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भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के फेल हो जाने की एक मजेदार स्थिति इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रही है। यह कॉमेडी, फनी मोमेंट्स और एंटरटेनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, और लोग इसे एक फनी रील या मीम के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं।

1 hr ago
user_Seth Ji 5G
Seth Ji 5G
बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के फेल हो जाने की एक मजेदार स्थिति इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रही है। यह कॉमेडी, फनी मोमेंट्स और एंटरटेनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, और लोग इसे एक फनी रील या मीम के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं।

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  • भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के फेल हो जाने की एक मजेदार स्थिति इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रही है। यह कॉमेडी, फनी मोमेंट्स और एंटरटेनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, और लोग इसे एक फनी रील या मीम के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं।
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    भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के फेल हो जाने की एक मजेदार स्थिति इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रही है। यह कॉमेडी, फनी मोमेंट्स और एंटरटेनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, और लोग इसे एक फनी रील या मीम के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं।
    user_Seth Ji 5G
    Seth Ji 5G
    बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • फेफना थाना क्षेत्र के दुमदुमा गांव में रविवार शाम एक घर की छत की ढलाई के दौरान हुए विवाद में पीड़िता ममता देवी ने गांव के दबंगों पर निर्माणाधीन छत को क्षतिग्रस्त करने, गाली-गलौज करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में पुलिस से आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। अमडारी गांव की मूल निवासी ममता देवी ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि उन्होंने फरवरी 2026 में संबंधित भूमि की रजिस्ट्री कराई थी और मुख्य मार्ग से लगभग डेढ़ फीट जमीन छोड़कर मकान बनवा रही थीं। रविवार को जब मकान की छत की ढलाई का काम चल रहा था, तभी शाम के समय गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने ढलाई में लगी सेंटरिंग, बांस और बल्लियों को गिरा दिया, जिससे निर्माणाधीन छत क्षतिग्रस्त हो गई। ममता देवी का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज भी की गई। इस घटना की सूचना मिलने पर यूपी-112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन थाना पर आकर शिकायत दर्ज कराने की बात कहकर वापस लौट गई। पीड़िता के देवर रामाकांत गोंड ने बताया कि घटना के समय घर पर केवल महिलाएं मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलकर उनके निर्माण कार्य में बाधा डाली, जबकि वे अपनी जमीन की सीमा के भीतर ही निर्माण करा रहे थे और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। इस संबंध में फेफना थानाध्यक्ष विश्वदीप सिंह ने बताया कि अभी तक उनके पास कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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    फेफना थाना क्षेत्र के दुमदुमा गांव में रविवार शाम एक घर की छत की ढलाई के दौरान हुए विवाद में पीड़िता ममता देवी ने गांव के दबंगों पर निर्माणाधीन छत को क्षतिग्रस्त करने, गाली-गलौज करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में पुलिस से आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

अमडारी गांव की मूल निवासी ममता देवी ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि उन्होंने फरवरी 2026 में संबंधित भूमि की रजिस्ट्री कराई थी और मुख्य मार्ग से लगभग डेढ़ फीट जमीन छोड़कर मकान बनवा रही थीं। रविवार को जब मकान की छत की ढलाई का काम चल रहा था, तभी शाम के समय गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने ढलाई में लगी सेंटरिंग, बांस और बल्लियों को गिरा दिया, जिससे निर्माणाधीन छत क्षतिग्रस्त हो गई। ममता देवी का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज भी की गई।

इस घटना की सूचना मिलने पर यूपी-112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन थाना पर आकर शिकायत दर्ज कराने की बात कहकर वापस लौट गई। पीड़िता के देवर रामाकांत गोंड ने बताया कि घटना के समय घर पर केवल महिलाएं मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मिलकर उनके निर्माण कार्य में बाधा डाली, जबकि वे अपनी जमीन की सीमा के भीतर ही निर्माण करा रहे थे और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

