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एटा में उत्तर मध्य रेलवे के बरहन-एटा रेलखंड पर गेट संख्या 22-सी के निकट निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्थिति निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मौके पर कार्यरत मजदूरों को बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी जूते, बिना दस्ताने और बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के अत्यंत जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर गहरी खुदाई, भारी मशीनरी, लोहे की सरिया और मिट्टी के ऊंचे ढेरों जैसी खतरनाक परिस्थितियों के बीच श्रमिकों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन के प्रति गंभीर उपेक्षा का उदाहरण माना जा रहा है। निर्माण क्षेत्र में लागू विभिन्न श्रम एवं सुरक्षा नियमों के तहत ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक श्रमिक को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराएं, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है, जिससे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन परिस्थितियों में कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित ठेकेदार, साइट इंजीनियर, सुपरवाइजर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी के कारण गंभीर दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी श्रमिक की जान जाने के बाद ही जागेगा, क्योंकि निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरणों का अभाव, निगरानी की कमी और अधिकारियों की कथित उदासीनता यह संकेत दे रही है कि नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तत्काल जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, जब तक सभी श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक कार्य को रोकने पर भी विचार करने की बात कही गई है। जनता का मानना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों की सुविधा और सुरक्षा है, न कि मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डालकर काम पूरा करना। यदि समय रहते इस गंभीर मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो कोई भी दुर्घटना प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का सीधा परिणाम होगी। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन, श्रम विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और औपचारिकताओं का सिलसिला ही शुरू होगा।

2 hrs ago
user_Star ToDay Samachar
Star ToDay Samachar
Local News Reporter जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

एटा में उत्तर मध्य रेलवे के बरहन-एटा रेलखंड पर गेट संख्या 22-सी के निकट निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्थिति निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मौके पर कार्यरत मजदूरों को बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी जूते, बिना दस्ताने और बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के अत्यंत जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर गहरी खुदाई, भारी मशीनरी, लोहे की सरिया और मिट्टी के ऊंचे ढेरों जैसी खतरनाक परिस्थितियों के बीच श्रमिकों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन के प्रति गंभीर उपेक्षा का उदाहरण माना जा रहा है। निर्माण क्षेत्र में लागू विभिन्न श्रम एवं सुरक्षा नियमों के तहत ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक श्रमिक को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराएं, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है, जिससे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन परिस्थितियों में कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित ठेकेदार, साइट इंजीनियर, सुपरवाइजर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी के कारण गंभीर दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी श्रमिक की जान जाने के बाद ही जागेगा, क्योंकि निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरणों का अभाव, निगरानी की कमी और अधिकारियों की कथित उदासीनता यह संकेत दे रही है कि नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तत्काल जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, जब तक सभी श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक कार्य को रोकने पर भी विचार करने की बात कही गई है। जनता का मानना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों की सुविधा और सुरक्षा है, न कि मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डालकर काम पूरा करना। यदि समय रहते इस गंभीर मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो कोई भी दुर्घटना प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का सीधा परिणाम होगी। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन, श्रम विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और औपचारिकताओं का सिलसिला ही शुरू होगा।

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  • जनपद एटा की तहसील सदर क्षेत्र में मलावन पावर प्लांट के निकट स्थित लगभग 21.665 हेक्टेयर वेटलैंड भूमि के संरक्षण, सदुपयोग और प्राकृतिक सौंदर्य के विकास के उद्देश्य से जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इला मारन जी एवं प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी विपिन वर्मा के साथ स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान वेटलैंड क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी तंत्र का अवलोकन करते हुए, जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इसकी प्राकृतिक एवं जैविक विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए इसे प्राकृतिक सौंदर्य का एक आकर्षक केंद्र विकसित किया जाए। उन्होंने प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को वेटलैंड के चारों ओर एवं किनारों पर व्यापक स्तर पर सघन वृक्षारोपण कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वृक्षारोपण कार्य में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रहे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिला समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं सहभागिता का अवसर मिल सके। जिलाधिकारी ने वेटलैंड भूमि की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैव विविधता संरक्षण, भू-जल संवर्धन, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार को वेटलैंड क्षेत्र के संरक्षण, रखरखाव एवं उपयोग की कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने, स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण करने तथा पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह वेटलैंड क्षेत्र भविष्य में जनपद में प्राकृतिक सौंदर्य एवं पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
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    जनपद एटा की तहसील सदर क्षेत्र में मलावन पावर प्लांट के निकट स्थित लगभग 21.665 हेक्टेयर वेटलैंड भूमि के संरक्षण, सदुपयोग और प्राकृतिक सौंदर्य के विकास के उद्देश्य से जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इला मारन जी एवं प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी विपिन वर्मा के साथ स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान वेटलैंड क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी तंत्र का अवलोकन करते हुए, जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इसकी प्राकृतिक एवं जैविक विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए इसे प्राकृतिक सौंदर्य का एक आकर्षक केंद्र विकसित किया जाए।

