यह तहसीलदार यदि शुक्ला जी का प्रोग्रेस है कोई भी जानकारी इनको नहीं है यह तहसीलदार रीवा यतीश शुक्ला जी का कार्य करवा रहे हैं इनसे अगर सवाल पूछा जाए कि इसमें यह रोड कितना मीटर की रोड है कोई भी जानकारी उनके पास नहीं है और कार्यवाही जोरो सोरों पर लगी हुई है आम पब्लिक के साथ इनका व्यवहार ऐसा है कि जैसे हम उनके बहुत बड़े दुश्मन हो जबकि मेरी जमीन सब पूरी पट्टे पर है नॉर्मल जानकारी मांगने पर इन्होंने जो ऐसा किया कि मतलब यह हमारे कितने बड़े दुश्मन है ऐसे ही अधिकारियों से कार्य होगा यह प्रशासन तय करें जब पब्लिक को पूरी जानकारी ही नहीं दी जाएगी तो कैसे कार्य होगा इसी तरह से इनका जबरदस्ती का कार्य होगा ठीक है सौंदर्य करण का कार्य है अच्छी बात है लेकिन कोई भी व्यक्ति अगर जानकारी मांग रहा है आप तहसीलदार हैं इनको जानकारी ही नहीं है पूरी यह बोल रहे हैं कि ठेकेदार से पूछो ठेकेदार चला गया कहां चला गया कुछ पता ही नहीं गोलमोल जवाब इनका सब कुछ है
यह तहसीलदार यदि शुक्ला जी का प्रोग्रेस है कोई भी जानकारी इनको नहीं है यह तहसीलदार रीवा यतीश शुक्ला जी का कार्य करवा रहे हैं इनसे अगर सवाल पूछा जाए कि इसमें यह रोड कितना मीटर की रोड है कोई भी जानकारी उनके पास नहीं है और कार्यवाही जोरो सोरों पर लगी हुई है आम पब्लिक के साथ इनका व्यवहार ऐसा है कि जैसे हम उनके बहुत बड़े दुश्मन हो जबकि मेरी जमीन सब पूरी पट्टे पर है नॉर्मल जानकारी मांगने पर इन्होंने जो ऐसा किया कि मतलब यह
हमारे कितने बड़े दुश्मन है ऐसे ही अधिकारियों से कार्य होगा यह प्रशासन तय करें जब पब्लिक को पूरी जानकारी ही नहीं दी जाएगी तो कैसे कार्य होगा इसी तरह से इनका जबरदस्ती का कार्य होगा ठीक है सौंदर्य करण का कार्य है अच्छी बात है लेकिन कोई भी व्यक्ति अगर जानकारी मांग रहा है आप तहसीलदार हैं इनको जानकारी ही नहीं है पूरी यह बोल रहे हैं कि ठेकेदार से पूछो ठेकेदार चला गया कहां चला गया कुछ पता ही नहीं गोलमोल जवाब इनका सब कुछ है
- इस बार फरीदाबाद के दशहरा ग्राउंड में भव्य रूप से मनाया जाएगा देश के संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस "डॉ आंबेडकर सामाजिक एकता मंच फरीदाबाद" ने होने वाले कार्यक्रम को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कार्यक्रम की रूपरेखा को साझा किया ।1
- ग्राम विकास अधिकारी का रोड पर निकला प्लाट, खुशी का ठिकाना नहीं रहा1
- ऑपरेशन प्रहार-2 में बड़ी कार्रवाई: 100 नग नशीली कफ सिरप के साथ आरोपी गिरफ्तार रीवा। अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ऑपरेशन प्रहार-2 के तहत गोविन्दगढ़ पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस महानिरीक्षक रीवा के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) आरती सिंह एवं उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) उदित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को थाना गोविन्दगढ़ अंतर्गत चौकी शिवपुरवा क्षेत्र में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सहिजना मोड़ के पास नहर किनारे घेराबंदी कर एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 100 नग अवैध नशीली कफ सिरप बरामद हुई। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी के साथ इस अवैध कारोबार में दो अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्हें भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। तीनों के विरुद्ध थाना गोविन्दगढ़ में अपराध क्रमांक 114/2026 के तहत धारा 8/21, 22, 29 एनडीपीएस एक्ट एवं 5/13 ड्रग्स कंट्रोल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार आरोपी अजय तिवारी उर्फ शिब्बू (35 वर्ष) निवासी ग्राम सहिजना नंबर 02 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अरविंद सिंह, उपनिरीक्षक निशा खूता, सहायक उपनिरीक्षक रामजियावन वर्मा, इन्द्रभान सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों और जवानों की अहम भूमिका रही।2
- मां शारदा देवी के दर्शन करने पहुंचे रीवा IG गौरव राजपूत1
- hamare Gav me3
- Post by उमेश पाठक सेमरिया रीवा1
- नई दिल्ली। आज का वैश्विक परिदृश्य कई संघर्षों और युद्धों से प्रभावित है। चाहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव हो, पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच संघर्ष हो या यूक्रेन-रूस का युद्ध, दुनिया के कई हिस्सों में अशांति और तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में विश्व शांति और आंतरिक संतुलन का संदेश देने के उद्देश्य से ‘ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स (GCML) 2026’ का आयोजन 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, आध्यात्मिक नेताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस सम्मेलन का आयोजन बुद्धा-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन द्वारा आयुष मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम में एस-व्यासा विश्वविद्यालय, पिरामिड मेडिटेशन चैनल (PMC) हिंदी, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी, पिरामिड वैली इंटरनेशनल, स्पिरिचुअल टैबलेट्स रिसर्च फाउंडेशन, BeSuperMind और ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) सहित कई संस्थान सहयोगी के रूप में जुड़े हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ध्यान को एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक माध्यम के रूप में स्थापित करना है, ताकि इसे नीति-निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कार्यस्थलों में शामिल कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके। बुद्धा-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. चंद्र पुलामरसेट्टी ने कहा कि ध्यान मन और शरीर को संतुलित करने के साथ-साथ व्यक्ति को सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। उनके अनुसार जब नेतृत्व ध्यान के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन अपनाता है, तो यह परिवर्तन समाज और विश्व शांति की दिशा में सकारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं पद्मश्री डॉ. डी. आर. कार्तिकेयन, पूर्व निदेशक सीबीआई एवं सीआरपीएफ, ने कहा कि “वैश्विक शांति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर की शांति से होती है।” सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर एच.