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शाहाबाद क्षेत्र में में अतिक्रमण पर चला NHAI का पीला पंजा नेशनल हाईवे-27 के दायरे में हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ NHAI ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के अनुसार हाईवे के 22 मीटर के दायरे में किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए पीला पंजा चलाया गया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही अतिक्रमणकारियों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। NHAI की टीम ने हाईवे सीमा में आने वाले अतिक्रमण को हटाया। कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा रही। बताया जा रहा है कि हाईवे के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।
हर्षित भार्गव
शाहाबाद क्षेत्र में में अतिक्रमण पर चला NHAI का पीला पंजा नेशनल हाईवे-27 के दायरे में हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ NHAI ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के अनुसार हाईवे के 22 मीटर के दायरे में किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए पीला पंजा चलाया गया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही अतिक्रमणकारियों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। NHAI की टीम ने हाईवे सीमा में आने वाले अतिक्रमण को हटाया। कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा रही। बताया जा रहा है कि हाईवे के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।
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- ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में पहुंचकर राशन न मिलने की शिकायत दर्ज कराई शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र के दीघोद गाँव के ग्रामीण आज कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में पहुँचे और कलेक्टर से चार माह से राशन ना मिलने की शिकायत करते हुए उचित मूल्य की दुकान की जांच करवाकर चार माह का राशन दिलाने की मांग की ग्रामीणों ने शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन मुनेश जाटव और दिलीप जाटव पर चार माह से राशन वितरित न करने का आरोप लगाते हुए बताया कि पूर्व में शिकायत के बाद तहसीलदार और खाद्य विभाग के अधिकारियों ने गांव में जांच की थी। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए और दुकान के महीने में केवल तीन दिन खुलने की रिपोर्ट तैयार कर दी गई। उन्होंने अपनी उपस्थिति में दोबारा जांच कराने और चार माह का बकाया राशन दिलाने की मांग की।2
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- ग्राम सिरसौद पंचायत सिरसौद जिला शिवपुरी शिवपुरी जिले के पोहरी तहसील क्षेत्र के सिरसौद गांव में 3-4 माह पूर्व निर्माण हुई सड़क, पहली ही बारिश में बही.. सरपंच संचिव ने लगाया सरकार को लाखों का चूना...!!.1
- गुना में शिक्षा व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर! स्कूल मे ताला हाथों मे किताबें दोपहर 12 बजे तक स्कूल पर लटका रहा ताला, बच्चे बाहर बैठकर करते रहे पढ़ाई सिरसी पंचायत के बेरखेड़ी प्राथमिक शासकीय विद्यालय का वीडियो वायरल, शिक्षक और शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। सिरसी पंचायत अंतर्गत बेरखेड़ी प्राथमिक शासकीय विद्यालय का एक वीडियो मंगलवार 11 अगस्त को सामने आया है, जिसमें स्कूल के समय में भी विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका दिखाई दे रहा है और बच्चे शिक्षकों के इंतजार में स्कूल के बाहर बैठे नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो के अनुसार, दोपहर 12 बजे के बाद तक स्कूल का ताला नहीं खुला था। बच्चे काफी देर तक शिक्षकों के आने का इंतजार करते रहे। जब इंतजार लंबा हो गया तो बच्चों ने हार मानने के बजाय स्कूल के बाहर ही बैठकर खुद पढ़ाई शुरू कर दी। 📚 शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों ने खुद संभाली पढ़ाई वीडियो में मासूम बच्चे स्कूल के बाहर जमीन पर बैठकर पढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जिस उम्र में बच्चों को कक्षा में शिक्षक से पढ़ाई मिलनी चाहिए, उसी उम्र में वे बंद स्कूल के बाहर अपनी पढ़ाई खुद करने को मजबूर नजर आए। यह तस्वीर केवल एक स्कूल की अव्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। 🥛 बच्चों के हाथ में दूध का डिब्बा, संचालक भी लौटे मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई। बताया जा रहा है कि इसी दौरान समूह के संचालक ने छात्राओं के हाथों में दूध का डिब्बा थमा दिया और कथित तौर पर यह कहते हुए चले गए कि घर जाकर खीर बना लेना। अगर यह बात सही है तो सवाल यह है कि स्कूल में बच्चों के लिए निर्धारित मध्याह्न भोजन/पोषण व्यवस्था आखिर किस तरह संचालित हो रही है? क्या बच्चों को विद्यालय में भोजन और दूध दिया जाना था या फिर उन्हें सामग्री देकर घर भेजना ही व्यवस्था का हिस्सा बना दिया गया है? 📱 ई-अटेंडेंस से लेकर मॉनिटरिंग तक कई सवाल इस घटना ने शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस व्यवस्था, स्कूल मॉनिटरिंग, शिक्षकों की उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल खुलने के निर्धारित समय पर शिक्षक मौजूद थे या नहीं? ई-अटेंडेंस में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज हुई या नहीं? स्कूल की नियमित मॉनिटरिंग कौन करता है? जिम्मेदार अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण कब किया था? बच्चों को स्कूल के बाहर क्यों बैठना पड़ा? दूध/मध्याह्न भोजन की व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं? पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होगी या मामला केवल जांच तक सीमित रह जाएगा? ⚠️ सबसे बड़ा सवाल—बच्चों के भविष्य का क्या? सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे शासन की शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर होते हैं। यदि स्कूल के समय में ही विद्यालय बंद मिले और बच्चे शिक्षक का इंतजार करते हुए बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है। बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए, बंद स्कूल का ताला नहीं। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के सामने आने के बाद गुना जिला शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और बेरखेड़ी प्राथमिक शासकीय विद्यालय में स्कूल समय पर ताला लटकने की वास्तविक वजह क्या थी। नोट: वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।1
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