बालेटा की बेटियों का कमाल: प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने रचा इतिहास बालेटा की बेटियों का कमाल: प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने रचा इतिहास अलवर। जुनून, जज्बा और कड़ी मेहनत जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बालेटा की छात्राओं और स्टाफ ने। प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल मार्गदर्शन और शिक्षकों के समर्पण ने विद्यालय को सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया है। कक्षा 12 के प्रथम बैच ने गाड़े सफलता के झंडे बालेटा विद्यालय के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह कक्षा 12 का प्रथम बोर्ड बैच था। छात्राओं ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत (100%) परिणाम दिया है। कुल छात्राएं: 13 प्रथम श्रेणी: 12 छात्राएं (92% छात्राएं फर्स्ट डिवीजन) टॉपर्स: शालू और चंचल ने 85% अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। गार्गी पुरस्कार: विद्यालय की 8 छात्राओं का चयन प्रतिष्ठित गार्गी पुरस्कार के लिए हुआ है। कक्षा 5, 8 और 10 में भी रहा 'क्लीन स्वीप' सफलता का यह सिलसिला केवल 12वीं तक सीमित नहीं रहा। विद्यालय का कक्षा 5, 8 और 10 का परीक्षा परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा है। कक्षा 10 में छात्रा पायल ने 90% अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। कक्षा 10 में कुल तीन छात्राओं ने 90% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विपरीत परिस्थितियों में मिली 'स्वर्ण' सफलता प्रधानाचार्य संगीता गौड़ ने बताया कि विद्यालय की वर्तमान स्थिति और सीमित संसाधनों को देखते हुए ऐसा परिणाम लाना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन स्टाफ की मेहनत और छात्राओं की लगन ने इस "मुश्किल" को "मुमकिन" कर दिखाया। सफलता की खुशी में प्रधानाचार्य ने समस्त स्टाफ का मुँह मीठा कराकर उनका आभार व्यक्त किया और उत्तीर्ण छात्राओं को फोन पर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। "यह सब प्रधानाचार्य जी के अथक प्रयास, कुशल नेतृत्व और बच्चों की मेहनत का ही परिणाम है।" > — समस्त ग्रामवासी, बालेटा गांव में जश्न का माहौल विद्यालय की इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद बालेटा गांव में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने इस सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के 'एजुकेशन विजन' और शिक्षकों की टीम वर्क को दिया है। छात्राओं के घरों पर उत्सव जैसा माहौल है और हर तरफ इन "बेटियों" की चर्चा हो रही है।
बालेटा की बेटियों का कमाल: प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने रचा इतिहास बालेटा की बेटियों का कमाल: प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने रचा इतिहास अलवर। जुनून, जज्बा और कड़ी मेहनत जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बालेटा की छात्राओं और स्टाफ ने। प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल मार्गदर्शन और शिक्षकों के समर्पण ने विद्यालय को सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया है। कक्षा 12 के प्रथम बैच ने गाड़े सफलता के झंडे बालेटा विद्यालय के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह कक्षा 12 का प्रथम बोर्ड बैच था। छात्राओं ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत (100%) परिणाम दिया है। कुल छात्राएं: 13 प्रथम श्रेणी: 12 छात्राएं (92% छात्राएं फर्स्ट डिवीजन) टॉपर्स: शालू और चंचल ने 85% अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। गार्गी पुरस्कार: विद्यालय की 8 छात्राओं का चयन प्रतिष्ठित गार्गी पुरस्कार के लिए हुआ है। कक्षा 5, 8 और 10 में भी रहा 'क्लीन स्वीप' सफलता का यह सिलसिला केवल 12वीं तक सीमित नहीं रहा। विद्यालय का कक्षा 5, 8 और 10 का परीक्षा परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा है। कक्षा 10 में छात्रा पायल ने 90% अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। कक्षा 10 में कुल तीन छात्राओं ने 90% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विपरीत परिस्थितियों में मिली 'स्वर्ण' सफलता प्रधानाचार्य संगीता गौड़ ने बताया कि विद्यालय की वर्तमान स्थिति और सीमित संसाधनों को देखते हुए ऐसा परिणाम लाना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन स्टाफ की मेहनत और छात्राओं की लगन ने इस "मुश्किल" को "मुमकिन" कर दिखाया। सफलता की खुशी में प्रधानाचार्य ने समस्त स्टाफ का मुँह मीठा कराकर उनका आभार व्यक्त किया और उत्तीर्ण छात्राओं को फोन पर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। "यह सब प्रधानाचार्य जी के अथक प्रयास, कुशल नेतृत्व और बच्चों की मेहनत का ही परिणाम है।" > — समस्त ग्रामवासी, बालेटा गांव में जश्न का माहौल विद्यालय की इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद बालेटा गांव में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने इस सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के 'एजुकेशन विजन' और शिक्षकों की टीम वर्क को दिया है। छात्राओं के घरों पर उत्सव जैसा माहौल है और हर तरफ इन "बेटियों" की चर्चा हो रही है।
