प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन और घोटाले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम मंदिर में हुए इस गबन और घोटाले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच संदेह के घेरे में है। सांख्यान ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच देश के उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में की जानी चाहिए। संदीप सांख्यान के अनुसार, इस पूरे मामले से न केवल देश के हिंदुओं के साथ खिलवाड़ हुआ है, बल्कि सभी राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा है। सांख्यान ने आरोप लगाया कि चंदे और चढ़ावे की कम रिपोर्टिंग की गई और करोड़ों रुपयों का कोई उचित हिसाब-किताब नहीं रखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संदीप सांख्यान ने बताया कि यह घोटाला ₹200 करोड़ से अधिक का अनुमानित है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में प्रतिदिन श्री राम मंदिर अयोध्या में औसतन ₹8 से ₹10 लाख का चढ़ावा आता था, जबकि व्रत और त्योहारों के दौरान यह चढ़ावा ₹18 से ₹20 लाख तक पहुंच जाता था, जिसमें नकद राशि, सोना-चांदी और बहुमूल्य आभूषण भी शामिल होते थे, जो कि कथित तौर पर गायब किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सांख्यान ने सवाल उठाया कि मंदिर न्यास में ₹14-15 हजार वेतन पाने वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों और उनके करीबियों ने पिछले कुछ महीनों में ₹40 लाख से लेकर ₹1.5 करोड़ तक के प्लॉट और मकान कैसे खरीद लिए, यह कैसे संभव हो सकता है। संदीप सांख्यान ने भाजपा की केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर सरकारें बनाईं, लेकिन आज उसी राम मंदिर का चढ़ावा और संपत्ति चोरी होती रही और सरकारें मूकदर्शक बनी रहीं, जिससे देश के 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता रहा। उन्होंने इसे 'शर्मनाक' बताया और पूछा कि इस मसले पर आज भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच व इनकी अन्य संस्थाएं क्यों चुप हैं, जबकि देश की जनता इस पर जवाब चाहती है। सांख्यान ने मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट, जिसमें 'राजनीतिक लोग शामिल हैं', उसे भंग किया जाए और उसमें संतों, पुजारियों व धर्मगुरुओं को जगह दी जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन और घोटाले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम मंदिर में हुए इस गबन और घोटाले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच संदेह के घेरे में है। सांख्यान ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच देश के उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में की जानी चाहिए। संदीप सांख्यान के अनुसार, इस पूरे मामले से न केवल देश के हिंदुओं के साथ खिलवाड़ हुआ है, बल्कि सभी राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा है। सांख्यान ने आरोप लगाया कि चंदे और चढ़ावे की कम रिपोर्टिंग की गई और करोड़ों रुपयों का कोई उचित हिसाब-किताब नहीं रखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संदीप सांख्यान ने बताया कि यह घोटाला ₹200 करोड़ से अधिक का अनुमानित है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में प्रतिदिन श्री राम मंदिर अयोध्या में औसतन ₹8 से ₹10 लाख का चढ़ावा आता था, जबकि व्रत और त्योहारों के दौरान यह चढ़ावा ₹18 से ₹20 लाख तक पहुंच जाता था, जिसमें नकद राशि, सोना-चांदी और बहुमूल्य आभूषण भी शामिल होते थे, जो कि कथित तौर पर गायब किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सांख्यान ने सवाल उठाया कि मंदिर न्यास में ₹14-15 हजार वेतन पाने वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों और उनके करीबियों ने पिछले कुछ महीनों में ₹40 लाख से लेकर ₹1.5 करोड़ तक के प्लॉट और मकान कैसे खरीद लिए, यह कैसे संभव हो सकता है। संदीप सांख्यान ने भाजपा की केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर सरकारें बनाईं, लेकिन आज उसी राम मंदिर का चढ़ावा और संपत्ति चोरी होती रही और सरकारें मूकदर्शक बनी रहीं, जिससे देश के 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता रहा। उन्होंने इसे 'शर्मनाक' बताया और पूछा कि इस मसले पर आज भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच व इनकी अन्य संस्थाएं क्यों चुप हैं, जबकि देश की जनता इस पर जवाब चाहती है। सांख्यान ने मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट, जिसमें 'राजनीतिक लोग शामिल हैं', उसे भंग किया जाए और उसमें संतों, पुजारियों व धर्मगुरुओं को जगह दी जानी चाहिए।
- झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत, स्थानीय विधायक जीत राम कटवाल की अध्यक्षता में भाजपा मंडल झंडूता और झंडूता कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक शांतिपूर्ण रैली निकाली। यह रैली विज्ञान संकाय की कक्षाओं को बंद किए जाने के विरोध में आयोजित की गई थी।1
- अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हो गया। यह अभियान 17 जून से 26 जून तक चलाया गया था, जिसका समापन समारोह एक साइकिल रैली के साथ हुआ। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि सरकार नशे के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और नशा तस्करी में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहयोग से किया गया था। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, उन्हें समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प दिलाना और विशेष रूप से युवाओं से नशे से दूर रहकर स्वस्थ व विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील करना था। इस दौरान लोगों को राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 की जानकारी भी प्रदान की गई, ताकि नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति समय पर परामर्श और सहायता प्राप्त कर सकें। आयोजन स्थल पर सूचना बोर्ड पर उपलब्ध कराए गए क्यूआर कोड के माध्यम से भी अभियान और नशामुक्ति सेवाओं से संबंधित जानकारी दी गई।1
- कौशल विकास भत्ता योजना को बहाल करने की मांग की गई है। इस संबंध में राज्य में यह मांग सामने आई है।1
- सुजानपुर में नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली है। जिला अध्यक्ष सुमन भारती ने इस अवसर पर बताया कि सुजानपुर में विकास कार्य मुख्यमंत्री के आशीर्वाद से ही करवाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्दलीय पार्षदों ने कांग्रेस का साथ देते हुए पार्टी को नगर परिषद में सत्तासीन किया है। सुमन भारती के अनुसार, नगर परिषद के परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने जीते हुए पार्षदों से मुलाकात की थी, जिनमें वार्ड नंबर 2 के पार्षद मनीष गुप्ता और वार्ड नंबर 8 की पार्षद वीना धीमान प्रमुख थीं। इन पार्षदों से कांग्रेस सरकार बनाने को लेकर चर्चा की गई थी और बाद में इन प्रत्याशियों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर पार्टी को जीत दिलाई। पार्षद मनीष गुप्ता ने इस अवसर पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही हैं और सदैव कांग्रेस के साथ ही रहेंगे। सुमन भारती ने इस जीत का श्रेय अपने और माननीय विधायक के प्रयासों को दिया, जिनके कारण नगर परिषद में कांग्रेस का कब्जा संभव हो पाया है।1
- हिमाचल प्रदेश के झंडूता कॉलेज में साइंस की कक्षाएं बंद किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विरोध प्रदर्शन किया है। इस प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक जीत राम कटवाल ने कांग्रेस पर मनमानी करने का आरोप लगाया।2
- गुरुवार को शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के तकलेच चौकी क्षेत्र में उरमण नामक स्थान पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहाँ एक पिकअप वाहन (HP06B-2420) गहरी खाई में जा गिरा, जिससे उसमें सवार सभी छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह दुर्घटना इतनी भयावह थी कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और सभी छह शवों को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। मृतकों की पहचान अभिषेक सनी (23), लायक राम (56), अशोक जेन (32) (जो वाहन चालक थे), नीतीन (23), आशा कुमारी और युगल के रूप में हुई है। ये मृतक शिमला जिले के रामपुर तहसील के शरनाल, पाठ, छलटा गांवों तथा कुल्लू जिले के आनी तहसील के कुवाणु गांव से संबंधित थे। पुलिस ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की गहन जांच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना से रामपुर और आनी क्षेत्रों में गहरा शोक व्याप्त है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं।1
- जिला मुख्यालय ऊना के पुराना होशियारपुर रोड पर स्थित लाल सिंगी गांव में शनिवार सुबह प्रवासी श्रमिकों की झोपड़ियों में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में देखते ही देखते लगभग 40 झोपड़ियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं, जिससे करीब चार लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां तत्काल मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना के बाद पुलिस ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण खाना बनाते समय निकली कोई चिंगारी या लापरवाही को माना जा रहा है। दमकल अधिकारी सुरेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि आग लगने का वास्तविक कारण विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।1