बावलिया खाल में गूंजा आस्था का जयघोष, खेड़ापति हनुमान व शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी शुरू कुशलगढ़। बावलिया खाल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में श्रावण मास के सोमवार एवं नाग पंचमी के पावन अवसर पर धार्मिक आयोजन हुआ। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर बावरिया खाल एवं शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को निर्धारित करने तथा तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से विभिन्न देवी-देवताओं को विधिवत आमंत्रित किया गया। इस दौरान भगवान श्री हनुमान जी, तेजाजी, दशा माता, शनि महाराज एवं शिव मंदिर नागनाथ में पूजा-अर्चना कर श्रीफल भेंट किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना करते हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को सफल एवं निर्विघ्न संपन्न कराने की कामना की। इस अवसर पर नगर के प्रमुख यजमान सुधीर स्वर्णकार द्वारा श्रीफल रखवाया गया। कार्यक्रम में हनुमान मंदिर समिति के सदस्य एवं भक्त उपस्थित रहे। इस दौरान कमलेश कावड़िया, संदीप नाहटा, जगदीश चंद्र पटेल, कैलाश प्रजापत, हसमुख जोशी, बाबूलाल प्रजापत, नारायण लाल बारोडिया, हरेंद्र बारोडिया, नितेश बैरागी, अशोक जोशी सहित मंदिर के पुजारी कैलाश बैरागी एवं अन्य भक्त मौजूद रहे।
बावलिया खाल में गूंजा आस्था का जयघोष, खेड़ापति हनुमान व शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी शुरू कुशलगढ़। बावलिया खाल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में श्रावण मास के सोमवार एवं नाग पंचमी के पावन अवसर पर धार्मिक आयोजन हुआ। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर बावरिया खाल एवं शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को निर्धारित करने तथा तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से विभिन्न देवी-देवताओं को विधिवत आमंत्रित किया गया। इस दौरान भगवान श्री हनुमान जी, तेजाजी, दशा माता, शनि महाराज एवं शिव मंदिर
नागनाथ में पूजा-अर्चना कर श्रीफल भेंट किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना करते हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को सफल एवं निर्विघ्न संपन्न कराने की कामना की। इस अवसर पर नगर के प्रमुख यजमान सुधीर स्वर्णकार द्वारा श्रीफल रखवाया गया। कार्यक्रम में हनुमान मंदिर समिति के सदस्य एवं भक्त उपस्थित रहे। इस दौरान कमलेश कावड़िया, संदीप नाहटा, जगदीश चंद्र पटेल, कैलाश प्रजापत, हसमुख जोशी, बाबूलाल प्रजापत, नारायण लाल बारोडिया, हरेंद्र बारोडिया, नितेश बैरागी, अशोक जोशी सहित मंदिर के पुजारी कैलाश बैरागी एवं अन्य भक्त मौजूद रहे।
- बावलिया खाल में गूंजा आस्था का जयघोष, खेड़ापति हनुमान व शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी शुरू कुशलगढ़। बावलिया खाल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में श्रावण मास के सोमवार एवं नाग पंचमी के पावन अवसर पर धार्मिक आयोजन हुआ। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर बावरिया खाल एवं शनि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को निर्धारित करने तथा तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से विभिन्न देवी-देवताओं को विधिवत आमंत्रित किया गया। इस दौरान भगवान श्री हनुमान जी, तेजाजी, दशा माता, शनि महाराज एवं शिव मंदिर नागनाथ में पूजा-अर्चना कर श्रीफल भेंट किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना करते हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को सफल एवं निर्विघ्न संपन्न कराने की कामना की। इस अवसर पर नगर के प्रमुख यजमान सुधीर स्वर्णकार द्वारा श्रीफल रखवाया गया। कार्यक्रम में हनुमान मंदिर समिति के सदस्य एवं भक्त उपस्थित रहे। इस दौरान कमलेश कावड़िया, संदीप नाहटा, जगदीश चंद्र पटेल, कैलाश प्रजापत, हसमुख जोशी, बाबूलाल प्रजापत, नारायण लाल बारोडिया, हरेंद्र बारोडिया, नितेश बैरागी, अशोक जोशी सहित मंदिर के पुजारी कैलाश बैरागी एवं अन्य भक्त मौजूद रहे।2
- Post by Harish Ninama1
- बजाना जिला रतलाम मध्य प्रदेश शान द्वारा हमारे हमारे समाचार यूट्यूब पर ध्यान दें हर खबर देखते रहे बजाना पानी की समस्या हर समस्या के लिए नदी नाला पानी में नहीं हो रहा है मच्छर 18 रोग से परेशानी होने से कारण नदी नाला कमजोरी दवाई मिल सकती है मच्छर भी नहीं हर समस्या के लिए जल्दी से जल्दी अच्छी दवाई दे और अच्छाकाम1
