कलम की तेज धार से | अयोध्या "2 महीने बाद दर्शन दिए, कैमरा देखकर नाराजगी जताई" राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय बोले - "अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा" अयोध्या। 6 जून 2026 - राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। 8 आरोपी गिरफ्तार हुए। 26 जून - ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया। और फिर... करीब 2 महीने तक सन्नाटा। आज क्या हुआ आज चंपत राय पहली बार अयोध्या में नजर आए। जगह थी - तपस्वी छावनी मंदिर। जैसे ही मीडियाकर्मी फोटो-वीडियो बनाने लगे, वे गुस्से में आ गए। उंगली से इशारा कर कैमरे बंद कराने को कहा। इसके बाद तपस्वी छावनी के महंत परमहंस आचार्य से बंद कमरे में मुलाकात हुई। महंत परमहंस आचार्य ने बाहर आकर बताया: _"हमने निवेदन किया कि आप अयोध्या धाम मत छोड़िए। उन्होंने निवेदन स्वीकार किया और कहा कि अंतिम सांस तक मैं अयोध्या में रहूंगा।" कलम की तेज धार से कटाक्ष चोरी जून में हुई, बयान अगस्त में आया। वाह! क्या टाइमिंग है। 8 लोग जेल में, और पदाधिकारी कैमरे से नाराज। सवाल पूछना गुनाह है क्या? या जवाब देना मुश्किल? "अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा" - ये संकल्प सराहनीय है। पर रामनगरी सिर्फ रहने से नहीं, जवाबदेही से भी चलती है। चढ़ावा चोरी कोई छोटी बात नहीं। ये आस्था के साथ खिलवाड़ है। 2 महीने बाद आकर अगर पहली बात यही होती - _"मैं इस्तीफा दे चुका, जांच में सहयोग करूंगा"_ - तो शायद कैमरे भी बंद न कराने पड़ते। मंदिर आस्था का है, पारदर्शिता का भी होना चाहिए। अयोध्या पूछ रही है - चोरी कैसे हुई? सुरक्षा में चूक किसकी? और आगे ऐसा न हो, इसकी गारंटी क्या? कैमरा बंद करने से सच बंद नहीं होता, महाराज।
कलम की तेज धार से | अयोध्या "2 महीने बाद दर्शन दिए, कैमरा देखकर नाराजगी जताई" राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय बोले - "अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा" अयोध्या। 6 जून 2026 - राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। 8 आरोपी गिरफ्तार हुए। 26 जून - ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया। और फिर... करीब 2 महीने तक सन्नाटा। आज क्या हुआ आज चंपत राय पहली बार अयोध्या में नजर आए। जगह थी - तपस्वी छावनी मंदिर। जैसे ही मीडियाकर्मी फोटो-वीडियो बनाने लगे, वे गुस्से में आ गए। उंगली से इशारा कर कैमरे बंद कराने को कहा। इसके बाद तपस्वी छावनी के महंत परमहंस आचार्य से बंद कमरे में मुलाकात हुई। महंत परमहंस आचार्य ने बाहर आकर बताया: _"हमने निवेदन किया कि आप अयोध्या धाम मत छोड़िए। उन्होंने निवेदन स्वीकार किया
और कहा कि अंतिम सांस तक मैं अयोध्या में रहूंगा।" कलम की तेज धार से कटाक्ष चोरी जून में हुई, बयान अगस्त में आया। वाह! क्या टाइमिंग है। 8 लोग जेल में, और पदाधिकारी कैमरे से नाराज। सवाल पूछना गुनाह है क्या? या जवाब देना मुश्किल? "अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा" - ये संकल्प सराहनीय है। पर रामनगरी सिर्फ रहने से नहीं, जवाबदेही से भी चलती है। चढ़ावा चोरी कोई छोटी बात नहीं। ये आस्था के साथ खिलवाड़ है। 2 महीने बाद आकर अगर पहली बात यही होती - _"मैं इस्तीफा दे चुका, जांच में सहयोग करूंगा"_ - तो शायद कैमरे भी बंद न कराने पड़ते। मंदिर आस्था का है, पारदर्शिता का भी होना चाहिए। अयोध्या पूछ रही है - चोरी कैसे हुई? सुरक्षा में चूक किसकी? और आगे ऐसा न हो, इसकी गारंटी क्या? कैमरा बंद करने से सच बंद नहीं होता, महाराज।