एच. पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती, डॉ. विनोद के. पॉल (नीति आयोग), पद्मश्री डॉ. एच. आर. नागेंद्र (एस-व्यासा विश्वविद्यालय), पद्मश्री राजेश कोटेचा (सचिव, आयुष मंत्रालय), डॉ. सुधांशु त्रिवेदी (सांसद, राज्यसभा), डॉ. सारा लाजर (हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, अमेरिका), डॉ. रीमा दादा (एम्स), डॉ. मोहित गुप्ता, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती, डॉ. न्यूटन कोंडावेती, श्री सौरभ बोथरा और श्री विजयभास्कर रेड्डी सहित कई प्रतिष्ठित वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान ध्यान पर आधारित शोध, केस स्टडी, पैनल चर्चा, नेतृत्व और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव तथा निर्देशित ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनसे प्रतिभागियों को ध्यान के व्यावहारिक लाभों का अनुभव होगा।1
- दुल्हन के पीछे बाराती और दूल्हा भाग-भाग के परेशान1
- CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा इको क्लब के सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- "अगर जीवन शैली नहीं बदली, तो पर्यावरण के साथ मानव अस्तित्व भी संकट में" रीवा। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) रीवा के इको क्लब द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन भोपाल के निर्देशन में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' विषय पर एक वृहद सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभावों से अवगत कराना रहा। पूर्वजों की परंपराएं थीं वैज्ञानिक: डॉ. अतुल तिवारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल तिवारी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को प्रकृति का सच्चा रक्षक बताया। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने धर्म और संस्कृति को प्रकृति से इस तरह जोड़ा था कि पेड़ काटना पाप और लगाना पुण्य माना जाता था। भारतीय संस्कृति दुनिया की उन विरल संस्कृतियों में से है, जहाँ प्रकृति को केवल 'उपभोग की वस्तु' नहीं, बल्कि 'साक्षात् चेतना' और 'माता' माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है: "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।" (अर्थात्: भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।) यही भाव भारतीय जनमानस में वृक्षों, नदियों और पहाड़ों के प्रति पूज्य भाव जगाता है।हमारी संस्कृति में एक वृक्ष लगाना दस पुत्रों के सौभाग्य के समान माना गया है। यही कारण है कि हम पीपल, बरगद, तुलसी और नीम की पूजा करते हैं, ताकि धर्म के बहाने ही सही, हम ऑक्सीजन देने वाले इन जीवनदाताओं की रक्षा कर सकें।आज के आधुनिक युग में, जहाँ विकास की अंधी दौड़ में हमने जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया है, वहाँ भारतीय संस्कृति का यह 'पारिस्थितिक ज्ञान' ही हमें बचा सकता है। मुहावरों और लोकोक्तियों के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन की आदत बना दिया था।" डॉ. तिवारी ने खेद जताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इन जड़ों को भूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वायु और जल प्रदूषण आज असाध्य बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पौधारोपण करने का मंत्र दिया। कीटनाशकों का कहर और जेनेटिक खतरा: डॉ. अरविंद त्रिपाठी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए जीन म्यूटेशन और डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने पंजाब के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिक उत्पादन की लालसा में कीटनाशक रसायनों और फर्टिलाइजर्स के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी और अनाज को जहरीला बना दिया है। डॉ. त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, "आज स्थिति यह है कि पंजाब से राजस्थान के लिए 'कैंसर ट्रेन' चल रही है। जो बीमारियाँ पहले दुर्लभ थीं, वे आज हर घर की कहानी बन रही हैं।" उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की सलाह दी। डॉ त्रिपाठी ने अफसोस जाहिर किया कि हमारी आधुनिकता की अंधी दौड़ और लालच के कारण हम प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन प्लास्टिक नदी एवं समुद्रों में डाल रहे हैं और हमने महासागरों को डंप में बदल दिया है जिससे जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है और हमारा इकोसिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का आह्वान: प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल ने प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि केवल सेमिनार तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए छतों और आंगन में पानी के सकोरे अवश्य रखें। प्राचार्य ने जोर दिया कि नए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी पुराने पौधों को पानी देकर जीवित रखना है। शून्य प्लास्टिक और 'ग्रीन वेलकम' की अनूठी मिसाल महाविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। अतिथियों का स्वागत भी परम्परागत फूलों के हार या बुके (जो बाद में कचरा बन जाते हैं) के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्राध्यापकों और प्रशिक्षणार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव तिवारी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया, वहीं आभार प्रदर्शन श्रीमती रेखा त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. पी.एन. मिश्रा, डॉ. संजय सक्सेना,डॉ. दीपा अग्निहोत्री, डॉ. नीता सिंह, डॉ गीता पालीवाल डॉ. उमेश पांडे, डॉ. अनूप पांडे, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ. स्मिता अग्निहोत्री, डॉ. माया मिश्रा, डॉ अनिल तिवारी, डॉ. सुचिता शर्मा, डॉ. पांडे, इकलेश तिवारी सहित एम.एड. एवं बी.एड. के समस्त प्रशिक्षार्थी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।3