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कल्याण दास बाबा की बगीची परमद्रा जय कालिदास बाबा की जय हनुमान जी महाराज की

10 hrs ago
user_Ved Tiwari
Ved Tiwari
डीग, भरतपुर, राजस्थान•
10 hrs ago

कल्याण दास बाबा की बगीची परमद्रा जय कालिदास बाबा की जय हनुमान जी महाराज की

More news from राजस्थान and nearby areas
  • गृह राज्य मंत्री बेढम से आदि बद्री पर्वत परिक्रमा मार्ग का विधिवत निर्माण कराए जाने की मांग , मार्ग के व्यवस्थित निर्माण से श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा । अमर दीप सैन। डीग ब्रज की आस्था के प्रमुख केंद्र आदि बद्री पर्वत की पाँचवीं परिक्रमा गुरुवार को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुई। संतों के सानिध्य में निकली इस पावन यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। परिक्रमा महंत शिवराम दास एवं पद्मश्री से सम्मानित संत रमेश बाबा के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई। संतों के सानिध्य में निकली भव्य यात्रा परिक्रमा आदि बद्री से प्रारंभ होकर नील घाटी, गदरवास, रुंध और हयातपुर होते हुए जटेरी पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया। ब्रज की गोपियों ने नृत्य-कीर्तन के साथ वातावरण को उत्सवमय बना दिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति रस में सराबोर हो गया। परिक्रमा शुक्रवार को जटेरी से प्रस्थान कर डावक पहुंचेगी। परिक्रमा मार्ग के निर्माण की उठी मांग मानमंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री एवं सचिव सुनील सिंह ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से आदि बद्री पर्वत परिक्रमा मार्ग का विधिवत निर्माण कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मार्ग के व्यवस्थित निर्माण से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और ब्रज की इस पावन धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। संतों के संघर्ष से जनआंदोलन तक वक्ताओं ने कहा कि ब्रज की आस्था, संतों के संघर्ष और बलिदान की गाथा अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। आदि बद्री पर्वत केवल एक धरोहर नहीं, बल्कि ब्रज की आत्मा है। जब इन दिव्य पर्वतों को खनन माफिया द्वारा डायनामाइट से उड़ाया जा रहा था, तब संत रमेश बाबा ने इनके संरक्षण का संकल्प लिया। मान मंदिर एवं आदि बद्री धाम के संयुक्त तत्वावधान में लंबा आंदोलन चला, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में इन पर्वतों को आरक्षित वन घोषित किया गया। इस आंदोलन में संत विजय बाबा ने आत्मदाह कर बलिदान दिया था। उनकी स्मृति में यह परिक्रमा निरंतर आयोजित की जा रही है। आस्था, संरक्षण और संकल्प का संगम पाँचवीं परिक्रमा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि ब्रज की पावन धरा पर आस्था और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। संतों के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान न केवल धार्मिक चेतना को जागृत कर रहा है, बल्कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा का भी संकल्प दोहरा रहा है।
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    गृह राज्य मंत्री बेढम से आदि बद्री पर्वत परिक्रमा मार्ग का विधिवत निर्माण कराए जाने की मांग ,
मार्ग के व्यवस्थित निर्माण से श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा ।
अमर दीप सैन। डीग ब्रज की आस्था के प्रमुख केंद्र आदि बद्री पर्वत की पाँचवीं परिक्रमा गुरुवार को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुई। संतों के सानिध्य में निकली इस पावन यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। परिक्रमा महंत शिवराम दास एवं पद्मश्री से सम्मानित संत रमेश बाबा के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई।
संतों के सानिध्य में निकली भव्य यात्रा
परिक्रमा आदि बद्री से प्रारंभ होकर नील घाटी, गदरवास, रुंध और हयातपुर होते हुए जटेरी पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया। ब्रज की गोपियों ने नृत्य-कीर्तन के साथ वातावरण को उत्सवमय बना दिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति रस में सराबोर हो गया।
परिक्रमा शुक्रवार को जटेरी से प्रस्थान कर डावक पहुंचेगी।
परिक्रमा मार्ग के निर्माण की उठी मांग
मानमंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री एवं सचिव सुनील सिंह ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से आदि बद्री पर्वत परिक्रमा मार्ग का विधिवत निर्माण कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मार्ग के व्यवस्थित निर्माण से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और ब्रज की इस पावन धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।
संतों के संघर्ष से जनआंदोलन तक
वक्ताओं ने कहा कि ब्रज की आस्था, संतों के संघर्ष और बलिदान की गाथा अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। आदि बद्री पर्वत केवल एक धरोहर नहीं, बल्कि ब्रज की आत्मा है।
जब इन दिव्य पर्वतों को खनन माफिया द्वारा डायनामाइट से उड़ाया जा रहा था, तब संत रमेश बाबा ने इनके संरक्षण का संकल्प लिया। मान मंदिर एवं आदि बद्री धाम के संयुक्त तत्वावधान में लंबा आंदोलन चला, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में इन पर्वतों को आरक्षित वन घोषित किया गया।
इस आंदोलन में संत विजय बाबा ने आत्मदाह कर बलिदान दिया था। उनकी स्मृति में यह परिक्रमा निरंतर आयोजित की जा रही है।
आस्था, संरक्षण और संकल्प का संगम
पाँचवीं परिक्रमा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि ब्रज की पावन धरा पर आस्था और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। संतों के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान न केवल धार्मिक चेतना को जागृत कर रहा है, बल्कि प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा का भी संकल्प दोहरा रहा है।
