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नेरली घाटी में ट्रक पेड़ से टकराया, लंबा जाम लगा...... दंतेवाड़ा के नेरली घाटी में एक ट्रक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराया। हादसे के बाद बचेली-नेरली मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सड़क पर लंबा जाम लगने से कई यात्री बसें और कारें फंस गईं। घाटी में वाहनों की लंबी कतार लगने से राहगीरों को भी परेशानी हुई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल टीम मार्ग से ट्रक हटाकर यातायात बहाल करने में जुटी हुई है।
Kamlesh singh thakur
नेरली घाटी में ट्रक पेड़ से टकराया, लंबा जाम लगा...... दंतेवाड़ा के नेरली घाटी में एक ट्रक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराया। हादसे के बाद बचेली-नेरली मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सड़क पर लंबा जाम लगने से कई यात्री बसें और कारें फंस गईं। घाटी में वाहनों की लंबी कतार लगने से राहगीरों को भी परेशानी हुई। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल टीम मार्ग से ट्रक हटाकर यातायात बहाल करने में जुटी हुई है।
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- मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित शुद्धिकरण’ के विरोध में दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी ने सौंपा ज्ञापन तहसीलदार महोदय को रिपोर्ट रवि सरकार किरंदुल में जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी मामले के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व),तहसील बड़े बचेली को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया,ज्ञापन में कांग्रेस ने हल्द्वानी-देहरादून में हुई घटना को लेकर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है,ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ का कांग्रेस विरोध करती है,मामले ने उस समय और राजनीतिक रूप ले लिया जब कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर,इस विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है, ज्ञापन में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने आरोप लगाया है कि ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’जैसी गतिविधियां सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत संदेश देती हैं,कांग्रेस ने इसे दलित समाज के सम्मान और संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़ते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, क्या है पूरा विवाद?,मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली हुई थी। इसके बाद उसी स्थल पर कुछ संगठनों द्वारा कथित तौर पर हवन, गंगाजल छिड़कने और शुद्धिकरण’का आयोजन किया गया,इस घटना को कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति का विषय बनाया और इसे जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत की मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए और हल्लाबोल किया जा रहा है,हालांकि, इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और घटना के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं,इसलिए ‘शुद्धिकरण’ के उद्देश्य और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, दंतेवाड़ा में कांग्रेस का संदेश जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य हल्द्वानी की घटना का विरोध करना और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना है, ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि देश में सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए तथा जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए,ज्ञापन पर कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर भी दिखाई दे रहे हैं। इस तरह हल्द्वानी के‘शुद्धिकरण’ विवाद की गूंज अब दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा तक पहुंच गई है और जिला कांग्रेस ने प्रशासन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया है भारी संख्या में विरोध दर्ज किया जिसने सभीं जिले के एवं नगर के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं युवा महिला की विशेष उपस्थिति थी इस आंदोलन में मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित शुद्धिकरण’ के विरोध में दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी ने सौंपा ज्ञापन तहसीलदार महोदय को रिपोर्ट रवि सरकार किरंदुल में जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी मामले के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व),तहसील बड़े बचेली को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया,ज्ञापन में कांग्रेस ने हल्द्वानी-देहरादून में हुई घटना को लेकर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है,ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ का कांग्रेस विरोध करती है,मामले ने उस समय और राजनीतिक रूप ले लिया जब कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर,इस विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है, ज्ञापन में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने आरोप लगाया है कि ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’जैसी गतिविधियां सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत संदेश देती हैं,कांग्रेस ने इसे दलित समाज के सम्मान और संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़ते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, क्या है पूरा विवाद?,मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली हुई थी। इसके बाद उसी स्थल पर कुछ संगठनों द्वारा कथित तौर पर हवन, गंगाजल छिड़कने और शुद्धिकरण’का आयोजन किया गया,इस घटना को कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति का विषय बनाया और इसे जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत की मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए और हल्लाबोल किया जा रहा है,हालांकि, इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और घटना के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं,इसलिए ‘शुद्धिकरण’ के उद्देश्य और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, दंतेवाड़ा में कांग्रेस का संदेश जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य हल्द्वानी की घटना का विरोध करना और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना है, ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि देश में सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए तथा जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए,ज्ञापन पर कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर भी दिखाई दे रहे हैं। इस तरह हल्द्वानी के‘शुद्धिकरण’ विवाद की गूंज अब दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा तक पहुंच गई है और जिला कांग्रेस ने प्रशासन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया है भारी संख्या में विरोध दर्ज किया जिसने सभीं जिले के एवं नगर के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं युवा महिला की विशेष उपस्थिति थी इस आंदोलन में1
- PM-RAHAT सड़क दुर्घटना पीड़ितों हेतु कैशलेस उपचार योजना समय पर उपचार, जीवन का उपहार PM-RAHAT सड़क दुर्घटना पीड़ितों हेतु कैशलेस उपचार योजना समय पर उपचार, जीवन का उपहार1
- जगदलपुर: इंद्रावती पुल से गोरिया बहार तक बनेगा ग्रीन गेटवे, 2700 पौधों से सजेगा शहर का प्रवेश द्वार जगदलपुर। शहर के प्रवेश द्वार आमागुड़ा क्षेत्र को ग्रीन गेटवे बनाने की कवायद नगर निगम ने शुरू की है। इंद्रावती नए पुल से गोरिया बहार तक 2700 पौधे लगाकर एनएच क्षेत्र को हरित स्वरूप देने का दावा किया गया है। महापौर संजय पांडे ने बताया 10 सितंबर को डिप्टी सीएम अरुण साव और वन मंत्री केदार कश्यप की मौजूदगी में कनेर, बोगनविलिया और टेकोमा के पौधे लगाए जाएंगे। पौधे वन विभाग उपलब्ध करा रहा है। वहीं कांग्रेस ने प्रोजेक्ट पर सवाल उठाते हुए इसे महापौर की छवि चमकाने का प्रयास बताया।3
- बस्तर बदल रहा है… और यही बदलाव कुछ लोगों के पेट में दर्द पैदा कर रहा है! बस्तर बदल रहा है… और यही बदलाव कुछ लोगों के पेट में दर्द पैदा कर रहा है! . बस्तर… हाँ, वही बस्तर। जिसका नाम कभी सुनते ही लोगों के जेहन में जंगल, बंदूक, बारूद, लैंडमाइन, एंबुश और नक्सली हिंसा की तस्वीर उभर आती थी। वही बस्तर… जहाँ जंगलों में चिड़ियों की आवाज से ज्यादा गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती थी। जहाँ सड़क पर चलना सिर्फ सफर नहीं, बल्कि जोखिम था। जहाँ शाम के बाद गांवों में सन्नाटा उतरता था। जहाँ एक धमाका सिर्फ आवाज नहीं होता था— वह किसी परिवार की जिंदगी उजाड़ देने वाली खबर हो सकता था। दशकों तक बस्तर ने इस हिंसा को झेला। और सबसे बड़ी विडंबना देखिए… जिस हिंसा के सबसे बड़े शिकार बस्तर के आदिवासी हुए, उसी हिंसा को दूर बैठे कुछ लोग ‘क्रांति’ कहने लगे! जिस बंदूक ने आदिवासी के घर में डर पैदा किया, उसे ‘संघर्ष का हथियार’ बताया गया। जिस हिंसा ने गांवों को पीछे धकेला, उसे ‘जल-जंगल-जमीन की लड़ाई’ का नाम दिया गया। और अब… जब वही बंदूकें कमजोर पड़ रही हैं, जब जंगलों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी है, जब सड़कें अंदरूनी इलाकों तक पहुंच रही हैं, जब मोबाइल नेटवर्क उन गांवों तक पहुंच रहा है जहाँ कभी संचार भी सपना था, जब बच्चे स्कूलों की तरफ लौट रहे हैं, जब स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं… तो कुछ विचारधाराओं के चेहरे पर बेचैनी दिखाई देने लगी है। क्यों? क्योंकि बस्तर का बदलना सिर्फ बस्तर का बदलना नहीं है। यह उस पूरी कहानी का अंत है जिसमें बंदूक को आदिवासी