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जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लंबे समय तक भोजन न करने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन बंद होने के शुरुआती 12 से 24 घंटों के भीतर शरीर ऊर्जा के लिए सबसे पहले रक्त में मौजूद ग्लूकोज और लिवर में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे व्यक्ति को तेज भूख महसूस हो सकती है। उपवास के 24 से 48 घंटों के भीतर शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर फैट तेजी से टूटकर कीटोन बनाता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और सांस या मुंह से हल्की अलग गंध आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, लंबे उपवास में शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है, जिसमें शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तोड़कर उनका पुनर्चक्रण करता है, हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इंसानों में इसके सक्रिय होने की परिस्थितियों पर अध्ययन कर रहे हैं। यदि भोजन लंबे समय तक नहीं मिलता, तो शरीर केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के प्रोटीन का भी उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और गंभीर मामलों में अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी मिलने की स्थिति में एक इंसान अपनी उम्र, वजन, शरीर में वसा की मात्रा और स्वास्थ्य के आधार पर लगभग 30 से 60 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि पानी के बिना शरीर केवल 3 से 7 दिनों तक ही सामान्य रूप से कार्य कर पाता है। चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी लंबा उपवास नहीं करना चाहिए।

1 hr ago
user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
BaरKaट्ठा Ki आwaज
Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
1 hr ago

जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लंबे समय तक भोजन न करने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन बंद होने के शुरुआती 12 से 24 घंटों के भीतर शरीर ऊर्जा के लिए सबसे पहले रक्त में मौजूद ग्लूकोज और लिवर में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे व्यक्ति को तेज भूख महसूस हो सकती है। उपवास के 24 से 48 घंटों के भीतर शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर फैट तेजी से टूटकर कीटोन बनाता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और सांस या मुंह से हल्की अलग गंध आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, लंबे उपवास में शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है, जिसमें शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तोड़कर उनका पुनर्चक्रण करता है, हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इंसानों में इसके सक्रिय होने की परिस्थितियों पर अध्ययन कर रहे हैं। यदि भोजन लंबे समय तक नहीं मिलता, तो शरीर केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के प्रोटीन का भी उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और गंभीर मामलों में अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी मिलने की स्थिति में एक इंसान अपनी उम्र, वजन, शरीर में वसा की मात्रा और स्वास्थ्य के आधार पर लगभग 30 से 60 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि पानी के बिना शरीर केवल 3 से 7 दिनों तक ही सामान्य रूप से कार्य कर पाता है। चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी लंबा उपवास नहीं करना चाहिए।

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  • जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लंबे समय तक भोजन न करने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन बंद होने के शुरुआती 12 से 24 घंटों के भीतर शरीर ऊर्जा के लिए सबसे पहले रक्त में मौजूद ग्लूकोज और लिवर में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे व्यक्ति को तेज भूख महसूस हो सकती है। उपवास के 24 से 48 घंटों के भीतर शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर फैट तेजी से टूटकर कीटोन बनाता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और सांस या मुंह से हल्की अलग गंध आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, लंबे उपवास में शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है, जिसमें शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तोड़कर उनका पुनर्चक्रण करता है, हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इंसानों में इसके सक्रिय होने की परिस्थितियों पर अध्ययन कर रहे हैं। यदि भोजन लंबे समय तक नहीं मिलता, तो शरीर केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के प्रोटीन का भी उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और गंभीर मामलों में अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी मिलने की स्थिति में एक इंसान अपनी उम्र, वजन, शरीर में वसा की मात्रा और स्वास्थ्य के आधार पर लगभग 30 से 60 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि पानी के बिना शरीर केवल 3 से 7 दिनों तक ही सामान्य रूप से कार्य कर पाता है। चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी लंबा उपवास नहीं करना चाहिए।
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    जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लंबे समय तक भोजन न करने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन बंद होने के शुरुआती 12 से 24 घंटों के भीतर शरीर ऊर्जा के लिए सबसे पहले रक्त में मौजूद ग्लूकोज और लिवर में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे व्यक्ति को तेज भूख महसूस हो सकती है।

उपवास के 24 से 48 घंटों के भीतर शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर फैट तेजी से टूटकर कीटोन बनाता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और सांस या मुंह से हल्की अलग गंध आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, लंबे उपवास में शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है, जिसमें शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तोड़कर उनका पुनर्चक्रण करता है, हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इंसानों में इसके सक्रिय होने की परिस्थितियों पर अध्ययन कर रहे हैं।

यदि भोजन लंबे समय तक नहीं मिलता, तो शरीर केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के प्रोटीन का भी उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और गंभीर मामलों में अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी मिलने की स्थिति में एक इंसान अपनी उम्र, वजन, शरीर में वसा की मात्रा और स्वास्थ्य के आधार पर लगभग 30 से 60 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि पानी के बिना शरीर केवल 3 से 7 दिनों तक ही सामान्य रूप से कार्य कर पाता है। चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी लंबा उपवास नहीं करना चाहिए।
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    1 hr ago
  • तिरला का एक बेबस परिवार अपने मृत बेटे के अंतिम दर्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जिसकी दुबई में मौत हो गई है। वह बेटा वहां कमाने गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी उसका पार्थिव शरीर वतन वापस नहीं आ पाया है। अपने बेटे के शव को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार बेहद लाचार स्थिति में है। इस दुख की घड़ी में सांत्वना देने आ रहे नेताओं और विधायकों का रवैया भी बेहद निराशाजनक है। वे पीड़ित परिवार के घर आकर सिर्फ एक ही आश्वासन दे रहे हैं कि "प्रयास कर रहे हैं, आ जाएगा, आ जाएगा।" लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हफ्तों का समय बीत जाने के बावजूद शव को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और नेताओं के पास सिर्फ 'कोरे आश्वासन' ही बचे हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति नेताओं और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है कि क्या विदेशी जमीन पर दम तोड़ देने वाले हमारे भाइयों के शवों की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या नेताओं के वादे सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहते हैं? अब तिरला के इस लाचार परिवार की आवाज बनकर सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि प्रशासन जागने पर मजबूर हो सके।
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    तिरला का एक बेबस परिवार अपने मृत बेटे के अंतिम दर्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जिसकी दुबई में मौत हो गई है। वह बेटा वहां कमाने गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी उसका पार्थिव शरीर वतन वापस नहीं आ पाया है। अपने बेटे के शव को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार बेहद लाचार स्थिति में है।