- प्रयागराज के दबंग पूर्व विधायक उदयभान करवरीया समाजसेवी नेता है या एक दबंग बाहुबली जानिए बेबाक परिचर्चा में। Breking news2
- कलम की धार से | अयोध्या बंगला नंबर चार: नोटिस कहां, ताला पहले" प्रशासन ने खाली कराया, आवंटी बोले - मिली सिर्फ मौखिक सूचना अयोध्या। सिविल लाइन, रामपथ किनारे स्थित नगर निगम का बंगला नंबर चार मंगलवार को प्रशासन की कार्रवाई का केंद्र बना। जिला प्रशासन ने ताला तोड़कर बंगला खाली करवा दिया। मामला क्या है मुलायम सरकार के समय पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थान के संचालन के लिए यह बंगला वरिष्ठ पत्रकार स्व. शीतला सिंह को आवंटित हुआ था। बंगला मंडलायुक्त आवास के सामने है। 17 जुलाई को इस बंगले को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आदित्य विक्रम अग्रवाल के नाम एलाट कर दिया गया। प्रशासन का दावा था कि बंगला 3 साल से खाली है। संपादक के निधन के बाद इसे रिक्त मानते हुए खाली करने का नोटिस दिए जाने की बात कही गई। और फिर मंगलवार को कार्रवाई - बंगले का ताला तोड़ा गया, सारा सामान बाहर निकाला गया और प्रशासन ने अपना ताला जड़ दिया। आवंटी परिवार का आरोप स्व. शीतला सिंह के पुत्र सूर्य नारायण सिंह का कहना है: 1. न ट्रस्ट को, न परिवार को कोई नोटिस मिली। सिर्फ 26 जुलाई को तहसीलदार घर पहुंचे और मौखिक सूचना देकर तुरंत खाली करने को कहा। 2. 28 जुलाई को संपादक की पत्नी की तेरहवीं थी। मोहलत मांगी गई, पर प्रशासन दबाव बनाता रहा। 3. सामान में 5 तख्त, 2 सोफा सेट, बिस्तर, 90 कुर्सियां, 4 अलमारी, गैस चूल्हा, बर्तन, जरूरी कागजात तक बाहर निकाल दिए गए। उनका सवाल सीधा है - "प्रशासन को विधिक नोटिस देनी चाहिए थी।" प्रशासन का पक्ष जिला प्रशासन का कहना है कि संपादक के निधन के बाद बंगला रिक्त माना गया और नोटिस दिए जाने के बाद कार्रवाई की गई। कलम की तेज धार से कटाक्ष कानून कहता है - पहले नोटिस, फिर कार्रवाई। यहां हुआ - पहले ताला, फिर बहस। एक तरफ तेरहवीं का शोक, दूसरी तरफ सामान सड़क पर। 90 कुर्सियां थीं, शायद बैठकर बात करने के लिए। पर बात करने वाला कोई नहीं मिला। 3 साल से खाली बताकर 17 जुलाई को नया आवंटन, और 21 जुलाई को ही एलाट। इतनी फुर्ती! पर परिवार को कागज पर सूचना देने की फुर्ती क्यों नहीं दिखी? प्रशासन की मंशा पर सवाल नहीं, पर प्रक्रिया पर सवाल जरूर है। सरकारी बंगला सरकारी है, पर उसमें रखा सामान और सम्मान भी सरकारी जिम्मेदारी है। अगर गलती थी तो नोटिस दीजिए, मौका दीजिए, फिर कार्रवाई कीजिए। ताला तोड़ना आसान है, भरोसा तोड़ना मुश्किल। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच करे और परिवार को सुनवाई का उचित अवसर दे।4
- राममंदिर चढ़ावा चोरी के 2 महीने बाद चंपत राय दिखेः अयोध्या में उंगली दिखाकर कैमरे बंद कराए, बोले- मरते दम तक यहीं रहूंगा राम मंदिर चढ़ावा चोरी के करीब 2 महीने बाद पूर्व महासचिव चंपत राय मंगलवार को पहली बार अयोध्या में नजर आए। वह तपस्वी छावनी मंदिर पहुंचे। जब वह मंदिर जा रहे थे तो मीडियाकर्मी उनकी फोटो-वीडियो बनाने लगे। इस पर चंपत राय गुस्से में नजर आए और उंगली से इशारा करके अपने साथियों से कैमरे बंद कराने को कहा। चंपत राय से मुलाकात के बाद तपस्वी छावनी मंदिर के