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राजस्थान के जैसलमेर से News28 India की ग्राउंड रिपोर्ट में 'गौमाता' की दर्दनाक बदहाली उजागर हुई है, जहां कचरे के ढेर पर दर्जनों गायें बेदम होकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही हैं। ये तस्वीरें उन सरकारों के गौभक्ति के दावों की धज्जियां उड़ाती हैं, जो सनातन, धर्म और गौवंश के नाम पर सत्ता की कुर्सियों तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में गायों को केवल 'वोटबैंक' के रूप में इस्तेमाल करती हैं। वीडियो में मीलों तक फैले प्लास्टिक, गंदगी और कूड़े के अंबार के बीच कई गायों के कंकाल नजर आ रहे हैं, जबकि अन्य भूख और बीमारी से तड़प रही हैं। भारत की संस्कृति में पूजनीय मानी जाने वाली ये गायें अब भोजन की तलाश में जहरीला प्लास्टिक और कचरा चबाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी की मुख्य वजह सरकारी नीतियां और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूख है। सदियों से स्थानीय पशुपालकों के मवेशियों के लिए चरागाह रही 'ओरण' (पवित्र देव-भूमि) और 'गोचर' (चरागाह) भूमि को 'हरित ऊर्जा' और 'विकास' के नाम पर गुपचुप तरीके से बड़े उद्योगपतियों और सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन चरागाहों के चारों ओर ऊंची बाड़ लगाए जाने से मवेशियों के लिए प्राकृतिक घास और पानी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया, जिसके चलते अपनी पारंपरिक जमीन से खदेड़ी गई गायें अब शहरों के बाहर डंपिंग यार्ड्स में कचरा खाने पर विवश हैं। News28 India ने इस बदहाली पर धर्म रक्षक और गौ रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं से जवाब मांगा है। जब गायों के लिए चरने की जमीन और घास ही छीन ली गई, तो कागजों पर चल रही "गौ संरक्षण" की योजनाएं और बड़े-बड़े नारे निरर्थक साबित हुए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए सनातन और आस्था को केवल राजनीतिक हथियार बनाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने की बारी आने पर पूरी व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। News28 India ने तीखा सवाल किया है कि आस्था के नाम पर जनता से छल करने वाली व्यवस्था आखिर इन बेजुबानों की मौत का हिसाब कब देगी, और कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को इस दर्दनाक मंजर को देखकर अब शर्म से डूब मरना चाहिए।

4 hrs ago
user_News 28 India
News 28 India
Doctor Matihani, Begusarai•
4 hrs ago

राजस्थान के जैसलमेर से News28 India की ग्राउंड रिपोर्ट में 'गौमाता' की दर्दनाक बदहाली उजागर हुई है, जहां कचरे के ढेर पर दर्जनों गायें बेदम होकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही हैं। ये तस्वीरें उन सरकारों के गौभक्ति के दावों की धज्जियां उड़ाती हैं, जो सनातन, धर्म और गौवंश के नाम पर सत्ता की कुर्सियों तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में गायों को केवल 'वोटबैंक' के रूप में इस्तेमाल करती हैं। वीडियो में मीलों तक फैले प्लास्टिक, गंदगी और कूड़े के अंबार के बीच कई गायों के कंकाल नजर आ रहे हैं, जबकि अन्य भूख और बीमारी से तड़प रही हैं। भारत की संस्कृति में पूजनीय मानी जाने वाली ये गायें अब भोजन की तलाश में जहरीला प्लास्टिक और कचरा चबाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी की मुख्य वजह सरकारी नीतियां और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूख है। सदियों से स्थानीय पशुपालकों के मवेशियों के लिए चरागाह रही 'ओरण' (पवित्र देव-भूमि) और 'गोचर' (चरागाह) भूमि को 'हरित ऊर्जा' और 'विकास' के नाम पर गुपचुप तरीके से बड़े उद्योगपतियों और सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन चरागाहों के चारों ओर ऊंची बाड़ लगाए जाने से मवेशियों के लिए प्राकृतिक घास और पानी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया, जिसके चलते अपनी पारंपरिक जमीन से खदेड़ी गई गायें अब शहरों के बाहर डंपिंग यार्ड्स में कचरा खाने पर विवश हैं। News28 India ने इस बदहाली पर धर्म रक्षक और गौ रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं से जवाब मांगा है। जब गायों के लिए चरने की जमीन और घास ही छीन ली गई, तो कागजों पर चल रही "गौ संरक्षण" की योजनाएं और बड़े-बड़े नारे निरर्थक साबित हुए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए सनातन और आस्था को केवल राजनीतिक हथियार बनाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने की बारी आने पर पूरी व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। News28 India ने तीखा सवाल किया है कि आस्था के नाम पर जनता से छल करने वाली व्यवस्था आखिर इन बेजुबानों की मौत का हिसाब कब देगी, और कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को इस दर्दनाक मंजर को देखकर अब शर्म से डूब मरना चाहिए।

