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पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल सीतापुर द्वारा चलाई गई तबादला एक्सप्रेस थाना अध्यक्षों का हुआ स्थानांतरण इधर से उधर भेजे गए थानाध्यक्ष
Raju Kumar Bansal Patrakaar
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल सीतापुर द्वारा चलाई गई तबादला एक्सप्रेस थाना अध्यक्षों का हुआ स्थानांतरण इधर से उधर भेजे गए थानाध्यक्ष
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- लखीमपुर खीरी में आज शनिवार देर शाम सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के लिए थाना अध्यक्ष निराला तिवारी, एसएसआई राजबहादुर और चौकी इंचार्ज संजय यादव ने भारी पुलिस बल के साथ कस्बे के मुख्य मार्गों, चौराहों और गलियों में फ्लैग मार्च किया। इसके बाद पुलिस टीम शाही किले के उर्स परिसर में पहुंचकर सुरक्षा का जायजा लिया और लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। महिलाओं से किसी भी समस्या पर तुरंत पुलिस से संपर्क करने की अपील की गई। थाना अध्यक्ष ने बताया कि उर्स स्थल और प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।1
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- प्रयागराज में भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे मंच पर एक ब्राह्मण बच्चे के प्रति सम्मान का भाव प्रदर्शित करते नजर आ रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचे एक ब्राह्मण बच्चे ने जब खेसारी लाल यादव के पैर छूने का प्रयास किया, तो अभिनेता ने उसे ऐसा करने से मना कर दिया। खेसारी लाल यादव ने बच्चे से कहा, “आप ब्राह्मण कुल के आदमी हो। हमारे यहां ब्राह्मण बच्चों का भी पैर छूते हैं। हमारे यहां संस्कार है।” यह कहते हुए खेसारी लाल यादव स्वयं झुक गए और बच्चे के पैर छूकर उसे सम्मान दिया। इस दृश्य को देखकर मंच पर मौजूद लोग भावुक हो गए और तालियों से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा। खेसारी लाल यादव के इस व्यवहार को लोग संस्कार, विनम्रता और सामाजिक समरसता का उदाहरण बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर प्रशंसकों का कहना है कि खेसारी लाल यादव ने यह साबित किया है कि सम्मान उम्र या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि संस्कारों से दिया जाता है। उनका यह कदम समाज में आपसी सम्मान और सद्भाव का संदेश देता है।1
- हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित करीब 200 साल पुराना गिरड माता मंदिर भीषण आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। देवदार की लकड़ी से निर्मित इस प्राचीन मंदिर की संरचना आग में पूरी तरह नष्ट हो गई। मंदिर के अंदर स्थापित अधिकांश प्राचीन मूर्तियां और धार्मिक सामग्री भी आग की भेंट चढ़ गईं, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं में गहरा दुख और आक्रोश है। बताया जा रहा है कि कड़ाके की ठंड के चलते मंदिर 13 अप्रैल तक शीतकालीन अवकाश के कारण बंद था। इसी दौरान आग लगने की घटना सामने आई। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हैं। प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों की जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। यह मंदिर क्षेत्र की आस्था और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता था। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।1
- सीतापुर के मंडी से आ रही है एक बड़ी खबर जहाँ प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ्ता अभियान की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है नजारा आप स्वयं कैमरे मे कैद हुई तस्वीरों मे देख सकते है शराब के खाली पौव्वा, सडे आलू, डेढ़ फुट जमा कचड़े का ढेर पर स्वछता के नाम पर आँशू बहा रहा है ।1
- थाना अध्यक्षों का हुआ स्थानांतरण इधर से उधर भेजे गए थानाध्यक्ष1
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- धरने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर, जिम्मेदार मौन लखीमपुर खीरी। अपनी मांगों को लेकर पिछले लगभग 54 दिनों से धरने पर बैठी आशा वर्करों की अब तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। लगातार चल रहे इस धरने का सीधा असर अब स्वास्थ्य विभाग के कार्यों पर साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन साधे हुए हैं। धरने पर बैठी आशा वर्करों का कहना है कि वे रोज़ सुबह धरना स्थल पर पहुंचती हैं और दिनभर नारेबाजी व प्रदर्शन करती रहती हैं, लेकिन उनकी समस्याएं सुनने और समाधान निकालने वाला कोई नहीं है। लंबे समय से जारी इस अनदेखी से आशा वर्करों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाती हैं। मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, सर्वे और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में उनका लंबे समय तक धरने पर रहना स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर कर रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। धरनारत आशा वर्करों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी। अब बड़ा सवाल यह है कि 54 दिनों से जारी आंदोलन के बावजूद आखिर आशा वर्करों की आवाज़ कब सुनी जाएगी? या फिर यूं ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती रहेंगी।2