लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र शामिल थे। अपनी जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया था, जबकि कुछ ने ऊंचाई से छलांग लगाकर या तारों के सहारे नीचे उतरकर भागने का प्रयास किया। इस हादसे की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस अवैध बिल्डिंग को साल 2016 में गिराने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह खड़ी रही। यह पूरा मामला अब 'सिस्टम की बड़ी नाकामी' को उजागर करता है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस भीषण अग्निकांड का असली जिम्मेदार कौन है — आग, अवैध इमारत या फिर प्रशासन की घोर लापरवाही? इस पूरी रिपोर्ट को प्रकाश पाठक ने प्रस्तुत किया है।
लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र शामिल थे। अपनी जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया था, जबकि कुछ ने ऊंचाई से छलांग लगाकर या तारों के सहारे नीचे उतरकर भागने का प्रयास किया। इस हादसे की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस अवैध बिल्डिंग को साल 2016 में गिराने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह खड़ी रही। यह पूरा मामला अब 'सिस्टम की बड़ी नाकामी' को उजागर करता है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस भीषण अग्निकांड का असली जिम्मेदार कौन है — आग, अवैध इमारत या फिर प्रशासन की घोर लापरवाही? इस पूरी रिपोर्ट को प्रकाश पाठक ने प्रस्तुत किया है।
- मऊगंज में कई वर्षों से बंद एक रास्ते को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर “राखी के वचन” भूलने का आरोप लगा है। इस रास्ते के बंद होने का दर्द हाल ही में एक बेटी की विदाई के दौरान सामने आया, जब डोली के लिए भी ताला नहीं खुला। परिणामस्वरूप, बेटी की विदाई मोटरसाइकिल से खेतों के रास्ते करनी पड़ी। इस घटना ने प्रशासनिक दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, और जिम्मेदार अधिकारी इस पर मौन हैं। नौढ़िया नंबर-1 के आदिवासी परिवारों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि अपने घरों तक पहुंचने के मूल अधिकार की आवश्यकता है। इन परिवारों का आरोप है कि वे कई वर्षों से प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। अब उन्होंने जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।1
- सतना में जिला अधिवक्ता संघ के चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए चुनाव मैदान में उतरीं एडवोकेट कल्पना चौधरी लगातार अधिवक्ता साथियों से जनसंपर्क कर रही हैं और उनसे समर्थन तथा आशीर्वाद मांग रही हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 3 जुलाई 2026 को होना निर्धारित है, जिसमें कल्पना चौधरी का सरल क्रमांक 3 है। कल्पना चौधरी ने अधिवक्ता साथियों से अपील की है कि वे उन्हें अपना सहयोग प्रदान करें और भारी मतों से विजयी बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें अधिवक्ताओं का विश्वास और समर्थन मिला, तो वे पूरी जिम्मेदारी के साथ अधिवक्ता हितों की रक्षा, संगठन को मजबूती प्रदान करने और साथियों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करेंगी। अपने संदेश में, उन्होंने अधिवक्ता साथियों के विश्वास पर खरा उतरने का संकल्प व्यक्त करते हुए "आपका विश्वास, हमारी जिम्मेदारी" का नारा दिया है। चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का माहौल है, और कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए मुकाबला भी रोचक होता जा रहा है। सभी की नजरें अब 3 जुलाई 2026 को होने वाले मतदान पर टिकी हुई हैं।2
- सतना में विंध्य चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव को लेकर व्यापारिक जगत में चर्चाओं का दौर जारी है। चुनाव मैदान में चार प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन समाज सेवा और जनहित के कार्यों में उनकी निरंतर सक्रियता के कारण मनोहर डिगवानी को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। मनोहर डिगवानी अमर ज्योति सेवा समिति के संस्थापक सदस्य के रूप में वर्षों से समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हैं। उनके प्रयासों से 800 से अधिक नेत्रदान संपन्न हुए हैं, जिनसे 1600 से ज्यादा लोगों को दृष्टि का लाभ मिला है। इसके अलावा, उन्होंने मेडिकल कॉलेज के लिए देहदान और अंगदान के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाकर चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। व्यापारियों का कहना है कि मनोहर डिगवानी ने हमेशा समाज और व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता दी है। प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उनकी अच्छी पकड़ होने के कारण वे व्यापारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सक्षम माने जाते हैं। व्यापारिक वर्ग में यह चर्चा है कि जो व्यक्ति वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करता आया हो, वही संगठन को नई दिशा और मजबूती दे सकता है। यही वजह है कि अनेक प्रतिष्ठित व्यापारी और युवा व्यापारी उनसे उम्मीदें लगाए हुए हैं। नेत्रदान, देहदान जागरूकता, मानव सेवा और व्यापारी हितों के लिए निरंतर कार्य करने वाले मनोहर डिगवानी एवं उनकी पूरी टीम की सेवाओं को समाज और व्यापारी वर्ग सम्मान की दृष्टि से देख रहा है, और वे व्यापारियों की पहली पसंद के रूप में उभर रहे हैं।1