- बालेटा की बेटियों का कमाल: प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल नेतृत्व में विद्यालय ने रचा इतिहास अलवर। जुनून, जज्बा और कड़ी मेहनत जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बालेटा की छात्राओं और स्टाफ ने। प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के कुशल मार्गदर्शन और शिक्षकों के समर्पण ने विद्यालय को सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया है। कक्षा 12 के प्रथम बैच ने गाड़े सफलता के झंडे बालेटा विद्यालय के लिए यह वर्ष ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह कक्षा 12 का प्रथम बोर्ड बैच था। छात्राओं ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत (100%) परिणाम दिया है। कुल छात्राएं: 13 प्रथम श्रेणी: 12 छात्राएं (92% छात्राएं फर्स्ट डिवीजन) टॉपर्स: शालू और चंचल ने 85% अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। गार्गी पुरस्कार: विद्यालय की 8 छात्राओं का चयन प्रतिष्ठित गार्गी पुरस्कार के लिए हुआ है। कक्षा 5, 8 और 10 में भी रहा 'क्लीन स्वीप' सफलता का यह सिलसिला केवल 12वीं तक सीमित नहीं रहा। विद्यालय का कक्षा 5, 8 और 10 का परीक्षा परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा है। कक्षा 10 में छात्रा पायल ने 90% अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। कक्षा 10 में कुल तीन छात्राओं ने 90% से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विपरीत परिस्थितियों में मिली 'स्वर्ण' सफलता प्रधानाचार्य संगीता गौड़ ने बताया कि विद्यालय की वर्तमान स्थिति और सीमित संसाधनों को देखते हुए ऐसा परिणाम लाना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन स्टाफ की मेहनत और छात्राओं की लगन ने इस "मुश्किल" को "मुमकिन" कर दिखाया। सफलता की खुशी में प्रधानाचार्य ने समस्त स्टाफ का मुँह मीठा कराकर उनका आभार व्यक्त किया और उत्तीर्ण छात्राओं को फोन पर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। "यह सब प्रधानाचार्य जी के अथक प्रयास, कुशल नेतृत्व और बच्चों की मेहनत का ही परिणाम है।" > — समस्त ग्रामवासी, बालेटा गांव में जश्न का माहौल विद्यालय की इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद बालेटा गांव में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने इस सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य संगीता गौड़ के 'एजुकेशन विजन' और शिक्षकों की टीम वर्क को दिया है। छात्राओं के घरों पर उत्सव जैसा माहौल है और हर तरफ इन "बेटियों" की चर्चा हो रही है।1
- कुण्डल तहसील मुख्यालय पर निर्माणाधीन 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन में कथित घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। करोड़ों की लागत से बन रहे इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौते के आरोपों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।2
- RBSE 12वीं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर 99.60% अंक अर्जित करने वाली प्रतिभाशाली बेटी नव्या मीणा से आज फोन पर बात कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की। नव्या की यह अद्भुत उपलब्धि सिर्फ उनके निरंतर परिश्रम, धैर्य और समर्पण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस उज्जवल भविष्य की प्रथम किरण है, जिसकी चमक आने वाले कल में न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित करेगी। उनकी इस अनमोल सफलता ने परिवार, विद्यालय और हमारे समाज—सभी का मान बढ़ाया है। नव्या को ढेरों शुभकामनाएं—यूँ ही अपने सपनों को नई उड़ानें देती रहें, नई ऊंचाइयों को छूती रहें। बेटी की आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता का आश्वासन देते हुए, साथ ही ग्रामीण जनों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनकर उनके समाधान का आश्वासन भी दिया।1
