सतना जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ अध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रदीप पाण्डेय को मिल रहे लगातार बढ़ते जनसमर्थन ने चुनावी मुकाबले को और गर्मा दिया है। अधिवक्ताओं के बीच उनके पक्ष में बन रहे मजबूत माहौल से अन्य प्रत्याशियों की चिंताएँ बढ़ती दिख रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक प्रदीप पाण्डेय के समर्थन में अधिवक्ताओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता उनके साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं, जिससे कई स्थानों पर जुलूस जैसा माहौल बन रहा है। चुनावी हलकों में यह चर्चा है कि प्रदीप पाण्डेय को मिल रहा यह अपार समर्थन उन्हें अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला रहा है। उनके समर्थकों का दावा है कि अधिवक्ताओं के हितों के लिए उनकी सक्रियता, सरल व्यवहार और मजबूत पकड़ ही उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाती है। प्रदीप पाण्डेय के पक्ष में बन रहे इस माहौल ने विरोधी खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, अधिवक्ता संघ की राजनीति और भी दिलचस्प होती जा रही है। अब सभी की निगाहें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।
सतना जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ अध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रदीप पाण्डेय को मिल रहे लगातार बढ़ते जनसमर्थन ने चुनावी मुकाबले को और गर्मा दिया है। अधिवक्ताओं के बीच उनके पक्ष में बन रहे मजबूत माहौल से अन्य प्रत्याशियों की चिंताएँ
बढ़ती दिख रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक प्रदीप पाण्डेय के समर्थन में अधिवक्ताओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता उनके साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं, जिससे कई स्थानों पर जुलूस जैसा माहौल बन
रहा है। चुनावी हलकों में यह चर्चा है कि प्रदीप पाण्डेय को मिल रहा यह अपार समर्थन उन्हें अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला रहा है। उनके समर्थकों का दावा है कि अधिवक्ताओं के हितों के लिए उनकी सक्रियता, सरल व्यवहार और मजबूत पकड़ ही उन्हें अन्य उम्मीदवारों
से अलग बनाती है। प्रदीप पाण्डेय के पक्ष में बन रहे इस माहौल ने विरोधी खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, अधिवक्ता संघ की राजनीति और भी दिलचस्प होती जा रही है। अब सभी की निगाहें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।
- जिला अधिवक्ता संघ चुनाव के लिए अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार प्रदीप कुमार पाण्डेय ने मंगलवार, 23 जून 2026 को सतना जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ता साथियों के साथ एक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ताओं का आशीर्वाद लिया और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना। जनसंपर्क के दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और आवश्यकताओं को श्री पाण्डेय के समक्ष रखा। इन सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद, श्री पाण्डेय ने आश्वासन दिया कि यदि उन्हें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलती है, तो दूसरे ही दिन से कार्यों का परिणाम दिखने लगेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल वादे करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर उतारना है। श्री पाण्डेय ने यह भी कहा कि यदि वे अपने वचनों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो कुछ महीनों के भीतर अपने पद से त्यागपत्र देने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने अधिवक्ताओं के समक्ष अपनी प्राथमिकताओं को रखते हुए बताया कि उनका लक्ष्य न्यायालय परिसर को एक स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक कचहरी के रूप में विकसित करना है, जिससे अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिल सकें। श्री पाण्डेय ने अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत अपने चैंबर से की और उसके बाद पूरे कचहरी परिसर में पहुंचकर अधिवक्ताओं से संपर्क किया, जहाँ उन्हें अधिवक्ता साथियों का भरपूर सहयोग एवं समर्थन प्राप्त हुआ। इस जनसंपर्क अभियान में एडवोकेट मुन्नी खान, विष्णु नारायण गर्ग, बी.के. मिश्रा, संतोष यादव, विनोद गौतम, मोहन यादव, बृजेश यादव, सी.एल. यादव, सुरेंद्र शर्मा, शैलेंद्र सिंह, रज्जन श्रीवास्तव, के.पी. त्रिपाठी, विष्णुकांत पाठक, सुभाष विश्वकर्मा, राजेश खरे “मंटू भइया”, पुष्पेन्द्र बागरी सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे। अभियान के अंत में श्री पाण्डेय ने सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह चुनाव अधिवक्ताओं के सम्मान, सुविधाओं और न्यायालय परिसर के समग्र विकास के लिए समर्पित है।1
