तिरला का एक बेबस परिवार अपने मृत बेटे के अंतिम दर्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जिसकी दुबई में मौत हो गई है। वह बेटा वहां कमाने गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी उसका पार्थिव शरीर वतन वापस नहीं आ पाया है। अपने बेटे के शव को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार बेहद लाचार स्थिति में है। इस दुख की घड़ी में सांत्वना देने आ रहे नेताओं और विधायकों का रवैया भी बेहद निराशाजनक है। वे पीड़ित परिवार के घर आकर सिर्फ एक ही आश्वासन दे रहे हैं कि "प्रयास कर रहे हैं, आ जाएगा, आ जाएगा।" लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हफ्तों का समय बीत जाने के बावजूद शव को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और नेताओं के पास सिर्फ 'कोरे आश्वासन' ही बचे हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति नेताओं और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है कि क्या विदेशी जमीन पर दम तोड़ देने वाले हमारे भाइयों के शवों की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या नेताओं के वादे सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहते हैं? अब तिरला के इस लाचार परिवार की आवाज बनकर सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि प्रशासन जागने पर मजबूर हो सके।
तिरला का एक बेबस परिवार अपने मृत बेटे के अंतिम दर्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जिसकी दुबई में मौत हो गई है। वह बेटा वहां कमाने गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी उसका पार्थिव शरीर वतन वापस नहीं आ पाया है। अपने बेटे के शव को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार बेहद लाचार स्थिति में है। इस दुख की घड़ी में सांत्वना देने आ रहे नेताओं और विधायकों का रवैया भी बेहद निराशाजनक है। वे पीड़ित परिवार के घर आकर सिर्फ एक ही आश्वासन दे रहे हैं कि "प्रयास कर रहे हैं, आ जाएगा, आ जाएगा।" लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हफ्तों का समय बीत जाने के बावजूद शव को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और नेताओं के पास सिर्फ 'कोरे आश्वासन' ही बचे हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति नेताओं और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है कि क्या विदेशी जमीन पर दम तोड़ देने वाले हमारे भाइयों के शवों की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या नेताओं के वादे सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहते हैं? अब तिरला के इस लाचार परिवार की आवाज बनकर सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि प्रशासन जागने पर मजबूर हो सके।
- तिरला का एक बेबस परिवार अपने मृत बेटे के अंतिम दर्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जिसकी दुबई में मौत हो गई है। वह बेटा वहां कमाने गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी उसका पार्थिव शरीर वतन वापस नहीं आ पाया है। अपने बेटे के शव को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार बेहद लाचार स्थिति में है। इस दुख की घड़ी में सांत्वना देने आ रहे नेताओं और विधायकों का रवैया भी बेहद निराशाजनक है। वे पीड़ित परिवार के घर आकर सिर्फ एक ही आश्वासन दे रहे हैं कि "प्रयास कर रहे हैं, आ जाएगा, आ जाएगा।" लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हफ्तों का समय बीत जाने के बावजूद शव को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और नेताओं के पास सिर्फ 'कोरे आश्वासन' ही बचे हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति नेताओं और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है कि क्या विदेशी जमीन पर दम तोड़ देने वाले हमारे भाइयों के शवों की कोई कीमत नहीं रह गई है? क्या नेताओं के वादे सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहते हैं? अब तिरला के इस लाचार परिवार की आवाज बनकर सोई हुई सरकार और प्रशासन को जगाने की पुरजोर मांग की जा रही है ताकि प्रशासन जागने पर मजबूर हो सके।1
- हजारीबाग के सिलवार स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच भक्तों ने महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान हजारीबाग के एसपी अमन कुमार ने भी मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और जिले की सुख-समृद्धि की कामना की। इधर भव्य रथयात्रा को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज महाप्रभु अपनी मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। रथयात्रा के सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं यातायात के व्यापक इंतजाम किए हैं।1
- जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लंबे समय तक भोजन न करने से मानव शरीर पर क्या असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन बंद होने के शुरुआती 12 से 24 घंटों के भीतर शरीर ऊर्जा के लिए सबसे पहले रक्त में मौजूद ग्लूकोज और लिवर में जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा वसा को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे व्यक्ति को तेज भूख महसूस हो सकती है। उपवास के 24 से 48 घंटों के भीतर शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर फैट तेजी से टूटकर कीटोन बनाता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और सांस या मुंह से हल्की अलग गंध आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, लंबे उपवास में शरीर में ऑटोफैजी नामक प्रक्रिया भी सक्रिय हो सकती है, जिसमें शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तोड़कर उनका पुनर्चक्रण करता है, हालांकि वैज्ञानिक अभी भी इंसानों में इसके सक्रिय होने की परिस्थितियों पर अध्ययन कर रहे हैं। यदि भोजन लंबे समय तक नहीं मिलता, तो शरीर केवल वसा ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के प्रोटीन का भी उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और गंभीर मामलों में अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी मिलने की स्थिति में एक इंसान अपनी उम्र, वजन, शरीर में वसा की मात्रा और स्वास्थ्य के आधार पर लगभग 30 से 60 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि पानी के बिना शरीर केवल 3 से 7 दिनों तक ही सामान्य रूप से कार्य कर पाता है। चक्कर, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी लंबा उपवास नहीं करना चाहिए।1
- गिरिडीह के डुमरी प्रखंड के लक्ष्मणटुंडा स्थित श्री सीताराम ठाकुरबाड़ी से रविवार को भगवान श्री जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। देश की आज़ादी से भी पहले, यानी सन 1913 से चली आ रही यह पावन परंपरा आज भी पूरी जीवंतता के साथ कायम है। इस वर्ष भी 113 साल पुरानी इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देने के लिए लक्ष्मणटुंडा से तेलियाटुंडा गांव की ओर प्रस्थान किए। ढोल-नगाड़े, शंख और जयकारों की गूंज के बीच निकली इस शोभायात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में विशेष उत्साह देखा गया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पूजा-अर्चना के साथ भगवान का भव्य स्वागत किया और क्षेत्र में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की। इस धार्मिक आयोजन में भाजपा नेता सुरेंद्र कुमार, ग्राम कल्याण समिति के अध्यक्ष गिरजानंद प्रसाद, गोबर्धन पंडित, मुरली ठाकुर, प्रमोद रविदास, लालजी प्रसाद, ढूलेश्वर साव, सुकर साव, राजू स्वर्णकार, प्रयाग प्रसाद, किशुन महतो, पोखी साव, मंगर सिंह, राजू साव, महादेव पंडित, बैजनाथ महतो और डोमन महतो सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, रथ यात्रा पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। आयोजन समिति ने इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाने में अपना बहुमूल्य सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।3
- आज सभी दर्शकों को उज्जैन के महाकालेश्वर महाकाल ज्योतिर्लिंग के प्रातःकालीन दर्शन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।1
- हजारीबाग लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल गुरुवार को बरही विधानसभा के चौपारण स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर, बैजनाथ नगर सियरकोनी में आयोजित भव्य रथयात्रा महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद, सांसद ने श्रद्धालुओं के साथ महाप्रभु के रथ की रस्सी खींची और कई किलोमीटर तक पदयात्रा करते हुए गढ़काली स्थित मौसीबाड़ी पहुंचे। मौसीबाड़ी पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के बीच लंगर का प्रसाद वितरित किया और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण किया। रथयात्रा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि चौपारण की रथयात्रा अब ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और आयोजकों को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए भगवान जगन्नाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।4
- आइस स्तूप के कारण सुर्खियों में आए सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं। सोनम वांगचुक, जिन्होंने पूर्व में आइस स्तूप से काफी सुर्खियां बटोरी थीं, अब दिल्ली के जंतर-मंतर में अनशन कर रहे हैं।1
- झारखंड के हजारीबाग में दारू थाना के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। यहाँ एक थार गाड़ी ने टक्कर मार दी, जिसके बाद गाड़ी पलट गई।1