इस दुख की घड़ी में सांत्वना देने आ रहे नेताओं और विधायकों का रवैया भी बेहद निराशाजनक है। वे पीड़ित परिवार के घर आकर सिर्फ एक ही आश्वासन दे रहे हैं कि "प्रयास कर रहे हैं, आ जाएगा, आ जाएगा।" लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हफ्तों का समय बीत जाने के बावजूद शव को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और नेताओं के पास सिर्फ 'कोरे आश्वासन' ही बचे हैं।

यह बेहद गंभीर स्थिति नेताओं और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है कि क्या विदेशी जमीन पर दम तोड़ देने वाले हमारे भाइयों के शवों की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या नेताओं के वादे सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहते हैं? अब तिरला के इस लाचार परिवार की आवाज बनकर सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि प्रशासन जागने पर मजबूर हो सके।
    user_Sach Tak Jharkhand News
    Sach Tak Jharkhand News
    Local News Reporter बिशुनगढ़, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • जंतर मंतर पर एक मां की बेटी छात्र (Student) के लिए पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल (hunger strike) पर बैठी हुई है। इस बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए सभी लोगों से इस बहन की जान बचाने और मदद के लिए आगे आने का भावुक अनुरोध किया जा रहा है।
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    जंतर मंतर पर एक मां की बेटी छात्र (Student) के लिए पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल (hunger strike) पर बैठी हुई है। इस बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए सभी लोगों से इस बहन की जान बचाने और मदद के लिए आगे आने का भावुक अनुरोध किया जा रहा है।
    user_SUDHIR KUMAR SAW
    SUDHIR KUMAR SAW
    Mandi Agent मरकाचो, कोडरमा, झारखंड•
    13 hrs ago
  • आज सभी दर्शकों को उज्जैन के महाकालेश्वर महाकाल ज्योतिर्लिंग के प्रातःकालीन दर्शन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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    आज सभी दर्शकों को उज्जैन के महाकालेश्वर महाकाल ज्योतिर्लिंग के प्रातःकालीन दर्शन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
    user_चितरंजन प्रसाद गुप्ता आर टीआई सक्रिय कार्यकर्ता हजारीबाग
    चितरंजन प्रसाद गुप्ता आर टीआई सक्रिय कार्यकर्ता हजारीबाग
    Voice of people हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    44 min ago
  • कोडरमा के झुमरीतिलैया में जेजे कॉलेज को बचाने के लिए आगामी 19 जुलाई को एक महाआमसभा का आयोजन किया जाएगा।
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    कोडरमा के झुमरीतिलैया में जेजे कॉलेज को बचाने के लिए आगामी 19 जुलाई को एक महाआमसभा का आयोजन किया जाएगा।
    user_कौशल कुमार पाण्डेय
    कौशल कुमार पाण्डेय
    Media company कोडरमा, कोडरमा, झारखंड•
    1 hr ago
  • हजारीबाग लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल गुरुवार को बरही विधानसभा के चौपारण स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर, बैजनाथ नगर सियरकोनी में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद, सांसद ने श्रद्धालुओं के साथ महाप्रभु के रथ की रस्सी खींची और कई किलोमीटर तक पदयात्रा करते हुए गढ़काली स्थित मौसीबाड़ी पहुंचे। मौसीबाड़ी पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच लंगर का प्रसाद वितरित किया और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण किया। रथयात्रा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि चौपारण की रथयात्रा अब ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और आयोजकों को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए भगवान जगन्नाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
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    हजारीबाग लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल गुरुवार को बरही विधानसभा के चौपारण स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर, बैजनाथ नगर सियरकोनी में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद, सांसद ने श्रद्धालुओं के साथ महाप्रभु के रथ की रस्सी खींची और कई किलोमीटर तक पदयात्रा करते हुए गढ़काली स्थित मौसीबाड़ी पहुंचे।

मौसीबाड़ी पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच लंगर का प्रसाद वितरित किया और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण किया। रथयात्रा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि चौपारण की रथयात्रा अब ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और आयोजकों को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए भगवान जगन्नाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
    user_Nitu kumari
    Nitu kumari
    After-school programme हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    4 hrs ago
  • आइस स्तूप के कारण सुर्खियों में आए सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं। सोनम वांगचुक, जिन्होंने पूर्व में आइस स्तूप से काफी सुर्खियां बटोरी थीं, अब दिल्ली के जंतर-मंतर में अनशन कर रहे हैं।
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    आइस स्तूप के कारण सुर्खियों में आए सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं। सोनम वांगचुक, जिन्होंने पूर्व में आइस स्तूप से काफी सुर्खियां बटोरी थीं, अब दिल्ली के जंतर-मंतर में अनशन कर रहे हैं।
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    2 hrs ago
  • झारखंड के हजारीबाग में दारू थाना के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। यहाँ एक थार गाड़ी ने टक्कर मार दी, जिसके बाद गाड़ी पलट गई।
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    झारखंड के हजारीबाग में दारू थाना के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। यहाँ एक थार गाड़ी ने टक्कर मार दी, जिसके बाद गाड़ी पलट गई।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    56 min ago
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