मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को इंदौर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया और उनके मध्यप्रदेश प्रवास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति का मां अहिल्या की नगरी में हार्दिक अभिनंदन है। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट और अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद थे। डॉ. यादव ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू अपने प्रवास के दौरान कूनो क्षेत्र में चीता प्रोजेक्ट का अवलोकन करेंगी और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भी सहभागी होंगी। वह ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी संस्था के कार्यक्रम में भी शामिल होंगी, जिससे स्वयंसेवी एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रति सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति का यह दौरा प्रदेशवासियों में उत्साह और उमंग का संचार करेगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश द्वारा नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता प्राप्त करने का भी उल्लेख किया, जिसमें बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और प्रगति का माहौल बना है। उन्होंने मध्यप्रदेश में हुए अन्य विकास कार्यों का भी जिक्र किया, जैसे यूनियन कार्बाइड दुर्घटना से जुड़े लगभग 40 वर्ष पुराने कचरे का सुरक्षित निस्तारण, नदी जोड़ो अभियान, और चीता प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन, जो देश-दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय बने हैं। डॉ. यादव ने धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी पर शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा और नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को 700 वर्ष पुराने विवाद के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज, पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की नई संस्थाएं स्थापित की गई हैं। मध्यप्रदेश देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में अग्रणी है, और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज की अवधारणा को सबसे पहले यहीं प्रभावी रूप से लागू किया गया। उन्होंने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश ने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। आगामी ढाई वर्षों में सिंचित क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सरकार बनने से पहले प्रति व्यक्ति आय लगभग 11 हजार रुपये थी, जो बढ़कर वर्तमान में 1 लाख 70 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है, और अमृतकाल 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इसे लगभग 22.50 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को इंदौर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया और उनके मध्यप्रदेश प्रवास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति का मां अहिल्या की नगरी में हार्दिक अभिनंदन है। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट और अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद थे। डॉ. यादव ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू अपने प्रवास के दौरान कूनो क्षेत्र में चीता प्रोजेक्ट का अवलोकन करेंगी और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भी सहभागी होंगी। वह ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी संस्था के कार्यक्रम में भी शामिल होंगी, जिससे स्वयंसेवी एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रति सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति का यह दौरा प्रदेशवासियों में उत्साह और उमंग का संचार करेगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश द्वारा नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता प्राप्त करने का भी उल्लेख किया, जिसमें बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और प्रगति का माहौल बना है। उन्होंने मध्यप्रदेश में हुए अन्य विकास कार्यों का भी जिक्र किया, जैसे यूनियन कार्बाइड दुर्घटना से जुड़े लगभग 40 वर्ष पुराने कचरे का सुरक्षित निस्तारण, नदी जोड़ो अभियान, और चीता प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन, जो देश-दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय बने हैं। डॉ. यादव ने धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी पर शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा और नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को 700 वर्ष पुराने विवाद के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज, पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की नई संस्थाएं स्थापित की गई हैं। मध्यप्रदेश देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में अग्रणी है, और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज की अवधारणा को सबसे पहले यहीं प्रभावी रूप से लागू किया गया। उन्होंने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश ने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। आगामी ढाई वर्षों में सिंचित क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सरकार बनने से पहले प्रति व्यक्ति आय लगभग 11 हजार रुपये थी, जो बढ़कर वर्तमान में 1 लाख 70 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है, और अमृतकाल 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इसे लगभग 22.50 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जाएंगे।
- भिंड जिले में ग्रामीण जिला कांग्रेस ने अघोषित बिजली कटौती, मनमाने बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर की कमियों के विरोध में विद्युत विभाग के अधीक्षण यंत्री कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वाटर वर्क्स रोड स्थित कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें बिजली कंपनी को इन समस्याओं का समाधान करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष रामशेष बघेल ने कहा कि भीषण गर्मी में घंटों की बिजली कटौती से जनता परेशान है, जिससे किसानों, छात्रों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर और गलत रीडिंग ने उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी है। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में अघोषित बिजली कटौती को तुरंत बंद करना, बढ़े हुए बिलों की समीक्षा करना और जर्जर तारों व पुरानी डीपी को बदलना शामिल है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे इससे भी बड़ा जनांदोलन करेंगे।4
