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CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा इको क्लब के सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- "अगर जीवन शैली नहीं बदली, तो पर्यावरण के साथ मानव अस्तित्व भी संकट में" रीवा। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) रीवा के इको क्लब द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन भोपाल के निर्देशन में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' विषय पर एक वृहद सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभावों से अवगत कराना रहा। पूर्वजों की परंपराएं थीं वैज्ञानिक: डॉ. अतुल तिवारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल तिवारी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को प्रकृति का सच्चा रक्षक बताया। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने धर्म और संस्कृति को प्रकृति से इस तरह जोड़ा था कि पेड़ काटना पाप और लगाना पुण्य माना जाता था। भारतीय संस्कृति दुनिया की उन विरल संस्कृतियों में से है, जहाँ प्रकृति को केवल 'उपभोग की वस्तु' नहीं, बल्कि 'साक्षात् चेतना' और 'माता' माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है: "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।" (अर्थात्: भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।) यही भाव भारतीय जनमानस में वृक्षों, नदियों और पहाड़ों के प्रति पूज्य भाव जगाता है।हमारी संस्कृति में एक वृक्ष लगाना दस पुत्रों के सौभाग्य के समान माना गया है। यही कारण है कि हम पीपल, बरगद, तुलसी और नीम की पूजा करते हैं, ताकि धर्म के बहाने ही सही, हम ऑक्सीजन देने वाले इन जीवनदाताओं की रक्षा कर सकें।आज के आधुनिक युग में, जहाँ विकास की अंधी दौड़ में हमने जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया है, वहाँ भारतीय संस्कृति का यह 'पारिस्थितिक ज्ञान' ही हमें बचा सकता है। मुहावरों और लोकोक्तियों के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन की आदत बना दिया था।" डॉ. तिवारी ने खेद जताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इन जड़ों को भूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वायु और जल प्रदूषण आज असाध्य बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पौधारोपण करने का मंत्र दिया। कीटनाशकों का कहर और जेनेटिक खतरा: डॉ. अरविंद त्रिपाठी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए जीन म्यूटेशन और डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने पंजाब के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिक उत्पादन की लालसा में कीटनाशक रसायनों और फर्टिलाइजर्स के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी और अनाज को जहरीला बना दिया है। डॉ. त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, "आज स्थिति यह है कि पंजाब से राजस्थान के लिए 'कैंसर ट्रेन' चल रही है। जो बीमारियाँ पहले दुर्लभ थीं, वे आज हर घर की कहानी बन रही हैं।" उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की सलाह दी। डॉ त्रिपाठी ने अफसोस जाहिर किया कि हमारी आधुनिकता की अंधी दौड़ और लालच के कारण हम प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन प्लास्टिक नदी एवं समुद्रों में डाल रहे हैं और हमने महासागरों को डंप में बदल दिया है जिससे जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है और हमारा इकोसिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का आह्वान: प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल ने प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि केवल सेमिनार तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए छतों और आंगन में पानी के सकोरे अवश्य रखें। प्राचार्य ने जोर दिया कि नए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी पुराने पौधों को पानी देकर जीवित रखना है। शून्य प्लास्टिक और 'ग्रीन वेलकम' की अनूठी मिसाल महाविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। अतिथियों का स्वागत भी परम्परागत फूलों के हार या बुके (जो बाद में कचरा बन जाते हैं) के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्राध्यापकों और प्रशिक्षणार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव तिवारी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया, वहीं आभार प्रदर्शन श्रीमती रेखा त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. पी.एन. मिश्रा, डॉ. संजय सक्सेना,डॉ. दीपा अग्निहोत्री, डॉ. नीता सिंह, डॉ गीता पालीवाल डॉ. उमेश पांडे, डॉ. अनूप पांडे, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ. स्मिता अग्निहोत्री, डॉ. माया मिश्रा, डॉ अनिल तिवारी, डॉ. सुचिता शर्मा, डॉ. पांडे, इकलेश तिवारी सहित एम.एड. एवं बी.एड. के समस्त प्रशिक्षार्थी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

2 hrs ago
user_शेखर तिवारी
शेखर तिवारी
Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा इको क्लब के सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- "अगर जीवन शैली नहीं बदली, तो पर्यावरण के साथ मानव अस्तित्व भी संकट में" रीवा। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) रीवा के इको क्लब द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन भोपाल के निर्देशन में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' विषय पर एक वृहद सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभावों से अवगत कराना रहा। पूर्वजों की परंपराएं थीं वैज्ञानिक: डॉ. अतुल तिवारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल तिवारी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को प्रकृति का सच्चा रक्षक बताया। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने धर्म और संस्कृति को प्रकृति से इस तरह जोड़ा था कि पेड़ काटना पाप और लगाना पुण्य माना जाता था। भारतीय संस्कृति दुनिया की उन विरल संस्कृतियों में से है, जहाँ प्रकृति को केवल 'उपभोग की वस्तु' नहीं, बल्कि 'साक्षात् चेतना' और 'माता' माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है: "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।" (अर्थात्: भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।)

यही भाव भारतीय जनमानस में वृक्षों, नदियों और पहाड़ों के प्रति पूज्य भाव जगाता है।हमारी संस्कृति में एक वृक्ष लगाना दस पुत्रों के सौभाग्य के समान माना गया है। यही कारण है कि हम पीपल, बरगद, तुलसी और नीम की पूजा करते हैं, ताकि धर्म के बहाने ही सही, हम ऑक्सीजन देने वाले इन जीवनदाताओं की रक्षा कर सकें।आज के आधुनिक युग में, जहाँ विकास की अंधी दौड़ में हमने जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया है, वहाँ भारतीय संस्कृति का यह 'पारिस्थितिक ज्ञान' ही हमें बचा सकता है। मुहावरों और लोकोक्तियों के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन की आदत बना दिया था।" डॉ. तिवारी ने खेद जताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इन जड़ों को भूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वायु और जल प्रदूषण आज असाध्य बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पौधारोपण करने का मंत्र दिया। कीटनाशकों का कहर और जेनेटिक खतरा: डॉ. अरविंद त्रिपाठी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए जीन म्यूटेशन और डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने पंजाब के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिक उत्पादन की लालसा में कीटनाशक रसायनों और फर्टिलाइजर्स के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी और अनाज को जहरीला बना दिया है। डॉ. त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, "आज स्थिति यह है कि पंजाब से राजस्थान के लिए 'कैंसर ट्रेन' चल रही है। जो बीमारियाँ पहले दुर्लभ थीं, वे आज हर घर की कहानी बन रही हैं।" उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की सलाह दी। डॉ त्रिपाठी ने अफसोस जाहिर किया कि हमारी आधुनिकता

की अंधी दौड़ और लालच के कारण हम प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन प्लास्टिक नदी एवं समुद्रों में डाल रहे हैं और हमने महासागरों को डंप में बदल दिया है जिससे जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है और हमारा इकोसिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का आह्वान: प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल ने प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि केवल सेमिनार तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए छतों और आंगन में पानी के सकोरे अवश्य रखें। प्राचार्य ने जोर दिया कि नए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी पुराने पौधों को पानी देकर जीवित रखना है। शून्य प्लास्टिक और 'ग्रीन वेलकम' की अनूठी मिसाल महाविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। अतिथियों का स्वागत भी परम्परागत फूलों के हार या बुके (जो बाद में कचरा बन जाते हैं) के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्राध्यापकों और प्रशिक्षणार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव तिवारी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया, वहीं आभार प्रदर्शन श्रीमती रेखा त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. पी.एन. मिश्रा, डॉ. संजय सक्सेना,डॉ. दीपा अग्निहोत्री, डॉ. नीता सिंह, डॉ गीता पालीवाल डॉ. उमेश पांडे, डॉ. अनूप पांडे, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ. स्मिता अग्निहोत्री, डॉ. माया मिश्रा, डॉ अनिल तिवारी, डॉ. सुचिता शर्मा, डॉ. पांडे, इकलेश तिवारी सहित एम.एड. एवं बी.एड. के समस्त प्रशिक्षार्थी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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  • ऑपरेशन प्रहार-2 में बड़ी कार्रवाई: 100 नग नशीली कफ सिरप के साथ आरोपी गिरफ्तार रीवा। अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ऑपरेशन प्रहार-2 के तहत गोविन्दगढ़ पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस महानिरीक्षक रीवा के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) आरती सिंह एवं उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) उदित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को थाना गोविन्दगढ़ अंतर्गत चौकी शिवपुरवा क्षेत्र में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सहिजना मोड़ के पास नहर किनारे घेराबंदी कर एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 100 नग अवैध नशीली कफ सिरप बरामद हुई। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी के साथ इस अवैध कारोबार में दो अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्हें भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। तीनों के विरुद्ध थाना गोविन्दगढ़ में अपराध क्रमांक 114/2026 के तहत धारा 8/21, 22, 29 एनडीपीएस एक्ट एवं 5/13 ड्रग्स कंट्रोल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार आरोपी अजय तिवारी उर्फ शिब्बू (35 वर्ष) निवासी ग्राम सहिजना नंबर 02 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अरविंद सिंह, उपनिरीक्षक निशा खूता, सहायक उपनिरीक्षक रामजियावन वर्मा, इन्द्रभान सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों और जवानों की अहम भूमिका रही।
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    ऑपरेशन प्रहार-2 में बड़ी कार्रवाई: 100 नग नशीली कफ सिरप के साथ आरोपी गिरफ्तार
रीवा। अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ऑपरेशन प्रहार-2 के तहत गोविन्दगढ़ पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस महानिरीक्षक रीवा के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) आरती सिंह एवं उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) उदित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को थाना गोविन्दगढ़ अंतर्गत चौकी शिवपुरवा क्षेत्र में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सहिजना मोड़ के पास नहर किनारे घेराबंदी कर एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 100 नग अवैध नशीली कफ सिरप बरामद हुई। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी के साथ इस अवैध कारोबार में दो अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्हें भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। तीनों के विरुद्ध थाना गोविन्दगढ़ में अपराध क्रमांक 114/2026 के तहत धारा 8/21, 22, 29 एनडीपीएस एक्ट एवं 5/13 ड्रग्स कंट्रोल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
गिरफ्तार आरोपी अजय तिवारी उर्फ शिब्बू (35 वर्ष) निवासी ग्राम सहिजना नंबर 02 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अरविंद सिंह, उपनिरीक्षक निशा खूता, सहायक उपनिरीक्षक रामजियावन वर्मा, इन्द्रभान सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य अधिकारियों और जवानों की अहम भूमिका रही।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    59 min ago
  • hamare Gav me
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    hamare Gav me
    user_Krishna Kumar Rawat Krishna
    Krishna Kumar Rawat Krishna
    Plumber रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • नगर निगम प्रशासन के द्वारा यह कार्य जो कई वर्षों से कब्जा किया गया था उसको हटाया गया एवं नई रोड के निर्माण कार्य हेतु यह कार्य हो रहा है
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    नगर निगम प्रशासन के द्वारा यह कार्य जो कई वर्षों से कब्जा किया गया था उसको हटाया गया एवं नई रोड के निर्माण कार्य हेतु  यह कार्य हो रहा है
    user_Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    NGO Worker हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • इस बार फरीदाबाद के दशहरा ग्राउंड में भव्य रूप से मनाया जाएगा देश के संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस "डॉ आंबेडकर सामाजिक एकता मंच फरीदाबाद" ने होने वाले कार्यक्रम को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कार्यक्रम की रूपरेखा को साझा किया ।
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    इस बार फरीदाबाद के दशहरा ग्राउंड में भव्य रूप से मनाया जाएगा देश के संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस "डॉ आंबेडकर सामाजिक एकता मंच फरीदाबाद" ने  होने वाले कार्यक्रम को लेकर  प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कार्यक्रम की रूपरेखा को साझा किया ।
    user_पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पब्लिक मीडिया न्यूज़ चैनल
    पत्रकार Rewa, Madhya Pradesh•
    1 hr ago
