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Rajendra Kumar Doveriya
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- हरियाणा के भिवानी में गौ भक्तों ने एक 'महामंथन' का आयोजन किया, जहाँ गाय को राष्ट्र माता घोषित करने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की गई। इस महामंथन में यह लक्ष्य निर्धारित किया गया कि देशभर में एक 'महा हस्ताक्षर अभियान' चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से दो करोड़ लोगों से हस्ताक्षर एकत्र किए जाएंगे।1
- यूरोप का सबसे सुंदर शहर और फ्रांस की राजधानी पेरिस इस वक्त दंगों की भीषण आग में झुलस रहा है। जानकारी के अनुसार, पूरा शहर कट्टरपंथियों की चपेट में आ चुका है और वहां का सिस्टम पूरी तरह से कॉलेप्स कर गया है। पोस्ट में जोर देकर कहा गया है कि डेमोग्राफी में बदलाव का क्या असर होता है, यह आज साफ तौर पर पेरिस में देखा जा सकता है।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी से एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें एक दारोगा का गुस्सा चरम पर पहुँच गया और उसने एक व्यक्ति को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। यह घटना एक मामूली विवाद के बाद हुई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दारोगा द्वारा मारा गया थप्पड़ पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू बन गया है। यह वायरल वीडियो पुलिस के व्यवहार और उनके अधिकारों के उपयोग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, और इसे देखने वाले लोग विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो का केवल एक ही हिस्सा सामने आया है, जिससे विवाद की शुरुआत, पूर्व की घटनाओं और दोनों पक्षों की भूमिका से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। यह पूरा मामला फिलहाल जाँच का विषय है, और पूर्ण सच्चाई सामने आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना अनुचित होगा। यह घटना इस बात पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है कि क्या यह व्यवहार वर्दी की गरिमा के अनुरूप था, या इसके पीछे कोई ऐसी अस्पष्ट स्थिति है जो अभी तक सामने नहीं आई है।1
- हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में किसान-मजदूर-व्यापारी संयुक्त मोर्चा का आंदोलन शनिवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। पिछले तीन दिनों से उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर गेहूं खरीद की अवधि बढ़ाने और पर्याप्त बारदाना उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन का संतोषजनक समाधान न मिलने पर हजारों किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सभा के बाद किसान पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड तोड़ते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए, जहां उन्होंने रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया। देखते ही देखते रेलवे लाइन पर करीब आधा किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बन गई। किसानों के भारी जमावड़े से प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया और मौके पर मौजूद पुलिस बल किसानों की भीड़ के सामने बेबस नजर आया। किसानों ने ट्रैक पर बैठकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला कलक्टर खुशाल यादव, अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेदी लाल मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गीता चौधरी और उपखंड अधिकारी उमा मित्तल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधि मंडल और प्रशासन के बीच लंबी वार्ता चली। किसान नेताओं ने गेहूं खरीद अवधि बढ़ाने, पोर्टल पर दर्ज समस्त गेहूं की खरीद सुनिश्चित करने और पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराने की मांगें रखीं। लंबे विचार-विमर्श के बाद जिला कलक्टर ने हनुमानगढ़ जिले में शीघ्र ही आठ लाख बैग उपलब्ध करवाने तथा पोर्टल पर दर्ज संपूर्ण गेहूं का उठाव करवाने का भरोसा दिलाया। प्रशासन के इस आश्वासन पर संयुक्त मोर्चा ने सहमति जताई और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।1
- रावतभाटा में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के अंतर्गत नगर क्षेत्र में जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से आमजन तक जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाया गया। कार्यक्रमों की श्रृंखला में, शाम 7 बजे आर.पी.एस. डैम चंबल नदी घाट पर एक रंगोली कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद शाम 7:30 बजे आर.पी.एस. डैम पार्क, इंडिया गेट पर प्लास्टिक की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम और कपड़े के बैग का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को प्रतिबंधित सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करना था, जिसके लिए "घर से लेकर निकले कपड़े का थैला, अपने शहर को ना करें मेला" का नारा भी दिया गया। अभियान के तहत शाम 8 बजे चंबल नदी में दीप प्रज्वलन और रंगोली कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। इस अभियान में सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, एनजीओ प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों, स्वच्छता मित्रों और आमजन ने चंबल घाट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अधिशासी अधिकारी मुकेश नागर ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और एक स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण के लिए सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करना है।4
- बूंदी के हिंडोली स्थित आदर्श पुलिस थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार में शनिवार शाम एक रेडीमेड कपड़ा व्यापारी पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया गया, जिसने कस्बे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम जनता में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हीरा का बाड़ा निवासी 28 वर्षीय पीड़ित व्यापारी नरेश कुमार गुर्जर अपनी दुकान पर थे। शाम करीब 7:25 बजे, धनपुरा निवासी मुकुट गुर्जर, जो अपने साथ 5-7 अन्य अज्ञात बदमाशों को एक स्विफ्ट कार (नंबर RJ 08 2019) में लेकर आया था, उसने धारदार गंडासों से लैस होकर नरेश पर जानलेवा हमला कर दिया। पीड़ित ने मकान मालिक असलम के घर में छिपकर अपनी जान बचाई, लेकिन बदमाशों का हौसला इतना बुलंद था कि उन्होंने पीड़ित की मारुति आल्टो कार (नंबर RJ 08 CA 7629) के सभी शीशे तोड़ दिए और गाड़ी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आरोपियों ने नरेश को जान से मारने की धमकियां देते हुए मौके से फरार हो गए। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। मुख्य बाजार जैसी व्यस्ततम जगह पर शाम के समय हुई इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि अगर व्यापारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा। इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि बदमाशों में कानून का कोई डर नहीं है। पीड़ित की तहरीर पर हिंडोली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2), 333 और 324(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच एएसआई भागचंद को सौंपी गई है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन व पुलिस अधीक्षक से क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने और मुख्य आरोपी मुकुट गुर्जर सहित सभी हमलावरों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की है, ताकि जनता का कानून पर विश्वास बहाल हो सके।1
- सोशल मीडिया पर एक 17 वर्षीय छात्र सिद्धांत द्वारा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठाए गए गंभीर सवाल इन दिनों तेजी से वायरल हो रहे हैं। ये प्रश्न अब CBSE के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी गहन चर्चा का विषय बन गए हैं, जिसने छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। सिद्धांत ने विशेष रूप से CBSE की टेंडर प्रक्रिया पर ही ये गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद यह मूलभूत प्रश्न उठ रहा है कि आखिर इनका जवाब कौन देगा। इन सवालों के माध्यम से यह भी पूछा जा रहा है कि छात्रों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा।1