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मऊगंज कलेक्ट्रेट में रोता बिलखता पहुंचा फरियादी!
Lavkesh singh
मऊगंज कलेक्ट्रेट में रोता बिलखता पहुंचा फरियादी!
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- ओवरलोड वाहनों पर परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई, डंपर समेत तीन गिट्टी लदे ट्रैक्टरों का चालान प्रयागराज। परिवहन विभाग ने कौंधियारा क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे ओवरलोड और बिना आवश्यक मानकों का पालन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एक डंपर और तीन गिट्टी लदे ट्रैक्टरों का चालान किया। जांच अभियान के दौरान पकड़े गए डंपर पर 62 हजार रुपये का चालान किया गया। वहीं, गिट्टी लदे तीन ट्रैक्टरों में से दो ट्रैक्टरों पर 96-96 हजार रुपये तथा एक ट्रैक्टर पर 55 हजार रुपये का चालान किया गया। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ओवरलोडिंग, यातायात नियमों की अनदेखी और बिना आवश्यक दस्तावेजों के वाहन संचालन करने वालों के विरुद्ध आगे भी अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग ने वाहन स्वामियों और चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें तथा वैध दस्तावेजों के साथ ही वाहन संचालित करें, अन्यथा नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।1
- एक तरफ आय दोगनी का दावा दूसरी तरफ यूरिया के लिए लाइन में किसान खाद के लिए मारामारी प्रयागराज। केंद्र और राज्य सरकार जहां किसानों की आय दोगुनी करने का बखान कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यूरिया खाद के लिए किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। इसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद किसानों में आक्रोश है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि धूप में सैकड़ों किसान बोरे लेकर खाद केंद्र के बाहर कतार में खड़े हैं। किसी के सिर पर गमछा है तो कोई छाता लगाकर घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। आरोप है कि खाद समय पर और पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही, जिससे रबी की बुवाई प्रभावित हो रही है। किसानों का दर्द लाइन में लगे किसान ने वीडियो में कहा, "सरकार कहती है किसान की आय दोगुनी करेंगे। पहले समय पर खाद तो दे दो। सुबह 5 बजे से लगे हैं, नंबर ही नहीं आ रहा। काला बाजारी भी हो रही है।सोशल मीडिया पर गुस्सा वीडियो वायरल होते ही कमेंट में किसान अपनी परेशानी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि "वादा बड़े-बड़े और हालात जमीनी स्तर पर खराब। खाद, बीज, डीजल महंगा और मिलता भी नहीं। क्या है मांग किसान संगठनों ने मांग की है: खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगेहर सहकारी समिति और निजी दुकानों पर पर्याप्त यूरिया की सप्लाई हो पारदर्शी वितरणके लिए टोकन सिस्टम लागू हो इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति कराई जा रही है और कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई होगी। सरकार के दावों और किसानों की जमीनी हकीकत के बीच का यह फर्क वायरल वीडियो के बाद एक बार फिर चर्चा में है।1
- "आधुनिक डिज़ाइन, आकर्षक हरियाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सुगम यातायात के साथ रीवा की नई पहचान बनेगा..." "आधुनिक डिज़ाइन, आकर्षक हरियाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सुगम यातायात के साथ रीवा की नई पहचान बनेगा..." वाह! बड़े-बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं। लेकिन ज़रा मोहल्लों की गलियों में भी नज़र डाल लीजिए। वहाँ आज भी सड़कें ऐसी हैं कि बरसात में सड़क कम, तालाब ज़्यादा दिखाई देता है। लगता है शहर की पहचान बदलने से पहले मोहल्लों की बदहाली बदलना भूल गए। हाल यह है कि इंसान की किस्मत बदल सकती है, सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन कुछ मोहल्लों की सड़कें नहीं बदलतीं। कम से कम बरसात के मौसम में एक ट्रॉली मुरूम ही डलवा दीजिए, ताकि लोगों को रोज़ कीचड़ से जंग न लड़नी पड़े। विकास के दावों की असली परीक्षा चमकदार परियोजनाओं से नहीं, बल्कि आम लोगों के घर तक पहुँचने वाली सड़क से होती है।1
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