भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर प्लास्टिक करेंसी या पॉलीमर नोट्स को प्रचलन में लाने के विचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब डिजिटल भुगतान और UPI के तेजी से विस्तार के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी ₹42.86 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। वर्तमान में, कागजी करेंसी को छापने और पुराने नोटों को बदलने पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पॉलीमर नोट्स इस समस्या का समाधान प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वे गंदगी, नमी और फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और इनमें बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे जाली करेंसी बनाना कठिन हो जाता है। भारत ने 2012 में ₹10 के पॉलीमर नोट्स का परीक्षण भी किया था, लेकिन तब तकनीकी और ATM से संबंधित चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब नई तकनीक के आगमन के साथ यह विचार एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर सहित लगभग 60 देश पहले से ही पॉलीमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं। यह विषय RBI, करेंसी मैनेजमेंट, मॉनेटरी सिस्टम, फाइनेंशियल इंक्लूजन और इकोनॉमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत को कागजी नोटों से पॉलीमर नोट्स की ओर बढ़ना चाहिए, जिस पर लोगों से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर प्लास्टिक करेंसी या पॉलीमर नोट्स को प्रचलन में लाने के विचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब डिजिटल भुगतान और UPI के तेजी से विस्तार के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी ₹42.86 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। वर्तमान में, कागजी करेंसी को छापने और पुराने नोटों को बदलने पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पॉलीमर नोट्स इस समस्या का समाधान प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वे गंदगी, नमी और फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और इनमें बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे जाली करेंसी बनाना कठिन हो जाता है। भारत ने 2012 में ₹10 के पॉलीमर नोट्स का परीक्षण भी किया था, लेकिन तब तकनीकी और ATM से संबंधित चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब नई तकनीक के आगमन के साथ यह विचार एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर सहित लगभग 60 देश पहले से ही पॉलीमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं। यह विषय RBI, करेंसी मैनेजमेंट, मॉनेटरी सिस्टम, फाइनेंशियल इंक्लूजन और इकोनॉमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत को कागजी नोटों से पॉलीमर नोट्स की ओर बढ़ना चाहिए, जिस पर लोगों से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर प्लास्टिक करेंसी या पॉलीमर नोट्स को प्रचलन में लाने के विचार पर काम शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब डिजिटल भुगतान और UPI के तेजी से विस्तार के बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी ₹42.86 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी है। वर्तमान में, कागजी करेंसी को छापने और पुराने नोटों को बदलने पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पॉलीमर नोट्स इस समस्या का समाधान प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वे गंदगी, नमी और फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। इनकी उम्र लंबी होती है और इनमें बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी जा सकती हैं, जिससे जाली करेंसी बनाना कठिन हो जाता है। भारत ने 2012 में ₹10 के पॉलीमर नोट्स का परीक्षण भी किया था, लेकिन तब तकनीकी और ATM से संबंधित चुनौतियों के कारण इसे रोक दिया गया था। अब नई तकनीक के आगमन के साथ यह विचार एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर सहित लगभग 60 देश पहले से ही पॉलीमर करेंसी का उपयोग कर रहे हैं। यह विषय RBI, करेंसी मैनेजमेंट, मॉनेटरी सिस्टम, फाइनेंशियल इंक्लूजन और इकोनॉमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत को कागजी नोटों से पॉलीमर नोट्स की ओर बढ़ना चाहिए, जिस पर लोगों से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- Post by Sharda Singh1
- सोमवार को चरपोखरी प्रखंड मुख्यालय स्थित पंचायती राज भवन में एक दिव्यांगता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर बीडीओ मोनिका कुमारी के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों की जांच करना और उन्हें सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने हेतु आवेदन लेना था। शाम करीब 4 बजे तक शिविर में कुल 48 दिव्यांगजनों ने अपने आवेदन जमा किए। उपस्थित चिकित्सकों की टीम ने सभी आवेदकों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया। इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी डॉ. सुशांत कुमार गुप्ता, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. हर्षिता एवं डॉ. अनामिका मौजूद रहीं, जबकि लैब टेक्नीशियन प्रमोद कुमार, ऋषि कुमार, अंशु कुमारी, सुजीत कुमार तथा एनएम प्रीति सिन्हा सहित अन्य कर्मियों ने शिविर के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।1
