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धार जिले के धरमपुरी तहसील में मजदूरों की जान खतरे में डाल कर करवा रहे शासकीय कार्य। धार जिले की धरमपुरी तहसील की जनपद पंचायत धरमपुरी के अंतर्गत में चला रहा प्रतीक इंफ्रा द्वारा पेयजल योजना के अन्तर्गत में टंकी निर्माण में मजदूरों के बिना सुरक्षा के निर्माण कार्य हो रहा है। ऐसे ने बड़ी जनहानि दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन। सुनील सन्नी रिपोर्टर 9752452859
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धार जिले के धरमपुरी तहसील में मजदूरों की जान खतरे में डाल कर करवा रहे शासकीय कार्य। धार जिले की धरमपुरी तहसील की जनपद पंचायत धरमपुरी के अंतर्गत में चला रहा प्रतीक इंफ्रा द्वारा पेयजल योजना के अन्तर्गत में टंकी निर्माण में मजदूरों के बिना सुरक्षा के निर्माण कार्य हो रहा है। ऐसे ने बड़ी जनहानि दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन। सुनील सन्नी रिपोर्टर 9752452859
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- संजू सेमसन के बदौलत जीति टीम इंडिया, भेदभाव के बाद भी नही टूटा संजू।1
- राजपुर में होलिका दहन का पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि एवं गाँव पटेल द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया गया। इस अवसर पर नगर के कई गणमान्य नागरिकों ने भी पूजा में सहभागिता की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण रहा तथा लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। होलिका दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया और नगरवासियों ने शांति, सौहार्द एवं भाईचारे की भावना को बनाए रखने का संकल्प लिया।1
- *💥बदनावर में मारपीट कर सोने की चेन लूटने वाले, 5 आरोपियों को पुलिस ने धरदबोचा💥* *LIKE 👍 SHARE💥 SUBSCRIBE 🎯*1
- बड़वानी। संत खांडेराव महाराज और फखरुद्दीन बाबा की स्मृति में निभाई जा रही 831 वर्ष पुरानी गाड़ा खिंचाई की ऐतिहासिक परंपरा इस वर्ष 4 मार्च 2026 (धुलेंडी) को गोधूलि बेला में बड़वानी जिला मुख्यालय, ठीकरी, अंजड़ और शहर के नवलपुरा क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित की जाएगी। विक्रम संवत 1252 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा आज भी क्षेत्र की आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बनी हुई है। ठीकरी में होगा आयोजन ठीकरी में आयोजन की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ होगी। एक दिन पूर्व रात्रि में बाबा खांडेराव महाराज मंदिर से गाड़ों को गाड़ा मैदान लाया जाएगा। धुलेंडी के दिन दोपहर दर्शन के पश्चात मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। गोधूलि बेला में बड़वा एडू यादव के बाहर आने पर सारथी उन्हें कंधे पर बैठाकर गाड़ा मैदान तक ले जाएंगे। मलिहार चौक में पारंपरिक मकड़ी यंत्र घुमाने की रस्म निभाई जाएगी। इसके बाद जैसे ही बड़वा चंदन की जोड़ी को कंधे पर धारण कर गाड़ों को स्पर्श करेंगे, रेल की तरह एक-दूसरे से बंधे भारी-भरकम गाड़े स्वतः चल पड़ेंगे। अंतिम गाड़े के तोरण पार करते ही गाड़ा खिंचाई की रस्म पूर्ण मानी जाएगी। नगर परिषद और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अंजड़ में बस स्टैंड से भोंगली नदी पुलिया तक सात गाड़े खींचे जाएंगे अंजड़ में भी यह आयोजन शाम 6 बजे से बस स्टैंड क्षेत्र में प्रारंभ होगा। बड़वा संतोष धनगर यादव मोहल्ले से ढोल-नगाड़ों के साथ निकलकर हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन करेंगे और आशीर्वाद लेकर आयोजन स्थल पहुंचेंगे। बस स्टैंड से भोंगली नदी पुलिया तक सात गाड़े खींचे जाएंगे। मकड़ी यंत्र घुमाने के बाद बड़वा का कंधा लगते ही गाड़े जयघोष के बीच चल पड़ेंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। बड़वानी में होगा अलग माहौल बड़वानी शहर के नवलपुरा क्षेत्र में इस वर्ष 20वें वर्ष गाड़ा खिंचाई का आयोजन होगा। लगभग 14 से 15 गाड़ों को एक साथ बांधकर हल्दी-कुंकू से सजाया जाएगा। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गाड़ों पर सौभाग्य तिलक कर पूजन करेंगी। बड़वा राकेश यादव “खांडेराव-खांडेराव” के जयघोष के साथ गाड़ों को स्पर्श करेंगे और कई टन वजनी गाड़े आगे बढ़ते नजर आएंगे। पूरे मार्ग पर रंगोली और गुलाल से सजावट की जाएगी तथा श्रद्धालु मार्ग के दोनों ओर और मकानों की छतों से इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनेंगे। एकता की मिसाल भी मानी जाती है यह परंपरा हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी मानी जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार संत खांडेराव महाराज और उनके मित्र पीर मोईनुद्दीन चिश्ती वर्षों पूर्व भ्रमण करते हुए ठीकरी पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों को चमत्कार दिखाकर आपसी भाईचारे और गांव की उन्नति के लिए गाड़ा खिंचाई की परंपरा प्रारंभ करने का संदेश दिया। तभी से यादव परिवार के बड़वा इस आयोजन का निर्वहन करते आ रहे हैं। गोधूलि बेला में बड़वा के कंधा लगते ही गाड़ों का चल पड़ना अलग है गोधूलि बेला में बड़वा के कंधा लगते ही गाड़ों का चल पड़ना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक धरोहर की अनूठी मिसाल है। 