- बेणेश्वर धाम आसपुर साबला सागर के बीच में बेणेश्वर धाम वहां पर अंतिम संस्कार करते समय बारिश आ गए1
- नेमीनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का नाट्य मंचन के साथ आगाज, आज निकलेगा वरघोड़ा नेमीनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का नाट्य मंचन के साथ आगाज, आज निकलेगा वरघोड़ा तीर्थंकरों के जन्म से खिल उठती है प्रकृति : साध्वी शहर के श्री जैन श्वेतांबर विशा पोरवाड़ संघ के तत्वावधान में ओटा स्थित नेमीनाथ मंदिर में साध्वी श्री निर्मलगुणा श्रीजी आदि ठाणा-5 के सानिध्य में तीन दिवसीय भगवान नेमीनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का रविवार को शुभारंभ हुआ। पहले दिन पुण्य प्रवचन हॉल में भगवान के च्यवन प्रसंग का भावपूर्ण नाट्य मंचन हुआ। इसमें भगवान के माता-पिता, इंद्र-इंद्राणी, नगर सेठ, राज ज्योतिषी, प्रियंवदा, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, सेनापति सहित कई पात्रों ने प्रभावी अभिनय किया। साध्वी श्री निर्मलगुणा श्रीजी ने कहा कि जब भी किसी तीर्थंकर का जन्म होने वाला होता है, तब प्रकृति भी खिल उठती है। चारों ओर प्रकाश फैलता है। सुख, शांति, समृद्धि का वातावरण बनता है। तीर्थंकरों के धरती पर अवतरण के साथ मनुष्य के साथ पशु-पक्षी भी आनंदित होकर चहचहाने लगते हैं। नाट्य मंचन के दौरान प्रियंवदा ने राजा को भगवान के जन्म का समाचार सुनाया। पूरा पंडाल खुशी से झूम उठा। श्रद्धालु हर्षोल्लास में नाचने लगे। वातावरण भगवान नेमीनाथ के जयकारों से गूंज उठा। पात्रों ने अपने अभिनय से च्यवन प्रसंग को जीवंत कर दिया। इससे पहले सुबह जिनालय में भगवान का पक्षाल हुआ। केसर पूजा हुई। आरती सहित अन्य धार्मिक आयोजन हुए। महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। महोत्सव के तहत सोमवार को भगवान नेमीनाथ के जन्म कल्याणक के निमित्त भव्य वरघोड़ा निकलेगा। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। वरघोड़े में समाजजन, श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे1
- डूंगरपुर में किसका राज़ बाप पार्टी के दिग्विजय सिंह या फिर भाजपा के विकास पुरुष के के गुप्ता डूंगरपुर की राजनीति में नया मोड़, कभी साथ चले आज आमने सामने,,,, जनता अब क्या करेगी,,दोनों एक दूसरे के बारे में बहुत सी बाते जानते है,,,अब किस की क्या खुलेगी,,,ओर जनता किस को अपना ऐगी....नगर सभापति के लिए.... विकास पुरुष के के गुप्ता या फिर बाप पार्टी के दिग्विजय सिंह1
- रविवार को गौरेश्वर महादेव अरनोद का सायंकालीन मनमोहक श्रृंगार1
- 800 साल पुराने ओबलेश्वर मंदिर में छिपा है इतिहास, 11वीं-12वीं शताब्दी की शिलाखंड व प्रतिमाएं आनंदपुरी। कस्बे से करीब 5 किमी दूर और जिला मुख्यालय बांसवाड़ा से लगभग 70 किमी दूर ओबला गांव में स्थित प्राचीन ओबलेश्वर महादेव मंदिर अपने भीतर इतिहास और स्थापत्य कला की अनमोल विरासत समेटे हुए है। मंदिर परिसर में 11वीं-12वीं शताब्दी के दौर के शिलाखंड, प्रतिमाएं और अन्य प्राचीन अवशेष आज भी दिखाई देते हैं। मंदिर की ऐतिहासिक विरासत इसके आसपास बिखरे पत्थरों और शिलाखंडों में साफ नजर आती है। कई शिलाखंडों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां व नक्काशीदार आकृतियां बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां प्राचीन मंदिरों के निर्माण में प्रयुक्त शिल्प अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध प्राचीन कला एवं संस्कृति की कहानी कहते हैं। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां दर्शन-पूजन करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सावन के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन शिलाखंडों पर लगातार प्राकृतिक क्षरण का असर दिखाई दे रहा है। कई अवशेष इधर-उधर बिखरे हुए हैं और कुछ झाड़ियों के बीच पड़े हैं। स्थानीय पुजारी एवं सेवक शांतिलाल पारगी ने बताया कि क्षेत्र में कई प्राचीन मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं, जिनके संरक्षण की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन प्राचीन अवशेषों का पुरातात्विक सर्वेक्षण कर संरक्षण किया जाए तो ओबलेश्वर मंदिर को क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहचान मिल सकती है।1