“UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक”नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया “UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक” नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन, समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठी मांग UGC नियमों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा, आर्थिक आधार को महत्व और ‘समान अवसर आयोग’ के गठन समेत छह प्रमुख मांगें नरैनी। UGC के नियमों, आरक्षण व्यवस्था, समान अवसर तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सोमवार को नरैनी तहसील में राष्ट्रपति महोदय के नाम उपजिलाधिकारी नरैनी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में UGC के वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम से संबंधित शिकायतों में निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा, आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक परिस्थितियों को महत्व देने तथा ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन सहित छह प्रमुख मांगें उठाई गईं। ज्ञापन में कहा गया कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संरक्षण के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकार, विधिक सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित किए जाना भी आवश्यक है। UGC नियमों पर पुनर्विचार की मांग ज्ञापन में UGC के उच्च शिक्षा से संबंधित वर्तमान नियमों की व्यापक समीक्षा की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रावधान पर पुनर्विचार होना चाहिए जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों या उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अथवा विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका हो। वक्ताओं ने विवादित प्रावधानों को वापस लेने अथवा आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग की। SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा पर जोर ज्ञापन में SC/ST अधिनियम को लेकर कहा गया कि कानून का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करना है, लेकिन झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की स्थिति में निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रतिनिधियों ने मांग की कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ-साथ झूठी शिकायत प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था हो। आरक्षण में आर्थिक आधार को महत्व देने की मांग ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ आय, संपत्ति, आर्थिक स्थिति, शैक्षणिक परिस्थिति और वास्तविक आवश्यकता जैसे प्रमाणित मानकों को भी उचित महत्व दिए जाने की मांग की गई। साथ ही आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का समय-समय पर तथ्यात्मक आकलन किए जाने की मांग रखी गई, ताकि सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ की मांग सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों की शिक्षा, फीस, छात्रवृत्ति, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आयोग के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा सकती है। रोहित पाठक बोले—“सरकार UGC रोल बैक नहीं करती तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे” ज्ञापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रोहित पाठक ने कहा, “यदि सरकार UGC के इन नियमों को रोल बैक नहीं करती है, तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या वर्ग की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को जनता की आवाज सुननी होगी।” उमेश तिवारी—“हमारी लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, समान अवसर के लिए है” वहीं उमेश तिवारी ने कहा, “हमारी मांग किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। यदि किसी व्यवस्था से विद्यार्थियों के भविष्य, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर प्रश्न खड़े होते हैं, तो उस व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। हम अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मजबूती के साथ उठाते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को बनाए रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें वास्तविक जरूरत, आर्थिक स्थिति, पात्रता और प्रमाणित तथ्यों को भी महत्व मिले। सैकड़ों लोग रहे मौजूद ज्ञापन कार्यक्रम में उमेश तिवारी, सोनू करवरिया, प्रदीप करवरिया, आदित्य प्रताप सिंह, आनंद पांडेय, रोहित पाठक, जीतू त्रिपाठी, कामता प्रसाद मिश्रा, जागेश्वर प्रसाद पांडेय, पप्पू करवरिया समेत कई सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सवर्ण समाज का कहना है कि सभी मांगें लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति महोदय और सरकार के समक्ष रखी गई हैं तथा संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की अपेक्षा है।
“UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक”नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया “UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक” नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन, समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठी मांग UGC नियमों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा, आर्थिक आधार को महत्व और ‘समान अवसर आयोग’ के गठन समेत छह प्रमुख मांगें नरैनी। UGC के नियमों, आरक्षण व्यवस्था, समान अवसर तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सोमवार को नरैनी तहसील में राष्ट्रपति महोदय के नाम उपजिलाधिकारी नरैनी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में UGC के वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम से संबंधित शिकायतों में निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा, आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक परिस्थितियों को महत्व देने तथा ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन सहित छह प्रमुख मांगें उठाई गईं। ज्ञापन में कहा गया कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संरक्षण के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकार, विधिक सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित किए जाना भी आवश्यक है। UGC नियमों पर पुनर्विचार की मांग ज्ञापन में UGC के उच्च शिक्षा से संबंधित वर्तमान नियमों की व्यापक समीक्षा की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रावधान पर पुनर्विचार होना चाहिए जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों या उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अथवा विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका हो। वक्ताओं ने विवादित प्रावधानों को वापस लेने अथवा आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग की। SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा पर जोर ज्ञापन में SC/ST अधिनियम को लेकर कहा गया कि कानून का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करना है, लेकिन झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की स्थिति में निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रतिनिधियों ने मांग की कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ-साथ झूठी शिकायत प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था हो। आरक्षण में आर्थिक आधार को महत्व देने की मांग ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ आय, संपत्ति, आर्थिक स्थिति, शैक्षणिक परिस्थिति और वास्तविक आवश्यकता जैसे प्रमाणित मानकों को भी उचित महत्व दिए जाने की मांग की गई। साथ ही आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का समय-समय पर तथ्यात्मक आकलन किए जाने की मांग रखी गई, ताकि सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ की मांग सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों की शिक्षा, फीस, छात्रवृत्ति, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आयोग के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा सकती है। रोहित पाठक बोले—“सरकार UGC रोल बैक नहीं करती तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे” ज्ञापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रोहित पाठक ने कहा, “यदि सरकार UGC के इन नियमों को रोल बैक नहीं करती है, तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या वर्ग की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को जनता की आवाज सुननी होगी।” उमेश तिवारी—“हमारी लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, समान अवसर के लिए है” वहीं उमेश तिवारी ने कहा, “हमारी मांग किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। यदि किसी व्यवस्था से विद्यार्थियों के भविष्य, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर प्रश्न खड़े होते हैं, तो उस व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। हम अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मजबूती के साथ उठाते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को बनाए रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें वास्तविक जरूरत, आर्थिक स्थिति, पात्रता और प्रमाणित तथ्यों को भी महत्व मिले। सैकड़ों लोग रहे मौजूद ज्ञापन कार्यक्रम में उमेश तिवारी, सोनू करवरिया, प्रदीप करवरिया, आदित्य प्रताप सिंह, आनंद पांडेय, रोहित पाठक, जीतू त्रिपाठी, कामता प्रसाद मिश्रा, जागेश्वर प्रसाद पांडेय, पप्पू करवरिया समेत कई सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सवर्ण समाज का कहना है कि सभी मांगें लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति महोदय और सरकार के समक्ष रखी गई हैं तथा संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की अपेक्षा है।
- ड्यूटी पर जा रहे वन विभाग कर्मी की दर्दनाक मौत तेज रफ्तार डंपर ने स्कूटी सवार वन विभाग कर्मी कोमारी टक्कर। ड्यूटी पर जा रहे वन विभाग कर्मी की दर्दनाक मौत। तेज रफ्तार डंपर ने स्कूटी सवार वन विभाग कर्मी कोमारी टक्कर। बांदा में फिर टूटा रफ्तार का कहर वन कर्मी की मौत। बांदा के तिंदवारी में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में वन विभाग के कर्मचारी की मौत हो गई। बांदा-फतेहपुर राजमार्ग पर मुंगुस गांव के पास तेज रफ्तार डंपर ने स्कूटी सवार वन विभाग कर्मी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में 40 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद डंपर चालक मौके से भागने लगा, लेकिन पीछा कर उसे पकड़ लिया गया और पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। बांदा-फतेहपुर राजमार्ग पर सोमवार सुबह हुए हादसे की ये तस्वीरें तिंदवारी के मुंगुस गांव के पास की हैं। कूड़ा निस्तारण केंद्र के निकट ड्यूटी पर जा रहे वन विभाग कर्मी शाहिद सिद्दीकी की स्कूटी को पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटी अनियंत्रित होकर सड़क पर जा गिरी और शाहिद भी सड़क पर गिर पड़े। गंभीर चोट लगने के चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में स्कूटी और हेलमेट भी क्षतिग्रस्त हो गया। शाहिद सिद्दीकी तिंदवारी कस्बे के भगवती नगर निवासी थे और बांदा वन विभाग में बाबू के पद पर कार्यरत थे। सोमवार सुबह वह रोज की तरह स्कूटी से ड्यूटी के लिए बांदा जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार डंपर ने उनकी जान ले ली। हादसे के बाद डंपर चालक वाहन लेकर मौके से भागने लगा। परिजनों और स्थानीय लोगों ने पीछा कर डंपर को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शाहिद दो भाइयों में सबसे बड़े थे। वर्ष 2008 में उनकी शादी फरजाना से हुई थी और उनकी कोई संतान नहीं थी। हादसे की खबर घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां पतिया और पत्नी फरजाना का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। बाइट:- मृतक के परिजन1
