हाथीदह स्थित राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की तत्परता से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने समय रहते व्यक्ति को नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरांची पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि भर्ती कराने के बावजूद करीब एक घंटे तक मरीज का समुचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सा कर्मियों की ओर से आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई गई। News Mirror को जानकारी मिलने और मीडिया प्रतिनिधियों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मरीज की औपचारिक जांच व इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक उसकी स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो चुकी थी। बाद में खानापूर्ति करते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में जब अस्पताल के चिकित्सकों से देरी और लापरवाही को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बात को टालने की कोशिश की, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाविकों और बस चालक ने समय पर मदद न की होती, तो व्यक्ति की जान जा सकती थी, जबकि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति और खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने और आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद जमीनी स्तर पर चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लोगों ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।
हाथीदह स्थित राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की तत्परता से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने समय रहते व्यक्ति को नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरांची पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि भर्ती कराने के बावजूद करीब एक घंटे तक मरीज का समुचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सा कर्मियों की ओर से आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई गई। News Mirror को जानकारी मिलने और मीडिया प्रतिनिधियों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मरीज की औपचारिक जांच व इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक उसकी स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो चुकी थी। बाद में खानापूर्ति करते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में जब अस्पताल के चिकित्सकों से देरी और लापरवाही को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बात को टालने की कोशिश की, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाविकों और बस चालक ने समय पर मदद न की होती, तो व्यक्ति की जान जा सकती थी, जबकि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति और खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने और आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद जमीनी स्तर पर चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लोगों ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।
- IPL 2026 प्लेऑफ की शुरुआत हो चुकी है और आज सबसे बड़ा मुकाबला—क्वालीफायर-1—खेला जाएगा। धर्मशाला के HPCA स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) आमने-सामने होंगी। यह अहम मैच तय करेगा कि कौन सी टीम सीधे फाइनल में प्रवेश करेगी और कौन सी टीम को खिताबी जंग में पहुँचने के लिए एक और मौका मिलेगा। एक तरफ, RCB अपनी चोटों और टीम कॉम्बिनेशन को लेकर चिंतित है, वहीं शुभमन गिल की अगुवाई वाली गुजरात टाइटंस पूरी फॉर्म में नजर आ रही है। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में सबसे बड़ा ट्विस्ट मौसम का है। धर्मशाला में बारिश की संभावना जताई जा रही है, जो पूरे मैच का खेल बदल सकती है और मुकाबले के नतीजे पर सीधा असर डाल सकती है। इसी के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या RCB फाइनल में पहुँच पाएगी, या GT अपना दबदबा कायम रखेगी, और क्या बारिश इस रोमांचक भिड़ंत के पूरे खेल को बिगाड़ देगी।1
- शेखपुरा शहर के गिरीहिंडा मोहल्ला स्थित खीरी पोखर में सौंदर्यीकरण कार्य करा रहे संवेदक पर बिजली विभाग को चूना लगाने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि संवेदक ने बिना किसी वैध बिजली कनेक्शन के ही मोटर लगाकर पूरे तालाब का पानी सुखा दिया, जिससे बिजली विभाग के सरकारी राजस्व को हजारों रुपये की भारी क्षति पहुँची है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खीरी पोखर के सौंदर्यीकरण कार्य पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इस कार्य के दौरान तालाब से पानी निकालने के लिए बड़े मोटर पंप का उपयोग किया गया, जिसके लिए न तो कोई विभागीय अनुमति ली गई और न ही बिजली कनेक्शन। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि एक ओर आम उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी के लिए कड़ी कार्रवाई की जाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े कार्यों में खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।1
- बिहार के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत हाथीदह थाना क्षेत्र में राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की मुस्तैदी से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने साहस दिखाते हुए उसे नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने घायल व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचते ही स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि लगभग एक घंटे तक व्यक्ति का उचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत और अधिक बिगड़ गई। परिजनों और स्थानीय निवासियों ने चिकित्सकों पर उदासीनता बरतने का गंभीर आरोप लगाया। बाद में, औपचारिकता पूरी करने के बाद मरीज को बेहतर उपचार के लिए पटना पीएमसीएच भेज दिया गया। जब इस मामले में चिकित्सकों से सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से कतराते हुए बात टालने की कोशिश की। इस पूरी घटना ने एक बार फिर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद, चिकित्सकीय लापरवाही के कारण कई मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।1