मुक्ति का रास्ता बताने की कोशिश की जाती रही। लेकिन बस्तर ने असली चेहरा देखा है। मैंने बस्तर को सिर्फ नक्शे पर नहीं देखा। मैंने इसे करीब से देखा है। मैंने उस डर को महसूस किया है, जिसमें एक परिवार यह सोचने पर मजबूर होता था कि आज रात कौन सुरक्षित लौटेगा और कौन नहीं। मैंने ऐसे लोगों की कहानियां सुनी हैं जिनके लिए खेत सिर्फ जमीन नहीं था— वह उनके पुरखों की विरासत था। लेकिन डर इतना बड़ा था कि इंसान को अपनी जमीन से ज्यादा अपने परिवार की चिंता करनी पड़ी। बूढ़े मां-बाप… पत्नी… बच्चे… आखिर कोई अपने परिवार को बंदूक के सामने कैसे खड़ा कर सकता है? और फिर यही सवाल पूछना जरूरी है— अगर बंदूक आदिवासियों की मुक्ति का रास्ता थी, तो इस रास्ते की सबसे बड़ी कीमत आदिवासियों ने ही क्यों चुकाई? किसका घर उजड़ा? किसका बच्चा अनाथ हुआ? किसका पति मारा गया? किसका भाई गया? किसका गांव डर में जीता रहा? बस्तर के आम आदमी का। अब जरा आज का बस्तर देखिए। जहाँ कभी बंदूक का डर था, वहाँ अब मोबाइल नेटवर्क की बात हो रही है। जहाँ कभी विकास का रास्ता बंद था, वहाँ सड़कें पहुंच रही हैं। जहाँ बच्चों का भविष्य अनिश्चित था, वहाँ स्कूल और शिक्षा की चर्चा हो रही है। जहाँ इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। और सबसे बड़ी बात— लोगों के भीतर डर की जगह उम्मीद पैदा हो रही है। क्या यही असली बदलाव नहीं है? क्या आदिवासी समाज को यही नहीं चाहिए था? क्या उसे अपने बच्चे को पढ़ाने का अधिकार नहीं है? क्या उसे अपने गांव तक सड़क नहीं चाहिए? क्या उसे अस्पताल नहीं चाहिए? क्या उसे मोबाइल नेटवर्क नहीं चाहिए? क्या उसे रोजगार नहीं चाहिए? क्या उसे अपने खेत में बिना डर के जाने का अधिकार नहीं चाहिए? अगर इन सवालों का जवाब ‘हां’ है, तो फिर बंदूक की राजनीति किसके लिए थी? और अब कुछ लोग कह रहे हैं— “नक्सली क्रांतिकारी थे…” माफ कीजिए! बस्तर के आम आदमी से पूछिए। उस मां से पूछिए जिसने अपना बेटा खोया। उस परिवार से पूछिए जिसने डर के कारण गांव छोड़ा। उस ग्रामीण से पूछिए जिसने वर्षों तक धमकी और भय के बीच जीवन बिताया। उस जवान के परिवार से पूछिए जिसने बस्तर की धरती पर ड्यूटी करते हुए अपनी जान गंवाई। फिर तय कीजिए— कौन क्रांतिकारी था और कौन हिंसा का रास्ता चुन चुका था? मेरे लिए जवाब बिल्कुल स्पष्ट है। बंदूक के दम पर लोकतंत्र नहीं आता। डर के दम पर विकास नहीं आता। हिंसा के दम पर आदिवासी सशक्त नहीं होता। आदिवासी सशक्त तब होता है जब उसके हाथ में बंदूक नहीं, कलम और रोजगार होता है। जब उसके गांव तक सड़क होती है। जब उसके बच्चे के पास स्कूल होता है। जब उसके परिवार के पास इलाज की सुविधा होती है। जब वह अपने खेत में बिना भय के जा सकता है। और शायद यही बात कुछ लोगों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। क्योंकि जब जंगलों में बंदूक कमजोर होती है, तो सिर्फ हिंसा कमजोर नहीं होती… हिंसा के नाम पर चलने वाला पूरा नैरेटिव कमजोर पड़ता है। लेवी की व्यवस्था कमजोर पड़ती है। डर की राजनीति कमजोर पड़ती है। बंदूक के सहारे प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कमजोर पड़ती है। और तब असली सवाल सामने आता है— आखिर बस्तर के नाम पर इतने वर्षों तक किसका हित साधा जा रहा था? बस्तर को अब किसी बाहरी विचारधारा के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। बस्तर के लोग खुद तय करेंगे कि उन्हें कैसा बस्तर चाहिए। और मुझे पूरा विश्वास है— उन्हें बंदूक वाला बस्तर नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए— - शांत बस्तर - शिक्षित बस्तर - स्वस्थ बस्तर - सड़क वाला बस्तर - कनेक्टेड बस्तर - रोजगार वाला बस्तर - पर्यटन वाला बस्तर - और सबसे बढ़कर—भयमुक्त बस्तर। याद रखिए… जिस जंगल को दशकों तक बंदूक ने कैद करके रखा, वह जंगल अब खुली हवा में सांस लेना चाहता है। जिस आदिवासी को डर के साये में जीना पड़ा, वह अब अपने बच्चों का भविष्य बनाना चाहता है। जिस बस्तर की पहचान कभी नक्सलवाद से कराई जाती थी… वह अब अपनी पहचान खुद लिख रहा है। और इस बदलाव को रोकना आसान नहीं होगा। क्योंकि यह बदलाव किसी एक सरकार, किसी एक संगठन या किसी एक व्यक्ति का नहीं है। यह बस्तर के आम आदमी की इच्छा है। वह बस्तर जिसने हिंसा देखी है। वह बस्तर जिसने अपने लोगों को खोया है। वह बस्तर जिसने डर सहा है। और अब वही बस्तर कह रहा है— बस बहुत हुआ! हमें बंदूक नहीं चाहिए। हमें बारूद नहीं चाहिए। हमें लेवी नहीं चाहिए। हमें हिंसा नहीं चाहिए। हमें अपना भविष्य चाहिए। और मैं पूरे विश्वास से कहता हूं— मेरा बस्तर बदल रहा है… मेरा बस्तर बदलेगा… और अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, विकास और उसकी अद्भुत संस्कृति होगी। जो लोग बस्तर को फिर से हिंसा के अंधेरे में ले जाना चाहते हैं, उन्हें एक बात समझ लेनी चाहिए— बस्तर अब जाग चुका है। और जागा हुआ बस्तर पीछे नहीं जाएगा। आप बस्तर के इस बदलाव के साथ हैं? तो सिर्फ पढ़कर मत जाइए—अपनी आवाज