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • जय कालिदास बाबा की जय हनुमान जी महाराज की
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    जय कालिदास बाबा की जय हनुमान जी महाराज की
    user_Ved Tiwari
    Ved Tiwari
    डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
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    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Govardhan, Mathura•
    7 hrs ago
  • जिले से खबर रवि कुमार 9982916093 कामां -डीग जिले के कामा कस्बे में पहाड़ी रोड सैनी छात्रावास के पास स्थित एक रेडीमेड के नए खुले शोरूम में अज्ञात चोरों ने हाथ साफ कर दिया लाखों रुपए के रेडीमेड के कपड़े चोरी कर ले गए अज्ञात चोरों ने दुकान का शटर तोड़कर दुकान में प्रवेश किया और करीब चार-पांच लाख रुपए के रेडीमेड के कपड़े चोरी कर रफूचक्कर हो गए शोरूम के मालिक गांव बिलग निवासी इम्तियाज़ खान ने बताया कि उसने कामां कस्बा में सैनी छात्रावास के पास नया रेडीमेड गारमेंट का शोरूम खोला था 21 फरवरी को उद्घाटन होने के बाद 6-7 लाख रुपए कीमत के रेडीमेड कपड़े दुकान में बिक्री के लिए रखे थे देर रा५त को अज्ञात चोर दुकान का शटर तोड़कर करीब चार-पांच लाख रुपए के रेडीमेड कपड़े चोरी कर ले गए घटना की सूचना कामां थाना पुलिस को दी गई है
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    जिले से खबर 
रवि कुमार 9982916093
कामां -डीग जिले के कामा कस्बे में पहाड़ी रोड  सैनी छात्रावास के पास स्थित एक रेडीमेड के नए खुले शोरूम में अज्ञात चोरों ने हाथ साफ कर दिया लाखों रुपए के रेडीमेड के कपड़े चोरी कर ले गए अज्ञात चोरों ने दुकान का शटर तोड़कर दुकान में प्रवेश किया और करीब चार-पांच लाख रुपए के रेडीमेड के कपड़े चोरी कर रफूचक्कर हो गए 
शोरूम के मालिक गांव बिलग निवासी इम्तियाज़ खान ने बताया कि उसने कामां कस्बा में सैनी छात्रावास के पास नया रेडीमेड गारमेंट का शोरूम खोला था 21 फरवरी को उद्घाटन होने के बाद 6-7 लाख रुपए कीमत के रेडीमेड कपड़े दुकान में बिक्री के लिए रखे थे देर रा५त को अज्ञात चोर दुकान का शटर तोड़कर करीब चार-पांच लाख रुपए के रेडीमेड कपड़े चोरी कर ले गए घटना की सूचना कामां थाना पुलिस को दी गई है
    user_Ravindra kumar(Ravi kumar)
    Ravindra kumar(Ravi kumar)
    कामाँ, भरतपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • Post by News 93
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    Post by News 93
    user_News 93
    News 93
    Court reporter Kaman, Bharatpur•
    22 hrs ago
  • धर्म नगरी श्री कृष्ण जन्म स्थान में आज होली का भव्य आयोजन किया गया, जहां श्रद्धा, रंग और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान के दरबार में रंगों की होली खेली और भक्ति रस में सराबोर हो गए। रंगों के इस पावन उत्सव में लठमार होली, गुलाल होली और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को पूरी तरह कृष्णमय बना दिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, ढोल-नगाड़ों की थाप और होली गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण फूलों की होली रही, जिसमें पुजारियों और सेवायतों ने भगवान को पुष्प अर्पित किए और फिर श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। “यहां आकर ऐसा लगता है जैसे सच में द्वापर युग की होली जीवंत हो गई हो। भगवान के साथ होली खेलने का आनंद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।” मान्यता है कि मथुरा के ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ होली खेली थी और तभी से यहां यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। यही वजह है कि हर साल इस उत्सव में शामिल होने देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। “यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और परंपरा का प्रतीक है। हमारी कोशिश रहती है कि सभी भक्त सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन और होली का आनंद ले सकें।” पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की संयुक्त व्यवस्था से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भक्ति, रंग और उल्लास से सराबोर श्री कृष्ण जन्म स्थान की यह होली एक बार फिर साबित कर गई कि ब्रज की होली केवल त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है, जो हर साल नई ऊर्जा और आस्था के साथ मनाई जाती है।
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    धर्म नगरी श्री कृष्ण जन्म स्थान में आज होली का भव्य आयोजन किया गया, जहां श्रद्धा, रंग और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान के दरबार में रंगों की होली खेली और भक्ति रस में सराबोर हो गए। रंगों के इस पावन उत्सव में लठमार होली, गुलाल होली और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को पूरी तरह कृष्णमय बना दिया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, ढोल-नगाड़ों की थाप और होली गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण फूलों की होली रही, जिसमें पुजारियों और सेवायतों ने भगवान को पुष्प अर्पित किए और फिर श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। “यहां आकर ऐसा लगता है जैसे सच में द्वापर युग की होली जीवंत हो गई हो। भगवान के साथ होली खेलने का आनंद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।” मान्यता है कि मथुरा के ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ होली खेली थी और तभी से यहां यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। यही वजह है कि हर साल इस उत्सव में शामिल होने देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। “यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और परंपरा का प्रतीक है। हमारी कोशिश रहती है कि सभी भक्त सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन और होली का आनंद ले सकें।” पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की संयुक्त व्यवस्था से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भक्ति, रंग और उल्लास से सराबोर श्री कृष्ण जन्म स्थान की यह होली एक बार फिर साबित कर गई कि ब्रज की होली केवल त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है, जो हर साल नई ऊर्जा और आस्था के साथ मनाई जाती है।
