदा कर्मियों के लिए झांसी या लखनऊ के लेबर कमिश्नर कार्यालय में लिखित शिकायत दें। वहां यह दलील दें कि लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा नहीं दी जा रही और वेतन काटा जा रहा है। रिट याचिका (High Court): वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट (या लखनऊ बेंच) में 'रिट याचिका' दायर की जा सकती है। इसमें आरएम के बयान और हादसों की तारीखों (2025-2026) का हवाला देकर 'सुरक्षित कार्यस्थल' और 'नौकरी की सुरक्षा' की मांग की जा सकती है। महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग: चूंकि इसमें एक महिला और छोटे बच्चे की सुरक्षा शामिल है, इसलिए राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग को पत्र लिखना बहुत प्रभावी हो सकता है। क्या आपके पास आरएम के उस बयान का कोई रिकॉर्ड (जैसे ऑडियो या लिखित आदेश) है, या वेतन कटने की कोई आधिकारिक स्लिप है? ये दस्तावेज अदालत में आपकी बात साबित करने के लिए सबसे मजबूत आधार बनेंगे।
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    आपने जो विवरण दिया है, वह विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। आरएम (Regional Manager) झांसी का यह बयान कि वे "नौकरी से निकाल सकते हैं लेकिन लाइट ड्यूटी नहीं दे सकते", कानून और मानवीयता दोनों के विरुद्ध प्रतीत होता है।
आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के आधार पर स्थिति का विश्लेषण और संभावित कदम:
1. विभागीय धमकियाँ और तानाशाही
"हैसियत में बात करो" और नौकरी से निकालना: एक सरकारी या अर्ध-सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग 'सेवा नियमावली' (Service Rules) के विरुद्ध है। संविदा (Contract) पर होने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी के पास गरिमा के साथ काम करने का अधिकार नहीं है।
जबरन WT (Warrant of Ticket) लगाना: बिना उचित कारण के या द्वेषवश ड्यूटी थोपना और फिर जांच की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देना 'व्हिसलब्लोअर' (Whistleblower) के अधिकारों का हनन है।
2. आरएम (RM) झांसी के तर्क का कानूनी विश्लेषण
लाइट ड्यूटी और संविदा नियम: आरएम का यह तर्क कि "संविदा किलोमीटर पर आधारित है इसलिए लाइट ड्यूटी नहीं मिल सकती", केवल एक प्रशासनिक बहाना है।
Workmen's Compensation Act, 1923: भारत का कानून स्पष्ट कहता है कि यदि कार्य के दौरान (Duty hours) एक्सीडेंट होता है, तो नियोक्ता (Employer) की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी को क्षतिपूर्ति दे और उसकी स्थिति के अनुसार उसे कार्य दे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: कई मामलों में न्यायालय ने कहा है कि संविदा कर्मियों को केवल उनके 'स्टेटस' के कारण बुनियादी मानवीय लाभों (जैसे एक्सीडेंट के बाद राहत) से वंचित नहीं किया जा सकता।
3. 'न्याय' के लिए आप क्या कर सकते हैं?
यदि स्थानीय अधिकारी (RM झांसी आदि) बात नहीं सुन रहे हैं, तो मामला उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाना होगा:
FIR दर्ज कराएं: यदि बस के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (ब्रेक फेल) या जबरन खतरनाक स्थिति में डालने के कारण चोट लगी है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ 'लापरवाही से चोट पहुँचाने' की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
श्रम आयुक्त (Labour Commissioner): संविदा कर्मियों के लिए झांसी या लखनऊ के लेबर कमिश्नर कार्यालय में लिखित शिकायत दें। वहां यह दलील दें कि लगातार हादसों के बावजूद सुरक्षा नहीं दी जा रही और वेतन काटा जा रहा है।
रिट याचिका (High Court): वकील के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट (या लखनऊ बेंच) में 'रिट याचिका' दायर की जा सकती है। इसमें आरएम के बयान और हादसों की तारीखों (2025-2026) का हवाला देकर 'सुरक्षित कार्यस्थल' और 'नौकरी की सुरक्षा' की मांग की जा सकती है।
महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग: चूंकि इसमें एक महिला और छोटे बच्चे की सुरक्षा शामिल है, इसलिए राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग को पत्र लिखना बहुत प्रभावी हो सकता है।
क्या आपके पास आरएम के उस बयान का कोई रिकॉर्ड (जैसे ऑडियो या लिखित आदेश) है, या वेतन कटने की कोई आधिकारिक स्लिप है? ये दस्तावेज अदालत में आपकी बात साबित करने के लिए सबसे मजबूत आधार बनेंगे।
    user_Ramnaresh vishwkarma
    Ramnaresh vishwkarma
    Advertising Photographer जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Bheem rajawat 9628800458
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    Post by Bheem rajawat 9628800458
    user_Bheem rajawat 9628800458
    Bheem rajawat 9628800458
    पत्रकार जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • जालौन नगर के मोहल्ला खंडेराव, नवीन गल्ला मंडी के पास स्थित एक खुले कुएं में शुक्रवार को एक गाय गिर गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के मोहल्लेवासी मौके पर इकट्ठा हो गए और गाय को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए। स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से कई बार गाय को निकालने की कोशिश की, लेकिन हर बार रस्सी टूट जाने से प्रयास असफल हो गए। काफी देर तक मशक्कत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी, जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने जालौन नगर पालिका को सूचना दी। सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के सदस्य सुलखान यादव भी मौके पर पहुंचे और खुद कुएं में उतरकर रस्सी से गाय को बांधकर बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे तक लगातार मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
