हमारे ऋषि-मुनियों, वेदों, पुराणों और शास्त्रों के अनुसार बिना हरि की कृपा के मनुष्य को किसी भी युग में सुख, शांति और आनंद नहीं मिल सकता है। फिर भी मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद रूपी शत्रुओं से दोस्ती कर परमात्मा को भूल जाता है और माया के अभिमान में खुद को ही भगवान समझने लगता है, जिसका फैसला अंततः पंच तत्व करते हैं। जब मनुष्य ऊपर देखता है तो संकट में पड़ता है, लेकिन यदि वह अपनी निगाह नीची और नीयत ऊपर रखकर धरती की ओर देखता है तो परमात्मा उसकी आत्मा पर कृपा अवश्य करते हैं। इसी सोच के साथ कहा गया है कि कर्मों की खेती अच्छी होने पर ही मीठे फल प्राप्त होते हैं। छबड़ा क्षेत्र में जब फसलें सूखने की कगार पर थीं, तब मनुष्य ने धरती की ओर देखकर सेवा का महत्व समझा। इसके बाद भुवाखेड़ी स्थित खाटूश्याम गौशाला की पहाड़ी से श्याम भक्तों और किसानों द्वारा लगाई गई पुकार को बाबा श्याम ने सुन लिया। इसी कृपा के फलस्वरूप यहाँ मेघ बरस पड़े हैं और 21 जुलाई की रात से ही लगातार धीमी और तेज वर्षा हो रही है, जिससे भक्तों में 'जय बाबा श्याम' का हर्ष व्याप्त है।
हमारे ऋषि-मुनियों, वेदों, पुराणों और शास्त्रों के अनुसार बिना हरि की कृपा के मनुष्य को किसी भी युग में सुख, शांति और आनंद नहीं मिल सकता है। फिर भी मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद रूपी शत्रुओं से दोस्ती कर परमात्मा को भूल जाता है और माया के
अभिमान में खुद को ही भगवान समझने लगता है, जिसका फैसला अंततः पंच तत्व करते हैं। जब मनुष्य ऊपर देखता है तो संकट में पड़ता है, लेकिन यदि वह अपनी निगाह नीची और नीयत ऊपर रखकर धरती की ओर देखता है तो परमात्मा उसकी आत्मा पर कृपा अवश्य करते
हैं। इसी सोच के साथ कहा गया है कि कर्मों की खेती अच्छी होने पर ही मीठे फल प्राप्त होते हैं। छबड़ा क्षेत्र में जब फसलें सूखने की कगार पर थीं, तब मनुष्य ने धरती की ओर देखकर सेवा का महत्व समझा। इसके बाद भुवाखेड़ी स्थित खाटूश्याम गौशाला की पहाड़ी
से श्याम भक्तों और किसानों द्वारा लगाई गई पुकार को बाबा श्याम ने सुन लिया। इसी कृपा के फलस्वरूप यहाँ मेघ बरस पड़े हैं और 21 जुलाई की रात से ही लगातार धीमी और तेज वर्षा हो रही है, जिससे भक्तों में 'जय बाबा श्याम' का हर्ष व्याप्त है।
- Jagdish Chandra Sharmaछिपाबड़ौद, बारां, राजस्थानJai shree khatu shyam18 hrs ago
- राजस्थान के बारां जिले के अटरू में ईएलसी कार्यकारिणी ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का संकल्प लिया है।1
- झालावाड़ के खानपुर उपखंड क्षेत्र में अल सुबह से लगातार झमाझम बारिश का दौर जारी है। इस दौरान पनवाड़ क्षेत्र में करीब 35 मिनट तक तेज बारिश हुई। इस अच्छी बारिश के बाद क्षेत्र के किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है और उनके चेहरे खिल उठे हैं।1
- ममता बनर्जी ने आज सुबह 'एकुशे जुलाई' मंच का दौरा कर वहां का निरीक्षण किया। कल रात तारामंडल के पास इस 'एकुशे जुलाई' मंच में तोड़फोड़ की गई थी। इस घटना के बाद वे कल रात भी वहां गई थीं और आज सुबह उन्हें एक बार फिर से मंच का निरीक्षण करते हुए देखा गया है।1
- राजस्थान के बारां जिले की किशनगंज तहसील के सकरावदा ग्राम में भकरावदा रोड से सकरावदा स्कूल तक जाने वाले आम रास्ते पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। इस आम रास्ते पर करीब एक फीट पानी भरा रहता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और सभी ग्राम वासियों को इसी पानी के बीच से होकर गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए पंचायत समिति से गुहार लगाते हुए निवेदन किया है कि इस रास्ते पर जल्द से जल्द सीसी रोड का निर्माण करवाया जाए ताकि बच्चों और ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत मिल सके।1