- सतना जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ अध्यक्ष पद के उम्मीदवार प्रदीप पाण्डेय को मिल रहे लगातार बढ़ते जनसमर्थन ने चुनावी मुकाबले को और गर्मा दिया है। अधिवक्ताओं के बीच उनके पक्ष में बन रहे मजबूत माहौल से अन्य प्रत्याशियों की चिंताएँ बढ़ती दिख रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक प्रदीप पाण्डेय के समर्थन में अधिवक्ताओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके जनसंपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता उनके साथ जुड़ते दिखाई दे रहे हैं, जिससे कई स्थानों पर जुलूस जैसा माहौल बन रहा है। चुनावी हलकों में यह चर्चा है कि प्रदीप पाण्डेय को मिल रहा यह अपार समर्थन उन्हें अध्यक्ष पद की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला रहा है। उनके समर्थकों का दावा है कि अधिवक्ताओं के हितों के लिए उनकी सक्रियता, सरल व्यवहार और मजबूत पकड़ ही उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाती है। प्रदीप पाण्डेय के पक्ष में बन रहे इस माहौल ने विरोधी खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, अधिवक्ता संघ की राजनीति और भी दिलचस्प होती जा रही है। अब सभी की निगाहें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।4
- सतना में विंध्य चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव को लेकर व्यापारिक जगत में चर्चाओं का दौर जारी है। चुनाव मैदान में चार प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन समाज सेवा और जनहित के कार्यों में उनकी निरंतर सक्रियता के कारण मनोहर डिगवानी को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। मनोहर डिगवानी अमर ज्योति सेवा समिति के संस्थापक सदस्य के रूप में वर्षों से समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हैं। उनके प्रयासों से 800 से अधिक नेत्रदान संपन्न हुए हैं, जिनसे 1600 से ज्यादा लोगों को दृष्टि का लाभ मिला है। इसके अलावा, उन्होंने मेडिकल कॉलेज के लिए देहदान और अंगदान के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाकर चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। व्यापारियों का कहना है कि मनोहर डिगवानी ने हमेशा समाज और व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता दी है। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उनकी अच्छी पकड़ होने के कारण वे व्यापारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सक्षम माने जाते हैं। व्यापारिक वर्ग में यह चर्चा है कि जो व्यक्ति वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करता आया हो, वही संगठन को नई दिशा और मजबूती दे सकता है। यही वजह है कि अनेक प्रतिष्ठित व्यापारी और युवा व्यापारी उनसे उम्मीदें लगाए हुए हैं। नेत्रदान, देहदान जागरूकता, मानव सेवा और व्यापारी हितों के लिए निरंतर कार्य करने वाले मनोहर डिगवानी एवं उनकी पूरी टीम की सेवाओं को समाज और व्यापारी वर्ग सम्मान की दृष्टि से देख रहा है, और वे व्यापारियों की पहली पसंद के रूप में उभर रहे हैं।1
- बसंत कुमार गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाया है कि तहसीलदार के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण हटाने के निर्देशों की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति के कारण कानून का उल्लंघन हो रहा है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र राय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना कहीं न कहीं कानून के दुरुपयोग का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर की जन सुनवाई में आवेदन देने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सीधे तौर पर कानून और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की अवहेलना है। राय के अनुसार, वर्तमान स्थिति में भ्रष्टाचार के सामने कानून को न्याय मांगने के लिए हाथ जोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी इस पूरी स्थिति का पुरजोर विरोध करती है। पार्टी ने विशेष रूप से मंदिर की जमीन हड़पने की कोशिशों का भी विरोध किया है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने प्रशासन से जनता को तुरंत न्याय दिलाने और उन्हें अपनी शिकायतों के लिए भटकने पर मजबूर न करने की मांग की है।1