4 मार्च 2026 को एक बार फिर बड़वानी जिले में हजारों लोगों की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक दृश्य साकार होगा और गाड़ा खिंचाई की परंपरा पूरे श्रद्धाभाव के साथ निभाई जाएगी।1
- Post by Hemant Nagziriya2
- चतुर्भुज श्री राम मंदिर मांडू में होलिका दहन कार्यक्रम धूम धाम से मनाया गया होलिका दहन चतुर्भुज श्री राम मंदिर मांडू के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉक्टर नरसिंह दास जी महाराज द्वारा क्या गया राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू नगर में आज होलिका दहन कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से मनाया गया। मांडू नगर और आसपास के क्षेत्र की महिलाओं ने शाम होते ही कार्यक्रम स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना की और सुख समृद्धि की कामना की। सबसे पहले होली जलाने की परंपरा मांडू के चतुर्भुज राम मंदिर में है वही पूजा अर्चना कर होलिका दहन किया। पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ नरसिंह दास महाराज ने जलाई होली होलिका में गाय के गोबर से बने उपले की माला बनाई गई है उस माला में छोटे-छोटे सात उपले बनाकर आज होली में पूजन अर्चन के बाद टांगे गए। मांडू नगर मे परंपरा अनुसार 7 बजे पूजन अर्चन के बाद होलिका दहन किया गया। होली के समय यह माला होलिका के साथ जला दी। इसका उद्देश्य यह होता है कि होली के साथ घर में रहने वाली बुरी नज़र भी जल जाती है और घर में सुख समृद्धि आने लगती है। गाय के गोबर के कंडे से व उपलों से बनी इस होलिका का मध्याह्न से ही विधिवत पूजा प्रारम्भ होने लगी। आज होली के अवसर पर घरों में जो भी बने पकवान बने थे उसका भी भोग लगाया गया पूजा के साथ। आज रात तक शुभ मुहूर्त पर होलिका का दहन किया गया। इस होलिका में नई फसल की गेहूं की बालियों और चने के झंगरी को भी भूना होली की आग में सेंका गया और सीक ने के बाद खाया प्रसाद के रूप में इसे खाया गया। होलिका का दहन हमें समाज की व्याप्त बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय त्योहारः मांडू में होलिका दहन कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया, महिलाओं ने पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी का प्रतीक है। होली पर्व का आज पहला दिन। होलिका दहन के साथ पाप अंहकार को भस्म कर लोगों ने एक दूसरे के लिए सुख समृद्धि की दुआएं मांगी हैं। सोमवार को मांडू नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मैं महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर होली के फेरे लगा कर सुख शांति की कामना की। लंबे समय से बीमारियों से ग्रस्त लोगों ने आहूति देकर बीमारियों से छुटकारे की कामना की। वही होलिका दहन के बाद चतुर्भुज राम मंदिर के पुजारी महेंद्र जी वह बटुक छोटे छोटे बच्चों ने होलिका की पूजा की वही आचार्य शुभम जी के द्वारा वैदिक मंत्र का जाप क्या गया वही रामायण मंडल के द्वारा फाग गीत गाए वही वहां पर उपस्थित भाजपा अजजा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष मांडू नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि जयराम गावर,मांडू नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्णा यादव ,भाजपा मन की बात धार जिला ग्रामीण प्रभारी रवींद्र परिहार,चतुर्भुज श्री राम मंदिर ट्रस्टी मांगीलाल जायसवाल,ट्रस्टी अशोक निगम,राहुल सेन मांडव,उज्वल निगम के साथ कई भक्त लोग होलिका दहन में मौजूद रहे ओर पुजा अर्चना की गई पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉक्टर नरसिंह दास जी ने क्या कहा वही चतुर्भुज श्री राम मंदिर मांडू के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर दो नरसिंह दास जी महाराज ने बताया कि होली का ने प्रहलाद को अपनी गोद में बैठ कर जलती आग में प्रवेश क्या लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलीका जलकर भस्म हो गई यही कारण है कि हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन किया जाता है होलिका दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है3
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