  • सेमरिया थाना प्रभारी समेत तीन सस्पेंड, IG की सख्ती के बाद SP का बड़ा एक्शन बड़ी कार्रवाई: NDPS के आरोपियों को 6 घंटे थाने में बिठाकर बिना कार्रवाई छोड़ा, 'सेटिंग' के संदेह में गाज गिरी रीवा संभाग में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सतना के कोटर से पकड़े गए NDPS एक्ट के दो आरोपियों को 'मैनेज' कर छोड़ने के मामले में रीवा आईजी गौरव राजपूत के निर्देश पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। रीवा एसपी शैलेन्द्र सिंह ने सेमरिया थाना प्रभारी विकास कपिश, आरक्षक रामयश रावत और सुजीत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से समूचे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। 6 घंटे तक चली 'सौदाबाजी' सूत्रों के मुताबिक, नशे के दो सौदागरों को दबोचा था, जिन्हें सेमरिया थाना लाया गया। नियमानुसार आरोपियों पर तत्काल मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश करना था, लेकिन सेमरिया थाने में कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। आरोपियों को करीब 6 घंटे तक थाने में बिठाकर रखा गया और फिर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के संदिग्ध परिस्थितियों में रिहा कर दिया गया। रीवा से फोन पर 'कंट्रोल' हो रहा था खेल जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जब यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था, थाना प्रभारी विकास कपिश रीवा में मौजूद थे। वे फोन के माध्यम से थाने के स्टाफ को लगातार दिशा-निर्देश दे रहे थे। शुरुआती जांच में निजी बातचीत और कथित 'लेन-देन' के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपियों को छोड़ने के पीछे गहरी साजिश और 'सेटिंग' थी। > "NDPS जैसे गंभीर मामलों में लापरवाही और अपराधियों को संरक्षण देना अक्षम्य है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। जांच जारी है, जो भी दोषी होगा उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।" जांच के घेरे में कई और नाम पुलिस सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ तीन पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं है। आईजी के सख्त रुख के बाद अब थाना प्रभारी और आरक्षकों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इसमें कुछ और बड़े चेहरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आने वाले दिनों में महकमे में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां या विभागीय कार्रवाई संभव है।
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    सेमरिया थाना प्रभारी समेत तीन सस्पेंड, IG की सख्ती के बाद SP का बड़ा एक्शन
बड़ी कार्रवाई: NDPS के आरोपियों को 6 घंटे थाने में बिठाकर बिना कार्रवाई छोड़ा, 'सेटिंग' के संदेह में गाज गिरी
रीवा संभाग में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सतना के कोटर से पकड़े गए NDPS एक्ट के दो आरोपियों को 'मैनेज' कर छोड़ने के मामले में रीवा आईजी गौरव राजपूत के निर्देश पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। रीवा एसपी शैलेन्द्र सिंह ने सेमरिया थाना प्रभारी विकास कपिश, आरक्षक रामयश रावत और सुजीत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से समूचे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
6 घंटे तक चली 'सौदाबाजी'
सूत्रों के मुताबिक, नशे के दो सौदागरों को दबोचा था, जिन्हें सेमरिया थाना लाया गया। नियमानुसार आरोपियों पर तत्काल मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश करना था, लेकिन सेमरिया थाने में कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। आरोपियों को करीब 6 घंटे तक थाने में बिठाकर रखा गया और फिर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के संदिग्ध परिस्थितियों में रिहा कर दिया गया।
रीवा से फोन पर 'कंट्रोल' हो रहा था खेल
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जब यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था, थाना प्रभारी विकास कपिश रीवा में मौजूद थे। वे फोन के माध्यम से थाने के स्टाफ को लगातार दिशा-निर्देश दे रहे थे। शुरुआती जांच में निजी बातचीत और कथित 'लेन-देन' के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपियों को छोड़ने के पीछे गहरी साजिश और 'सेटिंग' थी।
> "NDPS जैसे गंभीर मामलों में लापरवाही और अपराधियों को संरक्षण देना अक्षम्य है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। जांच जारी है, जो भी दोषी होगा उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।"
जांच के घेरे में कई और नाम
पुलिस सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ तीन पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं है। आईजी के सख्त रुख के बाद अब थाना प्रभारी और आरक्षकों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इसमें कुछ और बड़े चेहरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आने वाले दिनों में महकमे में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां या विभागीय कार्रवाई संभव है।
    user_हरित प्रवाह न्यूज़
    हरित प्रवाह न्यूज़
    हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • पूरे शहर में लोगों को गैस देने के नाम पर हो रही है ठगी, पब्लिक गैस सिलेंडर के लिए यहां से वहां भटक रहे हैं
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    पूरे शहर में लोगों को गैस देने के नाम पर हो रही है ठगी, पब्लिक गैस सिलेंडर के लिए यहां से वहां भटक रहे हैं
    user_Abhishek Pandey
    Abhishek Pandey
    Huzur, Rewa•
    3 hrs ago
  • Post by Bolti Divare
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    Post by Bolti Divare
    user_Bolti Divare
    Bolti Divare
