सम्भल में सनातन पब्लिक स्कूल को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अधिवक्ता अमित उठवाल ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जो स्कूल पिछले 36 वर्षों से संचालित हो रहा था, उसकी एनओसी की कमी अब जाकर कैसे सामने आई, और यदि स्कूल में खामियां थीं तो प्रशासन इतने वर्षों तक क्या कर रहा था? अधिवक्ता उठवाल ने जोर देकर कहा कि स्कूल सील होने से हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नए सत्र की फीस जमा की जा चुकी है, और बच्चों ने ड्रेस, किताबें व स्टेशनरी भी खरीद ली है, लेकिन अचानक स्कूल बंद होने से उनका पूरा शैक्षणिक सत्र संकट में आ गया है। उन्होंने इस आर्थिक और मानसिक नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अमित उठवाल ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वह सभी अभिभावकों के साथ बैठक कर उनकी पसंद के अनुसार बच्चों का प्रवेश अन्य स्कूलों में कराए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि पहले से जमा की गई फीस, ड्रेस और स्टेशनरी का लाभ नए स्कूल में भी मिल सके, ताकि अभिभावकों पर दोहरी आर्थिक मार न पड़े। अधिवक्ता उठवाल ने यह भी आरोप लगाया कि सम्भल में गली-मोहल्लों और संकरी गलियों में बिना मानकों के कई स्कूल चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल सनातन पब्लिक स्कूल पर ही की गई है। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो कई अन्य स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन के पारिवारिक विवाद का खामियाजा छात्र और अभिभावक भुगत रहे हैं। अधिवक्ता ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से यह मांग की कि दोषियों की जवाबदेही तय की जाए, पूरे जिले के स्कूलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद अभिभावक और छात्र ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, और प्रशासन को उनका विश्वास फिर से बहाल करना होगा।
सम्भल में सनातन पब्लिक स्कूल को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अधिवक्ता अमित उठवाल ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जो स्कूल पिछले 36 वर्षों से संचालित हो रहा था, उसकी एनओसी की कमी अब जाकर कैसे सामने आई, और यदि स्कूल में खामियां थीं तो प्रशासन इतने वर्षों तक क्या कर रहा था? अधिवक्ता उठवाल ने जोर देकर कहा कि स्कूल सील होने से हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नए सत्र की फीस जमा की जा चुकी है, और बच्चों ने ड्रेस, किताबें व स्टेशनरी भी खरीद ली है, लेकिन अचानक स्कूल बंद होने से उनका पूरा शैक्षणिक सत्र संकट में आ गया है। उन्होंने इस आर्थिक और मानसिक नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अमित उठवाल ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वह सभी अभिभावकों के साथ बैठक कर उनकी पसंद के अनुसार बच्चों का प्रवेश अन्य स्कूलों में कराए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि पहले से जमा की गई फीस, ड्रेस और स्टेशनरी का लाभ नए स्कूल में भी मिल सके, ताकि अभिभावकों पर दोहरी आर्थिक मार न पड़े। अधिवक्ता उठवाल ने यह भी आरोप लगाया कि सम्भल में गली-मोहल्लों और संकरी गलियों में बिना मानकों के कई स्कूल चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल सनातन पब्लिक स्कूल पर ही की गई है। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो कई अन्य स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन के पारिवारिक विवाद का खामियाजा छात्र और अभिभावक भुगत रहे हैं। अधिवक्ता ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से यह मांग की कि दोषियों की जवाबदेही तय की जाए, पूरे जिले के स्कूलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद अभिभावक और छात्र ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, और प्रशासन को उनका विश्वास फिर से बहाल करना होगा।
- सम्भल के विकासखंड पवांसा क्षेत्र के गांव सैफ खां सराय में एक सरकारी रास्ते पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है, जिसके बाद ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने इस पर कार्रवाई की मांग की है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हाजी नदीम ने सम्भल सिटी मजिस्ट्रेट को एक प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि सुलेमान शहीद से लेकर बाईपास तक किसानों ने सरकारी रास्ते को अपनी जमीन में मिला लिया है। इस कथित अतिक्रमण के कारण रास्ता काफी संकरा हो गया है, जिससे ग्रामीणों और वाहनों को आवागमन में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हाजी नदीम ने यह भी बताया कि यह मार्ग पहले नीमशरण तीर्थ मंदिर तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता था और बाईपास बनने से पहले श्रद्धालु इसी मार्ग का उपयोग करते थे। प्रार्थना पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि इस सरकारी रास्ते को तत्काल कब्जामुक्त कराकर इसका चौड़ीकरण किया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों को राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त, इस मार्ग को 24 कोसिये परिक्रमा मार्ग से जोड़ने की भी मांग की गई है। इस शिकायत के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाकर रास्ते को उसके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाता है या नहीं।4