- 18 साल की सेवा, फिर भी संविदा का इंतजार; एनएचएम कर्मियों ने दी आंदोलन की चेतावनी बांदा। 18 वर्षों से संविदा पर सेवाएं दे रहे एनएचएम कर्मचारियों ने नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। कर्मचारियों का तर्क है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान के बावजूद उनके भविष्य की स्थिरता अब भी अनिश्चित है। संघ ने कैशलेस इलाज, डीए, पीएफ और स्थानांतरण नीति की बहाली समेत आठ मांगें रखीं। जिला अध्यक्ष डॉ. मिलेन्द्र सिंह ने कहा कि 3 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो 5 अक्टूबर से काली पट्टी बांधकर काम और 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इस दौरान मोहम्मद सरीफ, पंकज, गौरव द्विवेदी, रश्मि अवस्थी, अंजू, सरिता, सचिन, नवल अवस्थी समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।1
- ड्यूटी पर जा रहे वन विभाग के बाबू की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत *बाँदा:* बाँदा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में वन विभाग में तैनात बाबू की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान *अब्दुल शाहिद (उम्र 40 वर्ष), पुत्र अब्दुल वारिस* के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अब्दुल शाहिद अपनी स्कूटी से बाँदा वन विभाग में अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चौकी के पास दो ट्रक एक-दूसरे को ओवरटेक कर रहे थे, इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से स्कूटी सवार शाहिद ट्रक की चपेट में आ गए और ट्रक के नीचे कुचल गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मृतक के चचेरे भाई *अब्दुल मजीद* ने दी। उन्होंने बताया कि शाहिद बाँदा वन विभाग में क्लर्क (बाबू) के पद पर कार्यरत थे। वह शादीशुदा थे और उनका एक बच्चा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।4
- IIT Kanpur के Startups की बड़ी उड़ान! | ₹11,355 करोड़ की वैल्यू | UP News 2026 | बड़ी खबर कानपुर IIT से जुड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Invest UP की 2 सितंबर 2026 की खबर के अनुसार IIT Kanpur के स्टार्टअप्स की कुल वैल्यू ₹11,355 करोड़ बताई गई है। AI, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जुड़े इन स्टार्टअप्स ने कानपुर को नए टेक हब के रूप में पहचान दिलाई है।1
- बबेरू मे गणेश महोत्सव की धूम, तिन्दवारी रोड समिति के द्वारा जागरण कार्यक्रम का आयोजन1
- हमीरपुर :छह सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील परिसर में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और निजी क्षेत्र में आरक्षण की उठी मांग मौदहा हमीरपुर । सामाजिक न्याय एवं वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर मंगलवार को तहसील परिसर में भीम आर्मी भारत एकता मिशन, विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं संविधानवादी साथियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर वंचित, पिछड़े, अति-पिछड़े, दलित एवं आदिवासी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनीतिक उत्थान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपते हुए संदीप वाल्मीकि ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता, सामाजिक न्याय और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है। इसके बावजूद वंचित समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और अन्य क्षेत्रों में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार को ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों ने UGC नियम 2026 को प्रभावी रूप से लागू करने, मंडल कमीशन की शेष 38 सिफारिशों को लागू करने और निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई। इसके साथ ही OBC के पृथक कॉलम के साथ जातीय जनगणना कराने, EWS आरक्षण की समीक्षा कर उसे समाप्त करने तथा दलितों, आदिवासियों एवं अन्य वंचित वर्गों के साथ भेदभाव और अत्याचार की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई। संदीप वाल्मीकि ने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और सम्मान के समान अवसर मिलेंगे। उन्होंने राष्ट्रपति से ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकारों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किए जाने का अनुरोध किया। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में सैकड़ों की संख्या में युवा, महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग की।1
- “UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक”नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया “UGC रोल बैक करो, वरना जनता करेगी सत्ता का रोल बैक” नरैनी से राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन, समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठी मांग UGC नियमों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा, आर्थिक आधार को महत्व और ‘समान अवसर आयोग’ के गठन समेत छह प्रमुख मांगें नरैनी। UGC के नियमों, आरक्षण व्यवस्था, समान अवसर तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सोमवार को नरैनी तहसील में राष्ट्रपति महोदय के नाम उपजिलाधिकारी नरैनी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में UGC के वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा, SC/ST अधिनियम से संबंधित शिकायतों में निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा, आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक परिस्थितियों को महत्व देने तथा ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन सहित छह प्रमुख मांगें उठाई गईं। ज्ञापन में कहा गया कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संरक्षण के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकार, विधिक सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित किए जाना भी आवश्यक है। UGC नियमों पर पुनर्विचार की मांग ज्ञापन में UGC के उच्च शिक्षा से संबंधित वर्तमान नियमों की व्यापक समीक्षा की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रावधान पर पुनर्विचार होना चाहिए जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों या उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अथवा विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका हो। वक्ताओं ने विवादित प्रावधानों को वापस लेने अथवा आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग की। SC/ST अधिनियम में निर्दोषों की सुरक्षा पर जोर ज्ञापन में SC/ST अधिनियम को लेकर कहा गया कि कानून का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करना है, लेकिन झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की स्थिति में निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रतिनिधियों ने मांग की कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ-साथ झूठी शिकायत प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था हो। आरक्षण में आर्थिक आधार को महत्व देने की मांग ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ आय, संपत्ति, आर्थिक स्थिति, शैक्षणिक परिस्थिति और वास्तविक आवश्यकता जैसे प्रमाणित मानकों को भी उचित महत्व दिए जाने की मांग की गई। साथ ही आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का समय-समय पर तथ्यात्मक आकलन किए जाने की मांग रखी गई, ताकि सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ की मांग सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों की शिक्षा, फीस, छात्रवृत्ति, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ‘सवर्ण आयोग’ अथवा ‘समान अवसर आयोग’ के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आयोग के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा सकती है। रोहित पाठक बोले—“सरकार UGC रोल बैक नहीं करती तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे” ज्ञापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रोहित पाठक ने कहा, “यदि सरकार UGC के इन नियमों को रोल बैक नहीं करती है, तो हम सरकार को रोल बैक करेंगे। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या वर्ग की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को जनता की आवाज सुननी होगी।” उमेश तिवारी—“हमारी लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, समान अवसर के लिए है” वहीं उमेश तिवारी ने कहा, “हमारी मांग किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान अवसर सुनिश्चित करने की है। यदि किसी व्यवस्था से विद्यार्थियों के भविष्य, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर प्रश्न खड़े होते हैं, तो उस व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए। हम अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मजबूती के साथ उठाते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को बनाए रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें वास्तविक जरूरत, आर्थिक स्थिति, पात्रता और प्रमाणित तथ्यों को भी महत्व मिले। सैकड़ों लोग रहे मौजूद ज्ञापन कार्यक्रम में उमेश तिवारी, सोनू करवरिया, प्रदीप करवरिया, आदित्य प्रताप सिंह, आनंद पांडेय, रोहित पाठक, जीतू त्रिपाठी, कामता प्रसाद मिश्रा, जागेश्वर प्रसाद पांडेय, पप्पू करवरिया समेत कई सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सवर्ण समाज का कहना है कि सभी मांगें लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति महोदय और सरकार के समक्ष रखी गई हैं तथा संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की अपेक्षा है।1
- जनपद/बांदा - लूट के इरादे से बुजुर्ग महिला की हत्या करने वाला आरोपी गिरफ्तार अतर्रा /बांदा- अतर्रा थाना क्षेत्र के खम्हौरा गांव में 61 वर्ष बुजुर्ग महिला से मारपीट कर नाक की कील लूटने और इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से महिला की लूटी गई नाक की कील भी बरामद की है। पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को खम्हौरा गांव में एक बुजुर्ग महिला के साथ अज्ञात व्यक्ति ने मारपीट की थी। गंभीर हालत में महिला का इलाज चल रहा था, इसी दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में मृतका की बहू सरोज की तहरीर पर अतर्रा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मंगलवार 22 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर आरोपी ददुआ पुत्र शिवअवतार निवासी अंश बल्लान, थाना अतर्रा को रेलवे क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने घटना में शामिल होना स्वीकार किया और बताया कि 18 सितंबर को धान के खेत में उसने बुजुर्ग महिला के साथ मारपीट कर उसकी नाक की कील छीन ली थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक नाक की कील बरामद की। आरोपी के खिलाफ अतर्रा थाने में मु0अ0सं0 351/2026, धारा 105/309(6)/317(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। गिरफ्तारी करने वाली टीम प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार तिवारी, उपनिरीक्षक सुरेंद्र प्रताप, हेड उप निरीक्षक फूलचंद मिश्र कांस्टेबल विमल मिश्रा और कांस्टेबल सतीश यादव शामिल रहे। जनपद बांदा से सुनील यादव की रिपोर्ट3