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एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम पर यह सवाल उठाया गया है कि क्या उद्धव ठाकरे से जुड़े छह बागी सदस्यों ने माफी मांग ली है। इस संभावित घटना को एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस संदर्भ में कांग्रेस और भाजपा का भी जिक्र किया गया है।
सच के साथ
एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम पर यह सवाल उठाया गया है कि क्या उद्धव ठाकरे से जुड़े छह बागी सदस्यों ने माफी मांग ली है। इस संभावित घटना को एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस संदर्भ में कांग्रेस और भाजपा का भी जिक्र किया गया है।
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- उत्तर प्रदेश से एक बेहद हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, एक शख्स अपने निधन के 39 दिन बाद जीवित घर लौट आया, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।1
- एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम पर यह सवाल उठाया गया है कि क्या उद्धव ठाकरे से जुड़े छह बागी सदस्यों ने माफी मांग ली है। इस संभावित घटना को एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस संदर्भ में कांग्रेस और भाजपा का भी जिक्र किया गया है।1
- मुहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के नाम से जाना जाता है, जो इतिहास की सबसे गमनाक तारीख मानी जाती है क्योंकि इसी दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी। विश्वभर में सभी भाषाओं और जाति-धर्म के लोग मुहर्रम का यह गम मनाते हैं, और भारत में यह परंपरा शुरुआत से चली आ रही है। जहाँ शिया समुदाय इस गम को मनाता है, वहीं कुछ जगहों पर इसे हिंदुओं द्वारा शुरू करने के प्रमाण भी मिलते हैं, जिसकी पुष्टि पुरानी तर्ज़ पर निकलने वाले मुहर्रम जुलूस करते हैं। कौशाम्बी के दारानगर कस्बे में अज़ादारी की यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है; ब्रिटिश शासन के दौरान जब मुहर्रम पर कुछ पाबंदियाँ लगाई गईं, तब दारानगर में ब्राह्मण समाज के लोगों ने शिया समुदाय के साथ मिलकर मुहर्रम का जुलूस निकाला, जिससे यह परंपरा आज तक अपना अस्तित्व बनाए हुए है। इमाम हुसैन और उनके साथियों के परिवारजनों को पुरसा मजलिस और मातम के ज़रिए दिलासा दिया जाता है, और निर्धारित तारीखों पर इसे जुलूस की शक्ल में सड़कों पर लाया जाता है। दारानगर में मुहर्रम पर दिखने वाली हिंदू-मुस्लिम एकता किसी को भी चकित कर देती है; एक ओर जहाँ शिया समुदाय दशहरा पर्व में रघुराई राम, लखन, सीता और रामलीला कमेटी का स्वागत करता है, वहीं मुहर्रम का दसवाँ आशूरा जुलूस प्राचीन हनुमान मंदिर के सामने से निकाला जाता है, जिसमें हिंदुओं का पूरा सहयोग मिलता है। दारानगर अंजुमन के सदर सय्यद असद सग़ीर जुलूस में मुहर्रम की दर्दनाक घटना और उसके महत्व के बारे में जानकारी देते हैं, जहाँ हिंदी नौहा भी पढ़ा जाता है। दारानगर का मुहर्रम न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि यहाँ अनोखे अंदाज़ में किए जाने वाला हाथ और छुरियों का मातम भी खास मायने रखता है, जिसका अंदाज़ सब जगहों से अलग दिखता है।2
- कौशांबी जिले के भरवारी क्षेत्र में मोहर्रम का त्योहार भरवारी पुलिस की मुस्तैदी के कारण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। थाना कोखराज की भरवारी चौकी प्रभारी, दरोगा नितेश त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार गश्त और कड़ी निगरानी कर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखा। सिपाही रितेश यादव और जितेंद्र सिंह सहित पूरी टीम की सक्रियता से यह पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण में सकुशल संपन्न हो सका। क्षेत्र की जनता ने भरवारी पुलिस की इस तत्परता और प्रभावी कार्यशैली की जमकर सराहना की है।1
- कौशांबी में जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सोनकर और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के अंतर्गत आयोजित जनपद स्तरीय जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली कलेक्ट्रेट परिसर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मंझनपुर तक निकाली गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार ने इस अवसर पर जानकारी दी कि सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान 28 जून, 2026 से शुरू होगा। इस अभियान के तहत जनपद में कुल 747 बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहाँ 0 से 5 वर्ष तक के लगभग 2,56,995 बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। उन्होंने सभी अभिभावकों से यह सुनिश्चित करने का दायित्व निभाने की अपील की कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए पल्स पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं। डॉ. कुमार ने जनपदवासियों से अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। अभियान के दौरान सभी बूथों और घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाकर इसे सफल बनाने की अपील की गई। इस कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ओम प्रकाश सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के जवई में मुहर्रम पर्व नम आँखों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर लोगों ने भावुक होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।1
- यह सवाल उठ रहा है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान ने अपना मंत्रालय त्याग दिया है। राहुल द्वारा किए गए एक ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस (Congress) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संदर्भ में किया गया है।1
- ग्राम बिलौटी में हुई एक घटना के आधार पर, सिपाही संख्या 647 आशिष कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। उन पर बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली 2026 का उल्लंघन करने का आरोप है। इस कार्रवाई के तहत, सिपाही आशिष कुमार तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।1
- कौशाम्बी के दारानगर कस्बे में मुहर्रम की दसवीं तारीख (आशूरा) के अवसर पर एक ऐतिहासिक परंपरा का पालन करते हुए ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस प्राचीन हनुमान मंदिर के सामने बरामद हुआ, जहाँ इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मातम और नौहाख्वानी की गई। यह वर्षों पुरानी परंपरा सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल मानी जाती है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग मिलकर सहभागिता निभाते हैं। अंजुमन के सदर सैय्यद असद सगीर ने इस मौके पर कर्बला की शहादत पर प्रकाश डाला। दारानगर का मुहर्रम अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ हिंदी नौहा और पारंपरिक मातम के अनोखे अंदाज के लिए भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।1