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  • राजस्थान के जैसलमेर से News28 India की ग्राउंड रिपोर्ट में 'गौमाता' की दर्दनाक बदहाली उजागर हुई है, जहां कचरे के ढेर पर दर्जनों गायें बेदम होकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही हैं। ये तस्वीरें उन सरकारों के गौभक्ति के दावों की धज्जियां उड़ाती हैं, जो सनातन, धर्म और गौवंश के नाम पर सत्ता की कुर्सियों तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में गायों को केवल 'वोटबैंक' के रूप में इस्तेमाल करती हैं। वीडियो में मीलों तक फैले प्लास्टिक, गंदगी और कूड़े के अंबार के बीच कई गायों के कंकाल नजर आ रहे हैं, जबकि अन्य भूख और बीमारी से तड़प रही हैं। भारत की संस्कृति में पूजनीय मानी जाने वाली ये गायें अब भोजन की तलाश में जहरीला प्लास्टिक और कचरा चबाने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी की मुख्य वजह सरकारी नीतियां और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूख है। सदियों से स्थानीय पशुपालकों के मवेशियों के लिए चरागाह रही 'ओरण' (पवित्र देव-भूमि) और 'गोचर' (चरागाह) भूमि को 'हरित ऊर्जा' और 'विकास' के नाम पर गुपचुप तरीके से बड़े उद्योगपतियों और सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन चरागाहों के चारों ओर ऊंची बाड़ लगाए जाने से मवेशियों के लिए प्राकृतिक घास और पानी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया, जिसके चलते अपनी पारंपरिक जमीन से खदेड़ी गई गायें अब शहरों के बाहर डंपिंग यार्ड्स में कचरा खाने पर विवश हैं। News28 India ने इस बदहाली पर धर्म रक्षक और गौ रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं से जवाब मांगा है। जब गायों के लिए चरने की जमीन और घास ही छीन ली गई, तो कागजों पर चल रही "गौ संरक्षण" की योजनाएं और बड़े-बड़े नारे निरर्थक साबित हुए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए सनातन और आस्था को केवल राजनीतिक हथियार बनाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने की बारी आने पर पूरी व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। News28 India ने तीखा सवाल किया है कि आस्था के नाम पर जनता से छल करने वाली व्यवस्था आखिर इन बेजुबानों की मौत का हिसाब कब देगी, और कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को इस दर्दनाक मंजर को देखकर अब शर्म से डूब मरना चाहिए।
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    राजस्थान के जैसलमेर से News28 India की ग्राउंड रिपोर्ट में 'गौमाता' की दर्दनाक बदहाली उजागर हुई है, जहां कचरे के ढेर पर दर्जनों गायें बेदम होकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही हैं। ये तस्वीरें उन सरकारों के गौभक्ति के दावों की धज्जियां उड़ाती हैं, जो सनातन, धर्म और गौवंश के नाम पर सत्ता की कुर्सियों तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में गायों को केवल 'वोटबैंक' के रूप में इस्तेमाल करती हैं। वीडियो में मीलों तक फैले प्लास्टिक, गंदगी और कूड़े के अंबार के बीच कई गायों के कंकाल नजर आ रहे हैं, जबकि अन्य भूख और बीमारी से तड़प रही हैं। भारत की संस्कृति में पूजनीय मानी जाने वाली ये गायें अब भोजन की तलाश में जहरीला प्लास्टिक और कचरा चबाने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रासदी की मुख्य वजह सरकारी नीतियां और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूख है। सदियों से स्थानीय पशुपालकों के मवेशियों के लिए चरागाह रही 'ओरण' (पवित्र देव-भूमि) और 'गोचर' (चरागाह) भूमि को 'हरित ऊर्जा' और 'विकास' के नाम पर गुपचुप तरीके से बड़े उद्योगपतियों और सौर ऊर्जा कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन चरागाहों के चारों ओर ऊंची बाड़ लगाए जाने से मवेशियों के लिए प्राकृतिक घास और पानी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो गया, जिसके चलते अपनी पारंपरिक जमीन से खदेड़ी गई गायें अब शहरों के बाहर डंपिंग यार्ड्स में कचरा खाने पर विवश हैं।

