महोबा जिले के पनवाड़ी वन रेंज क्षेत्र में एक तरफ जहां "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों हरे और प्रतिबंधित सागौन के पेड़ों को काटे जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बहुत बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटान की गई है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया ढुलमुल बना हुआ है और वे केवल दर्जन भर पेड़ों के ही कटने की बात कह रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अब यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित पेड़ों की कटान किसके आदेश पर की गई और इसके लिए असली जिम्मेदार कौन है। मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग तेजी से उठ रही है, क्योंकि लोग पूछ रहे हैं कि क्या 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की आड़ में हकीकत में पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है?
महोबा जिले के पनवाड़ी वन रेंज क्षेत्र में एक तरफ जहां "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों हरे और प्रतिबंधित सागौन के पेड़ों को काटे जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस वन क्षेत्र में
बहुत बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटान की गई है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया ढुलमुल बना हुआ है और वे केवल दर्जन भर पेड़ों के ही कटने की बात कह रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अब यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित पेड़ों
की कटान किसके आदेश पर की गई और इसके लिए असली जिम्मेदार कौन है। मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग तेजी से उठ रही है, क्योंकि लोग पूछ रहे हैं कि क्या 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की आड़ में हकीकत में पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है?
- महोबा के सेंगरपुरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पौधारोपण किया। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पौधारोपण कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद, संगठन की तरफ से एक पारंपरिक देसी व्यंजन स्वादिष्ट पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित किसान नेताओं ने स्वादिष्ट देसी व्यंजनों का आनंद लेते हुए संगठन की मजबूती, आपसी भाईचारे और किसानों के हितों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने मंच से किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान निकालने तथा संगठन को और अधिक सशक्त व एकजुट बनाने पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें जिला अध्यक्ष राम खिलावन शुक्ला, महिला जिला अध्यक्ष माधुरी दीक्षित, जिला मीडिया प्रभारी वेद प्रकाश नायक, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमन शर्मा, तहसील मीडिया प्रभारी हरी सिंह वर्मा, ब्लॉक मीडिया प्रभारी शिवनंदन अग्निहोत्री, ब्लॉक अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा, ब्लॉक उपाध्यक्ष कौशलेंद्र पस्तोर, जिला प्रवक्ता महेंद्र मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष ब्रजेंद्र सोनकिया, जिला उपाध्यक्ष अशोक राजपूत, तहसील अध्यक्ष मान बहादुर राजपूत, ब्लॉक सचिव नीरज शर्मा, पनवाड़ी ग्राम अध्यक्ष नरेंद्र पांडेय और बबलू नायक सहित दर्जनों किसान सदस्य शामिल थे। पूरा कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण और किसान एकता के दृढ़ संकल्प के साथ समाप्त हुआ।1
- महोबा में इस बार काम पीडब्ल्यूडी के चहेते ठेकेदार को सौंपे जाने पर गहरा रोष जताया गया है। बारिश के मौसम के बीच अपने पसंदीदा ठेकेदार को काम दिए जाने के इस फैसले पर सीधे सवाल उठाते हुए लोगों से खुद इस स्थिति को देखने की अपील की जा रही है।1
- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिला अंतर्गत राठ के मारकंडेश्वर परिसर में बुंदेलखंड राज्य बनाओ अभियान के तहत एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिससे अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग एक बार फिर मुखर हो गई है। इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत के पहुंचने से आंदोलन को नई धार मिली है। पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत ने हुंकार भरते हुए कहा कि बुंदेलखंड की बेरोजगारी और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए अलग राज्य बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब वे चैन से नहीं बैठेंगे, अपने हक के लिए आवाज बुलंद करेंगे और इस आंदोलन को और तेज करेंगे। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर बुंदेलखंड की हमेशा अनदेखी हुई है और अलग राज्य बनने से ही यहाँ के युवाओं को रोजगार तथा क्षेत्र को पहचान मिलेगी। आयोजकों ने इस मांग को लेकर जल्द ही बड़े स्तर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है।1
- तुर्का लहचूरा1
- छतरपुर जिले के सिगरामपुरा गांव में 22 वर्षीय प्रेमलाल रैकवार की संदिग्ध हत्या का मामला सामने आया है, जहां उसका शव अमरोनिया गांव के पास जंगल में जमीन में दफन मिला। मृतक के परिजनों ने उसकी पत्नी और उसके कथित प्रेमी पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। शव मिलने की सूचना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया गया है कि प्रेमलाल की शादी करीब दो महीने पहले ही हुई थी। परिजनों का आरोप है कि उसकी पत्नी ने पार्टी के बहाने उसे अपने गांव बुलाया था, जिसके बाद वह देर रात तक घर नहीं लौटा। खोजबीन के दौरान परिजनों को सबसे पहले प्रेमलाल की लावारिस बाइक मिली और फिर अमरोनिया गांव से करीब दो किलोमीटर दूर जंगल में एक नाले के पास जमीन में दबी हुई उसकी लाश बरामद हुई। मृतक की बहन रामकली रैकवार ने आरोप लगाया है कि पत्नी ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर इस हत्या को अंजाम दिया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।1
- उत्तर प्रदेश में वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 का शुभारंभ हो चुका है। इसी बड़े अभियान के अंतर्गत महोबा जिले के पनवाड़ी सीएचसी में भी इसकी शुरुआत की गई है।1
- महोबा जिले के खन्ना थाना क्षेत्र के सिरसी कला गांव में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कथित लापरवाही के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ एक निर्माणाधीन पुल के कारण बनाए गए वैकल्पिक मार्ग से गुजर रही बारातियों से भरी एक वैन उफनती श्यामा नदी के तेज बहाव में बह गई। हादसे के दौरान इस वैन में दूल्हा समेत कई बाराती सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नदी का जलस्तर बढ़ा होने के बावजूद इस वैकल्पिक मार्ग पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी बोर्ड या आवागमन रोकने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई थी। इसी वजह से वैन तेज बहाव की चपेट में आकर नदी में बहने लगी। ऐसे नाजुक वक्त में स्थानीय मुस्लिम युवकों ने असाधारण साहस का परिचय दिया और अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में उतरकर दूल्हे सहित सभी बारातियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई। इस हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माणाधीन पुल के दौरान बनाए गए वैकल्पिक मार्ग की सुरक्षा को लेकर विभाग ने घोर लापरवाही बरती, जिसके कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल सभी बाराती सुरक्षित हैं और स्थानीय लोग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1