- चित्रकूट में डॉक्टरों द्वारा की जा रही प्राइवेट प्रैक्टिस के मुद्दे पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को प्राइवेट प्रैक्टिस से संबंधित कोई भी शिकायत है, तो उसे शिकायत लेकर आना चाहिए, जिसके बाद उस पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सीएमओ के इस बयान के बाद यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इस कदम से व्यवस्था में वाकई कोई सुधार आ पाएगा।2
- चित्रकूट में अपर पुलिस अधीक्षक श्री पीयूषकांत राय ने मंगलवार को पुलिस लाइंस में आयोजित साप्ताहिक परेड की सलामी ली और उसका निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, तत्पर और अनुशासित रखने के लिए विभिन्न प्रकार के शारीरिक व्यायाम कराए गए। साथ ही, स्वास्थ्य लाभ के लिए परेड की दौड़ भी करवाई गई। इसके बाद, अपर पुलिस अधीक्षक ने पुलिस लाइन का जायजा लिया और प्रभारी प्रतिसार निरीक्षक को सुधार हेतु निर्देश दिए। उन्होंने परेड में शामिल अधिकारी/कर्मचारीगण को अनुशासन, एकरूपता और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने के महत्व पर भी बल दिया। श्री राय ने परिवहन शाखा का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने थानों से आए समस्त चार और दो पहिया वाहनों, 112 पीआरवी वाहनों और परिवहन शाखा में रखे अन्य वाहनों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभारी परिवहन शाखा को वाहनों की कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के क्रम में, अपर पुलिस अधीक्षक ने डायल 112 कार्यालय, आवास परिसर, बैरक, सीपीसी कैंटीन, मंदिर, भोजनालय और ऑर्मरी का भी जायजा लिया। साथ ही, उन्होंने रिक्रूट आरक्षियों से उनके व्यवहारिक परीक्षण के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।1
- सतना में जिला अधिवक्ता संघ के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए चुनाव मैदान में उतरीं एडवोकेट कल्पना चौधरी लगातार अधिवक्ता साथियों से जनसंपर्क कर रही हैं और उनसे समर्थन तथा आशीर्वाद मांग रही हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 3 जुलाई 2026 को होना निर्धारित है, जिसमें कल्पना चौधरी का सरल क्रमांक 3 है। कल्पना चौधरी ने अधिवक्ता साथियों से अपील की है कि वे उन्हें अपना सहयोग प्रदान करें और भारी मतों से विजयी बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें अधिवक्ताओं का विश्वास और समर्थन मिला, तो वे पूरी जिम्मेदारी के साथ अधिवक्ता हितों की रक्षा, संगठन को मजबूती प्रदान करने और साथियों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करेंगी। अपने संदेश में, उन्होंने अधिवक्ता साथियों के विश्वास पर खरा उतरने का संकल्प व्यक्त करते हुए "आपका विश्वास, हमारी जिम्मेदारी" का नारा दिया है। चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का माहौल है, और कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए मुकाबला भी रोचक होता जा रहा है। सभी की नजरें अब 3 जुलाई 2026 को होने वाले मतदान पर टिकी हुई हैं।2
- लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र शामिल थे। अपनी जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया था, जबकि कुछ ने ऊंचाई से छलांग लगाकर या तारों के सहारे नीचे उतरकर भागने का प्रयास किया। इस हादसे की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस अवैध बिल्डिंग को साल 2016 में गिराने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह खड़ी रही। यह पूरा मामला अब 'सिस्टम की बड़ी नाकामी' को उजागर करता है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस भीषण अग्निकांड का असली जिम्मेदार कौन है — आग, अवैध इमारत या फिर प्रशासन की घोर लापरवाही? इस पूरी रिपोर्ट को प्रकाश पाठक ने प्रस्तुत किया है।1