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- जोजावर |राणावास श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी मानवहितकारी संघ,विद्याभूमि, राणावास के संस्थापक कर्मयोगी काका केसरीमल सुराणा के 117 जन्मोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केसाराम चौधरी,विधायक, मारवाड़ जंक्शन ने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक है। विद्याभूमि राणावास संस्कारों की अध्यात्म भूमि है। यहां शिक्षा के साथ जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष पी. मोहनलाल जैन गादिया (गुड़ा रामसिंह)ने आगंतुक सभी महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने संबोधन में विधायक महोदय एवं सरपंच प्रतिनिधि व जिला परिषद सदस्य सज्जन चौधरी का मुख्य चौराहे से संस्था मुख्य द्वार तक सीसी सड़क निर्माण हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सज्जन चौधरी जिला परिषद सदस्य ने अपने संबोधन में कहा कि काका केसरीमल सुराणा ने शिक्षा का जो बीज बोया वो आज वट वृक्ष बनकर पूरे ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों को सरल,तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम का सानिध्य गुरुदेव आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवृत्ति शिष्य मुनिश्री चैतन्य कुमार अमन ने अपने उद्बोधन में कहा कि काका केसरीमल सुराणा कर्म योगी के साथ-साथ धर्म योगी थे। इन्होंने अपने जीवन में कर्म तथा धर्म का समन्वय बनाए रखा। काका साहब व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व थे।सादगी व सरलता उनका जीवन था जिससे वे लोगों के दिलों में उतर गए । कार्य ऐसा करें कि लोगों के दिल में जाएं ना कि दिल से उतर जाए। कार्यक्रम में सुरेश चंद्र मरलेचा उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि काका साहब पूरे कांठा क्षेत्र के मसीहा है। जिनके प्रयासों से ही आज प्रत्येक घर में सरकारी कर्मचारी, और व्यावसायिक जगत में सफल व्यक्तियों का निर्माण हुआ है। सुमेरसिंह कुंपावत पूर्व प्रधान ने अपने संबोधन में काका केसरीमल के चरित्र निर्माण, ईमानदारी व नैतिकता की शिक्षा पर प्रकाश डाला।संस्था पदाधिकारी इंद्रमल गादिया, विजयराज जैन,हितेश जैन, जसपाल सिंह गादाना भाजपा युवा नेता, गणपत चौधरी तथा जयसिंह ठाकुरवास शिक्षाविद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में डॉ जबरसिंह राजपुरोहित निर्देशक, विमल गादिया, कुशाल जोशी, अरुण प्रताप सिंह, भावेश दवे, नेपाल सिंह राठौड़, जयप्रकाश, अमर सिंह सोलंकी, हिम्मत सिंह भाटी, घनश्याम जांगिड़, शांतिलाल वैष्णव , एडवोकेट मनोहर सिंह गादानासहित सभी यूनिट के स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।1
- पाली,मनीष राठौड़ | शहर में होली का उत्साह आज दूसरे दिन भी परवान पर है। मंगलवार को चंद्र ग्रहण के साये के कारण पालीवासियों ने आज बुधवार को जमकर गुलाल उड़ाया। गलियों से लेकर हाईवे तक, हर तरफ फागुन के रंग और 'हैप्पी होली' की गूंज सुनाई दे रही है। माली समाज की गेर और घर-घर ढूंढोत्सव माली समाज सहित विभिन्न समाजों द्वारा आज पारंपरिक गेर नृत्य का आयोजन किया गया। गेरिये ढोल-धमाकों के साथ समाज के उन घरों में पहुंचे जहां हाल ही में बच्चों का जन्म हुआ है। वहां विधि-विधान से 'ढूंढ' का कार्यक्रम संपन्न हुआ। चंग की थाप पर थिरकते गेरियों ने उत्सव में चार चांद लगा दिए।माली समाज विकास संस्था के अध्यक्ष भजन गायक रमेश माली ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत बेटियों की भी ढूंढ की गई कहीं कड़ाव का रंग, कहीं गुब्बारों की बौछार,शहर के अलग-अलग कोनों में होली के अलग-अलग रंग देखने को मिले नवलखा रोड: यहाँ रंग से भरा कड़ाव रखा गया, जहाँ से गुजरने वाले हर शख्स को रंग में सराबोर कर 'हैप्पी होली' की बधाई दी गई। पानी दरवाजा: यहाँ युवाओं का भारी हुजूम उमड़ा। ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर गुजर रही महिलाओं और राहगीरों पर युवाओं ने जमकर रंग भरे गुब्बारे फेंके। सर्राफा बाजार व पुरानी सब्जी मंडी: इन इलाकों में भी युवाओं और महिलाओं की टोलियां एक-दूजे को गुलाल लगाकर पर्व मनाती नजर आईं। पुरानी सब्जी मंडी और गांछों का बास में महिलाएं अपने परिवार के साथ सड़कों पर उतरीं। चेहरे पर गुलाल और हाथों में रंग लिए महिलाएं लोक गीतों पर झूमती दिखीं। पाली-जयपुर हाईवे स्थित श्रीनाथ होटल पर समाजसेवी सूरजपालसिंह रावलवास के नेतृत्व में होली मनाई गई, जहाँ सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। शाम को निकलेगी 'शाही गैर' आज शाम शहर के जोधपुरिया बारी से शाही गैर का भव्य आगाज होगा। प्याऊ चौक से गुजरने वाली इस ऐतिहासिक गैर के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। झीतड़ा में उमड़ा जनसैलाब पाली के निकट झीतड़ा के द्वारकाधीश मंदिर में आज विशाल मेला भरा। यहाँ फूलों की होली का आयोजन हुआ, जिसमें आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और भगवान के दर्शन कर खुशहाली की कामना की। शहर के भीतरी भागों में छतों से फेंकी जा रही रंग की थैलियों से वाहन चालक परेशान दिखे। उत्साह के इस पर्व में राहगीरों की सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की जा रही है।1
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- आज जोधपुर उत्तर वाड 65 मदेरणा कोलोनी में होली के और चंद्र ग्रहण होन कारण भगवान पर भार आजाता इस लिए सुख समृद्धि शांति और सभी भक्तों की श्री राम मनोकामना पूर्ण हो इस लिए मदेरणा कोलोनी लक्षमी नारायण मंदिर के पीछे गियान गली में सुंदर काण्ड पाठ किया गया जिसमें सयोगी रहे सेठू दर्जी चंद्र प्रकाश रतावा धनराज दाधीच रामेश्वर जी दाधीच सुभाष भाटी रामचंद्र गजेंद्र नैमिचंद1
- 🔸 विशेष सत्संग आयोजन 🔸 होली के पावन पर्व पर विशेष सत्संग जोधपुर मथानिया रजासनी गांव में रखी गई समाज सेवी भगवान सिंह सांखला ने बताया कि भेदीजन नि: केवल राम स्नेही संत श्री हिरालाल जी कच्छवाहा द्वारा सतगुरु सुखराम जी महाराज जी की वाणी जी की एक दिवसीय सत्संग नोकिया ट्यूबवेल राम भवन (राजासनी ) मथानिया में रखी गई जिसमें हजारों की संख्या में राम स्नेही भक्तों ने सत्संग का लाभ उठाया सत्संग में संत हीरालाल जी कच्छवाहा ने बताया कि माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥ इसका मतलब यह है कि केवल हाथ से माला जपते रहने से कोई लाभ नहीं, जब तक मन नहीं बदलता। हाथ की माला छोड़कर अपने मन को बदलो, सच्चे मन से राम का स्मरण करोगे तभी परमात्मा से मिलन होगा। सत्संग के समय राम स्नेही भक्तों का सुमिरन व ध्यान भी लगवाया गया। भक्तों ने सतगुरु सुखराम जी महाराज ने धन्य हो धन्य हो जयघोष से पुरा पंडाल गुंज उठा सत्संग के समापन के बाद प्रसादी का भी आयोजन रखा गया..!!1
- होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं1
- नाडोल सर्व प्रथम होली की पूजा अर्चना कर होली का दहन किया गया होली चौक चौधरियो के दरवाजे पर पंडित नटवर लाल त्रिवेदी एवं पंच गणो ने पूजा कर होली का दहन पर सैकड़ कि तादाद में नये परिधान मे गेरिये धम चक मचा रहे, महिलाये लुम्बर लेती, सिद्धी विनायक मित्र मण्डल,पुलिस चौकी प्रभारी चन्द्रविर सिंह, व्यवस्था बनाये रखने मे सहयोग रहा राठौड़ी गैर मण्डल अध्यक्ष पुनाराम काग,देवाराम घांची,व्यवस्थापक जितेन्द्र सिरवी, मोडाराम,एन एस राव एण्ड पाट्री द्वारा राठौड़ी गैर नृत्य में संग थारो गेरो बाजे आदि फागुन के गीतो से भाव विभोर कर दिया। 0 से 1वर्ष के नन्ने मुन्नों को पुरानी परम्परा के अनुसार होली के फेरे फिराये जाते हैं। महिलाये गीत गाती इसी के साथ दुसरे दिन ऐक दुसरे पर गुलाल, रंग डाल कर होली के पर्व को मनाया गया। नाडोल कस्बा बड़ा होने के कारण अपने अपने मोहल्लों में होली का दहन किया जाता है1