उन्होंने प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को वेटलैंड के चारों ओर एवं किनारों पर व्यापक स्तर पर सघन वृक्षारोपण कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वृक्षारोपण कार्य में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रहे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिला समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं सहभागिता का अवसर मिल सके।

जिलाधिकारी ने वेटलैंड भूमि की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैव विविधता संरक्षण, भू-जल संवर्धन, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार को वेटलैंड क्षेत्र के संरक्षण, रखरखाव एवं उपयोग की कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने, स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण करने तथा पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह वेटलैंड क्षेत्र भविष्य में जनपद में प्राकृतिक सौंदर्य एवं पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
    user_JURM KA PARDAAPHAASH
    JURM KA PARDAAPHAASH
    Press Midea जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • बिहार के गोपालगंज जिले से एक दिलचस्प प्रेम विवाह का मामला सामने आया है, जहाँ एक युवक और युवती की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हुई और यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। परिवार की सहमति न मिलने के कारण, दोनों ने घर छोड़ दिया और एक मंदिर में जाकर शादी कर ली। इधर, युवती के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी और अपहरण की आशंका जताते हुए श्रीपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों की तलाश की और उन्हें बरामद कर लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान, युवक और युवती दोनों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से साथ गए थे और उन्होंने स्वेच्छा से विवाह किया है। युवती ने भी साफ तौर पर कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है और वह अपनी इच्छा से युवक के साथ रहना चाहती है। इसके बाद, पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनके बयान दर्ज किए। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि जब दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह करने का निर्णय लेते हैं, तो कानून उनके अधिकारों की रक्षा करता है। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह प्रेम कहानी अंततः विवाह तक पहुंच गई, और पुलिस जांच में अपहरण की आशंका गलत साबित हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एफआईआर होने के बावजूद प्यार जीत गया और पुलिस ने भी दोनों की मर्जी को स्वीकार किया।
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    बिहार के गोपालगंज जिले से एक दिलचस्प प्रेम विवाह का मामला सामने आया है, जहाँ एक युवक और युवती की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हुई और यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। परिवार की सहमति न मिलने के कारण, दोनों ने घर छोड़ दिया और एक मंदिर में जाकर शादी कर ली।

इधर, युवती के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी और अपहरण की आशंका जताते हुए श्रीपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों की तलाश की और उन्हें बरामद कर लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान, युवक और युवती दोनों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से साथ गए थे और उन्होंने स्वेच्छा से विवाह किया है। युवती ने भी साफ तौर पर कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है और वह अपनी इच्छा से युवक के साथ रहना चाहती है। इसके बाद, पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनके बयान दर्ज किए।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि जब दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह करने का निर्णय लेते हैं, तो कानून उनके अधिकारों की रक्षा करता है। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह प्रेम कहानी अंततः विवाह तक पहुंच गई, और पुलिस जांच में अपहरण की आशंका गलत साबित हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एफआईआर होने के बावजूद प्यार जीत गया और पुलिस ने भी दोनों की मर्जी को स्वीकार किया।
    user_Hari Singh Gautam
    Hari Singh Gautam
    Teacher जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अवागढ़ थाना क्षेत्र के गांव इंदरगढ़ में तरबूज बेचने गए एक युवक के साथ गांव के ही कुछ नामजद लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने बताया कि वह गांव में तरबूज बेच रहा था, तभी किसी बात को लेकर कुछ ग्रामीणों से उसकी कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर नामजद लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की, जिससे उसे चोटें आईं। घटना के बाद पीड़ित युवक अवागढ़ थाने पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत देते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने यह शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना पुलिस का कहना है कि वे मामले की जांच के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई करेंगे।
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    अवागढ़ थाना क्षेत्र के गांव इंदरगढ़ में तरबूज बेचने गए एक युवक के साथ गांव के ही कुछ नामजद लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने बताया कि वह गांव में तरबूज बेच रहा था, तभी किसी बात को लेकर कुछ ग्रामीणों से उसकी कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर नामजद लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की, जिससे उसे चोटें आईं।