- हाल ही में ओवैसी के पंडित ने एक दमदार भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि अयोध्या राम मंदिर के 'चंदा चोरों' के घरों पर आखिर बुलडोजर क्यों नहीं चलाए गए और उनके खिलाफ गोलियां क्यों नहीं चलाई गईं। उनके इस भाषण ने उन लोगों के प्रति तीखा आक्रोश व्यक्त किया, जिन्हें 'चंदा चोर' बताया गया है, और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, जबकि अन्य मामलों में बुलडोजर और गोलियों का इस्तेमाल देखा जाता है।1
- संभल के नगला गाँव में सरकारी बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जहाँ महबूल्ला शाह की मजार और सरकारी धन से बना एक शौचालय पाया गया है। कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी एडवोकेट ने जिलाधिकारी से इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद तहसील प्रशासन ने मौके पर पैमाइश (माप) कराई। इस पैमाइश में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है। मौके पर मौजूद लेखपाल रोहित कुमार ने पुष्टि की कि गाटा संख्या 68/3 की 0.117 हेक्टेयर बंजर भूमि की माप की गई है और यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला प्रतीत होता है। वहीं, स्थानीय निवासी हाजी नूर मौहम्मद ने बताया कि यह मजार उनके होश संभालने से पहले से मौजूद है। उन्होंने पहले इसे मजार की जमीन बताया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि इसका कुछ हिस्सा ग्राम सभा की जमीन भी है। पैमाइश पूरी होने के बाद रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी गई है। अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार होगी। यदि कोर्ट अवैध कब्जे की पुष्टि करता है, तो सरकारी बंजर भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जा सकती है।4
- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर मुरादाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक विशेष आयोजन किया। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने 53 फीट लंबा 'साइकिल केक' काटा, जिसके साथ उन्होंने अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाया।1
- अमरोहा के रहरा थाना क्षेत्र के गांव फरौटा की मढ़ैया निवासी एक महिला ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजकर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महिला का आरोप है कि उसके पति को एक सुनियोजित साज़िश के तहत झूठे मुक़दमे में फँसाकर जेल भेजा गया है। अपने दावों के समर्थन में उसने डिजिटल साक्ष्यों से भरी एक पेन ड्राइव पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री डाक के माध्यम से भेजी है और मामले की एसआईटी (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़िता निशा, जो मनोज की पत्नी हैं, ने बताया कि 9 मई को गांव के ही एक व्यक्ति ने उनके साथ अभद्रता की थी। विरोध करने पर उसी रात आरोपी और उसके परिजनों ने घर में घुसकर मारपीट की, जिसके दौरान पेट में लात लगने से उनका दो माह का गर्भ गिर गया। उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन थाना स्तर पर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जहाँ उनका परिवाद अभी विचाराधीन है। महिला का आरोप है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण विपक्षी पक्ष लगातार समझौते का दबाव बना रहा था। जब उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया, तो उनके पति को झूठे मुक़दमे में फँसाने की साज़िश रची गई। इसी क्रम में रहरा थाने में मुक़दमा दर्ज कराया गया और पुलिस ने उनके पति के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर दी। शिकायती पत्र में महिला ने दावा किया है कि 20 जून को जिस समय की घटना मुक़दमे में दर्ज है, उस समय उनके पति गांव से निकलकर अपनी रिश्तेदारी में जा चुके थे। उसने बताया कि सोहत पेट्रोल पंप, उझारी और सैदनंगली मार्ग के सीसीटीवी कैमरों में उनके पति की आवाजाही रिकॉर्ड है। महिला का कहना है कि इन सभी फुटेज को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर पुलिस अधीक्षक को भेजा गया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उनके पति घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि 23 जून को उनके पति और देवर साक्ष्य लेकर रहरा थाने पहुँचे थे। वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारियों को मोबाइल में वीडियो दिखाए गए, लेकिन वीडियो देखने के बाद मोबाइल का डाटा डिलीट कर दिया गया और दोनों को हिरासत में ले लिया गया। आरोप है कि देवर को कई घंटों बाद छोड़ दिया गया, जबकि पति को करीब 40 घंटों तक हिरासत में रखने के बाद जेल भेज दिया गया। पीड़िता का कहना है कि वर्तमान विवेचना निष्पक्ष नहीं हो रही है और जांच अधिकारी उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अनदेखी कर रहे हैं। उसने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पेन ड्राइव में उपलब्ध सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को विवेचना का हिस्सा बनाया जाए तथा मामले की जांच वर्तमान विवेचक से हटाकर एसआईटी (SIT) के माध्यम से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अब सभी की निगाहें पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला एक नई दिशा ले सकता है। पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।3
- राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर मुरादाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “हू हील द हीलर्स” थीम पर आधारित इस समारोह में राष्ट्रीय सेमिनार, चिकित्सक सम्मान समारोह और टीबी मुक्त भारत शपथ समारोह शामिल थे। इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 100 से अधिक चिकित्सकों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्णकांत दवे, मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकांत सागर, डीन मेडिकल डॉ. प्रभु एम.एच., एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमित जैन तथा अन्य अतिथियों ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि डॉ. रमाकांत सागर ने अपने संबोधन में चिकित्सकों की कोरोना महामारी सहित हर संकट की घड़ी में की गई निस्वार्थ सेवा की सराहना की। उन्होंने बताया कि वेंक्टेश्वरा मेडिकल संस्थान एवं स्वास्थ्य विभाग मिलकर टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने चिकित्सकों को केवल स्वास्थ्य सेवाओं का वाहक नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव बताया और समाज से उनके समर्पण व सेवा भावना का सम्मान करने की अपील की। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों को मानव सेवा, राष्ट्र सेवा तथा टीबी मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई। समारोह को और यादगार बनाने के लिए छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल, डिप्टी सीएमओ डॉ. योगेन्द्र, एडिशनल सीएमओ डॉ. भास्कर, डॉ. वी.पी. सिंह, डॉ. बी.एस. त्यागी सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, मेडिकल छात्र और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।3
- मुरादाबाद में वाल्मीकि समाज की एक युवती आरती, जो श्री टिंकू की पत्नी और मीरपुर, वाल्मीकि बस्ती, मिलन विहार, थाना मझौला की निवासी है, को अगवा कर लिया गया है। पीड़ित परिवारजनों ने इस संबंध में थाना मझौला को सूचित किया था, जिसके बाद एक एफआईआर भी दर्ज की गई। हालाँकि, भारतीय वाल्मीकि धर्मसभा (भारत) 110/0026 के अनुसार, एफआईआर होने के बावजूद मझौला पुलिस आज तक न तो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर पाई है और न ही अगवा की गई आरती को बरामद करने में सफल रही है। पुलिस की इस विफलता से समस्त वाल्मीकि समाज में गहरा रोष व्याप्त है। समाज का कहना है कि एक तरफ भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुखिया आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का कथन देते हैं, वहीं दूसरी ओर मुरादाबाद पुलिस इस कथन को खोखला साबित कर रही है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि मझौला पुलिस उक्त अभियुक्तों के साथ हमसाज है। इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर, भारतीय वाल्मीकि धर्मसभा (भारत) 110/0026 के तत्वावधान में श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय, मुरादाबाद को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया है।3
- सम्भल में सनातन पब्लिक स्कूल को प्रशासन द्वारा सील किए जाने के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अधिवक्ता अमित उठवाल ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जो स्कूल पिछले 36 वर्षों से संचालित हो रहा था, उसकी एनओसी की कमी अब जाकर कैसे सामने आई, और यदि स्कूल में खामियां थीं तो प्रशासन इतने वर्षों तक क्या कर रहा था? अधिवक्ता उठवाल ने जोर देकर कहा कि स्कूल सील होने से हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नए सत्र की फीस जमा की जा चुकी है, और बच्चों ने ड्रेस, किताबें व स्टेशनरी भी खरीद ली है, लेकिन अचानक स्कूल बंद होने से उनका पूरा शैक्षणिक सत्र संकट में आ गया है। उन्होंने इस आर्थिक और मानसिक नुकसान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अमित उठवाल ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वह सभी अभिभावकों के साथ बैठक कर उनकी पसंद के अनुसार बच्चों का प्रवेश अन्य स्कूलों में कराए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि पहले से जमा की गई फीस, ड्रेस और स्टेशनरी का लाभ नए स्कूल में भी मिल सके, ताकि अभिभावकों पर दोहरी आर्थिक मार न पड़े। अधिवक्ता उठवाल ने यह भी आरोप लगाया कि सम्भल में गली-मोहल्लों और संकरी गलियों में बिना मानकों के कई स्कूल चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल सनातन पब्लिक स्कूल पर ही की गई है। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो कई अन्य स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन के पारिवारिक विवाद का खामियाजा छात्र और अभिभावक भुगत रहे हैं। अधिवक्ता ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से यह मांग की कि दोषियों की जवाबदेही तय की जाए, पूरे जिले के स्कूलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद अभिभावक और छात्र ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, और प्रशासन को उनका विश्वास फिर से बहाल करना होगा।1