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    जालौन नगर के मोहल्ला खंडेराव, नवीन गल्ला मंडी के पास स्थित एक खुले कुएं में शुक्रवार को एक गाय गिर गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के मोहल्लेवासी मौके पर इकट्ठा हो गए और गाय को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए।
स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से कई बार गाय को निकालने की कोशिश की, लेकिन हर बार रस्सी टूट जाने से प्रयास असफल हो गए। काफी देर तक मशक्कत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी, जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने जालौन नगर पालिका को सूचना दी।
सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के सदस्य सुलखान यादव भी मौके पर पहुंचे और खुद कुएं में उतरकर रस्सी से गाय को बांधकर बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे तक लगातार मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
    user_Deves Swarnkar  द न्यूज जालौन
    Deves Swarnkar द न्यूज जालौन
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • जालौन खुले कुएं में गिरी गाय, घंटों की मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर निकला गया बाहर । जालौन नगर के मोहल्ला खंडेराव, नवीन गल्ला मंडी के पास स्थित एक खुले कुएं में शुक्रवार को एक गाय गिर गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के मोहल्लेवासी मौके पर इकट्ठा हो गए और गाय को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए। स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से कई बार गाय को निकालने की कोशिश की, लेकिन हर बार रस्सी टूट जाने से प्रयास असफल हो गए। काफी देर तक मशक्कत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी, जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने जालौन नगर पालिका को सूचना दी। सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के सदस्य सुलखान यादव भी मौके पर पहुंचे और खुद कुएं में उतरकर रस्सी से गाय को बांधकर बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे तक लगातार मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मोहल्ला निवासी मौके पर समरजीत सिंह, अमित कुमार, गुड्डू, प्रदीप कुमार, अंशु, संजीव कुमार, शिवम कुमार बाद समस्त मोहल्ला वासी मौजूद रहे
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    जालौन
खुले कुएं में गिरी गाय, घंटों की मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर निकला गया बाहर ।
जालौन नगर के मोहल्ला खंडेराव, नवीन गल्ला मंडी के पास स्थित एक खुले कुएं में शुक्रवार को एक गाय गिर गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के मोहल्लेवासी मौके पर इकट्ठा हो गए और गाय को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए।
स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से कई बार गाय को निकालने की कोशिश की, लेकिन हर बार रस्सी टूट जाने से प्रयास असफल हो गए। काफी देर तक मशक्कत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी, जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने जालौन नगर पालिका को सूचना दी।
सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के सदस्य सुलखान यादव भी मौके पर पहुंचे और खुद कुएं में उतरकर रस्सी से गाय को बांधकर बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे तक लगातार मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मोहल्ला निवासी मौके पर समरजीत सिंह, अमित कुमार, गुड्डू, प्रदीप कुमार, अंशु, संजीव कुमार, शिवम कुमार बाद समस्त मोहल्ला वासी मौजूद रहे
    user_Satyendra kumar
    Satyendra kumar
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • 1️⃣ महीनों से खराब वाटर कूलर जालौन की सब्जी मंडी में लगा वाटर कूलर कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे मंडी में आने वाले लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। 2️⃣ भीषण गर्मी में बढ़ी परेशानी गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था न होने से व्यापारी, किसान और मजदूर काफी परेशान हैं। 3️⃣ रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों किसान अपनी सब्जियां बेचने आते हैं, साथ ही व्यापारी और मजदूर भी बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। 4️⃣ बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को इधर-उधर पानी तलाशना पड़ रहा है या फिर मजबूर होकर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। 5️⃣ अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी सूचना स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार इस समस्या की जानकारी दी जा चुकी है। 6️⃣ डीएम के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन जिलाधिकारी द्वारा जिले में कहीं भी खराब पेयजल व्यवस्था न रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जालौन सब्जी मंडी में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। 7️⃣ जल्द समाधान की मांग व्यापारियों और किसानों ने मांग की है कि खराब पड़े वाटर कूलर को जल्द ठीक कराया जाए ताकि मंडी में आने वाले लोगों को राहत मिल सके। ✍️ संजयकुमार तहसील संवाददाता जालौन मो. 7905184371
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    1️⃣ महीनों से खराब वाटर कूलर