- राजस्थान के जैसलमेर से News28 India की ग्राउंड रिपोर्ट में 'गौमाता' की दर्दनाक बदहाली उजागर हुई है, जहां कचरे के ढेर पर दर्जनों गायें बेदम होकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही हैं। ये तस्वीरें उन सरकारों के गौभक्ति के दावों की धज्जियां उड़ाती हैं, जो सनातन, धर्म और गौवंश के नाम पर सत्ता की कुर्सियों तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में गायों को केवल 'वोटबैंक' के रूप में इस्तेमाल करती हैं। वीडियो में मीलों तक फैले प्लास्टिक, गंदगी और कूड़े के अंबार के बीच कई गायों के कंकाल नजर आ रहे हैं, जबकि अन्य भूख और बीमारी से तड़प रही हैं। भारत की संस्कृति में पूजनीय मानी जाने वाली ये गायें अब भोजन की तलाश में जहरीला प्लास्टिक और कचरा चबाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी की मुख्य वजह सरकारी नीतियां और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूख है। सदियों से स्थानीय पशुपालकों के मवेशियों के लिए चरागाह रही 'ओरण' (पवित्र देव-भूमि) और 'गोचर' (चरागाह) भूमि को 'हरित ऊर्जा' और 'विकास' के नाम पर गुपचुप तरीके से बड़े उद्योगपतियों और सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन चरागाहों के चारों ओर ऊंची बाड़ लगाए जाने से मवेशियों के लिए प्राकृतिक घास और पानी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया, जिसके चलते अपनी पारंपरिक जमीन से खदेड़ी गई गायें अब शहरों के बाहर डंपिंग यार्ड्स में कचरा खाने पर विवश हैं। News28 India ने इस बदहाली पर धर्म रक्षक और गौ रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं से जवाब मांगा है। जब गायों के लिए चरने की जमीन और घास ही छीन ली गई, तो कागजों पर चल रही "गौ संरक्षण" की योजनाएं और बड़े-बड़े नारे निरर्थक साबित हुए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए सनातन और आस्था को केवल राजनीतिक हथियार बनाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने की बारी आने पर पूरी व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। News28 India ने तीखा सवाल किया है कि आस्था के नाम पर जनता से छल करने वाली व्यवस्था आखिर इन बेजुबानों की मौत का हिसाब कब देगी, और कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को इस दर्दनाक मंजर को देखकर अब शर्म से डूब मरना चाहिए।1
- पत्रकार नेता अविनाश भट्ट के नेतृत्व में बेगूसराय के हड़ताली चौक पर एक शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि न्याय नहीं मिला, तो दिनकर की धरती बेगूसराय का ताप राजधानी को झेलना पड़ेगा।1
- तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक दस साल की बच्ची के रेप और निर्मम हत्या के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। इस हत्याकांड को लेकर विजय सरकार निशाने पर है और विपक्ष लगातार टीवीके सरकार पर हमला बोल रहा है, वहीं पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी बीच, इस बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों के ठहाके मारकर हंसने का एक वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा है। वायरल वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी और वेस्ट ज़ोन के आईजी सहित तीन पुलिस अधिकारी मीडिया से बातचीत करते समय मुस्कुराते और ठहाके लगाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे देश में बच्ची की बेरहमी से की गई हत्या को लेकर रोष है। लापता हुई दस साल की यह बच्ची अपने घर के बाहर खेलते समय अचानक गायब हो गई थी और बाद में उसका शव एक तालाब के पास मिला था। पुलिस अधिकारियों की इस असंवेदनशीलता को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने गंभीर अपराध पर बात करते समय अधिकारी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखा रहे हैं। एक यूजर ने आईपीएस अफसरों की शिक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्हें असंवेदनशील करार दिया, जबकि अन्य ने इसे 'शर्मनाक' बताया। अभिषेक नामक एक यूजर ने लिखा कि अधिकारियों के लिए यह महज एक 'केस' है, इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा और वे हंस रहे हैं। लोग इन पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1
- हाथीदह स्थित राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की तत्परता से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने समय रहते व्यक्ति को नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरांची पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि भर्ती कराने के बावजूद करीब एक घंटे तक मरीज का समुचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सा कर्मियों की ओर से आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई गई। News Mirror को जानकारी मिलने और मीडिया प्रतिनिधियों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मरीज की औपचारिक जांच व इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक उसकी स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो चुकी थी। बाद में खानापूर्ति करते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में जब अस्पताल के चिकित्सकों से देरी और लापरवाही को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बात को टालने की कोशिश की, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाविकों और बस चालक ने समय पर मदद न की होती, तो व्यक्ति की जान जा सकती थी, जबकि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति और खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने और आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद जमीनी स्तर पर चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लोगों ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।1
- सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल लेना छोड़कर अमेरिका से महंगा तेल खरीद रहा है, और यदि ऐसा है तो इसके पीछे असली वजह क्या है। यह वीडियो भारत की तेल राजनीति और वैश्विक कूटनीति का पूरा सच सामने लाने का दावा करता है। वीडियो में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध, रुपये-रूबल व्यापार और शिपिंग-बीमा के खर्चों का भारत की तेल नीति पर क्या असर पड़ता है। इसमें गहराई से बताया जाएगा कि कैसे ये कारक देश की क्रूड ऑयल खरीदने की रणनीति को प्रभावित करते हैं। यह भी बताया जाएगा कि भारत अपने "नेशनल इंटरेस्ट" को ध्यान में रखते हुए किस तरह हर देश से संतुलन बनाकर तेल खरीदता है। इसका अर्थ यह है कि भारत न तो रूस का अंध समर्थन करता है और न ही अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहता है। यह पूरी कहानी आसान भाषा में, गहराई के साथ और सच्चाई के करीब बताई जाएगी, और दर्शकों से अपनी राय कमेंट में देने का आग्रह किया गया है।1
- राजगीर में इन दिनों मलमास को लेकर एक भव्य मेले का आयोजन किया गया है, जिसमें कई झूलों के साथ-साथ थिएटर और सर्कस भी बुलाए गए हैं। इसी दौरान बीते दिन एक दर्दनाक घटना सामने आई। बताया गया कि दो भाई झूले पर चढ़े थे, और छोटे भाई ने अपने बड़े भाई को झूले से गिरते हुए देखा। युवक की मौके पर ही मौत हो गई।1