सड़कें कागज़ों में, ज़मीनी हकीकत कीचड़ में: रजवाना ग्राम पंचायत में विकास पर सवाल चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र की रजवाना ग्राम पंचायत मुख्यालय में स्वच्छ और सुंदर गांव के दावों की हकीकत कीचड़ में दबती नजर आ रही है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को साफ-सफाई और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लाखों रुपये का बजट जारी किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी कीचड़ भरे रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत मुख्यालय के प्रमुख आम रास्तों पर पक्की सड़क नहीं होने के कारण गंदा पानी कच्ची सड़क के बीच जमा हो जाता है। इससे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और लोगों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को होती है, जिन्हें कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे इसी वजह से स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। बारिश के मौसम में तो स्थिति और भयावह हो जाती है, जब पूरा मार्ग दलदल में बदल जाता है।ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर सरपंच से लेकर पंचायत राज विभाग के उच्च अधिकारियों तक कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि बजट जारी होने के बावजूद विकास कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहे।यह समस्या केवल रजवाना तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़कें कागज़ों में, ज़मीनी हकीकत कीचड़ में: रजवाना ग्राम पंचायत में विकास पर सवाल चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र की रजवाना ग्राम पंचायत मुख्यालय में स्वच्छ और सुंदर गांव के दावों की हकीकत कीचड़ में दबती नजर आ रही है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को साफ-सफाई और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लाखों रुपये का बजट जारी किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी कीचड़ भरे रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत मुख्यालय के प्रमुख आम रास्तों पर पक्की सड़क नहीं होने के कारण गंदा पानी कच्ची सड़क के बीच जमा हो जाता है। इससे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और लोगों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से
कम नहीं है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को होती है, जिन्हें कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे इसी वजह से स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। बारिश के मौसम में तो स्थिति और भयावह हो जाती है, जब पूरा मार्ग दलदल में बदल जाता है।ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर सरपंच से लेकर पंचायत राज विभाग के उच्च अधिकारियों तक कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि बजट जारी होने के बावजूद विकास कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहे।यह समस्या केवल रजवाना तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सवाई माधोपुर. सरकार की स्वच्छता योजनाओं के तहत ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सामुदायिक शौचालय अब कई जगह सवालों के घेरे में आने लगे हैं। ऐसा ही मामला चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र की रजवाना ग्राम पंचायत के कुम्हारिया गांव से सामने आया है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र के पास बने सामुदायिक स्वास्थ्य परिसर का नया शौचालय निर्माण पूरा होने से पहले ही कथित भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गया है। करीब 3 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बने इस शौचालय को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय अभी तक उपयोग में भी नहीं आया, लेकिन उसकी हालत पहले ही जर्जर नजर आने लगी है। शौचालय के गेट झूल रहे हैं, अंदर फर्श पर टाइल्स तक नहीं बिछाई गई हैं और पानी की व्यवस्था अधूरी छोड़ दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि बाद में पानी की लाइन डालने के नाम पर नए निर्माण को ही तोड़कर पाइप डाले गए, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद शौचालय शुरू होने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया, जो सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण घटिया निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिल रहा है और सरकारी योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह रहा है।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण अधूरा था, तो शौचालय पर रंग-रोगन कर उसे तैयार दिखाने की जल्दबाजी क्यों की गई? यह मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी योजनाओं की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।5
- सवाई माधोपुर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर रोड पर कुछ महीने पूर्व यूआईटी द्वारा सौंदर्यकरण के नाम पर पेड़ पौधे और लोहे की जालियां लगाई गई थी। अब सड़क के चौड़ाईकरण को लेकर जालियां को वापस तोड़कर हटाया जा रहा है। जहां लाखों रुपए खर्च करके यूआईटी ने जालियां लगाई थी। आखिर देखने की बात है कि क्यों यूआईटी ने सौंदर्यकरण के नाम पर जालियां लगाई और अब हटाई जा रही है।2
- Post by दैनिक भास्कर संवाददाता1
- भगवान ही कहलवाता है अपने मुंह से " प्रभु की लीला कोई समझ न पाया " दुर्घटना से 2 घंटे पहले के धनराज जी जोशी के वचन स्वर्गीय श्री धनराज जी जोशी को प्रभु अपने चरणों मे स्थान प्रदान करे शत शत नमन A #dhanrajjoवहिले के वचन #Rajasthani Bhajan #singer1
