महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष्य में 16 जून 2026 को रावतभाटा स्थित लाहोटी हॉस्पिटल में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसमें वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की वीरता, स्वाभिमान और त्याग को याद किया जाएगा। आयोजक चेतन सिंह सांखला ने बताया कि इस रक्तदान शिविर का उद्देश्य महाराणा प्रताप जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर मानव सेवा के संकल्प को साकार करना है। उन्होंने 'रक्तदान महादान' के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकती है। सांखला ने क्षेत्र के सभी सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों के साथ-साथ आमजन से भी अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर में भाग लेकर रक्तदान करें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने लोगों से अपने परिवार सहित कार्यक्रम में उपस्थित होकर महाराणा प्रताप जयंती समारोह की शोभा बढ़ाने का भी आग्रह किया है।
महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष्य में 16 जून 2026 को रावतभाटा स्थित लाहोटी हॉस्पिटल में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसमें वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की वीरता, स्वाभिमान और त्याग को याद किया जाएगा। आयोजक चेतन सिंह सांखला ने बताया कि इस रक्तदान शिविर का उद्देश्य महाराणा प्रताप जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर मानव सेवा के संकल्प को साकार करना है। उन्होंने 'रक्तदान महादान' के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकती है। सांखला ने क्षेत्र के सभी सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों के साथ-साथ आमजन से भी अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर में भाग लेकर रक्तदान करें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने लोगों से अपने परिवार सहित कार्यक्रम में उपस्थित होकर महाराणा प्रताप जयंती समारोह की शोभा बढ़ाने का भी आग्रह किया है।
- कोटा में जिला प्रशासन और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सियाम ऑडिटोरियम में ई-मित्र कियोस्क धारकों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिलेभर से आए 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क संचालकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं के संबंध में गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक सरल और सुलभ तरीके से पहुँचाने में ई-मित्र कियोस्क की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी विभिन्न सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में नागरिक ई-मित्र केंद्रों पर आते हैं, इसलिए संचालकों को सभी प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। जिला कलक्टर ने ई-मित्र संचालकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक आईटी टूल्स के उपयोग के प्रति अपडेट रहने का आह्वान किया, जिससे तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी सेवाओं का लाभ लोगों तक उनके घर के नजदीक पारदर्शी और त्वरित तरीके से पहुँचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ई-मित्र केंद्रों पर सेवाओं के लिए केवल निर्धारित शुल्क ही लिया जाए और किसी भी प्रकार की ओवरचार्जिंग न की जाए, अन्यथा आमजन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के अतिरिक्त निदेशक महेन्द्र पाल सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोटा जिले में वर्तमान में लगभग 2200 सक्रिय ई-मित्र कियोस्क संचालित हैं। कार्यशाला के दौरान मास्टर ट्रेनर आशुतोष कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और उसकी संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं, मास्टर ट्रेनर्स विमल खंडेलवाल, बी.एस. शेखावत, सुरेश मीणा और विनोद कुमार ने आधार कार्ड, जनाधार, जन्म-मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र, जाति एवं मूल निवास प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, बिजली-पानी बिल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, कृषि विभाग की अनुदान योजनाएं तथा एनएफएसए में नाम जोड़ने सहित विभिन्न सेवाओं की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने यह सुझाव भी दिया कि दस्तावेजों को बार-बार स्कैन करने के बजाय मेटाडाटा के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाए, जिससे कार्य की गति और गुणवत्ता में सुधार हो सके। कार्यशाला में यह भी सूचित किया गया कि यदि किसी ई-मित्र संचालक के विरुद्ध ओवरचार्जिंग की तीन शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो उसका कियोस्क ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान ई-मित्र संचालक दीपक कुमार प्रजापति और इदरीस अहमद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ई-मित्र केंद्र संचालन से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है और वे आमजन की सेवा के साथ अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर पा रहे हैं। