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एरण महोत्सव में गूंजी बुंदेली बोली, बीना की बेटियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुति से जीता मंन

9 hrs ago
user_Mp news 24live
Mp news 24live
Journalist बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
9 hrs ago

एरण महोत्सव में गूंजी बुंदेली बोली, बीना की बेटियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुति से जीता मंन

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • एरण महोत्सव में गूंजी बुंदेली बोली, बीना की बेटियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुति से जीता मंन
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    एरण महोत्सव में गूंजी बुंदेली बोली,
बीना की बेटियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुति से जीता मंन
    user_Mp news 24live
    Mp news 24live
    Journalist बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • #lalitpur #chadrau
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    #lalitpur
#chadrau
    user_Patkar 🤳
    Patkar 🤳
    Lalitpur, Uttar Pradesh•
    3 hrs ago
  • ललितपुर जिले के गंगोरा गाओ में दो मोटरसाइकिल सामने से टकराई 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। कल शाम तकरीबन 6:30 बजे गंगोरा में दो मोटरसाइकिल सामने से टकरा गई जिसमें तीन लोग घायल हो गए। मोटरसाइकिल चालक छोटू जो मडवारी के रहने वाले इनको थोड़ी गंभीरचोट आई हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस बुलाकर घायलो को तत्काल जिला अस्पताल ललितपुर पहुंचाया। जिससे उन्हें तुरंत उपचार मिल गया।
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    ललितपुर जिले के गंगोरा गाओ में दो मोटरसाइकिल सामने से टकराई 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। 
कल शाम तकरीबन 6:30 बजे गंगोरा में दो मोटरसाइकिल सामने से टकरा गई जिसमें तीन लोग घायल हो गए। मोटरसाइकिल चालक छोटू जो मडवारी के रहने वाले इनको थोड़ी गंभीरचोट आई हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस बुलाकर घायलो को तत्काल जिला अस्पताल ललितपुर पहुंचाया। जिससे उन्हें तुरंत उपचार मिल गया।
    user_Bharat Yadav
    Bharat Yadav
    Lalitpur, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🌹🙏💯💯🙏🎈🎈🎈
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    🇮🇳🇮🇳🇮🇳🌹🙏💯💯🙏🎈🎈🎈
    user_Moti ray
    Moti ray
    Salesperson Sagar Nagar, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • आचार्य श्री सुनील सागर महाराज : युग-प्रवर्तक जैन चेतना का प्रकाशस्तंभ आज के भौतिकवादी और विचलित समय में जहाँ आध्यात्मिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं, वहीं आचार्य श्री सुनील सागर महाराज जैसे संत मानव समाज को आत्मबोध, संयम और सांस्कृतिक चेतना की ओर पुनः लौटने का मार्ग दिखा रहे हैं। वे केवल जैन समाज के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा ग्राम में 7 अक्टूबर 1977 को जन्मे आचार्य श्री ने मात्र 20 वर्ष की आयु में 1997 में आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षा लेकर संसारिक मोह से ऊपर उठकर त्याग, तप और साधना का व्रत ग्रहण किया। दस वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात 2007 में औरंगाबाद में उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया। यह केवल पद नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व की एक नई जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने असाधारण निष्ठा से निभाया। आचार्य श्री की सबसे बड़ी विशेषता है — प्राकृत भाषा में प्रवचन देने की विलक्षण क्षमता। आज जब प्राचीन भाषाएँ लुप्तप्राय होती जा रही हैं, आचार्य श्री ने प्राकृत को जन-जन की भाषा बना दिया। उनके प्रवचनों में शास्त्र, विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक जीवन के प्रश्नों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत "3T – टाइमिंग, ट्यूनिंग, ट्रेनिंग" आज के युवा वर्ग के लिए जीवन प्रबंधन का सशक्त सूत्र बन चुका है। वे बताते हैं कि जीवन में सफलता केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि सही समय, सही सोच और सही प्रशिक्षण से प्राप्त होती है। यह विचारधारा उन्हें पारंपरिक संत से आगे ले जाकर आधुनिक युग का मार्गदर्शक बनाती है। आचार्य श्री न केवल आध्यात्मिक उन्नयन पर बल देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास के संरक्षण को भी राष्ट्रधर्म मानते हैं। उनके प्रवचन भारत की आत्मा को जागृत करते हैं और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। उनकी विराट साधना यात्रा का प्रभाव उनके संघ में भी दृष्टिगोचर होता है, जहाँ आज 146 साध्वियाँ और 85 साधु तप, संयम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके विचारों की जीवंत धारा है। उनकी अद्वितीय उपलब्धियों को Royal Sunsex International Book of Record में भी दर्ज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का है। निष्कर्षतः, आचार्य श्री सुनील सागर महाराज हमारे समय के उन दुर्लभ संतों में हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनकर मानवता को नैतिकता, आत्मशुद्धि और शांति के पथ पर ले जा रहे हैं। वे वास्तव में जैन चेतना के युग-प्रवर्तक प्रकाशस्तंभ हैं।
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    आचार्य श्री सुनील सागर महाराज : युग-प्रवर्तक जैन चेतना का प्रकाशस्तंभ
आज के भौतिकवादी और विचलित समय में जहाँ आध्यात्मिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं, वहीं आचार्य श्री सुनील सागर महाराज जैसे संत मानव समाज को आत्मबोध, संयम और सांस्कृतिक चेतना की ओर पुनः लौटने का मार्ग दिखा रहे हैं। वे केवल जैन समाज के ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा ग्राम में 7 अक्टूबर 1977 को जन्मे आचार्य श्री ने मात्र 20 वर्ष की आयु में 1997 में आचार्य सन्मति सागर महाराज से दीक्षा लेकर संसारिक मोह से ऊपर उठकर त्याग, तप और साधना का व्रत ग्रहण किया। दस वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात 2007 में औरंगाबाद में उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया। यह केवल पद नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व की एक नई जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने असाधारण निष्ठा से निभाया।
आचार्य श्री की सबसे बड़ी विशेषता है — प्राकृत भाषा में प्रवचन देने की विलक्षण क्षमता। आज जब प्राचीन भाषाएँ लुप्तप्राय होती जा रही हैं, आचार्य श्री ने प्राकृत को जन-जन की भाषा बना दिया। उनके प्रवचनों में शास्त्र, विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक जीवन के प्रश्नों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
उनका प्रसिद्ध सिद्धांत "3T – टाइमिंग, ट्यूनिंग, ट्रेनिंग" आज के युवा वर्ग के लिए जीवन प्रबंधन का सशक्त सूत्र बन चुका है। वे बताते हैं कि जीवन में सफलता केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि सही समय, सही सोच और सही प्रशिक्षण से प्राप्त होती है। यह विचारधारा उन्हें पारंपरिक संत से आगे ले जाकर आधुनिक युग का मार्गदर्शक बनाती है।
आचार्य श्री न केवल आध्यात्मिक उन्नयन पर बल देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास के संरक्षण को भी राष्ट्रधर्म मानते हैं। उनके प्रवचन भारत की आत्मा को जागृत करते हैं और समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
उनकी विराट साधना यात्रा का प्रभाव उनके संघ में भी दृष्टिगोचर होता है, जहाँ आज 146 साध्वियाँ और 85 साधु तप, संयम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर हैं। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके विचारों की जीवंत धारा है।
उनकी अद्वितीय उपलब्धियों को Royal Sunsex International Book of Record में भी दर्ज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का है।
निष्कर्षतः, आचार्य श्री सुनील सागर महाराज हमारे समय के उन दुर्लभ संतों में हैं जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनकर मानवता को नैतिकता, आत्मशुद्धि और शांति के पथ पर ले जा रहे हैं। वे वास्तव में जैन चेतना के युग-प्रवर्तक प्रकाशस्तंभ हैं।
    user_नीरज वैद्यराज पत्रकार
    नीरज वैद्यराज पत्रकार
    Journalist Sagar, Madhya Pradesh•
    12 hrs ago