- झालावाड़ के झालरापाटन स्थित गोमती सागर तालाब पर मंगलवार को मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक व्यापक संयुक्त मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का व्यावहारिक परीक्षण करना था। मॉकड्रिल के दौरान एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गोमती सागर तालाब का जलस्तर अचानक बढ़ने और तेज बहाव से किनारे पर मौजूद लगभग 30 लोगों के पानी में घिरने का परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही सक्रिय हुए जिला प्रशासन ने SDRF, NDRF, भारतीय सेना, सिविल डिफेंस और स्थानीय पुलिस की टीमों को तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रवाना किया। बचाव दलों ने मोटर बोट, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू रोप और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से सभी 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद घटनास्थल पर बने अस्थायी राहत शिविर में चिकित्सा विभाग की टीम ने घायलों की प्राथमिक जांच और उपचार का अभ्यास किया। इस संयुक्त मॉकड्रिल में SDRF के 34, NDRF के 31 और भारतीय सेना के 81 जवानों सहित कुल 146 प्रशिक्षित जवानों ने भाग लेकर आपसी समन्वय का प्रदर्शन किया। इस दौरान ब्रिगेडियर संजय रावत, कमांडिंग ऑफिसर रोहित ढोबाल, मेजर निखिल, कंपनी कमांडर SDRF एकता हाड़ा, पुलिस अधीक्षक अमित बुडानिया, जिला परिषद CEO शंभुदयाल मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा, DSP हर्षराज सिंह खरेड़ा सहित सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। ASP भागचंद मीणा और NDRF कमांडेंट निशांत कुमार ने भी इस मॉकड्रिल की तैयारियों और सफल संचालन की जानकारी दी।1
- झालावाड़ के जिला मुख्यालय स्थित हीरा बा कॅवर जनाना चिकित्सालय में जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों की सुविधा के लिए 'प्रसुता हेल्प डेस्क' (पीएचडी) की शुरुआत की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय द्वारा मेडिकल कॉलेज झालावाड़ के मुख्य द्वार पर स्थापित की गई इस हेल्प डेस्क को 19.07.2026 रविवार शाम 7:00 बजे से शुरू किया गया है। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली हाई-रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) महिलाओं को अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराने, आवश्यक जांचें, सोनोग्राफी, ब्लड बैंक आदि की जानकारी न होने के कारण इलाज शुरू होने में काफी समय लग जाता था। इस समस्या को दूर करने के लिए ही अब मुख्य द्वार पर ही त्वरित मदद की व्यवस्था की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत हेल्प डेस्क पर 24 घंटे स्टाफ तैनात रहेगा, जिनकी विशेष पहचान के लिए 'ड्रेस कोड-पिंक अप्रीन' तय किया गया है। प्रशासन ने इसके लिए 'प्रसुता हैल्प डेस्क' नाम से एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है जिसमें जिला कलेक्टर, सीएमएचओ, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल सहित तमाम उच्च अधिकारी और स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी जुड़े हैं। साथ ही एक पृथक वॉट्सऐप कंट्रोल रूम भी बनाया गया है जिसका मोबाइल नंबर 80032-02104 है। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज के रेफर होते ही इसकी सूचना और एम्बुलेंस के नंबर कंट्रोल रूम पर साझा कर दिए जाते हैं, ताकि मरीज के आते ही केवल 10 मिनट के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन करवाकर तत्काल इलाज शुरू किया जा सके। इसके अलावा चिकित्सक की सलाह पर जांच के सैंपल बेड से ही लिए जाते हैं और सोनोग्राफी व ब्लड बैंक से खून लाने जैसी तमाम जिम्मेदारियां भी यह स्टाफ ही संभालता है। इस व्यवस्था के शुरू होते ही पहले 24 घंटों में कुल 19 प्रसूताएं ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आईं, जिनमें से 14 गंभीर एचआरपी श्रेणी की थीं। इनमें झालावाड़ की 11 (7 एचआरपी), अन्य जिलों की 2 (2 एचआरपी) और मध्य प्रदेश की 6 महिलाएं (5 एचआरपी) शामिल थीं। इस दौरान निपानिया की अंजू नागर, चौमहला की 29 वर्षीय आरती मालवीय और खानपुर की 32 वर्षीय ममता जैसी गंभीर रूप से रेफर होकर आई प्रसूताओं को इस स्टाफ ने अस्पताल पहुंचते ही तुरंत रिसीव कर इलाज शुरू करवाया। प्रसव के बाद डिस्चार्ज होने पर जच्चा-बच्चा को एम्बुलेंस उपलब्ध कराने से लेकर उनके घर पहुंचने तक का फॉलोअप भी यह स्टाफ ले रहा है। इस पूरी त्वरित और सुरक्षित व्यवस्था से प्रसूताओं के परिजन बेहद खुश हैं और वे सीएमएचओ कार्यालय व जिला स्वास्थ्य समिति का आभार जता रहे हैं।1
