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होली पर्व को लेकर महिलाओं द्वारा गैर गेट का आयोजन हुआ भव्य आयोजित होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं
मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
होली पर्व को लेकर महिलाओं द्वारा गैर गेट का आयोजन हुआ भव्य आयोजित होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं
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- होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं1
- बाली उपखण्ड के कोठार गांव काम्बेश्वर महादेव 36 कोम की गैर रबारी समाज की वेशभूषा मे नृत्य उपखण्ड बाली क्षेत्र कोठार गांव मे गैर नृत्य का इतिहास सालों से चलता आ रहा है कोठार गांव मै होली चौक के प्रागण मै गोल घेरे में गैर नृत्य की संरचना सालों से चली आ रही है गैर नृत्य करने वालें ‘गैरिया’ होली से प्रारम्भ होता है तथा 7दिन तक चलता है यह बाली क्षेत्र कोठार गांव प्रसिद्ध रबारी लोक नृत्य कला जो पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से गोल घेरा बनाकर ढोल थाली से आदि वाद्ययंत्रों के साथ हाथों में डंडा लकड़ी लेकर किया इस नृत्य को देखने लोग गांव से सैकड़ो आते है मारवाड़ के गैरिये नृत्यकार सफेद अंगरखी, धोती व सिर पर लाल पगड़ी धारण कर आते हैं लाइन से गोल घेरा लगाकर पुरुष एक साथ मिलकर वृत्ताकार रूप में नृत्य करते- इसे बोलते की मारवाड़ी गैर नृत्य की मूल रचना एक ही प्रकार है मण्डल में लगातार हाथो मे लकड़ी से ताल से ताल मिलाकर चलते है गैरिया अन्य रूप रबारी संस्कृति को प्रदर्शित करता है कोठार की प्रसिद्ध गैर नृत्य है1
- जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए। आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।1
- आहोर होली पर बच्चे बने दूल्हे, मामा- काका ने करवाएं फेरे: रोडला में निभाई गई परंपरा, होलिका दहन के दौरान की गई पूजा -अर्चना: महिलाओं ने गाएं फागुन के गीत:- जालोर जिले के आहोर उपखंड क्षेत्र के रोडला, भूती,कवलां , गुड़ा इन्द्रपुरा , वलदरा,कवराडा गांव में सोमवार की शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। वहीं रोडला गांव के आंखरिया चौक में होलिका दहन किया गया।रोडला में रजतप्रताप सिंह ने गांव के फलां हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर होलिका दहन स्थल पहुंचकर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के साथ होलिका स्थल से नाचते गाते फागुन के गीतों के साथ रंगों का पर्व का शुभारंभ हुआ। वहीं होली के पर्व पर बच्चों को दूल्हे के रूप में तैयार कर होलिका दहन स्थल पर कई परिवार वीआईपी कल्चर की गाड़ी व ढोल और बैंडबाजों पर नाचते हुए होलिका दहन स्थल पहुंचे। फिर इन दूल्हों को उनके काका व मामा एवं भाई ने गोंद में उठाकर होली के फेरे लगवाने की परंपरा निभाई। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चा बुरी नजर से बचा रहता है। वहीं होली दहन के बाद युवा चंग की थाप पर फाग गीत गाते, डांस करते हुए नजर आए। वहीं डीजे की धून पर युवाओं ने डांस किया। होली के अवसर पर महिलाओं ने भी परंपरा निभाई और विधिवत रूप से पूजा अर्चना की ।कई जने होलिका दहन की आग में गेहूं की बालियां सेंकते नजर आए। रोडला में शाम के श्रेष्ठ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के दूसरे दिन रंग-बिरंगी पिचकारी के साथ एवं मस्ती का गुलाल के साथ रंगों का पर्व होली उमंग व उत्साह के साथ धूलण्डी का पर्व मनाया। जिसमें फागुन की मस्ती और रंगों की फुहार के साथ धुलंडी का त्योहार मनाया गया। वहीं दूसरे दिन परंपरा के अनुसार ठाकुर परिवार के नेतृत्व गांव के प्रबुद्धजनों के साथ कलश निकासी के माध्यम से ग्रामीणों द्वारा वर्ष के खुशहाली के लिए कलश में रखे सात धान की परंपरा निभाई गई जिसमें धान के माध्यम से सगुन देखने की परंपरा निभाई गई। वहीं कलश सगुन के साथ शीतला सप्तमी तक आयोजित होने वाले गैर नृत्य का आगाज के फागुन महोत्सव का शुभारंभ हुआ। वहीं शीतला सप्तमी पर रोडला में आखरियां चौक पर गैर नृत्य का आयोजन होगा।2
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान4