  • 7898609221
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    7898609221
    user_Ranu rai waterrprofing
    Ranu rai waterrprofing
    Teacher सागर नगर, सागर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बीना से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐरण क्षेत्र न सिर्फ स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह स्थल पांचवीं और छठवीं शताब्दी के गुप्तकाल की अमूल्य धरोहरों को अपने भीतर समेटे हुए है, जो भारत के स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाता है।
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    बीना से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐरण क्षेत्र न सिर्फ स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह स्थल पांचवीं और छठवीं शताब्दी के गुप्तकाल की अमूल्य धरोहरों को अपने भीतर समेटे हुए है, जो भारत के स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाता है।
    user_RAJENDRA GOUTAM JOURNALIST
    RAJENDRA GOUTAM JOURNALIST
    Journalist बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹
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    जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹
    user_Moti ray
    Moti ray
    Salesperson Sagar Nagar, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
  • सागर पुलिस की संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता से बची बुजुर्ग महिला की जान BY नीरज वैद्यराज पत्रकार 07582888100 सीसीटीवी विश्लेषण और अथक प्रयासों से तीन दिन बाद मिला मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग मानवीय पुलिसिंग, संवेदनशीलता एवं आधुनिक तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग का एक और सराहनीय उदाहरण सागर पुलिस द्वारा प्रस्तुत किया गया। दिनांक 11 जनवरी 2026 की दोपहर को शालनी जैन निवासी गौरझामर अत्यंत व्यथित अवस्था में पुलिस कंट्रोल रूम सागर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह अपनी गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग माता जी का इलाज कराने भाग्योदय अस्पताल गई थीं। उपचार उपरांत लौटते समय भाग्योदय अस्पताल के सामने से ऑटो में बैठकर कटरा तक आईं, जहां उतरते समय ऑटो में उनकी माता जी का एक बैग छूट गया। बैग में यद्यपि कपड़े अधिक कीमती नहीं थे, किंतु उसमें माता जी के सभी महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज एवं रिपोर्ट रखे थे, जिनके अभाव में डॉक्टर इलाज करने से मना कर रहे थे। माता जी की हालत गंभीर होने के कारण यह बैग मिलना अत्यंत आवश्यक था। मामले की गंभीरता को देखते हुए संपूर्ण जानकारी तत्काल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा को दी गई। सिन्हा द्वारा मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान को तत्काल बैग का पता लगाने हेतु निर्देशित किया गया। निर्देशन के पश्चात सीसीटीवी कंट्रोल रूम टीम द्वारा लगातार तीन दिनों तक अथक प्रयास किए गए। उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक आशीष दुबे, महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक ट्रैफिक थाना एवं आरक्षक राकेश सुलखिया को सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से ऑटो की पहचान में लगाया गया। लगातार फुटेज खंगालने के बाद कटरा क्षेत्र में ऑटो से उतरते हुए जैन मैडम एवं उनकी माता जी को चिन्हित किया गया। ऑटो की आंशिक नंबर प्लेट के आधार पर संभावित कई रजिस्ट्रेशन नंबरों की पहचान कर उनसे जुड़े दर्जनों मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया। अत्यंत कठिन प्रयासों के पश्चात अंततः वास्तविक ऑटो चालक का पता लगाया गया। पुलिस टीम द्वारा ऑटो चालक के घर जाकर संपर्क किया गया, जहां से मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग सुरक्षित रूप से बरामद कर कंट्रोल रूम सागर लाया गया। बैग प्राप्त होने पर जैन मैडम स्वयं पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं, जहां उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा, सागर पुलिस एवं कंट्रोल रूम की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अपनी माता जी के इलाज हेतु आवश्यक मेडिकल दस्तावेज लेकर रवाना हुईं। यह सराहनीय कार्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान, प्रधान आरक्षक आशीष दुबे, महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक थाना यातायात, आरक्षक राकेश सुलखिया द्वारा किया गया। यह घटना सागर पुलिस की संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता, तत्परता एवं मानवीय सोच का जीवंत प्रमाण है, जिससे आम नागरिकों का पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
