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प्रेस क्लब जीरकपुर की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसमें बलविंदर सिंह (विक्की) को सर्वसम्मति से क्लब का प्रधान चुना गया। इस चुनाव के साथ ही, विक्की प्रेस क्लब जीरकपुर के नौवें प्रधान बन गए हैं।
देश खबरनामा
प्रेस क्लब जीरकपुर की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसमें बलविंदर सिंह (विक्की) को सर्वसम्मति से क्लब का प्रधान चुना गया। इस चुनाव के साथ ही, विक्की प्रेस क्लब जीरकपुर के नौवें प्रधान बन गए हैं।
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- प्रेस क्लब जीरकपुर की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसमें बलविंदर सिंह (विक्की) को सर्वसम्मति से क्लब का प्रधान चुना गया। इस चुनाव के साथ ही, विक्की प्रेस क्लब जीरकपुर के नौवें प्रधान बन गए हैं।1
- चंडीगढ़ के मणिमाजरा स्थित पीपलीवाला टाउन में एक गंभीर स्थिति सामने आई है, जहाँ युवकों ने एक ग्राउंड के पीछे सरेआम नशे का अड्डा बना रखा है। यहाँ नशेड़ी खुले तौर पर अपनी गतिविधियाँ अंजाम देते हैं, और इसकी लाइव तस्वीरें भी उपलब्ध हैं। यह आरोप लगाया गया है कि पुलिस प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है, जिसके कारण यह अवैध गतिविधि बेरोकटोक जारी है।1
- यह संदेश उन लोगों तक अवश्य पहुँचाया जाना चाहिए जो अपनी जिंदगी से हार मान लेते हैं और निराश हो चुके हैं।1
- शिमला में वकीलों द्वारा किए गए 'चक्का जाम' को लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल के कारण करीब तीन से चार घंटे तक ट्रैफिक जाम रहा, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नरेश चौहान ने स्पष्ट किया कि छोटा शिमला से शिल्ली चौक तक की सड़क एक 'सील्ड रोड' है और इसे पूरी तरह ट्रैफिक के लिए खोलना उचित नहीं होगा। उन्होंने जानकारी दी कि परमिट मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए विधानसभा में एक बिल पारित कर प्रति माह 1 हजार रुपये परमिट फीस तय की गई थी। साथ ही, इन रूट्स के दुरुपयोग की सूचनाएं भी सामने आ रही थीं। नरेश चौहान ने वकीलों के विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जा सकता था और उग्र होने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने सुझाया कि चुनी हुई प्रतिनिधि बॉडी मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रख सकती थी। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कानून की समझ रखने वाले लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी और सवाल उठाया कि वकील किस अथॉरिटी से लोगों की गाड़ियों को रोककर चालान कटवा रहे थे। उन्होंने इसे कानून को हाथ में लेने का अनुचित तरीका बताया। चौहान ने बताया कि बातचीत के बाद यह सहमति बनी है कि एक कमेटी गठित की जाएगी, जो सूची तैयार करेगी और यह तय करेगी कि किन लोगों को रियायती पास दिए जा सकते हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेश चौहान ने इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और कहा कि वकीलों की आवाज कोई नहीं दबा सकता।2
- बिलासपुर कांग्रेस के सदर और पूर्व नेता बंबर ठाकुर से संबंधित एक 'शूटर हुआ था' का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम पर बंबर ठाकुर क्या कहते हैं, इसकी पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखने का आग्रह किया गया है।1
- करनाल से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर नाबालिग लड़की के साथ गलत काम करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया गया है कि इस डॉक्टर ने सरकारी अस्पताल की ओपीडी में लड़की को बार-बार पीड़ित किया और उसके साथ 'रे...प' जैसा घिनौना कृत्य किया। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी को सड़क पर लेकर निकली, जो इस मामले की गंभीरता और सार्वजनिक रोष को दर्शाता है।1
- जगाधरी सिविल लाइन में स्थित अति प्राचीन गोगामेड़ी में वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर से आरती का शुभारंभ किया गया है। श्रद्धालुओं की विशेष पहल पर हुई इस शुरुआत के बाद, अब गोगामेड़ी में प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय विधि-विधान से आरती की जाएगी। आरती संपन्न होने के उपरांत, भक्तों ने आपस में खीर का प्रसाद वितरित कर अपनी खुशी और उत्साह का प्रदर्शन किया।1
- हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों के नतीजों के बाद, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने दावा किया है कि जनता ने कांग्रेस सरकार को पूरी तरह नकार दिया है और अब मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देकर विधानसभा चुनाव का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। रणधीर शर्मा के अनुसार, इन चुनावों में भाजपा की 'सुनामी' आई है, जिसमें कांग्रेस का प्रदेशभर में 'सुपड़ा साफ' हो गया है। उन्होंने कहा कि यह जनादेश स्पष्ट संकेत देता है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का समय निकट है। शर्मा ने चुनाव परिणामों का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया कि चार नगर निगमों में से तीन प्रमुख नगर निगमों - मंडी, धर्मशाला और सोलन - में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 22 में से 12 और नगर पंचायतों में 25 में से 18 स्थानों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। जिला परिषद चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 250 में से 144 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस केवल 60 सीटों तक सिमट गई। बिलासपुर में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई और मुख्यमंत्री के गृह जिले हमीरपुर में उसकी स्थिति बेहद कमजोर रही। पंचायत समिति (बीडीसी) चुनावों में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1769 वार्डों में से 1109 पर जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस 477 पर सिमट गई। इसके अतिरिक्त, प्रधान और उपप्रधान पदों पर 65 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधि भाजपा विचारधारा से जुड़े हुए हैं। रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार शुरू से इन चुनावों से बचती रही, कभी पुनर्गठन, कभी रोस्टर, तो कभी डिलिमिटेशन जैसे बहानों का सहारा लेकर इन्हें टालने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सरकार को पहले से ही जनता के बीच जाने पर करारी हार का आभास था, और अंततः न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही चुनाव करवाने पड़े। शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि जनता द्वारा कांग्रेस सरकार के खिलाफ सुनाया गया अविश्वास प्रस्ताव है, क्योंकि जनता झूठी गारंटियों, खोखले वादों और घोषणाओं की राजनीति से तंग आ चुकी है। उन्होंने विधानसभा चुनावों के समय महिलाओं को ₹1500 प्रतिमाह, युवाओं को रोजगार, किसानों को समर्थन मूल्य और मुफ्त बिजली जैसी कांग्रेस की गारंटियों का जिक्र करते हुए कहा कि तीन वर्ष बीतने के बाद भी अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जनादेश स्वीकार करने के बजाय बहानेबाजी करने और हार की समीक्षा करने के बजाय भाजपा नेतृत्व पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने मुख्यमंत्री की राजनीतिक हताशा का प्रमाण बताया। शर्मा ने कांग्रेस की आंतरिक कलह और गुटबाजी पर भी निशाना साधा, जिसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी हार का कारण मान रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को प्रशासनिक दबाव, भय और तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ा, लेकिन जनता ने इन प्रयासों को विफल कर दिया। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार नगर निगमों, नगर परिषदों, नगर पंचायतों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों के दौरान प्रशासनिक दबाव, प्रलोभन या शक्ति का दुरुपयोग कर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास करती है, तो भाजपा इसका लोकतांत्रिक और राजनीतिक स्तर पर पुरजोर विरोध करेगी। रणधीर शर्मा ने इन चुनावों को हिमाचल की सत्ता का 'सेमीफाइनल' बताते हुए कहा कि कांग्रेस यह 'सेमीफाइनल' बुरी तरह हार चुकी है और अब 'फाइनल' खेलने की स्थिति में भी नहीं बची है। उन्होंने अंत में मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा देने और विधानसभा चुनावों का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की, ताकि प्रदेश को एक नई दिशा और मजबूत नेतृत्व मिल सके।2