    Voice of people हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा इको क्लब के सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- "अगर जीवन शैली नहीं बदली, तो पर्यावरण के साथ मानव अस्तित्व भी संकट में" रीवा। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) रीवा के इको क्लब द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन भोपाल के निर्देशन में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' विषय पर एक वृहद सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभावों से अवगत कराना रहा। पूर्वजों की परंपराएं थीं वैज्ञानिक: डॉ. अतुल तिवारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल तिवारी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को प्रकृति का सच्चा रक्षक बताया। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने धर्म और संस्कृति को प्रकृति से इस तरह जोड़ा था कि पेड़ काटना पाप और लगाना पुण्य माना जाता था। भारतीय संस्कृति दुनिया की उन विरल संस्कृतियों में से है, जहाँ प्रकृति को केवल 'उपभोग की वस्तु' नहीं, बल्कि 'साक्षात् चेतना' और 'माता' माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है: "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।" (अर्थात्: भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।) यही भाव भारतीय जनमानस में वृक्षों, नदियों और पहाड़ों के प्रति पूज्य भाव जगाता है।हमारी संस्कृति में एक वृक्ष लगाना दस पुत्रों के सौभाग्य के समान माना गया है। यही कारण है कि हम पीपल, बरगद, तुलसी और नीम की पूजा करते हैं, ताकि धर्म के बहाने ही सही, हम ऑक्सीजन देने वाले इन जीवनदाताओं की रक्षा कर सकें।आज के आधुनिक युग में, जहाँ विकास की अंधी दौड़ में हमने जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया है, वहाँ भारतीय संस्कृति का यह 'पारिस्थितिक ज्ञान' ही हमें बचा सकता है। मुहावरों और लोकोक्तियों के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन की आदत बना दिया था।" डॉ. तिवारी ने खेद जताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इन जड़ों को भूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वायु और जल प्रदूषण आज असाध्य बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पौधारोपण करने का मंत्र दिया। कीटनाशकों का कहर और जेनेटिक खतरा: डॉ. अरविंद त्रिपाठी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए जीन म्यूटेशन और डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने पंजाब के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिक उत्पादन की लालसा में कीटनाशक रसायनों और फर्टिलाइजर्स के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी और अनाज को जहरीला बना दिया है। डॉ. त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, "आज स्थिति यह है कि पंजाब से राजस्थान के लिए 'कैंसर ट्रेन' चल रही है। जो बीमारियाँ पहले दुर्लभ थीं, वे आज हर घर की कहानी बन रही हैं।" उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की सलाह दी। डॉ त्रिपाठी ने अफसोस जाहिर किया कि हमारी आधुनिकता की अंधी दौड़ और लालच के कारण हम प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन प्लास्टिक नदी एवं समुद्रों में डाल रहे हैं और हमने महासागरों को डंप में बदल दिया है जिससे जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है और हमारा इकोसिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का आह्वान: प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल ने प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि केवल सेमिनार तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए छतों और आंगन में पानी के सकोरे अवश्य रखें। प्राचार्य ने जोर दिया कि नए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी पुराने पौधों को पानी देकर जीवित रखना है। शून्य प्लास्टिक और 'ग्रीन वेलकम' की अनूठी मिसाल महाविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। अतिथियों का स्वागत भी परम्परागत फूलों के हार या बुके (जो बाद में कचरा बन जाते हैं) के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्राध्यापकों और प्रशिक्षणार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव तिवारी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया, वहीं आभार प्रदर्शन श्रीमती रेखा त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. पी.एन. मिश्रा, डॉ. संजय सक्सेना,डॉ. दीपा अग्निहोत्री, डॉ. नीता सिंह, डॉ गीता पालीवाल डॉ. उमेश पांडे, डॉ. अनूप पांडे, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ. स्मिता अग्निहोत्री, डॉ. माया मिश्रा, डॉ अनिल तिवारी, डॉ. सुचिता शर्मा, डॉ. पांडे, इकलेश तिवारी सहित एम.एड. एवं बी.एड. के समस्त प्रशिक्षार्थी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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    CTE रीवा में गूँजा प्रकृति संरक्षण का स्वर: ‘कैंसर’ के खतरों से लेकर सनातन परंपराओं तक पर हुई गंभीर चर्चा