- कोटा जिले के सांगोद और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरकार लंबे इंतजार के बाद कुदरत का अनोखा करम हुआ है, जिसने क्षेत्र के हजारों अन्नदाताओं के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौटा दी है। बीते करीब बीस दिनों से बारिश की एक-एक बूंद को तरस रही सोयाबीन की सूखती फसल के लिए यह बरसात किसी अमृत और वरदान से कम साबित नहीं हुई है। सांगोद कस्बे सहित समीपवर्ती बपावर और मोईकलां क्षेत्र में सुबह लगभग नौ बजे के आसपास अचानक बादलों की आवाजाही बढ़ी और देखते ही देखते मध्यम गति की बारिश का दौर शुरू हो गया, जिससे किसानों की तमाम चिंताएं धुल गईं। दरअसल, क्षेत्र के किसानों ने लगभग तीन सप्ताह पहले भारी उम्मीदों के साथ अपने खेतों में सोयाबीन की बुवाई की थी, लेकिन बुवाई के बाद से ही मौसम लगातार शुष्क बना हुआ था। लंबे समय से बारिश न होने के कारण खेतों की नमी तेजी से सूखने लगी थी और किसानों की रातों की नींद उड़ चुकी थी। फसल के पूरी तरह से नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था, जिससे पूरा किसान समुदाय बेहद चिंतित और हताश नजर आ रहा था। ऐसे संकट के समय में शुरू हुई इस लगातार और मध्यम गति की बारिश ने खेतों की प्यास बुझाई है और सोयाबीन की फसल को एक नया जीवनदान दे दिया है। मानसून की इस मेहरबानी से अब पूरे क्षेत्र के वातावरण में ठंडक घुल गई है और कृषि गतिविधियों में एक बार फिर से नई ऊर्जा का संचार हो गया है। कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों का मानना है कि समय पर हुई यह बारिश न केवल पौधों की ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी थी, बल्कि इससे आने वाले दिनों में फसल की पैदावार भी काफी बेहतर होगी।1
- झालावाड़ जिले के झालरापाटन स्थित गोमती सागर तालाब पर मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक व्यापक संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के सहयोग से आयोजित इस अभ्यास में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और भारतीय सेना ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गोमती सागर तालाब का जलस्तर अचानक बढ़ने और किनारे मौजूद लगभग 30 लोगों के पानी में फंसने की स्थिति दर्शाई गई। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किया गया और बचाव दलों को तत्काल रेस्क्यू के लिए रवाना किया गया। रेस्क्यू टीमों ने मोटर बोट, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, रेस्क्यू रोप और अन्य आधुनिक लाइफ सेविंग उपकरणों की मदद से पानी में फंसे सभी 30 लोगों को अत्यंत संयम और दक्षता के साथ सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस पूरे अभियान के दौरान कोई जनहानि नहीं हुई। इस संयुक्त मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ के 34, एनडीआरएफ के 31 और भारतीय सेना के 81 जवानों सहित कुल 146 प्रशिक्षित जवानों ने भाग लेकर राहत एवं बचाव कार्यों का सफल प्रदर्शन किया। रेस्क्यू के बाद घटनास्थल पर स्थापित अस्थायी राहत शिविर में चिकित्सा टीम ने घायलों की प्राथमिक जांच और उपचार का प्रदर्शन किया, जबकि गंभीर रूप से घायल दर्शाए गए लोगों को तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया। शिविर में पेयजल, आवश्यक दवाओं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाएं भी दिखाई गईं। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना, संचार व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष की कार्यप्रणाली को परखना तथा त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और प्रभावी बनाना था ताकि वास्तविक आपदा में जनहानि और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।4
- झालावाड़ के झालरापाटन बाईपास के पास एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां अपने घर से ग्रोथ सेंटर ऑफिस जाने के लिए निकले युवक तोकीर गोरी की कार में अचानक ब्लास्ट हो गया। घर के बाहर बाईपास के पास हुए इस धमाके में गाड़ी काफी क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार युवक घायल हो गया। इस ब्लास्ट में युवक के दोनों हाथ जल गए हैं और उसके चेहरे पर भी निशान आए हैं। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों और परिजनों ने घायल युवक को तुरंत एसआरजी (SRG) अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे। वहीं, कार में ब्लास्ट की इस घटना को लेकर अब प्रशासन द्वारा भी जांच की बात सामने आ रही है।1