घटना के बाद पीड़ित युवक अवागढ़ थाने पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत देते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने यह शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना पुलिस का कहना है कि वे मामले की जांच के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई करेंगे।
    user_समीम खान
    समीम खान
    Jalesar, Etah•
    10 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग) कैलाश सिंह राजपूत ने एटा जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में जनप्रतिनिधियों और विद्युत विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था, उपभोक्ता शिकायतों और विभागीय कार्यों की समीक्षा करना था। राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि एटा जिले में बिजली व्यवस्था सुधारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उपभोक्ता संतुष्टि ही विभाग की पहली जिम्मेदारी है, जिसके लिए शिकायतों का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। समीक्षा बैठक के दौरान नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति, ट्रांसफार्मरों पर ओवरलोडिंग, क्षमता वृद्धि, विद्युत दुर्घटनाओं में अनुग्रह सहायता, पशु दुर्घटना भुगतान, राजस्व वसूली, सरकारी विभागों पर बकाया देयकों, बिलिंग व्यवस्था, विजिलेंस की कार्यवाही तथा विद्युत रोस्टर जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। राज्य मंत्री ने इन सभी पहलुओं पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, जिसमें एटा में बिजली संकट पर सरकार की गंभीरता और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर देना शामिल था। राज्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विकास खंडवार और नगर निकायवार विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में प्रदेश सरकार विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्टोरों में विद्युत उपकरणों और आवश्यक सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप अपनाने के लिए प्रेरित करने, तथा 'हर घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जन सामान्य को सोलर पैनल के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा अपनाने हेतु प्रेरित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने विद्युत कटौती संबंधी सूचनाएं समय से सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से जनप्रतिनिधियों और आम जनता तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया। कैलाश सिंह राजपूत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी उपभोक्ता का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए और अवैध वसूली की कोई शिकायत किसी भी स्तर पर प्राप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कार्यों में लापरवाही बरतने वाले एवं नियमों की अवहेलना करने वाले कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। बैठक में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों एवं सुझावों को गंभीरता से सुना गया तथा उनके नियमानुसार प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए गए। इस बैठक में विधायक मारहरा वीरेन्द्र सिंह लोधी, विधायक अलीगंज सत्यपाल सिंह राठौर, जिला अध्यक्ष बीजेपी प्रमोद गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख शीतलपुर पुष्पेन्द्र लोधी, ब्लॉक प्रमुख मारहरा रवि वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) संगम लाल, अधीक्षण अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता विद्युत समस्त एसडीओ एवं अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
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    उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग) कैलाश सिंह राजपूत ने एटा जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में जनप्रतिनिधियों और विद्युत विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था, उपभोक्ता शिकायतों और विभागीय कार्यों की समीक्षा करना था। राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि एटा जिले में बिजली व्यवस्था सुधारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उपभोक्ता संतुष्टि ही विभाग की पहली जिम्मेदारी है, जिसके लिए शिकायतों का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

समीक्षा बैठक के दौरान नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति, ट्रांसफार्मरों पर ओवरलोडिंग, क्षमता वृद्धि, विद्युत दुर्घटनाओं में अनुग्रह सहायता, पशु दुर्घटना भुगतान, राजस्व वसूली, सरकारी विभागों पर बकाया देयकों, बिलिंग व्यवस्था, विजिलेंस की कार्यवाही तथा विद्युत रोस्टर जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। राज्य मंत्री ने इन सभी पहलुओं पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, जिसमें एटा में बिजली संकट पर सरकार की गंभीरता और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर देना शामिल था।