इको क्लब के सेमिनार में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी- "अगर जीवन शैली नहीं बदली, तो पर्यावरण के साथ मानव अस्तित्व भी संकट में" 
रीवा।
शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) रीवा के इको क्लब द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन भोपाल के निर्देशन में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' विषय पर एक वृहद सेमिनार का आयोजन किया गया। इस वैचारिक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभावों से अवगत कराना रहा।
पूर्वजों की परंपराएं थीं वैज्ञानिक: डॉ. अतुल तिवारी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल तिवारी ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय ज्ञान और सनातन संस्कृति को प्रकृति का सच्चा रक्षक बताया। उन्होंने कहा, "हमारे पूर्वजों ने धर्म और संस्कृति को प्रकृति से इस तरह जोड़ा था कि पेड़ काटना पाप और लगाना पुण्य माना जाता था। भारतीय संस्कृति दुनिया की उन विरल संस्कृतियों में से है, जहाँ प्रकृति को केवल 'उपभोग की वस्तु'  नहीं, बल्कि 'साक्षात् चेतना' और 'माता' माना गया है।                                            
अथर्ववेद में कहा गया है:
"माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।"
(अर्थात्: भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूँ।)        
यही भाव भारतीय जनमानस में वृक्षों, नदियों और पहाड़ों के प्रति पूज्य भाव जगाता है।हमारी संस्कृति में एक वृक्ष लगाना दस पुत्रों के सौभाग्य के समान माना गया है। यही कारण है कि हम पीपल, बरगद, तुलसी और नीम की पूजा करते हैं, ताकि धर्म के बहाने ही सही, हम ऑक्सीजन देने वाले इन जीवनदाताओं की रक्षा कर सकें।आज के आधुनिक युग में, जहाँ विकास की अंधी दौड़ में हमने जंगलों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया है, वहाँ भारतीय संस्कृति का यह 'पारिस्थितिक ज्ञान' ही हमें बचा सकता है।
मुहावरों और लोकोक्तियों के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-जन की आदत बना दिया था।" डॉ. तिवारी ने खेद जताया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम इन जड़ों को भूल रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप वायु और जल प्रदूषण आज असाध्य बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने हर व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार पौधारोपण करने का मंत्र दिया।
कीटनाशकों का कहर और जेनेटिक खतरा: डॉ. अरविंद त्रिपाठी
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए जीन म्यूटेशन और डीएनए में होने वाले परिवर्तनों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने पंजाब के कृषि मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अधिक उत्पादन की लालसा में कीटनाशक रसायनों और फर्टिलाइजर्स के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी और अनाज को जहरीला बना दिया है। डॉ. त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, "आज स्थिति यह है कि पंजाब से राजस्थान के लिए 'कैंसर ट्रेन' चल रही है। जो बीमारियाँ पहले दुर्लभ थीं, वे आज हर घर की कहानी बन रही हैं।" उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसके पूर्ण बहिष्कार की सलाह दी। डॉ त्रिपाठी ने अफसोस जाहिर किया कि हमारी आधुनिकता की अंधी दौड़ और लालच के कारण हम प्रतिवर्ष 14 मिलियन टन प्लास्टिक नदी एवं समुद्रों में डाल रहे हैं और हमने महासागरों को डंप में बदल दिया है जिससे जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है और हमारा इकोसिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का आह्वान: प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. आर.एन. पटेल ने प्रशिक्षार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि केवल सेमिनार तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए छतों और आंगन में पानी के सकोरे अवश्य रखें। प्राचार्य ने जोर दिया कि नए पौधे लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी पुराने पौधों को पानी देकर जीवित रखना है।
शून्य प्लास्टिक और 'ग्रीन वेलकम' की अनूठी मिसाल
महाविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश दिया। कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। अतिथियों का स्वागत भी परम्परागत फूलों के हार या बुके (जो बाद में कचरा बन जाते हैं) के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्राध्यापकों और प्रशिक्षणार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली।
कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव तिवारी ने अपनी विशिष्ट शैली में किया, वहीं आभार प्रदर्शन श्रीमती रेखा त्रिपाठी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. पी.एन. मिश्रा, डॉ. संजय सक्सेना,डॉ. दीपा अग्निहोत्री, डॉ. नीता सिंह, डॉ गीता पालीवाल डॉ. उमेश पांडे, डॉ. अनूप पांडे, डॉ. कृष्णा सिंह,  डॉ. प्रियंका द्विवेदी, डॉ. स्मिता अग्निहोत्री, डॉ. माया मिश्रा, डॉ अनिल तिवारी, डॉ. सुचिता शर्मा,  डॉ. पांडे, इकलेश तिवारी सहित एम.एड. एवं बी.एड. के समस्त प्रशिक्षार्थी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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