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त निदेशक सविता कृष्णिया, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश चौधरी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक एम.एम. शेख सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क धारक उपस्थित रहे।2
- बहुचर्चित चंद्रेसल के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड के मामले में पुलिस ने तीन अन्य फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और पुलिस इनकी तलाश कर रही थी।1
- कोटा शहर के विज्ञान नगर थाना इलाके में डकनिया रोड पर जांबाज पत्रिका कार्यालय के सामने दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में एक रिटायर्ड टीचर की मौत हो गई। पुलिस मृतक का पोस्टमार्टम करवा रही है और मामले की जांच में जुटी है। विज्ञान नगर थाना हेड कांस्टेबल कमल किशोर ने रविवार सुबह 10:00 बजे यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान रिटायर्ड टीचर जमील मोहम्मद के रूप में हुई है, जो जांबाज पत्रिका में कार्यरत थे। यह हादसा तब हुआ जब जमील मोहम्मद पत्रिका कार्यालय से वापस लौट रहे थे और गेट के सामने एक तेजी से आ रही मोटरसाइकिल ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर से घायल हुए जमील मोहम्मद को तत्काल मैत्री अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- अनीता के पति दिनेश बिश्नोई ने अपने गहरे दुख को व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस कानून पर कोई विश्वास नहीं है, और उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तियों को केवल भगवान ही उचित सज़ा दे सकते हैं। दिनेश बिश्नोई का दृढ़ विश्वास है कि 'भगवान के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं', जो न्याय के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है, भले ही वे वर्तमान कानूनी व्यवस्था से निराश हों।1
- नीमच जिले की ग्राम पंचायत दुधलाई में मनरेगा के तहत हुए कथित 'कागजी जंगल' मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रिकॉर्ड में 448 दिनों की हाजिरी और लाखों रुपये का खर्च दिखाया गया है, जबकि मौके पर एक भी नया पौधा नहीं मिला है। इस 'कागजी जंगल' के बड़े खेल का खुलासा होने के बाद, शिकायत दर्ज कराई गई है। अब ग्रामीण इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1
- नीमच जिले की रामपुरा तहसील स्थित ग्राम पंचायत दुधलाई में मनरेगा के तहत हुए वृक्षारोपण कार्य में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2024 से जुलाई 2025 तक 448 दिनों तक काम चला दिखाया गया है, जिस पर लगभग 1.07 लाख रुपये का भुगतान भी हो चुका है। हालांकि, ग्राम पड़दा के सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को मौके पर निरीक्षण किया और पाया कि 'पतवारी के पास' वाली भूमि पर न तो कोई नया गड्ढा था, न नए पौधे और न ही सुरक्षा बाड़; वहाँ केवल 8-10 वर्ष पुराने कुछ सूखे पेड़ थे जो निजी भूमि पर स्थित थे। सरकारी एमआईएस पोर्टल से निकाले गए मस्टर रोल क्रमांक 341 से 348 में कार्यस्थल स्पष्ट रूप से "पतवारी के पास, ग्राम दुधलाई" दर्ज है, जहाँ 448 मानव दिवस सृजित किए गए और प्रतिदिन 20-25 मजदूर उपस्थित दर्शाए गए। लेकिन, जब यह अनियमितता उजागर हुई, तो ग्राम पंचायत के सरपंच पति और सचिव ने अपना बयान बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि वृक्षारोपण का कार्य 'पतवारी के पास' नहीं, बल्कि किसी 'दूसरी जगह' कराया गया था, जिससे ऑनलाइन सरकारी दस्तावेज में दर्ज स्थल और उनके मौखिक बयान में सीधा विरोधाभास पैदा हो गया। धनगर का आरोप है कि यह सब शासन के पैसे को हड़पने के लिए झूठ पर झूठ बोला जा रहा है, जिसमें फर्जी हाजिरी, एनएमएमएस ऐप पर फर्जी जियो-टैग्ड फोटो और माप पुस्तिका क्रमांक 306633 में बिना मापे एंट्री करना शामिल है, और अब पकड़े जाने पर कार्यस्थल ही बदलने का प्रयास किया जा रहा है। शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर नीमच, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नीमच और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मनासा को दी थी, जिसमें मस्टर रोल की प्रति, मौके की फोटो और ऑनलाइन मास्टर का प्रिंटआउट भी संलग्न था। हालांकि, शिकायत प्रस्तुत किए चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा न तो कोई जांच दल गठित किया गया है और न ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कार्यस्थल अलग होने पर सरपंच 'दूसरी जगह' का दावा क्यों कर रहे हैं, यदि कार्य अन्यत्र हुआ तो उस स्थल की नाप पुस्तिका, मस्टर रोल और जियो-टैग फोटो कहाँ हैं, 448 दिन और ₹1.07 लाख खर्च के बाद भी परिसंपत्ति रजिस्टर में एक भी पौधा क्यों दर्ज नहीं है, और सरकारी दस्तावेज से भिन्न बयान देकर भुगतान लेना किस श्रेणी का अपराध है। स्पष्ट है कि मनरेगा का उद्देश्य, ग्रामीणों को रोजगार और गाँव को हरियाली देना, इस मामले में पूरा नहीं हुआ, बल्कि केवल सरकारी खजाने पर डाका डाला गया।1
- कोटा के चंद्रेसल मठ में हुए बहुचर्चित महंत देवानंद महाराज के हत्याकांड मामले में पुलिस ने आज दो और गिरफ्तारियाँ की हैं। इनमें मठ के पुराने पुजारी नंदनवन महाराज और पुरातत्व विभाग का एक कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों ने इस पूरे मामले को लूट और डकैती का रूप देने की साज़िश रची थी। इस कार्रवाई के साथ, मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि विधि के विरुद्ध संघर्षरत एक नाबालिग को भी निरुद्ध किया गया है।1
- एक 'बड़ा विदेशी गैंग' भारतीय लड़कियों को शादी के विरुद्ध भड़काने में सक्रिय है, जिसके लिए उन्हें बाकायदा पैसे दिए जा रहे हैं। इस गैंग का उद्देश्य ऐसी लड़कियों को तैयार करना है जो शादी को 'गुलामी और दुखों का पर्याय' बताएं, जिससे अन्य लड़कियों का 'ब्रेनवॉश' किया जा सके। यह प्रचार-प्रसार विदेशों से मोटी फंडिंग के ज़रिए हो रहा है और इसका असर दिखने लगा है, खासकर हिंदू लड़कियों में यह 'कुविचार' पनप रहा है, जिसके कारण देश 'घोर गुलामी' की ओर बढ़ रहा है। इस सोच के दूरगामी और भयानक परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि आज की जवानी, शिक्षा और कमाने की क्षमता भले ही लड़कियों को बिना शादी के जीवन चलाने में मदद करे, पर साठ साल की उम्र के बाद या बीमारी में अपनों (भाई-भतीजों) का सहारा न मिलने पर, और दवाइयों व ऑपरेशन में सारा पैसा खत्म हो जाने पर बुढ़ापे में अपनी देखभाल कैसे होगी, यह प्रश्न उठता है। सबसे भयावह परिणाम हिंदुओं की पहले से तेजी से गिर रही आबादी पर पड़ेगा, क्योंकि यह पीढ़ी शादी से दूरी बना रही है या बहुत देर से शादी कर रही है, जिससे बच्चे एक या मुश्किल से दो ही होंगे। इससे देश 'बहुत तेजी से नारकीय गुलामी के अंधकार के दलदल' की ओर जा रहा है। पिछले एक हज़ार सालों के इतिहास का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस 'गुलामी' के दौर में हिंदू स्त्रियों को लाखों की संख्या में समरकंद की मंडियों में नंगी परेड करवा कर दो-दो दीनार में बेचा गया था। उनके बच्चों को अलग-अलग बेचा गया, जिससे माँ, बेटा और बेटी जीवन में दोबारा कभी नहीं मिल पाए। उन्हें पीट-पीटकर दिन-रात काम कराया गया, जबकि बचे हुए हिंदुओं का कत्ल कर दिया गया और उन्हें जीवित जलाया गया। उनकी धन-संपत्ति और मवेशियों को लूटा गया, और यह सब उन हज़ारों सालों की गुलामी में बार-बार दोहराया गया। लाखों हिंदू स्त्रियों का बार-बार बलात्कार कर उन्हें रखैलों की श्रेणी में स्थान मिला। आज शादी से इनकार करने वाली पीढ़ी से पूछा गया है कि क्या वे कल अपने माता-पिता, भाई-बहन का कत्ल और खुद का बलात्कार अपनी आँखों से देखना पसंद करेंगे/करेंगी? या क्या वे 'बुर्के में धीमा साँस' लेना, चार-चार सौतन और गाय का माँस बनाना व खाना पसंद करेंगे/करेंगी? इस 'नर्क' को झेलने के लिए तैयार होने का प्रश्न उठाते हुए, चौधरी ने व्यक्ति से खुद ही फैसला लेने का आह्वान किया है।1
- सरस डेयरी के कोटा-बून्दी जिला दुग्ध संघ कार्यालय में किसानों और पशुपालकों को चारा कुट्टी मशीनें वितरित की गईं। ये मशीनें हाथ और लाइट दोनों से चलने वाली थीं। इस मौके पर नागरिक सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेश बिरला, भाजपा विधायक संदीप शर्मा, मार्केटिंग चेयरमैन निहाल सिंह और सरस दुग्ध संघ के चेयरमैन चैन सिंह राठौड़ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। यह वितरण विशेष रूप से पशुपालकों को ध्यान में रखकर किया गया।1