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मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू
Vishnu lohar
मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू मादा में कपाया परिवारों की ऐतिहासिक बैठक, सामाजिक सुधार के लिए सख्त नियम लागू
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- उदयपुर। होली के त्यौहार पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उदयपुर पुलिस द्वारा सख्त निगरानी के बीच थाना सविना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर सहित तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो तलवार और एक चाकू जब्त किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल के निर्देशन में त्यौहार के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी थानाधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में थानाधिकारी सविना मय टीम ने थाना क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर दहशत फैलाने की सूचना पर त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कैलाश (निवासी बलीचा बाईपास), जयप्रकाश उर्फ प्रिन्स (निवासी महाराज का अखाड़ा, सविना) तथा गौरव सिंह (निवासी कालका माता रोड, पायडा) को गिरफ्तार किया। इनमें जयप्रकाश उर्फ प्रिन्स आदतन अपराधी व हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। तीनों आरोपियों के खिलाफ 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान जारी है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि त्यौहारों के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।1
- रंगों का पावन पर्व धुलण्डी मावली कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही उत्साह व उमंग के साथ मनाया गया। जानकारी के अनुसार आपसी प्रेम और भाईचारे के इस त्योहार पर ग्रामीणों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशियों के रंग साझा किए। धुलण्डी के अवसर पर युवाओं और बच्चों की टोलियां हाथों में रंग और पिचकारियां लेकर सड़कों पर निकल पड़ीं। "होली है" के जयकारों के साथ समूचा मावली कस्बा रंगों के सराबोर नजर आया। बड़े-बुजुर्गों ने भी एक-दूसरे को तिलक लगाकर पर्व की बधाई दी। फाल्गुनी गीतों और ढोल की थाप पर ग्रामीण जमकर थिरके, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया। होली के इस विशेष अवसर पर घरों में विशेष पकवान बनाए गए। ग्रामीणों ने पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों का लुत्फ उठाया। त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस जाब्ता तैनात रहा। जिससे पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।1
- जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। होली के मौके पर आदिवासी समाज द्वारा बजाया जाने वाला पारंपरिक ‘गैर का ढोल’पूरे क्षेत्र में गूंज उठा। ढोल की थाप पर युवक गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गैर नृत्य करते नजर आए। आदिवासी अंचल में होली के अवसर पर ढोल बजाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। विशेषकर गरासिया समाज में यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां युवा और बुजुर्ग एक साथ ढोल की थाप पर नृत्य कर खुशियां मनाते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिरोही जिला कांग्रेस अध्यक्ष, लीलाराम गरासिया आदिवासी युवकों के साथ ढोल बजाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि उनके साथ कई आदिवासी युवक भी मौजूद हैं और सभी पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते हुए ढोल बजा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह पारंपरिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक सौहार्द और संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है। होली के इस अवसर पर आदिवासी अंचल में उत्साह का माहौल बना हुआ है और ढोल की गूंज से पूरा वातावरण रंगमय हो उठा है।1
- रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.3
- आबूरोड। जनजाति बाहुल्य भाखर क्षेत्र में होली दहन के बाद आग के अंगारों में नंगे पांव से निकलने की परंपरागत। रणोरा व जाम्बुडी गांव में होली दहन के बाद आग के अंगारों में से नंगे पांवों से निकलते जनजाति लोग। भाखर जनजाति अंचल में अंगारों में निकलने वाले लोगों की मन्नत पूरी होने से यह लोग परंपरागत अंगारों से निकलते हैं। भाखर क्षेत्र के जनजातीय लोगों के लोक देवता भाखर बाबाजी व कुलदेवी माताजी का नाम लेकर यह लोग ढोल-नगाड़ों की गूंज से नंगे पांवों से आग के अंगारों में निकलने का परंपरागत है।4
- Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान4
- उदयपुर जिले के वल्लभनगर नगर पालिका क्षेत्र की नई बस्ती में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। खेत में लगे विद्युत ट्रांसफार्मर में अचानक शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार आग की लपटें तेज होने के कारण पास में खड़ी गेहूं एवं अन्य फसलों को भी खतरा उत्पन्न हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता के कारण बड़ी जनहानि टल गई। आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया, जिससे खेत में खड़ी गेहूं एवं अन्य फसलें बच गईं। ग्रामवासी एवं जनपरहरी सुरेश कुमार मेघवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। उन्होंने ग्रामीणों की सजगता व सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा की यदि समय पर प्रयास नहीं किए जाते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा की अपने-अपने खेतों में लगे ट्रांसफार्मरों के आसपास नियमित रूप से साफ-सफाई रखें, सूखी घास एवं ज्वलनशील पदार्थों को हटाएं, विद्युत तारों की स्थिति पर भी ध्यान दें। गर्मी के मौसम में शॉर्ट सर्किट की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने विद्युत विभाग से भी आग्रह किया है की किसान उपभोक्ताओं को समय-समय पर जागरूक किया जाए। ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, संभावित जोखिमों के बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं विद्युत विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में लगे सभी ट्रांसफार्मरों की तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र करवाया जाए। जिससे किसानों की मेहनत की फसल सुरक्षित रह सके।1
- सरूपगंज। कस्बे में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संयुक्त व्यापार मंडल के तत्वावधान में सामूहिक होली का आयोजन किया गया । जिसमें सभी व्यापारियों सहित कस्बे के आम जन ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे व सौहार्द का संदेश दिया। डीजे पर होली गीतों के बीच माहौल पूरी तरह रंगों में खुशियों से भरा नजर आया। आयोजन ने सामाजिक एकता परिचय देते हुए होली के पर्व को यादगार बना दिया।1
- Post by VAGAD news241