News28 India ने इस बदहाली पर धर्म रक्षक और गौ रक्षक होने का दावा करने वाले नेताओं से जवाब मांगा है। जब गायों के लिए चरने की जमीन और घास ही छीन ली गई, तो कागजों पर चल रही "गौ संरक्षण" की योजनाएं और बड़े-बड़े नारे निरर्थक साबित हुए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सत्ता हासिल करने के लिए सनातन और आस्था को केवल राजनीतिक हथियार बनाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता दिखाने की बारी आने पर पूरी व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। News28 India ने तीखा सवाल किया है कि आस्था के नाम पर जनता से छल करने वाली व्यवस्था आखिर इन बेजुबानों की मौत का हिसाब कब देगी, और कहा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को इस दर्दनाक मंजर को देखकर अब शर्म से डूब मरना चाहिए।
    user_News 28 India
    News 28 India
    Doctor Matihani, Begusarai•
    4 hrs ago
  • पत्रकार नेता अविनाश भट्ट के नेतृत्व में बेगूसराय के हड़ताली चौक पर एक शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि न्याय नहीं मिला, तो दिनकर की धरती बेगूसराय का ताप राजधानी को झेलना पड़ेगा।
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    पत्रकार नेता अविनाश भट्ट के नेतृत्व में बेगूसराय के हड़ताली चौक पर एक शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि न्याय नहीं मिला, तो दिनकर की धरती बेगूसराय का ताप राजधानी को झेलना पड़ेगा।
    user_मोबाइल टीवी न्यूज
    मोबाइल टीवी न्यूज
    Media house Begusarai, Bihar•
    5 hrs ago
  • तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक दस साल की बच्ची के रेप और निर्मम हत्या के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। इस हत्याकांड को लेकर विजय सरकार निशाने पर है और विपक्ष लगातार टीवीके सरकार पर हमला बोल रहा है, वहीं पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी बीच, इस बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों के ठहाके मारकर हंसने का एक वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा है। वायरल वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी और वेस्ट ज़ोन के आईजी सहित तीन पुलिस अधिकारी मीडिया से बातचीत करते समय मुस्कुराते और ठहाके लगाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे देश में बच्ची की बेरहमी से की गई हत्या को लेकर रोष है। लापता हुई दस साल की यह बच्ची अपने घर के बाहर खेलते समय अचानक गायब हो गई थी और बाद में उसका शव एक तालाब के पास मिला था। पुलिस अधिकारियों की इस असंवेदनशीलता को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने गंभीर अपराध पर बात करते समय अधिकारी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखा रहे हैं। एक यूजर ने आईपीएस अफसरों की शिक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्हें असंवेदनशील करार दिया, जबकि अन्य ने इसे 'शर्मनाक' बताया। अभिषेक नामक एक यूजर ने लिखा कि अधिकारियों के लिए यह महज एक 'केस' है, इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा और वे हंस रहे हैं। लोग इन पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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    तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक दस साल की बच्ची के रेप और निर्मम हत्या के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। इस हत्याकांड को लेकर विजय सरकार निशाने पर है और विपक्ष लगातार टीवीके सरकार पर हमला बोल रहा है, वहीं पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इसी बीच, इस बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों के ठहाके मारकर हंसने का एक वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा है।