राज्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विकास खंडवार और नगर निकायवार विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान हो सके। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में प्रदेश सरकार विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्टोरों में विद्युत उपकरणों और आवश्यक सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप अपनाने के लिए प्रेरित करने, तथा 'हर घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जन सामान्य को सोलर पैनल के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा अपनाने हेतु प्रेरित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने विद्युत कटौती संबंधी सूचनाएं समय से सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से जनप्रतिनिधियों और आम जनता तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया।

कैलाश सिंह राजपूत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी उपभोक्ता का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए और अवैध वसूली की कोई शिकायत किसी भी स्तर पर प्राप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कार्यों में लापरवाही बरतने वाले एवं नियमों की अवहेलना करने वाले कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। बैठक में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों एवं सुझावों को गंभीरता से सुना गया तथा उनके नियमानुसार प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए गए। इस बैठक में विधायक मारहरा वीरेन्द्र सिंह लोधी, विधायक अलीगंज सत्यपाल सिंह राठौर, जिला अध्यक्ष बीजेपी प्रमोद गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख शीतलपुर पुष्पेन्द्र लोधी, ब्लॉक प्रमुख मारहरा रवि वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) संगम लाल, अधीक्षण अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता विद्युत समस्त एसडीओ एवं अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
    user_SANDIP SINGH JADAUN
    SANDIP SINGH JADAUN
    Astrologer जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • हाथरस के सासनी क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह वीडियो 5 जून, 2026 को पुलिस के संज्ञान में आया था, जिसमें 5 मई, 2026 को हुए एक कार्यक्रम के दौरान एक कलाकार के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया था। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि यह कार्यक्रम एक जन्मदिन उत्सव के दौरान आयोजित किया गया था और इसके लिए सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सासनी पुलिस ने सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आवश्यक वैधानिक कार्यवाही भी जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने और किसी के साथ अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्राधिकारी नगर ने इस पूरे मामले पर जानकारी दी है।
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    हाथरस के सासनी क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह वीडियो 5 जून, 2026 को पुलिस के संज्ञान में आया था, जिसमें 5 मई, 2026 को हुए एक कार्यक्रम के दौरान एक कलाकार के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया था। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि यह कार्यक्रम एक जन्मदिन उत्सव के दौरान आयोजित किया गया था और इसके लिए सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सासनी पुलिस ने सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आवश्यक वैधानिक कार्यवाही भी जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने और किसी के साथ अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्राधिकारी नगर ने इस पूरे मामले पर जानकारी दी है।
    user_Cp 24 news
    Cp 24 news
    Local News Reporter हाथरस, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हाथरस जिलाधिकारी ने विकास खंड मुरसान की ग्राम पंचायत धतूरा खुर्द स्थित अस्थायी गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नीम के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करें।
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    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हाथरस जिलाधिकारी ने विकास खंड मुरसान की ग्राम पंचायत धतूरा खुर्द स्थित अस्थायी गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नीम के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करें।
    user_Vijay Dev
    Vijay Dev
    रिपोर्टर विजय देव B.india24.news Hathras, Uttar Pradesh•
    5 hrs ago
  • एटा जनपद के ब्लॉक शीतलपुर स्थित ग्राम कुनाबली में विकास के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत निराशाजनक है, जहाँ मुख्य सड़कों के किनारे नालियों का निर्माण न होने से ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के कारण सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है और ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के भीतर और मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली सड़कों के किनारे जल निकासी के लिए कोई पक्की नाली नहीं बनाई गई है। इसके परिणामस्वरूप, घरों से निकलने वाला गंदा पानी और थोड़ी सी भी बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। पैदल चलने वालों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है और लोग आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। सड़कों पर पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बदबू के कारण घरों में बैठना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की बात कही है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कहने को तो गांव में पक्की सड़कें बन गई हैं, लेकिन बिना नाली के ये सड़कें उनके लिए आफत बन चुकी हैं, क्योंकि पानी की निकासी न होने से सारा कचरा और गंदा पानी सड़कों पर ही सड़ता रहता है। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