    user_Murli Thakur Reporter
    Murli Thakur Reporter
    पत्रकार मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    6 min ago
  • मथुरा जनपद के कोसीकलां के बठेन गेट स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल में हुआ वार्षिक उत्सव का आयोजन जिसमें कोसीकला के गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में पहुंचे
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    मथुरा जनपद के कोसीकलां के बठेन गेट स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल में हुआ वार्षिक उत्सव का आयोजन जिसमें कोसीकला के गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में पहुंचे
    user_Lokesh Garg
    Lokesh Garg
    छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    29 min ago
  • डीग में राजस्थान सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत पंच गौरव सिलिकोसिस शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर शुक्रवार को जिला अस्पताल डीग में संपन्न हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य मूर्तिकारी (स्टोन कार्विंग) से जुड़े श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना था। इस विशेष शिविर का लक्ष्य ODOP स्टोन कार्विंग कार्य में लगे श्रमिकों को सिलिकोसिस जैसी गंभीर व्यावसायिक बीमारी से बचाना था। इसमें समय पर जांच, स्वास्थ्य सुधार और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता पर जोर दिया गया। शिविर में कुल आठ मूर्तिकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन डीग, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र डीग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग डीग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। शिविर के दौरान मूर्तिकारों की सिलिकोसिस जांच की गई और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र सिंह फौजदार ने उपस्थित श्रमिकों को सिलिकोसिस रोग के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे मे विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्थर तराशने के दौरान निकलने वाली धूल से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों का नियमित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। शिविर में मूर्तिकारों को टूल-सुरक्षा किट भी वितरित की गई। इस किट में छैनी, हथौड़ा, लेदर के जूते, सुरक्षा चश्मा और मूर्ति काटने के ब्लेड जैसे आवश्यक उपकरण शामिल थे। इस पहल से न केवल श्रमिकों की कार्य-सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्थानीय स्टोन कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता और संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कार्यक्रम ODOP योजना के तहत स्थानीय कारीगरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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    डीग में राजस्थान सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत पंच गौरव सिलिकोसिस शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर शुक्रवार को जिला अस्पताल डीग में संपन्न हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य मूर्तिकारी (स्टोन कार्विंग) से जुड़े श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना था।
इस विशेष शिविर का लक्ष्य ODOP स्टोन कार्विंग कार्य में लगे श्रमिकों को सिलिकोसिस जैसी गंभीर व्यावसायिक बीमारी से बचाना था। इसमें समय पर जांच, स्वास्थ्य सुधार और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता पर जोर दिया गया। शिविर में कुल आठ मूर्तिकारों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन डीग, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र डीग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग डीग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। शिविर के दौरान मूर्तिकारों की सिलिकोसिस जांच की गई और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।
जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र सिंह फौजदार ने उपस्थित श्रमिकों को सिलिकोसिस रोग के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे मे विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्थर तराशने के दौरान निकलने वाली धूल से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों का नियमित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
शिविर में मूर्तिकारों को टूल-सुरक्षा किट भी वितरित की गई। इस किट में छैनी, हथौड़ा, लेदर के जूते, सुरक्षा चश्मा और मूर्ति काटने के ब्लेड जैसे आवश्यक उपकरण शामिल थे। इस पहल से न केवल श्रमिकों की कार्य-सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्थानीय स्टोन कार्विंग उत्पादों की गुणवत्ता और संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह कार्यक्रम ODOP योजना के तहत स्थानीय कारीगरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
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