वायरल वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी और वेस्ट ज़ोन के आईजी सहित तीन पुलिस अधिकारी मीडिया से बातचीत करते समय मुस्कुराते और ठहाके लगाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे देश में बच्ची की बेरहमी से की गई हत्या को लेकर रोष है। लापता हुई दस साल की यह बच्ची अपने घर के बाहर खेलते समय अचानक गायब हो गई थी और बाद में उसका शव एक तालाब के पास मिला था।

पुलिस अधिकारियों की इस असंवेदनशीलता को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने गंभीर अपराध पर बात करते समय अधिकारी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखा रहे हैं। एक यूजर ने आईपीएस अफसरों की शिक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्हें असंवेदनशील करार दिया, जबकि अन्य ने इसे 'शर्मनाक' बताया। अभिषेक नामक एक यूजर ने लिखा कि अधिकारियों के लिए यह महज एक 'केस' है, इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा और वे हंस रहे हैं। लोग इन पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    user_Nikhil Vyas Official
    Nikhil Vyas Official
    Begusarai, Bihar•
    10 hrs ago
  • बेगूसराय के बछवारा थाना की पुलिस ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में सोमवार की देर रात 10:00 बजे प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए एसपी मनीष ने जानकारी दी। एसपी ने बताया कि यह गिरफ्तारी बेगूसराय पुलिस द्वारा अपराध कर्मियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मुकेश शाह उर्फ मुकेश कुमार के रूप में हुई है, जो पहले से ही अभियुक्त था। पुलिस अब इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
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    बेगूसराय के बछवारा थाना की पुलिस ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में सोमवार की देर रात 10:00 बजे प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए एसपी मनीष ने जानकारी दी।

एसपी ने बताया कि यह गिरफ्तारी बेगूसराय पुलिस द्वारा अपराध कर्मियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मुकेश शाह उर्फ मुकेश कुमार के रूप में हुई है, जो पहले से ही अभियुक्त था। पुलिस अब इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
    user_Ranjan Kumar
    Ranjan Kumar
    पत्रकार बेगूसराय, बेगूसराय, बिहार•
    11 hrs ago
  • हाथीदह स्थित राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की तत्परता से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने समय रहते व्यक्ति को नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरांची पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि भर्ती कराने के बावजूद करीब एक घंटे तक मरीज का समुचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सा कर्मियों की ओर से आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई गई। News Mirror को जानकारी मिलने और मीडिया प्रतिनिधियों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मरीज की औपचारिक जांच व इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक उसकी स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो चुकी थी। बाद में खानापूर्ति करते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में जब अस्पताल के चिकित्सकों से देरी और लापरवाही को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बात को टालने की कोशिश की, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाविकों और बस चालक ने समय पर मदद न की होती, तो व्यक्ति की जान जा सकती थी, जबकि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति और खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने और आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद जमीनी स्तर पर चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लोगों ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।
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    हाथीदह स्थित राजेंद्र सेतु के नीचे गंगा नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को स्थानीय नाविकों की तत्परता से बचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाविकों ने समय रहते व्यक्ति को नदी से बाहर निकाला, जिसके बाद एक बस चालक ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरांची पहुंचाया।

हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई। आरोप है कि भर्ती कराने के बावजूद करीब एक घंटे तक मरीज का समुचित इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सा कर्मियों की ओर से आवश्यक तत्परता नहीं दिखाई गई। News Mirror को जानकारी मिलने और मीडिया प्रतिनिधियों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मरीज की औपचारिक जांच व इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक उसकी स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो चुकी थी। बाद में खानापूर्ति करते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