- जोजावर |राणावास श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी मानवहितकारी संघ,विद्याभूमि, राणावास के संस्थापक कर्मयोगी काका केसरीमल सुराणा के 117 जन्मोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केसाराम चौधरी,विधायक, मारवाड़ जंक्शन ने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा के साथ संस्कार भी आवश्यक है। विद्याभूमि राणावास संस्कारों की अध्यात्म भूमि है। यहां शिक्षा के साथ जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष पी. मोहनलाल जैन गादिया (गुड़ा रामसिंह)ने आगंतुक सभी महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने संबोधन में विधायक महोदय एवं सरपंच प्रतिनिधि व जिला परिषद सदस्य सज्जन चौधरी का मुख्य चौराहे से संस्था मुख्य द्वार तक सीसी सड़क निर्माण हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सज्जन चौधरी जिला परिषद सदस्य ने अपने संबोधन में कहा कि काका केसरीमल सुराणा ने शिक्षा का जो बीज बोया वो आज वट वृक्ष बनकर पूरे ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों को सरल,तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम का सानिध्य गुरुदेव आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवृत्ति शिष्य मुनिश्री चैतन्य कुमार अमन ने अपने उद्बोधन में कहा कि काका केसरीमल सुराणा कर्म योगी के साथ-साथ धर्म योगी थे। इन्होंने अपने जीवन में कर्म तथा धर्म का समन्वय बनाए रखा। काका साहब व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व थे।सादगी व सरलता उनका जीवन था जिससे वे लोगों के दिलों में उतर गए । कार्य ऐसा करें कि लोगों के दिल में जाएं ना कि दिल से उतर जाए। कार्यक्रम में सुरेश चंद्र मरलेचा उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि काका साहब पूरे कांठा क्षेत्र के मसीहा है। जिनके प्रयासों से ही आज प्रत्येक घर में सरकारी कर्मचारी, और व्यावसायिक जगत में सफल व्यक्तियों का निर्माण हुआ है। सुमेरसिंह कुंपावत पूर्व प्रधान ने अपने संबोधन में काका केसरीमल के चरित्र निर्माण, ईमानदारी व नैतिकता की शिक्षा पर प्रकाश डाला।संस्था पदाधिकारी इंद्रमल गादिया, विजयराज जैन,हितेश जैन, जसपाल सिंह गादाना भाजपा युवा नेता, गणपत चौधरी तथा जयसिंह ठाकुरवास शिक्षाविद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में डॉ जबरसिंह राजपुरोहित निर्देशक, विमल गादिया, कुशाल जोशी, अरुण प्रताप सिंह, भावेश दवे, नेपाल सिंह राठौड़, जयप्रकाश, अमर सिंह सोलंकी, हिम्मत सिंह भाटी, घनश्याम जांगिड़, शांतिलाल वैष्णव , एडवोकेट मनोहर सिंह गादानासहित सभी यूनिट के स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।1
- मारवाड़ योद्धा जोन की एयू बनो चैम्पियन की सभी खेल लोकेशनों पर होली का पर्व धूमधाम व हर्षोल्लास से मनाया गया। जोन खेल सुपर कोच कन्हैयालाल मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि एथलेटिक्स कोच पूजा सिंह के सानिध्य में आहोर लोकेशन पर,फुटबॉल कोच उत्तम काबावत के सानिध्य में भीनमाल लोकेशन पर, फुटबॉल कोच प्रदीप कुमार के सानिध्य में सुमेरपुर लोकेशन पर,थ्रोबाल कोच कैलाशचंद्र के सानिध्य में बादनवाड़ी लोकेशन पर, एथलेटिक्स कोच झालाराम राणा के सानिध्य में सायला लोकेशन पर,एथलेटिक्स कोच पारती चौहान के सानिध्य में सिरोही लोकेशन पर व मुक्केबाजी वुशू खिलाड़ियों ने जालोर लोकेशन पर अबीर व गुलाल के साथ होली के पर्व का आनन्द लिया।मारवाड़ योद्धा जोन के सुपरकोच कन्हैयालाल मिश्रा ने फाल्गुली मस्ती व देशभक्ति से सराबोर गीत, थे खेलो लाल गुलाल,होली नित आवे व हां रे होली आई रे गीतों की खिलाड़ियों के साथ सामूहिक प्रस्तुति दी।कार्यक्रम के दौरान मुक्केबाज खिलाड़ी अनिता कुमारी, भावेश कुमार, चेतन कुमार व उत्कर्ष मिश्रा ने होली पर्व के बारे में अपने विचार प्रकट किये।होली गीतों की मिठास के बाद सभी खिलाड़ियों ने जमकर होली खेली।उसके बाद उपस्थित सभी खिलाड़ियों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर होली की शुभकामनाएं दी।2
- सरूपगंज। कस्बे में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संयुक्त व्यापार मंडल के तत्वावधान में सामूहिक होली का आयोजन किया गया । जिसमें सभी व्यापारियों सहित कस्बे के आम जन ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया। डीजे पर होली गीतों के बीच माहौल पूरी तरह रंगों में खुशियों से भरा नजर आया। आयोजन ने सामाजिक एकता परिचय देते हुए होली के पर्व को यादगार बना दिया।1