- बिहार के वैशाली जिले में 84 साल के एक बुजुर्ग को जेल जाना पड़ा है, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इससे सबक लेने की बात कर रहे हैं। इस उम्र में, जब बुजुर्गों को अपने बेटों और पोतों के सहारे की ज़रूरत होती है, उन्हें सलाखों के पीछे धकेला गया है। उनकी शारीरिक स्थिति अब ऐसी है कि उनका शरीर साथ छोड़ चुका है; वे ठीक से चल या बैठ नहीं पाते और उन्हें दो-दो लोगों के सहारे से बिठाना पड़ता है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके दीप राय को जवानी के दिनों में किए गए एक जघन्य अपराध की सज़ा भुगतनी पड़ रही है, जिसने उनके बुढ़ापे को नरक बना दिया है। यह पूरा मामला करीब 33 साल पुराना है, जो 10 नवंबर 1992 की सुबह वैशाली जिले के राघवपुर गाँव का है। उस दिन अदालत राय और उनकी पत्नी रामशकी देवी अपने घर के दरवाज़े पर बैठे थे, तभी दीप राय अपने परिवार के साथ हथियारों से लैस होकर वहाँ पहुँचा। उसने रास्ते पर काँच के टुकड़े बिछाना शुरू कर दिया, जिसका जब अदालत राय और उनकी पत्नी ने विरोध किया, तो दीप राय और उसके परिवार ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इसी मामले में, जीवन के अंतिम पड़ाव पर ठीक से चल पाने में असमर्थ, इस 84 वर्षीय बुजुर्ग को सहारे के साथ सलाखों तक पहुँचाया गया है।1
- सासाराम में जिला प्रशासन और नगर निगम ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने तथा फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुराने बस पड़ाव परिसर में एक वेंडर जोन का निर्माण कराया था। इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे और इसे शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। हालांकि, शुरुआती दिनों में उत्साह के बावजूद, यह योजना कुछ ही समय बाद लगभग असफल साबित हो गई है। प्रशासन ने शुरुआत में शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और सड़कों पर दुकान लगाने वाले ठेला, खोमचा और सब्जी विक्रेताओं को इस वेंडर जोन में स्थानांतरित किया था। लेकिन दुकानदारों का कहना है कि वेंडर जोन में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम है, क्योंकि लोगों की खरीदारी की आदतें और बाजार की गतिविधियां अभी भी शहर के मुख्य क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। इससे उनकी बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों का आरोप है कि वेंडर जोन का चयन व्यावहारिक नहीं था, क्योंकि यह शहर के मुख्य बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर है, जिसके कारण ग्राहक वहां पहुंचने से बचते हैं। नतीजतन, अधिकांश दुकानदार धीरे-धीरे अपने पुराने स्थानों पर लौट गए और फिर से प्रमुख सड़कों एवं चौक-चौराहों पर दुकानें सजाने लगे, जिससे शहर में अतिक्रमण की समस्या एक बार फिर बढ़ गई है। वर्तमान स्थिति यह है कि पुराने बस पड़ाव स्थित वेंडर जोन लगभग खाली पड़ा हुआ है, और जिस उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का मानना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत और दुकानदारों की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब वे प्रशासन से इस समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और फुटपाथी दुकानदारों को भी रोजगार के लिए उपयुक्त स्थान मिल सके। इस संबंध में, सासाराम नगर निगम के नगर आयुक्त विकास कुमार ने बताया कि नगर निगम लगातार सड़क जाम की समस्या और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने को लेकर सक्रिय है, और सासाराम नगर वासियों को जल्द ही जाम की समस्या से निजात मिलेगी।1
- भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के फेल हो जाने की एक मजेदार स्थिति इंटरनेट पर खूब ट्रेंड कर रही है। यह कॉमेडी, फनी मोमेंट्स और एंटरटेनमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, और लोग इसे एक फनी रील या मीम के रूप में खूब पसंद कर रहे हैं।1
- रोहतास के करगहर थाना क्षेत्र के बालापुर गाँव की एक महिला दुर्गा देवी ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। दुर्गा देवी ने एक वीडियो जारी कर अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उसने अपनी सास और ननद पर शादी के बाद से ही लगातार मारपीट और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। महिला ने बताया कि उसके पति का व्यवहार उसके प्रति ठीक है, लेकिन सास और ननद की प्रताड़ना के कारण उसका जीवन मुश्किल हो गया है। पीड़िता के अनुसार, इस मामले को सुलझाने के लिए गाँव के कई ग्रामीणों और सामाजिक लोगों की मौजूदगी में पंचायतें भी आयोजित की गईं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। अब दुर्गा देवी ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच करने और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की पुरज़ोर मांग की है। हालांकि, पुलिस का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है और मामले की सत्यता की पुष्टि जाँच के बाद ही हो पाएगी।1
- कुछ ही सेकंड के भीतर मौसम में आए एक अविश्वसनीय और अचानक बदलाव को दर्शाते हुए, एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में ऐसा भीषण आंधी-तूफान दिखाया गया है कि उसकी तीव्रता का वर्णन करना मुश्किल है। यह स्थिति उस पिछली गर्मी के ठीक विपरीत है, जब कुछ देर पहले एक अन्य वीडियो में बताया गया था कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक भी पेड़ की पत्तियाँ हिल नहीं रही थीं। अब दर्शक यह जानने को उत्सुक हैं कि इस तेज तूफान के साथ बारिश भी आएगी या यह सिर्फ आकर ही चला जाएगा।1