डिंडोरी जिले के शाहपुरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलगांव में लगातार हो रही बारिश और पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने से मुख्य सड़क मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जलभराव होने के कारण ग्रामीणों, राहगीरों और स्कूली छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा लोग जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। शनिवार सुबह लगभग 10 बजे ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा नाली निर्माण के बाद उसे ऊपर से बंद कर दिया गया, जिसके चलते बरसात का पानी पुलिया के ऊपर सड़क पर जमा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या के संबंध में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराकर सड़क को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है।
डिंडोरी जिले के शाहपुरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलगांव में लगातार हो रही बारिश और पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने से मुख्य सड़क मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जलभराव होने के कारण ग्रामीणों, राहगीरों और स्कूली छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा लोग जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। शनिवार सुबह लगभग 10 बजे ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा नाली निर्माण के बाद उसे ऊपर से बंद कर दिया गया, जिसके चलते बरसात का पानी पुलिया के ऊपर सड़क पर जमा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या के संबंध में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराकर सड़क को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है।
- डिंडोरी जिले के शाहपुरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलगांव में लगातार हो रही बारिश और पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने से मुख्य सड़क मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है। सड़क पर जलभराव होने के कारण ग्रामीणों, राहगीरों और स्कूली छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा लोग जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। शनिवार सुबह लगभग 10 बजे ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा नाली निर्माण के बाद उसे ऊपर से बंद कर दिया गया, जिसके चलते बरसात का पानी पुलिया के ऊपर सड़क पर जमा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या के संबंध में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराकर सड़क को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है।4
- उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 13 दिनों तक चले सघन खोज और निगरानी अभियान के बाद एक कॉलरयुक्त मादा बाघिन का खराब हो चुका रेडियो कॉलर सुरक्षित रूप से हटाकर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है। टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय ने इसे वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। अनुपम सहाय के अनुसार, 1 जुलाई 2026 की दोपहर करीब 2 बजे के बाद बाघिन के रेडियो कॉलर से जीपीएस और वीएचएफ सिग्नल मिलने बंद हो गए थे। लगातार बारिश और घने जंगल के कारण शुरुआत में सफलता नहीं मिली, जिसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के मार्गदर्शन में एक विशेष खोज दल गठित किया गया। करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन में वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के डॉ. प्रशांत देशमुख, प्रशिक्षित हाथियों, डॉग स्क्वाड और ट्रैप कैमरों की मदद ली गई। अंततः 12 जुलाई को पदचिह्नों के आधार पर बाघिन को उसके होम रेंज में सुरक्षित और स्वस्थ अवस्था में खोज निकाला गया, जहाँ जांच में उसका रेडियो कॉलर पूरी तरह खराब पाया गया। जरूरी अनुमति मिलने के बाद धमोखर बफर के बरबसपुर बीट में दो दिनों तक सघन निगरानी की गई और 25 जुलाई को विशेषज्ञों की टीम ने बाघिन को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज करके उसका कॉलर हटा दिया। स्वास्थ्य परीक्षण में पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने और निर्धारित प्रोटोकॉल पूरा होने के बाद बाघिन को होश में लाकर जंगल में छोड़ दिया गया। इस पूरे सफल अभियान में 63 अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम नामक प्रशिक्षित हाथियों तथा उनके महावतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।2
- मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की खाक छानने के बाद एक मादा बाघिन का खराब हो चुका रेडियो कॉलर सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। धमोखर बफर के बरबसपुर बीट अंतर्गत पीएफ-126, बरबसपुर-झांझहार क्षेत्र में बाघिन को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज कर उसका कॉलर हटाया गया। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे पूरी तरह होश में लाया गया और उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार बाघिन का रेडियो कॉलर कई दिनों से काम नहीं कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। इसके बाद प्रशिक्षित हाथियों, वन अमले, वन्यजीव विशेषज्ञों, ट्रैप कैमरों, वीएचएफ उपकरणों और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से सघन खोज अभियान चलाया गया। लगातार बारिश की चुनौतियों के बीच टीम ने 25 जुलाई को बाघिन को उसके होम रेंज में खोज निकाला। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति लेकर दो दिनों की गहन सर्च के बाद शनिवार को यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अभियान में क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित 63 अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। इसमें प्रशिक्षित हाथी लक्ष्मण, सूर्या, रामा व श्याम और उनके महावतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि बांधवगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। खराब कॉलर से बाघिन की निगरानी प्रभावित हो रही थी, इसलिए सभी अनुमतियों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यह अभियान चलाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बाघिन की सुरक्षा व स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया और कॉलर हटाने के बाद वह सामान्य रूप से अपने प्राकृतिक आवास की ओर चली गई।3
- मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर स्थित बरबसपुर बीट में एक कॉलरयुक्त मादा बाघिन को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर उसका खराब हो चुका रेडियो कॉलर सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। बाघिन का रेडियो कॉलर कई दिनों से काम नहीं कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन मिलना बंद हो गई थी। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे पूरी तरह होश में लाकर उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया है, जहां वह सामान्य रूप से जंगल की ओर चली गई। रेडियो कॉलर का सिग्नल बंद होने के बाद ट्रैप कैमरों, वीएचएफ उपकरणों और प्रशिक्षित हाथियों की मदद से करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सघन खोज अभियान चलाया गया था। लगातार बारिश जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टीम ने 25 जुलाई को बाघिन को उसके होम रेंज में पूरी तरह स्वस्थ खोज निकाला। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति लेकर शनिवार को पीएफ-126, बरबसपुर-झांझहार क्षेत्र में यह अभियान पूरा किया गया। इस कार्रवाई में क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक धमोखर बफर, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित 63 अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। इसमें प्रशिक्षित हाथियों लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम तथा उनके महावतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि बांधवगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कॉलर खराब होने से बाघिन की निगरानी प्रभावित हो रही थी, इसलिए सभी आवश्यक अनुमतियों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यह अभियान चलाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बाघिन की सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा गया।3
- मध्य प्रदेश के उमरिया में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ हुई कथित बर्बरता और दुर्व्यवहार के विरोध में जिला युवा कांग्रेस ने बुधवार को उग्र प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने वालों का दमन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस ने राहुल गांधी के साथ हुए दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। युवा कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर देश के कई अन्य हिस्सों में भी लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है।1
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इसे देश के युवाओं की बड़ी कामयाबी और लोकतंत्र की जीत बताया गया है। इस घटनाक्रम को लेकर कहा गया है कि देश के युवाओं ने आखिरकार यह कर दिखाया है और यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की जीत है। C J P की ओर से इस मोड़ को युवाओं के प्रयासों की सफलता के रूप में रेखांकित किया गया है।1
- मानपुर नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 7 में पहली ही तेज बारिश ने विकास कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। पूरे नगर के वर्षा जल की निकासी के लिए बनाई गई नाली पानी का दबाव नहीं झेल सकी, जिससे सड़कों पर गंदा पानी, कीचड़ और कचरा फैल गया है। रहवासी दुर्गंध और जलभराव के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं और उनका कहना है कि "भुगतान हो गया, अब भुगत रहे हम।" रहवासियों का आरोप है कि नाली का निर्माण संविदाकार ज्ञानेंद्र सिंह गहरवार के माध्यम से कराया गया, जिसमें नगर परिषद में अकाउंटेंट के सहायक शिवम गुप्ता ने समन्वय और भुगतान प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाई। लोगों के अनुसार, निर्माण में कई जगहों पर एक ओर दीवार तक नहीं बनाई गई और सीधे सीसी सड़क पर स्लैब रखकर ढंक दिया गया। बस स्टैंड सहित नगर के बड़े हिस्से का पानी इसी मार्ग से निकलता है, इसके बावजूद नाली की चौड़ाई महज एक फीट या उससे कम रखी गई। इस मामले में नगर परिषद के सीएमओ और उपयंत्री की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि निरीक्षण के दौरान इतनी गंभीर खामियां नजर क्यों नहीं आईं। रहवासियों का कहना है कि निर्माण के दौरान चौड़ाई और गुणवत्ता को लेकर कई बार आपत्तियां जताई गईं, लेकिन जिम्मेदार तमाशबीन बने रहे। अब बारिश का पानी और नगर की गंदगी सीधे सोनी मोहल्ला पहुंच रही है। रहवासियों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) मानपुर से नवनिर्मित नाली का तत्काल स्थलीय एवं तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने स्वीकृत स्टीमेट, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों, उपयंत्री और संविदाकार के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है।3
- उमरिया के बिरसिंहपुर पाली में सरस्वती शिशु मंदिर के पास एक पीपल के पेड़ पर चढ़ते ही बंदर को जोरदार करंट लग गया और वह अचेत होकर नीचे गिर पड़ा। घटना शाम तकरीबन 7:30 बजे की है। स्थानीय लोगों ने जब बंदर को इस हालत में देखा तो उस पर पानी डाला, जिसके बाद उसे थोड़ा होश आया और वह किनारे जाकर बैठ गया। हालांकि, उसकी हालत अभी भी सही नहीं है और वह खुद को संभाल नहीं पा रहा है। पेड़ में करंट कहाँ से आया, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बंदर जैसे ही उछलकर पेड़ पर गया, वह तुरंत अचेत होकर नीचे आ गिरा, जिससे साफ़ जाहिर होता है कि पेड़ में करंट था। किसी की लापरवाही का खामियाजा इस बेजुबान जीव को भुगतना पड़ा है। बरसात के मौसम में बिजली के खंभों और खास तौर पर हरे-भरे पेड़ों से दूर रहने तथा सतर्क रहने की सलाह दी गई है।1