- बसंत कुमार गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाया है कि तहसीलदार के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण हटाने के निर्देशों की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति के कारण कानून का उल्लंघन हो रहा है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जितेंद्र राय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना कहीं न कहीं कानून के दुरुपयोग का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर की जन सुनवाई में आवेदन देने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सीधे तौर पर कानून और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की अवहेलना है। राय के अनुसार, वर्तमान स्थिति में भ्रष्टाचार के सामने कानून को न्याय मांगने के लिए हाथ जोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी इस पूरी स्थिति का पुरजोर विरोध करती है। पार्टी ने विशेष रूप से मंदिर की जमीन हड़पने की कोशिशों का भी विरोध किया है। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने प्रशासन से जनता को तुरंत न्याय दिलाने और उन्हें अपनी शिकायतों के लिए भटकने पर मजबूर न करने की मांग की है।1
- सतना जिले के रामपुर बाघेलान स्थित ग्राम असरार की निवासी प्रेमा सिंह ने अपनी निजी जमीन पर जबरन कब्जा करने और जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए रामपुर बाघेलान थाने में शिकायत दर्ज कराई है। प्रेमा सिंह के अनुसार, 19 जून 2026 को विक्रम सिंह (पिता हनुमान सिंह) और विवेक सिंह (पिता विक्रम सिंह) ने उनकी निजी जमीन में बाड़ी लगा ली है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी हर रात उनके दरवाजे पर लात मारकर गाली-गलौज करते हैं और उन्हें जान से खत्म करने की धमकी देते हैं। प्रेमा सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके पति की पहले हत्या हो चुकी है और उनके इकलौते बेटे की भी एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई है। अब वह अपनी बहू के साथ अकेली रहती हैं, जिसका फायदा उठाकर आरोपी उनकी जमीन हड़पना चाहते हैं। इस मामले का संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी ने बताया कि उन्हें पीड़िता की शिकायत प्राप्त हुई है और यह मामला गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीन पर जबरन कब्जा और महिला को धमकाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थाना प्रभारी ने तुरंत एक टीम भेजकर मौके की जांच कराने की बात कही और आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पीड़िता को पूर्ण सुरक्षा देने का भी वादा किया। थाना प्रभारी ने दोहराया कि महिला सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग से मिलकर जमीन का सीमांकन कराया जाएगा और आरोपियों को नोटिस जारी कर उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे। पीड़िता प्रेमा सिंह ने आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिसके जवाब में पुलिस ने उन्हें सुरक्षा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- रीवा में ब्राह्मण समाज के प्रति एक युवक द्वारा कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने एक सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है। यह नया विवाद भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद दिए गए एक बयान को लेकर और भी तेज हो गया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी बघेली कलाकार मनीष पटेल के एक विवादित टाइटल को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे और एफआईआर दर्ज करने की स्थिति बनी थी। सामने आए इस वीडियो का उद्देश्य किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के प्रति नफरत फैलाना नहीं है, बल्कि इसका मुख्य लक्ष्य पूरे घटनाक्रम, विवाद की वास्तविक वजह और इस पर लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाओं की जानकारी प्रदान करना है।1
- लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मरने वालों में ज्यादातर युवा छात्र शामिल थे। अपनी जान बचाने के लिए कुछ छात्रों ने बाथरूम में खुद को बंद कर लिया था, जबकि कुछ ने ऊंचाई से छलांग लगाकर या तारों के सहारे नीचे उतरकर भागने का प्रयास किया। इस हादसे की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसे पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस अवैध बिल्डिंग को साल 2016 में गिराने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह खड़ी रही। यह पूरा मामला अब 'सिस्टम की बड़ी नाकामी' को उजागर करता है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस भीषण अग्निकांड का असली जिम्मेदार कौन है — आग, अवैध इमारत या फिर प्रशासन की घोर लापरवाही? इस पूरी रिपोर्ट को प्रकाश पाठक ने प्रस्तुत किया है।1