- जब हम ख़ुर्रा ग्राम के बीजासणी माता मेले के इतिहास की बात करते हैं, तो यह केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। आज के 'कॉन्ट्रैक्ट' और 'तलाक' वाले दौर में, माता के मेले में तय हुए रिश्ते आज भी चट्टान की तरह मजबूत खड़े हैं। मैं, खेमराज जोशी, खुद इस परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण हूँ—मेरा अपना रिश्ता इसी पावन मेले में तय हुआ था, जो बिना किसी बिखराव के आज भी पूरी मजबूती के साथ चल रहा है। रिश्तों की वह 'अदृश्य' डोर आज से ४० साल पहले, जब समाज बीजासणी माता के आँगन में इकट्ठा होता था, तो वहां केवल व्यापार नहीं होता था, बल्कि परिवारों का मिलन होता था। शब्द की कीमत: उस समय न कोई लिखित एग्रीमेंट था, न कोई कानूनी कागज़। माता की चौखट पर दी गई 'जुबान' ही सबसे बड़ा कानून थी। अटूट बंधन: मेरा स्वयं का उदाहरण गवाह है कि उस समय के रिश्तों में जो 'ठहराव' था, वह माता के प्रति अटूट श्रद्धा और आपसी विश्वास का परिणाम था। आज की चकाचौंध वाले वैवाहिक आयोजनों के मुकाबले, मेले की उस सादगी में बंधे रिश्ते कहीं ज्यादा टिकाऊ साबित हुए हैं। संस्कृति का गिरता स्तर और हमारी जिम्मेदारी पहले मेहमानों के लिए दरवाजे चौबीस घंटे खुले रहते थे। गाँवों में उत्साह ऐसा होता था कि लोग अपने घर आए मेहमान को भगवान का रूप मानते थे। आज इंतजाम सरकारी हैं, व्यवस्थाएं आधुनिक हैं, लेकिन वह 'अपनापन' गायब है बीजासणी माता के मेले की वह ४० साल पुरानी विरासत आज भी उन लोगों की यादों में और उनके सफल वैवाहिक जीवन में जीवित है, जिन्होंने उस दौर को जिया है। मेरा रिश्ता मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की एक कड़ी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को समझने और सहेजने की जरूरत है ग्राऊंड रिपोर्ट :खेमराज जोशी, शुरू न्यूज़,2
- Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS1
- हिंडौन करौली रोड पुराना फुलवाडा टोल टैक्स के ब्रेकर पर दो आगे चल रही गाड़ी ने लगाई ब्रेक पीछे आ रही गाड़ी ने मारी पीछे से टक्कर पीछे वाली गाड़ी भरतपुर से केला देवी मां के दर्शन करने जा रही थी और आगे वाली गाड़ी टोडाभीम के भैंसा गांव से दुल्हन को लेने कुतकपुर,गुणसार जा रही थी महिला यात्रियों के साथ मारपीट का आरोप3
- Post by Janta Seva841
- दौसा। कुण्डल में बन रहा 30 बेड सीएचसी भवन बना विवादों केन्द्र,घटिया निर्माण पर ग्रामीणों का उबाल देखने को मिला कुण्डल तहसील मुख्यालय पर निर्माणाधीन 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन में कथित घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। करोड़ों की लागत से बन रहे इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौते के आरोपों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह सीएचसी भवन क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों और लगभग 50 हजार की आबादी के लिए जीवनरेखा साबित होने वाला है। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने इस उम्मीद पर चिंता की परत चढ़ा दी है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं वार रूम कोऑर्डिनेटर जितेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में खुलेआम मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बजरी की जगह मिट्टी का इस्तेमाल, कमजोर गुणवत्ता की ईंटें और जंग लगे लोहे के सरिए इस भवन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई, तो भविष्य में यह भवन मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए खतरे का कारण बन सकता है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह सीएचसी बनने के बाद कुंडल, बडोली, निमाली, कालोता, खड़का, सिडोली, भांवता, खानभंकरी, कोलवा, दुडकी, बगडेडा, कालीपहाड़ी, तलवाड़ा, चौबड़ीवाला, मांगाभाटा और धर्मपुरा सहित कई गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी हैं। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल पूरे क्षेत्र की चिंता का विषय बन गए हैं। प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब: विरोध प्रदर्शन में राजेश मीना, अशोक योगी, नरेंद्र मीना, गिर्राज सैनी, लोकेश बैरवा, खेमराज मीणा, रितिकराज, कमलेश मीणा, दीपक सैनी, महेश सैनी, रोहित बैरवा और खुशीराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। जांच का भरोसा, लेकिन सवाल बरकरार: एनएचएम निर्माण विंग अलवर के अधिशासी अभियंता शिवराम जाटव ने बताया कि वे स्वयं और संबंधित अधिकारी निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं और शिकायतों की जांच कराई जाएगी। वहीं, सीएचसी प्रभारी डॉ. लोकेश कुमार मीणा ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया है।4