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को इंदौर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया और उनके मध्यप्रदेश प्रवास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति का मां अहिल्या की नगरी में हार्दिक अभिनंदन है। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट और अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद थे। डॉ. यादव ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू अपने प्रवास के दौरान कूनो क्षेत्र में चीता प्रोजेक्ट का अवलोकन करेंगी और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भी सहभागी होंगी। वह ईश्वरीय प्रजापति ब्रह्मकुमारी संस्था के कार्यक्रम में भी शामिल होंगी, जिससे स्वयंसेवी एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रति सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति का यह दौरा प्रदेशवासियों में उत्साह और उमंग का संचार करेगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश द्वारा नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता प्राप्त करने का भी उल्लेख किया, जिसमें बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और प्रगति का माहौल बना है। उन्होंने मध्यप्रदेश में हुए अन्य विकास कार्यों का भी जिक्र किया, जैसे यूनियन कार्बाइड दुर्घटना से जुड़े लगभग 40 वर्ष पुराने कचरे का सुरक्षित निस्तारण, नदी जोड़ो अभियान, और चीता प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन, जो देश-दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय बने हैं। डॉ. यादव ने धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी पर शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा और नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को 700 वर्ष पुराने विवाद के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कई मेडिकल कॉलेज, पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की नई संस्थाएं स्थापित की गई हैं। मध्यप्रदेश देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में अग्रणी है, और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज की अवधारणा को सबसे पहले यहीं प्रभावी रूप से लागू किया गया। उन्होंने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश ने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। आगामी ढाई वर्षों में सिंचित क्षेत्र को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सरकार बनने से पहले प्रति व्यक्ति आय लगभग 11 हजार रुपये थी, जो बढ़कर वर्तमान में 1 लाख 70 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है, और अमृतकाल 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इसे लगभग 22.50 लाख रुपये वार्षिक तक पहुंचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जाएंगे।1
- मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया। महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।1
- आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र के अंगूठी गांव में प्रशासन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाया है। इस अभियान के दौरान तालाब की जमीन पर बने मंदिर, मस्जिद और मजार को जेसीबी मशीनों की मदद से हटाया गया। यह कार्रवाई भारी पुलिस बल, पीएसी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। राजस्व विभाग और पुलिस बल के साथ मिलकर चलाए गए इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य तालाब की मूल भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना और सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि की स्थिति को बहाल करना था। प्रशासन ने कार्रवाई से पहले ही इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे, जिसमें गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार पैदल गश्त और संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती शामिल थी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई न्यायालय और एनजीटी के स्पष्ट आदेशों के तहत की गई है। कई घंटे तक चले इस अभियान के बाद तालाब की पूरी भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया। प्रशासन ने बताया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और किसी भी विरोध या कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या की सूचना नहीं मिली। कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है। प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।1
- भिण्ड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन विश्वास" अभियान के तहत जिले में बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान में पुलिस ने विभिन्न कंपनियों के कुल 325 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत 81 लाख 30 हजार रुपये बताई गई है। बरामद किए गए ये मोबाइल फोन बुधवार को एक कार्यक्रम में उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए। पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे। अपना खोया हुआ मोबाइल पाकर लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे और कई नागरिकों ने भिण्ड पुलिस के इस सराहनीय प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोबाइलों की बरामदगी में साइबर सेल और जिले के सभी थानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोबाइलों को ट्रैक करने के लिए सीईआईआर (CEIR) पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया, जिससे गुम हुए मोबाइलों की लोकेशन और उपयोग संबंधी जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस टीमों ने लगातार कार्रवाई करते हुए देश के 9 राज्यों से इन मोबाइल फोन को खोज निकाला। अधिकारियों ने जानकारी दी कि "ऑपरेशन विश्वास" के तहत वर्ष 2025 में भी 628 गुम मोबाइल फोन बरामद कर मालिकों को लौटाए गए थे और वर्ष 2026 में भी यह अभियान जारी है। पुलिस अधीक्षक ने इस अवसर पर कहा कि भिण्ड पुलिस जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं बल्कि लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों, फोटो, संपर्कों और व्यक्तिगत जानकारी का भी एक माध्यम हैं। इस अभियान से न केवल लाखों रुपये मूल्य के मोबाइल बरामद हुए हैं, बल्कि आमजन के बीच पुलिस के प्रति विश्वास और भरोसे को भी मजबूत किया गया है। यह अभियान आधुनिक तकनीक और प्रभावी पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद 'बाबा का बुलडोजर' एक्शन देखने को मिला। यह कार्रवाई आगरा जिले के अंतर्गत तालाब की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित संरचनाओं के खिलाफ की गई। अवैध निर्माणों में एक मंदिर, एक मजार और एक मस्जिद शामिल थे, जिन्हें सरकारी तालाब की जमीन पर बनाया गया था। एनजीटी के निर्देशों का पालन करते हुए, इन सभी अवैध ढाँचों को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया।1
- उत्तर प्रदेश के आनंद नगर स्थित आशीष गुप्ता की बर्फ फैक्टरी में अमोनिया गैस रिसाव की सूचना मिलने के बाद फायर सर्विस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। मौके पर पहुंचकर फैक्टरी परिसर का निरीक्षण किया गया और कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। फायर सर्विस की टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए और हालात पर लगातार निगरानी रखी। प्रशासन एवं संबंधित विभागों ने जनहित और सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए ऐसी किसी भी आपात स्थिति में पूरी तत्परता के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है।1
- भिंड पुलिस ने "ऑपरेशन विश्वास" के तहत बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से 325 गुम हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 81 लाख 30 हजार रुपये बताई गई है। बरामद किए गए ये मोबाइल पुलिस कंट्रोल रूम में एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके असली मालिकों को सौंपे गए, जिससे आवेदकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। सायबर सेल और थानों की टीमों ने CEIR पोर्टल का उपयोग कर इन मोबाइलों को मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल, असम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से ट्रैक कर बरामद किया। मोबाइल वापस पाने वालों में भारतीय सेना व होमगार्ड के जवान, भूतपूर्व सैनिक, छात्र, गृहणियां, शिक्षक, माली, खिलाड़ी और पत्रकार जैसे विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2025 में भी इसी पोर्टल के माध्यम से 628 मोबाइल फोन खोजे गए थे।2