- अलीगढ़। स्थानीय क्षेत्र में संस्था प्रधानों की दो दिवसीय शैक्षिक वाक् पीठ संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 1 मई 2026 से 2 मई 2026 तक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी में ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रधानों ने भाग लिया और विभागीय प्राथमिकताओं, प्रवेश उत्सव और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। विभागीय कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) श्री सीताराम मीणा रहे। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने सभी संस्था प्रधानों को निर्देशित किया कि वे विभागीय कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ और समय सीमा में पूरा करें। उन्होंने विशेष रूप से राज्य सरकार द्वारा संचालित 'प्रवेश उत्सव', 'आपनी लाडो योजना', 'यू-डाइस (U-DISE)' प्रविष्टि और छात्रवृत्ति योजनाओं के सुचारू संचालन पर जोर दिया। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने रखा अपना पक्ष संगोष्ठी में शिक्षक और संस्था प्रधानों की समस्याओं एवं उनके कल्याण पर भी सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ उपशाखा उनियारा के अध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह गौड़ और प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ टोंक के जिला अध्यक्ष श्री हंस राज मीणा ने अपना विशेष उद्बोधन दिया। उन्होंने शिक्षकों की विभागीय समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण, उनके हितों के संरक्षण और विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को और अधिक सुदृढ़ बनाने के संबंध में अपने विचार साझा किए। शाला प्रबंधन और शैक्षणिक विषयों पर मंथन कार्यक्रम की अध्यक्षता हेदारी पुरा के प्रिंसिपल श्री घनश्याम जी द्वारा की गई। संगोष्ठी के दौरान ब्लॉक प्रिंसिपल अध्यक्ष श्री रामप्रसाद मीणा ने सभी उपस्थित संस्था प्रधानों को संबोधित करते हुए विभागीय दायित्वों को समय पर पूर्ण करने की बात दोहराई। संगोष्ठी के आयोजक एवं संयोजक प्रिंसिपल श्री सत्येंद्र पाल सिंह (MGGS अलीगढ़) ने शाला प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से विद्यालय के शैक्षणिक स्तर को बेहतर किया जा सकता है। स्वास्थ्य और नवाचार पर विशेष सत्र संगोष्ठी में न केवल प्रशासनिक बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री हरपाल जी, श्रीमती रेखा कुमारी जी और श्री रामप्रसाद जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर डॉक्टर साहब द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता के अंतर्गत एचपीसी (HPC) टीके के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और बालिकाओं के स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर दिया गया। निवृत्त प्रिंसिपल का किया गया सम्मान कार्यक्रम के अंत में एक भावुक और सम्मानजनक क्षण भी आया, जब हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रिंसिपल श्री हनुमान मीणा सुथरा का ब्लॉक के सभी संस्था प्रधानों द्वारा माला व साफा पहनाकर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उनकी दीर्घकालीन सेवाओं की सराहना करते हुए सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।4
- लाखेरी - शनिवार को श्री बड़के बालाजी मंदिर के पास स्थित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में नारद जयंती के पावन अवसर पर पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर के पत्रकारों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद राठौर एवं जिला संस्कार केंद्र प्रमुख श्रवण कुमार शर्मा ने सभी पत्रकारों का तिलक लगाकर, एवं दुपट्टा ओढ़ाकर अभिनंदन किया और देव ऋषि नारद की जीवनी पर प्रकाश डाला।राठौर ने बताया कि देव ऋषि नारद को आद्य पत्रकार माना जाता है, जो लोक कल्याण हेतु सूचनाओं का संचार करते थे। आज के पत्रकार भी समाज का दर्पण हैं और उनकी भूमिका राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक कुंज बिहारी शर्मा ने सभी पत्रकारों को धन्यवाद दिया। इस दौरान गायों को हरा चारा डाला तथा गो रक्षा कार्यक्रम पर भी सेवा को लेकर चर्चाएं हुई। इस दौरान पत्रकार द्वारका प्रसाद जगदेव, विश्वनाथ शर्मा, जितेंद्र गौड़ सहित लोगों ने नारद ऋषि को पूजन किया।4
- Post by बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर मध्य प्रदेश1
- चौथ का बरवाड़ा। विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से बने पंचायत समिति भवन में लोकार्पण के महज 2 साल 11 माह बाद ही छत और दीवारों में दरारें पड़ने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। हालत यह है कि भवन के अंदर कई कमरों की दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं और छतों पर भी क्रैक पड़ चुके हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में चौथ का बरवाड़ा को पंचायत समिति का दर्जा मिलने के बाद शुरुआत में राजकीय विद्यालय के खाली पड़े नेहरू ब्लॉक भवन में पंचायत समिति कार्यालय संचालित किया गया था। करीब आठ वर्षों तक अस्थायी व्यवस्था में काम चलने के बाद वर्ष 2023 में सवाई माधोपुर मार्ग की ओर नया पंचायत समिति भवन बनकर तैयार हुआ और बड़े उत्साह के साथ इसका लोकार्पण किया गया। उम्मीद थी कि नया भवन क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यों को मजबूती देगा, लेकिन निर्माण के कुछ ही वर्षों में सामने आई दरारों ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस कक्ष में पंचायत समिति के मुखिया विकास अधिकारी बैठते हैं, वहां भी दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। अन्य कमरों और छतों पर भी जगह-जगह क्रैक दिखाई दे रहे हैं। इससे कर्मचारियों और आमजन में भवन की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा है कि निर्माण के दौरान ठेकेदार ने मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि अधिकारियों ने दरारों वाली बिल्डिंग को हैंडओवर लेकर संचालन कैसे शुरू कर दिया। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा करता है। हाल ही में उपखंड अधिकारी जोगेंद्र सिंह ने पंचायत समिति भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन में पड़ी दरारों को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद इतनी जल्दी भवन की यह स्थिति क्यों बनी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। उन्होंने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पंचायत समिति भवन में आई दरारें केवल दीवारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गहरी दरार का संकेत भी दे रही हैं।2