इस मामले में जब अस्पताल के चिकित्सकों से देरी और लापरवाही को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय बात को टालने की कोशिश की, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाविकों और बस चालक ने समय पर मदद न की होती, तो व्यक्ति की जान जा सकती थी, जबकि अस्पताल में इलाज न मिलने से मरीज की स्थिति और खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। यह घटना बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने और आधुनिक उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद जमीनी स्तर पर चिकित्सकों व कर्मियों की लापरवाही मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। लोगों ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े।
    user_Swaraj Bharat Live
    Swaraj Bharat Live
    Social worker मोकामा, पटना, बिहार•
    1 hr ago
  • लखीसराय जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के निर्देश पर जिले में बाल श्रम उन्मूलन के लिए एक सघन जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत ढाबा दल ने विभिन्न चौक-चौराहों और प्रतिष्ठानों पर जांच की, जिसके परिणामस्वरूप नया बाजार क्षेत्र से एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया गया। श्रम अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि बाल श्रम के विरुद्ध यह अभियान जिले में लगातार जारी रहेगा। बच्चों से काम कराने वाले नियोजकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मुक्त कराए गए बाल श्रमिक को तत्काल सहायता के रूप में ₹3,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत बच्चे के नाम से ₹25,000 की एफडी कराई जाएगी, जो उसके 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगी। साथ ही, ₹5,000 पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा किए जाएंगे। इस अभियान में श्रम अधीक्षक लखीसराय के नेतृत्व में बाल संरक्षण पुलिस पदाधिकारी और श्रम प्रवर्तन अधिकारी रंजीत कुमार, अनिकेत राम, जीवन कुमार एवं अभिषेक रावत सहित अन्य अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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    लखीसराय जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के निर्देश पर जिले में बाल श्रम उन्मूलन के लिए एक सघन जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत ढाबा दल ने विभिन्न चौक-चौराहों और प्रतिष्ठानों पर जांच की, जिसके परिणामस्वरूप नया बाजार क्षेत्र से एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया गया।

श्रम अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि बाल श्रम के विरुद्ध यह अभियान जिले में लगातार जारी रहेगा। बच्चों से काम कराने वाले नियोजकों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मुक्त कराए गए बाल श्रमिक को तत्काल सहायता के रूप में ₹3,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत बच्चे के नाम से ₹25,000 की एफडी कराई जाएगी, जो उसके 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगी। साथ ही, ₹5,000 पुनर्वास सह कल्याण कोष में जमा किए जाएंगे।

इस अभियान में श्रम अधीक्षक लखीसराय के नेतृत्व में बाल संरक्षण पुलिस पदाधिकारी और श्रम प्रवर्तन अधिकारी रंजीत कुमार, अनिकेत राम, जीवन कुमार एवं अभिषेक रावत सहित अन्य अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
    user_Atmanand Singh
    Atmanand Singh
    पत्रकार लखीसराय, लखीसराय, बिहार•
    2 hrs ago
  • बेगूसराय जिले के पोखरिया स्थित एक घर में बेखौफ चोरों ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की मौजूदगी के बावजूद गैस सिलेंडर चुरा लिया। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, क्योंकि चोर इतने बेपरवाह थे कि उन्होंने 'तीसरी आंख' की भी परवाह नहीं की और कैमरे के ठीक सामने से गैस सिलेंडर लेकर फरार हो गए। परिवार इस तरह की बार-बार हो रही चोरियों से बेहद परेशान है।
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    बेगूसराय जिले के पोखरिया स्थित एक घर में बेखौफ चोरों ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की मौजूदगी के बावजूद गैस सिलेंडर चुरा लिया। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, क्योंकि चोर इतने बेपरवाह थे कि उन्होंने 'तीसरी आंख' की भी परवाह नहीं की और कैमरे के ठीक सामने से गैस सिलेंडर लेकर फरार हो गए। परिवार इस तरह की बार-बार हो रही चोरियों से बेहद परेशान है।
    user_News Bihar
    News Bihar
    बखरी, बेगूसराय, बिहार•
    4 hrs ago
  • बेगूसराय में '[पटना होटल कांड]' के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस धरने में संजीव कुमार ने भाग लिया और अपनी बात रखी।
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    बेगूसराय में '[पटना होटल कांड]' के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस धरने में संजीव कुमार ने भाग लिया और अपनी बात रखी।
    user_मोबाइल टीवी न्यूज
    मोबाइल टीवी न्यूज
    Media house Begusarai, Bihar•
    6 hrs ago
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