इस संबंध में फेफना थानाध्यक्ष विश्वदीप सिंह ने बताया कि अभी तक उनके पास कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Kanhaiya Verma
    Kanhaiya Verma
    Media house बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बलिया जिला कलेक्ट्रेट पर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर बढ़ती महंगाई के विरोध में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आम जनता पर लगातार बढ़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा।
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    बलिया जिला कलेक्ट्रेट पर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर बढ़ती महंगाई के विरोध में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आम जनता पर लगातार बढ़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा।
    user_Ashutosh Tiwari
    Ashutosh Tiwari
    Computer Programmer बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • दोस्तों, एक नया 'पुष्पा' डायलॉग वीडियो बनाया गया है, जिसे देखने वाले ने बेहद 'मस्त' बताया है। इस वीडियो को बनाने वाले इसे देखने और ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील कर रहे हैं, ताकि सभी दोस्त इसे देख सकें।
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    दोस्तों, एक नया 'पुष्पा' डायलॉग वीडियो बनाया गया है, जिसे देखने वाले ने बेहद 'मस्त' बताया है। इस वीडियो को बनाने वाले इसे देखने और ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की अपील कर रहे हैं, ताकि सभी दोस्त इसे देख सकें।
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • समाजवादी पार्टी ने बलिया में महंगाई, बिजली से जुड़ी समस्याओं और पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर एक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने इन जनहित से जुड़े विषयों पर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया।
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    समाजवादी पार्टी ने बलिया में महंगाई, बिजली से जुड़ी समस्याओं और पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर एक जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने इन जनहित से जुड़े विषयों पर अपना तीव्र विरोध दर्ज कराया।
    user_गंगा 24 ख़बर
    गंगा 24 ख़बर
    Mobile Phone Shop सिकंदरपुर, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सिवान जिले के सिसवन प्रखंड अंतर्गत भीखपुर और बखरी पंचायतों में एक सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और राशन कार्ड, पेंशन, भूमि, आवास, नल-जल, बिजली तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित अपनी विभिन्न समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया, जबकि कुछ जटिल मामलों के शीघ्र समाधान का आश्वासन भी दिया गया। इस पहल का जायजा लेने पहुंचे जिला परिषद सदस्य ब्रजेश सिंह ने इसे सरकार की एक सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों के माध्यम से शासन व्यवस्था गाँव-गाँव तक पहुंची है, जिससे अब ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ब्लॉक या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इस अवसर पर बीडीओ राजेश कुमार, सीओ पंकज कुमार सहित कई पंचायत प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
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    सिवान जिले के सिसवन प्रखंड अंतर्गत भीखपुर और बखरी पंचायतों में एक सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और राशन कार्ड, पेंशन, भूमि, आवास, नल-जल, बिजली तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित अपनी विभिन्न समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया, जबकि कुछ जटिल मामलों के शीघ्र समाधान का आश्वासन भी दिया गया।

इस पहल का जायजा लेने पहुंचे जिला परिषद सदस्य ब्रजेश सिंह ने इसे सरकार की एक सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों के माध्यम से शासन व्यवस्था गाँव-गाँव तक पहुंची है, जिससे अब ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ब्लॉक या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इस अवसर पर बीडीओ राजेश कुमार, सीओ पंकज कुमार सहित कई पंचायत प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
    user_Sachita nand pandey
    Sachita nand pandey
    सिसवन, सीवान, बिहार•
    5 hrs ago
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर प्लास्टिक करेंसी या पॉलीमर नोट्स को प्रचलन में लाने के विचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब डिजिटल भुगतान और UPI के तेजी से विस्तार के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी ₹42.86 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। वर्तमान में, कागजी करेंसी को छापने और पुराने नोटों को बदलने पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पॉलीमर नोट्स इस समस्या का समाधान प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वे गंदगी, नमी और फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और इनमें बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे जाली करेंसी बनाना कठिन हो जाता है। भारत ने 2012 में ₹10 के पॉलीमर नोट्स का परीक्षण भी किया था, लेकिन तब तकनीकी और ATM से संबंधित चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब नई तकनीक के आगमन के साथ यह विचार एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर सहित लगभग 60 देश पहले से ही पॉलीमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं। यह विषय RBI, करेंसी मैनेजमेंट, मॉनेटरी सिस्टम, फाइनेंशियल इंक्लूजन और इकोनॉमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत को कागजी नोटों से पॉलीमर नोट्स की ओर बढ़ना चाहिए, जिस पर लोगों से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।
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    भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर प्लास्टिक करेंसी या पॉलीमर नोट्स को प्रचलन में लाने के विचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब डिजिटल भुगतान और UPI के तेजी से विस्तार के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी ₹42.86 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है।

वर्तमान में, कागजी करेंसी को छापने और पुराने नोटों को बदलने पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पॉलीमर नोट्स इस समस्या का समाधान प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वे गंदगी, नमी और फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और इनमें बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे जाली करेंसी बनाना कठिन हो जाता है। भारत ने 2012 में ₹10 के पॉलीमर नोट्स का परीक्षण भी किया था, लेकिन तब तकनीकी और ATM से संबंधित चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब नई तकनीक के आगमन के साथ यह विचार एक बार फिर चर्चा में है।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर सहित लगभग 60 देश पहले से ही पॉलीमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं। यह विषय RBI, करेंसी मैनेजमेंट, मॉनेटरी सिस्टम, फाइनेंशियल इंक्लूजन और इकोनॉमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत को कागजी नोटों से पॉलीमर नोट्स की ओर बढ़ना चाहिए, जिस पर लोगों से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।
    user_गांव ज्वार
    गांव ज्वार
    Local News Reporter नवाँनगर, बक्सर, बिहार•
    2 hrs ago
  • एक कंटेंट क्रिएटर ने बताया है कि वीडियो बनाने में बहुत मेहनत लगती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि आज उन्हें वीडियो बनाने का समय नहीं मिला। इसी कारण, उन्होंने कहा कि वे 'कुछ भी' पोस्ट कर रहे हैं। क्रिएटर ने अपने दोस्तों से 'जोड़ी प्राइस' कहकर एक अनुरोध भी किया है।
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    एक कंटेंट क्रिएटर ने बताया है कि वीडियो बनाने में बहुत मेहनत लगती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि आज उन्हें वीडियो बनाने का समय नहीं मिला। इसी कारण, उन्होंने कहा कि वे 'कुछ भी' पोस्ट कर रहे हैं। क्रिएटर ने अपने दोस्तों से 'जोड़ी प्राइस' कहकर एक अनुरोध भी किया है।
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist बलिया, बलिया, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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