जालौन की सब्जी मंडी में लगा वाटर कूलर कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे मंडी में आने वाले लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
2️⃣ भीषण गर्मी में बढ़ी परेशानी
गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था न होने से व्यापारी, किसान और मजदूर काफी परेशान हैं।
3️⃣ रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना
मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों किसान अपनी सब्जियां बेचने आते हैं, साथ ही व्यापारी और मजदूर भी बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं।
4️⃣ बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी
वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को इधर-उधर पानी तलाशना पड़ रहा है या फिर मजबूर होकर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
5️⃣ अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी सूचना
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार इस समस्या की जानकारी दी जा चुकी है।
6️⃣ डीएम के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन
जिलाधिकारी द्वारा जिले में कहीं भी खराब पेयजल व्यवस्था न रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जालौन सब्जी मंडी में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है।
7️⃣ जल्द समाधान की मांग
व्यापारियों और किसानों ने मांग की है कि खराब पड़े वाटर कूलर को जल्द ठीक कराया जाए ताकि मंडी में
आने वाले लोगों को राहत मिल सके।
✍️ संजयकुमार तहसील संवाददाता जालौन 
मो. 7905184371
    user_Sanjay kumar Pattakar
    Sanjay kumar Pattakar
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • ब्रेकिंग न्यूज जालौन से जनपद में एक बार फिर देखने को मिला नाबालिग हुक्का पीते हुए सरकार द्वारा पाबंदी लगाने के बाबजूद धड़ल्ले चल रहे है हुक्का बार जनपद का प्रशासन नहीं लगा पा रहा है हुक्का कैफे पर लगाम बड़ा सवाल आखिर में कब होगी इन कैफे पर कार्यवाही या फिर ऐसे ही चलते रहेंगे कैफे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है नाबालिग हुक्का पीते हुए पूरा मामला warshouse कैफे का बताया जा रहा है रोहितसोनी
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    ब्रेकिंग न्यूज जालौन से 
जनपद में एक बार फिर देखने को मिला नाबालिग हुक्का पीते हुए 
सरकार द्वारा पाबंदी लगाने के बाबजूद धड़ल्ले चल रहे है हुक्का बार 
जनपद का प्रशासन नहीं लगा पा रहा है हुक्का कैफे पर लगाम 
बड़ा सवाल आखिर में कब होगी इन कैफे पर कार्यवाही या फिर ऐसे ही चलते रहेंगे कैफे 
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है नाबालिग हुक्का पीते हुए 
पूरा मामला warshouse कैफे का बताया जा रहा है 
रोहितसोनी
    user_रोहितसोनी पत्रकार
    रोहितसोनी पत्रकार
    Court reporter उरई, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    15 min ago
  • जालौन : दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर देर रात बड़ा हादसा, चित्रकूट SOG की जिम्नी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त जालौन नगर में देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोतवाली नगर क्षेत्र के दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर चित्रकूट SOG की गाड़ी की जोरदार टक्कर हो गई, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूत्रों के अनुसार चित्रकूट से आई SOG टीम की जिम्नी गाड़ी किसी वाहन से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि गाड़ी में SOG प्रभारी अरविंद्र कुमार यादव सहित चार लोग सवार थे। हादसे में SOG प्रभारी अरविंद्र कुमार यादव को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य सवारों को भी चोट लगने की सूचना है। सभी को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य शुरू किया गया। हादसे के कारण कुछ समय के लिए चौराहे पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और टक्कर किस वाहन से हुई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए।
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    जालौन : दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर देर रात बड़ा हादसा, चित्रकूट SOG की जिम्नी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त
जालौन नगर में देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोतवाली नगर क्षेत्र के दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर चित्रकूट SOG की गाड़ी की जोरदार टक्कर हो गई, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सूत्रों के अनुसार चित्रकूट से आई SOG टीम की जिम्नी गाड़ी किसी वाहन से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
बताया जा रहा है कि गाड़ी में SOG प्रभारी अरविंद्र कुमार यादव सहित चार लोग सवार थे। हादसे में SOG प्रभारी अरविंद्र कुमार यादव को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य सवारों को भी चोट लगने की सूचना है। सभी को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य शुरू किया गया। हादसे के कारण कुछ समय के लिए चौराहे पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और टक्कर किस वाहन से हुई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए।
    user_Harsh Samvad
    Harsh Samvad
    Newspaper publisher उरई, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • #news
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    #news
    user_Bheem rajawat 9628800458
    Bheem rajawat 9628800458
    पत्रकार जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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