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भगवान ही कहलवाता है अपने मुंह से " प्रभु की लीला कोई समझ न पाया " दुर्घटना से 2 घंटे पहले के धनराज जी जोशी के वचन स्वर्गीय श्री धनराज जी जोशी को प्रभु अपने चरणों मे स्थान प्रदान करे शत शत नमन A #dhanrajjoवहिले के वचन #Rajasthani Bhajan #singer
Lokesh meena
भगवान ही कहलवाता है अपने मुंह से " प्रभु की लीला कोई समझ न पाया " दुर्घटना से 2 घंटे पहले के धनराज जी जोशी के वचन स्वर्गीय श्री धनराज जी जोशी को प्रभु अपने चरणों मे स्थान प्रदान करे शत शत नमन A #dhanrajjoवहिले के वचन #Rajasthani Bhajan #singer
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- चौथ का बरवाड़ा। विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से बने पंचायत समिति भवन में लोकार्पण के महज 2 साल 11 माह बाद ही छत और दीवारों में दरारें पड़ने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। हालत यह है कि भवन के अंदर कई कमरों की दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं और छतों पर भी क्रैक पड़ चुके हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में चौथ का बरवाड़ा को पंचायत समिति का दर्जा मिलने के बाद शुरुआत में राजकीय विद्यालय के खाली पड़े नेहरू ब्लॉक भवन में पंचायत समिति कार्यालय संचालित किया गया था। करीब आठ वर्षों तक अस्थायी व्यवस्था में काम चलने के बाद वर्ष 2023 में सवाई माधोपुर मार्ग की ओर नया पंचायत समिति भवन बनकर तैयार हुआ और बड़े उत्साह के साथ इसका लोकार्पण किया गया। उम्मीद थी कि नया भवन क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यों को मजबूती देगा, लेकिन निर्माण के कुछ ही वर्षों में सामने आई दरारों ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस कक्ष में पंचायत समिति के मुखिया विकास अधिकारी बैठते हैं, वहां भी दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। अन्य कमरों और छतों पर भी जगह-जगह क्रैक दिखाई दे रहे हैं। इससे कर्मचारियों और आमजन में भवन की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा है कि निर्माण के दौरान ठेकेदार ने मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि अधिकारियों ने दरारों वाली बिल्डिंग को हैंडओवर लेकर संचालन कैसे शुरू कर दिया। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है। हाल ही में उपखंड अधिकारी जोगेंद्र सिंह ने पंचायत समिति भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन में पड़ी दरारों को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद इतनी जल्दी भवन की यह स्थिति क्यों बनी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पंचायत समिति भवन में आई दरारें केवल दीवारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गहरी दरार का संकेत भी दे रही हैं।2
- सवाई माधोपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर रोड पर कुछ महीने पूर्व यूआईटी द्वारा सौंदर्यकरण के नाम पर पेड़ पौधे और लोहे की जालियां लगाई गई थी। अब सड़क के चौड़ाईकरण को लेकर जालियां को वापस तोड़कर हटाया जा रहा है। जहां लाखों रुपए खर्च करके यूआईटी ने जालियां लगाई थी। आखिर देखने की बात है कि क्यों यूआईटी ने सौंदर्यकरण के नाम पर जालियां लगाई और अब हटाई जा रही है।2
- Post by बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर मध्य प्रदेश1
- Post by Noshad ahmad qureshi1
- Post by दैनिक भास्कर संवाददाता1
- लाखेरी मॉल की झोपड़ियों में गेहूं की नोलाइयों में आग लगने की घटना सामने आई सूचना पर लाखेरी नगर पालिका की दमकल तुरंत मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया इस दौरान फायरमैन हरिओम भारती मनीष सैनी मृणाल शर्मा एवं ड्राइवर रंजीत जी मौके पर उपस्थित रहे जिन्होंने सफलतापूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।1
- रामदेवरा रामसरोवर में नहाते वक्त डूबा 15 वर्षीय किशोर, दर्दनाक मौत,#rajasthan #jaiselmer #pokaran.1
- चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र की रजवाना ग्राम पंचायत मुख्यालय में स्वच्छ और सुंदर गांव के दावों की हकीकत कीचड़ में दबती नजर आ रही है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को साफ-सफाई और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लाखों रुपये का बजट जारी किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी कीचड़ भरे रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत मुख्यालय के प्रमुख आम रास्तों पर पक्की सड़क नहीं होने के कारण गंदा पानी कच्ची सड़क के बीच जमा हो जाता है। इससे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और लोगों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को होती है, जिन्हें कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे इसी वजह से स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। बारिश के मौसम में तो स्थिति और भयावह हो जाती है, जब पूरा मार्ग दलदल में बदल जाता है।ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर सरपंच से लेकर पंचायत राज विभाग के उच्च अधिकारियों तक कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि बजट जारी होने के बावजूद विकास कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहे।यह समस्या केवल रजवाना तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।2