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होली पर आदिवासी अंचल में गूंजा ‘गैर’ का ढोल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी आए नजर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए। आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।

15 hrs ago
user_Journalist arif Pathan
Journalist arif Pathan
पत्रकार Pindwara, Sirohi•
15 hrs ago

होली पर आदिवासी अंचल में गूंजा ‘गैर’ का ढोल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी आए नजर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए। आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।

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  • जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए। आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।
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    जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए।
आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है।
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।
    user_Journalist arif Pathan
    Journalist arif Pathan
    पत्रकार Pindwara, Sirohi•
    15 hrs ago
  • आबूरोड। जनजाति बाहुल्य भाखर क्षेत्र में होली दहन के बाद आग के अंगारों में नंगे पांव से निकलने की परंपरागत। रणोरा व जाम्बुडी गांव में होली दहन के बाद आग के अंगारों में से नंगे पांवों से निकलते जनजाति लोग। भाखर जनजाति अंचल में अंगारों में निकलने वाले लोगों की मन्नत पूरी होने से यह लोग परंपरागत अंगारों से निकलते हैं। भाखर क्षेत्र के जनजातीय लोगों के लोक देवता भाखर बाबाजी व कुलदेवी माताजी का नाम लेकर यह लोग ढोल-नगाड़ों की गूंज से नंगे पांवों से आग के अंगारों में निकलने का परंपरागत है।
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    आबूरोड। जनजाति बाहुल्य भाखर क्षेत्र में होली दहन के बाद आग के अंगारों में नंगे पांव से निकलने की परंपरागत।
रणोरा व जाम्बुडी गांव में होली दहन के बाद आग के अंगारों में से नंगे पांवों से निकलते जनजाति लोग। 
भाखर जनजाति अंचल में अंगारों में निकलने वाले लोगों की मन्नत पूरी होने से यह लोग परंपरागत अंगारों से निकलते हैं।
भाखर क्षेत्र के जनजातीय लोगों के लोक देवता भाखर बाबाजी व कुलदेवी माताजी का नाम लेकर यह लोग ढोल-नगाड़ों की गूंज से नंगे पांवों से आग के अंगारों में निकलने का परंपरागत है।
    user_Lokesh Soni
    Lokesh Soni
    आबू रोड, सिरोही, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं
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    होली पर्व को लेकर महिला गैर नृत्य कार्यक्रम हुआ भव्य आयोजित इस दौरान रंगारंग क्षत्रिया लेकर गैर नृत्य करती महिलाएं
    user_मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
    मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
    Agricultural production बाली, पाली, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • बाली उपखण्ड के कोठार गांव काम्बेश्वर महादेव 36 कोम की गैर रबारी समाज की वेशभूषा मे नृत्य उपखण्ड बाली क्षेत्र कोठार गांव मे गैर नृत्य का इतिहास सालों से चलता आ रहा है कोठार गांव मै होली चौक के प्रागण मै गोल घेरे में गैर नृत्य की संरचना सालों से चली आ रही है गैर नृत्य करने वालें ‘गैरिया’ होली से प्रारम्भ होता है तथा 7दिन तक चलता है यह बाली क्षेत्र कोठार गांव प्रसिद्ध रबारी लोक नृत्य कला जो पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से गोल घेरा बनाकर ढोल थाली से आदि वाद्ययंत्रों के साथ हाथों में डंडा लकड़ी लेकर किया इस नृत्य को देखने लोग गांव से सैकड़ो आते है मारवाड़ के गैरिये नृत्यकार सफेद अंगरखी, धोती व सिर पर लाल पगड़ी धारण कर आते हैं लाइन से गोल घेरा लगाकर पुरुष एक साथ मिलकर वृत्ताकार रूप में नृत्य करते- इसे बोलते की मारवाड़ी गैर नृत्य की मूल रचना एक ही प्रकार है मण्डल में लगातार हाथो मे लकड़ी से ताल से ताल मिलाकर चलते है गैरिया अन्य रूप रबारी संस्कृति को प्रदर्शित करता है कोठार की प्रसिद्ध गैर नृत्य है
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    बाली उपखण्ड के कोठार गांव काम्बेश्वर महादेव 36 कोम की गैर रबारी समाज की वेशभूषा मे नृत्य
उपखण्ड बाली क्षेत्र कोठार गांव मे गैर नृत्य का इतिहास सालों से चलता आ रहा है कोठार गांव मै होली चौक के प्रागण मै गोल घेरे में गैर नृत्य की संरचना सालों से चली आ रही है गैर नृत्य करने वालें ‘गैरिया’ होली से प्रारम्भ होता है  तथा 7दिन तक चलता है यह बाली क्षेत्र कोठार गांव प्रसिद्ध रबारी लोक नृत्य कला जो पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से गोल घेरा बनाकर ढोल थाली से आदि वाद्ययंत्रों के साथ हाथों में डंडा लकड़ी लेकर किया इस नृत्य को देखने लोग गांव से सैकड़ो आते है मारवाड़ के गैरिये नृत्यकार सफेद अंगरखी, धोती व सिर पर लाल पगड़ी धारण कर आते हैं लाइन से गोल घेरा लगाकर पुरुष एक साथ मिलकर वृत्ताकार रूप में नृत्य करते- इसे बोलते की मारवाड़ी गैर नृत्य की मूल रचना एक ही प्रकार है मण्डल में लगातार हाथो मे लकड़ी से ताल से ताल मिलाकर चलते है गैरिया अन्य रूप रबारी संस्कृति को प्रदर्शित करता है कोठार की प्रसिद्ध गैर नृत्य है
    user_Nagendra Agarwal
    Nagendra Agarwal
    बाली, पाली, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • जय मामा जी
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    जय मामा जी
    user_Chhail Singh Rathore
    Chhail Singh Rathore
    जसवंतपुरा, जालोर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by Lake City News Rajasthan
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    Post by Lake City News Rajasthan
    user_Lake City News Rajasthan
    Lake City News Rajasthan
    Journalist बड़गाँव, उदयपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू
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    मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू
    user_Vishnu lohar
    Vishnu lohar
    Local News Reporter झाड़ोल, उदयपुर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • सरूपगंज। कस्बे में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संयुक्त व्यापार मंडल के तत्वावधान में सामूहिक होली का आयोजन किया गया । जिसमें सभी व्यापारियों सहित कस्बे के आम जन ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया। डीजे पर होली गीतों के बीच माहौल पूरी तरह रंगों में खुशियों से भरा नजर आया। आयोजन ने सामाजिक एकता परिचय देते हुए होली के पर्व को यादगार बना दिया।
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    सरूपगंज। कस्बे में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। 
संयुक्त व्यापार मंडल के तत्वावधान में सामूहिक होली का आयोजन किया गया ।
जिसमें सभी व्यापारियों सहित कस्बे के आम जन ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया। 
डीजे पर होली गीतों के बीच माहौल पूरी तरह रंगों में खुशियों से भरा नजर आया।
आयोजन ने सामाजिक एकता परिचय देते हुए होली के पर्व को यादगार बना दिया।
    user_Journalist arif Pathan
    Journalist arif Pathan
    पत्रकार Pindwara, Sirohi•
    19 hrs ago
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