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    एटा जनपद के ब्लॉक शीतलपुर स्थित ग्राम कुनाबली में विकास के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत निराशाजनक है, जहाँ मुख्य सड़कों के किनारे नालियों का निर्माण न होने से ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के कारण सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है और ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के भीतर और मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली सड़कों के किनारे जल निकासी के लिए कोई पक्की नाली नहीं बनाई गई है। इसके परिणामस्वरूप, घरों से निकलने वाला गंदा पानी और थोड़ी सी भी बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। पैदल चलने वालों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है और लोग आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। सड़कों पर पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बदबू के कारण घरों में बैठना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने मलेरिया, डेंगू और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की बात कही है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कहने को तो गांव में पक्की सड़कें बन गई हैं, लेकिन बिना नाली के ये सड़कें उनके लिए आफत बन चुकी हैं, क्योंकि पानी की निकासी न होने से सारा कचरा और गंदा पानी सड़कों पर ही सड़ता रहता है। उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
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    Local News Reporter जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • एटा में उत्तर मध्य रेलवे के बरहन-एटा रेलखंड पर गेट संख्या 22-सी के निकट निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्थिति निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मौके पर कार्यरत मजदूरों को बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी जूते, बिना दस्ताने और बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के अत्यंत जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर गहरी खुदाई, भारी मशीनरी, लोहे की सरिया और मिट्टी के ऊंचे ढेरों जैसी खतरनाक परिस्थितियों के बीच श्रमिकों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन के प्रति गंभीर उपेक्षा का उदाहरण माना जा रहा है। निर्माण क्षेत्र में लागू विभिन्न श्रम एवं सुरक्षा नियमों के तहत ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक श्रमिक को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराएं, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है, जिससे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन परिस्थितियों में कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित ठेकेदार, साइट इंजीनियर, सुपरवाइजर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी के कारण गंभीर दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी श्रमिक की जान जाने के बाद ही जागेगा, क्योंकि निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरणों का अभाव, निगरानी की कमी और अधिकारियों की कथित उदासीनता यह संकेत दे रही है कि नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तत्काल जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, जब तक सभी श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक कार्य को रोकने पर भी विचार करने की बात कही गई है। जनता का मानना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों की सुविधा और सुरक्षा है, न कि मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डालकर काम पूरा करना। यदि समय रहते इस गंभीर मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो कोई भी दुर्घटना प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का सीधा परिणाम होगी। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन, श्रम विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और औपचारिकताओं का सिलसिला ही शुरू होगा।
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    एटा में उत्तर मध्य रेलवे के बरहन-एटा रेलखंड पर गेट संख्या 22-सी के निकट निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्थिति निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मौके पर कार्यरत मजदूरों को बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी जूते, बिना दस्ताने और बिना किसी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के अत्यंत जोखिम भरे कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर गहरी खुदाई, भारी मशीनरी, लोहे की सरिया और मिट्टी के ऊंचे ढेरों जैसी खतरनाक परिस्थितियों के बीच श्रमिकों से लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन के प्रति गंभीर उपेक्षा का उदाहरण माना जा रहा है। निर्माण क्षेत्र में लागू विभिन्न श्रम एवं सुरक्षा नियमों के तहत ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे प्रत्येक श्रमिक को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराएं, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है, जिससे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन परिस्थितियों में कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित ठेकेदार, साइट इंजीनियर, सुपरवाइजर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी के कारण गंभीर दुर्घटना होने की स्थिति में संबंधित कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी श्रमिक की जान जाने के बाद ही जागेगा, क्योंकि निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरणों का अभाव, निगरानी की कमी और अधिकारियों की कथित उदासीनता यह संकेत दे रही है कि नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं।

श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तत्काल जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, जब तक सभी श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक कार्य को रोकने पर भी विचार करने की बात कही गई है। जनता का मानना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य लोगों की सुविधा और सुरक्षा है, न कि मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डालकर काम पूरा करना। यदि समय रहते इस गंभीर मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो कोई भी दुर्घटना प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का सीधा परिणाम होगी। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन, श्रम विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और औपचारिकताओं का सिलसिला ही शुरू होगा।
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    Local News Reporter जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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