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    सागर पुलिस की संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता से बची बुजुर्ग महिला की जान
BY नीरज वैद्यराज पत्रकार 
07582888100
सीसीटीवी विश्लेषण और अथक प्रयासों से तीन दिन बाद मिला मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग
मानवीय पुलिसिंग, संवेदनशीलता एवं आधुनिक तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग का एक और सराहनीय उदाहरण सागर पुलिस द्वारा प्रस्तुत किया गया।
दिनांक 11 जनवरी 2026 की दोपहर को शालनी जैन  निवासी गौरझामर अत्यंत व्यथित अवस्था में पुलिस कंट्रोल रूम सागर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह अपनी गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग माता जी का इलाज कराने भाग्योदय अस्पताल गई थीं। उपचार उपरांत लौटते समय भाग्योदय अस्पताल के सामने से ऑटो में बैठकर कटरा तक आईं, जहां उतरते समय ऑटो में उनकी माता जी का एक बैग छूट गया।
बैग में यद्यपि कपड़े अधिक कीमती नहीं थे, किंतु उसमें माता जी के सभी महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज एवं रिपोर्ट रखे थे, जिनके अभाव में डॉक्टर इलाज करने से मना कर रहे थे। माता जी की हालत गंभीर होने के कारण यह बैग मिलना अत्यंत आवश्यक था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संपूर्ण जानकारी तत्काल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा को दी गई। सिन्हा द्वारा मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान को तत्काल बैग का पता लगाने हेतु निर्देशित किया गया।
निर्देशन के पश्चात सीसीटीवी कंट्रोल रूम टीम द्वारा लगातार तीन दिनों तक अथक प्रयास किए गए। उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक आशीष दुबे, महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक ट्रैफिक थाना  एवं आरक्षक राकेश सुलखिया को सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से ऑटो की पहचान में लगाया गया।
लगातार फुटेज खंगालने के बाद कटरा क्षेत्र में ऑटो से उतरते हुए जैन मैडम एवं उनकी माता जी को चिन्हित किया गया। ऑटो की आंशिक नंबर प्लेट के आधार पर संभावित कई रजिस्ट्रेशन नंबरों की पहचान कर उनसे जुड़े दर्जनों मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया। अत्यंत कठिन प्रयासों के पश्चात अंततः वास्तविक ऑटो चालक का पता लगाया गया।
पुलिस टीम द्वारा ऑटो चालक के घर जाकर संपर्क किया गया, जहां से मेडिकल दस्तावेजों से भरा बैग सुरक्षित रूप से बरामद कर कंट्रोल रूम सागर लाया गया।
बैग प्राप्त होने पर जैन मैडम स्वयं पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं, जहां उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा, सागर पुलिस एवं कंट्रोल रूम की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अपनी माता जी के इलाज हेतु आवश्यक मेडिकल दस्तावेज लेकर रवाना हुईं।
यह सराहनीय कार्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सागर लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में
उप निरीक्षक आर.के.एस. चौहान,
प्रधान आरक्षक आशीष दुबे,
महिला प्रधान आरक्षक रेखा रजक थाना यातायात,
आरक्षक राकेश सुलखिया
द्वारा किया गया।
यह घटना सागर पुलिस की संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता, तत्परता एवं मानवीय सोच का जीवंत प्रमाण है, जिससे आम नागरिकों का पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
    user_नीरज वैद्यराज पत्रकार
    नीरज वैद्यराज पत्रकार
    Journalist Sagar, Madhya Pradesh•
    13 hrs ago
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