परमहंस आचार्य ने कहा- हम लोगों ने चंपत से निवेदन किया कि आप अयोध्या धाम मत छोड़िए। उन्होंने हमारा निवेदन स्वीकार किया और कहा कि अंतिम सांस तक मैं अयोध्या में रहूंगा। इससे पहले चंपत राय ने 7 जून को वीडियो जारी कर सफाई दी थी कि राम मंदिर में कोई चोरी नहीं हुई है। राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला 6 जून, 2026 को सामने आया था। अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले के बाद चंपत राय ने 26 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।2
- चंदौली के सकलडीहा तहसील के माधोपुर गांव में बेदखली के आदेश के बावजूद नहीं हटा अवैध कब्जा1
- PDA में PD “पंडित” का ही शार्ट फार्म है… -अखिलेश यादव1
- कलम की धार से | अयोध्या "हरित अयोध्या की ओर एक कदम" संजीवनी उपवन व जानकी जलाशय की ओर पलिया शाहबदी में मियावाकी पद्धति से बनेगा संजीवनी उपवन, जानकी जलाशय का भी होगा विकास अयोध्या। रामनगरी अब सिर्फ आस्था से ही नहीं, हरियाली से भी पहचानी जाएगी। नगर निगम अयोध्या और आईपीएल संस्था के संयुक्त प्रयास से पलिया शाहबदी क्षेत्र में सीएसआर फंड से एक बड़ी पर्यावरणीय परियोजना शुरू हुई है। क्या है परियोजना मियावाकी पद्धति पर आधारित "संजीवनी उपवन" और "जानकी जलाशय" का विकास किया जाएगा। मंगलवार को भूमिपूजन के साथ ही इसका शुभारंभ हो गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर विशिष्ट अतिथि - राज्य सूचना आयुक्त पीएन द्विवेदी रहे। क्या कहा मंच से कौशल किशोर जी ने कहा: "रामनगरी को अधिक हरित और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध बनाने की दिशा में यह उपवन एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रकृति संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।" महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा: "नगर निगम लगातार हरित आवरण बढ़ाने के लिए छोटे-बड़े उपवन विकसित कर रहा है। मियावाकी पद्धति से बनने वाला यह उपवन कम स्थान में घना, जैव विविधता से भरपूर होगा। जानकी जलाशय वर्षा जल संरक्षण और भूजल संवर्धन में अहम भूमिका निभाएगा।" राज्य सूचना आयुक्त पीएन द्विवेदी ने कहा कि जानकी जलाशय जल संरक्षण का प्रेरणादायी मॉडल बनेगा। 2 साल में होगा पूरा आईपीएल संस्था से पवन पांडे ने बताया कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लगभग दो वर्षों में विकसित किया जाएगा। भूमिपूजन के साथ ही कार्य शुरू कर दिया गया है। लक्ष्य है निर्धारित समय में इसे पूरा करना। कलम की धार मियावाकी मतलब - कम जगह, ज्यादा पेड़, ज्यादा ऑक्सीजन। संजीवनी उपवन नाम ही बता रहा है - ये उपवन शहर को नई सांस देगा। कंक्रीट के जंगल के बीच जब हरियाली का जंगल उगेगा, तो गर्मी भी कम होगी, पक्षी भी आएंगे और भूजल भी बचेगा। जानकी जलाशय सिर्फ पानी का तालाब नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का स्रोत बनेगा। सराहनीय पहल। अब जरूरत है इसे जन आंदोलन बनाने की। पेड़ लगाएं, बचाएं और संभालें। हरित अयोध्या - स्वच्छ अयोध्या3
- रवि किशन आज भी मौन व्रत पर हैं… बस आज वाला तरीका थोड़ा अलग है।1
- यह वायरल वीडियो वाराणसी के गंगापुर क्षेत्र का बताया जा रहा है फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। यह वायरल वीडियो वाराणसी के गंगापुर क्षेत्र का बताया जा रहा है फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।1