जरूर उठाइए। कमेंट में लिखिए— “मेरा बस्तर, मेरा गर्व।” #bastariya #BastarChanging #NaxalFreeBastar #BastarDevelopment #BastarDiaries #chhattisgarh #TribalDevelopment #peaceinbastar #development #BastarRising #Naxalism #explorepage #fypシ #Bastar #BastarChanging #BadaltaBastar #BastarNews #BastarDevelopment #Abujhmad #Abujhmar #AbujhmadNews #NaxalFreeBastar #Naxalism #NaxalMuktBastar #BastarVikas #BastarUpdate #ChhattisgarhNews #Chhattisgarh #BastarKiAwaaz #Adivasi #AdivasiNews #BastarCulture #BastarTourism #Development #Vikas #PeaceInBastar #JoharBastar #JoharBastarRT #Narayanpur #NarayanpurNews #BreakingNews #ViralVideo1
- कोंडागांव: बड़ेडोंगर-कोनगुड़ मार्ग पर बड़ा हादसा टला, जर्जर सड़क बनी परेशानी का सबब बड़ेडोंगर से कोनगुड़ मार्ग की जर्जर सड़क के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मार्ग पर आज गिट्टी से लदा एक मालवाहक वाहन साइड देने के दौरान सड़क से नीचे उतर गया और पलटने से बाल-बाल बचा। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों दोपहिया वाहन, छोटी-बड़ी गाड़ियां और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। यह मार्ग नारायणपुर क्षेत्र को भी जोड़ता है। सड़क की खराब स्थिति के चलते दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से सड़क की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।1
- शीतलापारा कोचवाही के घर में चोरी का प्रयास करने वाला आरोपी गिरफ्तार,भेजा जेल 2 सितंबर शाम 6 बजे जिला पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी अनुसार, जिले के नरहरपुर शीतलापारा कोचवाही में घर का ताला तोड़कर, चोरी का प्रयास करने वाले आरोपी को नरहरपुर पुलिस ने,ग्रामीणों की मदद से गिरफ्तार किया है। घटना 1 सितंबर की है। सत्यभामा कोरेटी अपने पुत्र के साथ खेत गई थीं। दोपहर में लौटने पर घर का ताला टूटा मिला और अंदर से आवाज सुनाई दी। आसपास के लोगों को बुलाने पर एक व्यक्ति घर से भागने लगा, जिसे ग्रामीणों ने पीछा कर पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान संजय कोरेटी उम्र 36 वर्ष, निवासी कोचवाही के रूप में हुई। पूछताछ में उसने चोरी की नीयत से घर में घुसकर,ताला तोड़ने का प्रयास करना स्वीकार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त गैती और टूटा हुआ ताला जब्त किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।1
- मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित शुद्धिकरण’ के विरोध में दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी ने सौंपा ज्ञापन तहसीलदार महोदय को रिपोर्ट रवि सरकार किरंदुल में जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी मामले के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व),तहसील बड़े बचेली को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया,ज्ञापन में कांग्रेस ने हल्द्वानी-देहरादून में हुई घटना को लेकर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है,ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ का कांग्रेस विरोध करती है,मामले ने उस समय और राजनीतिक रूप ले लिया जब कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर,इस विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है, ज्ञापन में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने आरोप लगाया है कि ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’जैसी गतिविधियां सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत संदेश देती हैं,कांग्रेस ने इसे दलित समाज के सम्मान और संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़ते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, क्या है पूरा विवाद?,मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली हुई थी। इसके बाद उसी स्थल पर कुछ संगठनों द्वारा कथित तौर पर हवन, गंगाजल छिड़कने और शुद्धिकरण’का आयोजन किया गया,इस घटना को कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति का विषय बनाया और इसे जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत की मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए और हल्लाबोल किया जा रहा है,हालांकि, इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और घटना के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं,इसलिए ‘शुद्धिकरण’ के उद्देश्य और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, दंतेवाड़ा में कांग्रेस का संदेश जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य हल्द्वानी की घटना का विरोध करना और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना है, ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि देश में सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए तथा जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए,ज्ञापन पर कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर भी दिखाई दे रहे हैं। इस तरह हल्द्वानी के‘शुद्धिकरण’ विवाद की गूंज अब दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा तक पहुंच गई है और जिला कांग्रेस ने प्रशासन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया है भारी संख्या में विरोध दर्ज किया जिसने सभीं जिले के एवं नगर के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं युवा महिला की विशेष उपस्थिति थी इस आंदोलन में मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित शुद्धिकरण’ के विरोध में दंतेवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी ने सौंपा ज्ञापन तहसीलदार महोदय को रिपोर्ट रवि सरकार किरंदुल में जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी मामले के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व),तहसील बड़े बचेली को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया,ज्ञापन में कांग्रेस ने हल्द्वानी-देहरादून में हुई घटना को लेकर आपत्ति जताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है,ज्ञापन में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित रूप से किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ का कांग्रेस विरोध करती है,मामले ने उस समय और राजनीतिक रूप ले लिया जब कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दूसरी ओर,इस विवाद को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ भी हल्द्वानी में मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है, ज्ञापन में जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने आरोप लगाया है कि ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’जैसी गतिविधियां सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत संदेश देती हैं,कांग्रेस ने इसे दलित समाज के सम्मान और संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़ते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, क्या है पूरा विवाद?,मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली हुई थी। इसके बाद उसी स्थल पर कुछ संगठनों द्वारा कथित तौर पर हवन, गंगाजल छिड़कने और शुद्धिकरण’का आयोजन किया गया,इस घटना को कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति का विषय बनाया और इसे जातिगत भेदभाव तथा छुआछूत की मानसिकता से जोड़कर सवाल उठाए और हल्लाबोल किया जा रहा है,हालांकि, इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और घटना के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं,इसलिए ‘शुद्धिकरण’ के उद्देश्य और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, दंतेवाड़ा में कांग्रेस का संदेश जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य हल्द्वानी की घटना का विरोध करना और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना है, ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि देश में सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए तथा जाति के 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- सुकमा यातायात पुलिस ने जिसने सडक पर शोर मचा रहे दहशदगर्दों को धरदबोचा सुकमा यातायात पुलिस ने जिसने सडक पर शोर मचा रहे दहशदगर्दों को धरदबोचा1
- बस्तर में जैसे-जैसे उद्योगों का कारोबार बढ़ रहा है, वैसे ही परिवहन में मोनोपोली को लेकर विवाद भी बढ़ता जा रहा है। प्रशासन और पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद परिवहन संस्थाएं मुनाफे को लेकर एक-दूसरे से उलझ रही हैं। बार-बार के विरोध प्रदर्शन, गाड़ियों के जाम से आम लोगों को परेशानी हो रही है। ताजा मामला नगरनार एनएमडीसी के झाड़ेश्वर समिति से जुड़ा है, जो भूमि प्रभावितों की संस्था है। समिति ने 110 ट्रकों को यह कहते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया कि वे शहरी क्षेत्र के हैं। नगरनार स्टील प्लांट में उत्पादन शुरू होने के साथ ही कारोबार की मोनोपोली को लेकर कई गुट सक्रिय हो गए हैं। इनमें से कई को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, तो कई समूह स्थानीय लोगों की भागीदारी को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ताजा मामला परिवहन विवाद से जुड़ा है, जहां एनएमडीसी द्वारा उत्पादित माल को प्राइवेट कंपनियों तक पहुंचाने के परिवहन ठेके में प्राथमिकता को लेकर आए दिन विवाद हो रहे हैं। झाड़ेश्वर समिति ने इसी विवाद के चलते स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के नाम पर 110 ट्रकों को बाहर कर दिया है। समिति के संचालकों का कहना है कि काम को व्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया गया है, बाद में काम की उपलब्धता के अनुसार बाहर किए गए लोगों को फिर से सदस्यता में वापस लिया जाएगा।4