सीमलवाड़ा। आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में पैदल मय हथियार फ्लैग मार्च निकाला गया। सीमलवाड़ा पुलिस उप अधीक्षक मदनलाल विश्नोई के सुपरविजन में फ्लैग मार्च धंबोला थाना क्षेत्र के सीमलवाड़ा कस्बा, पीठ कस्बा एवं धंबोला कस्बा सहित प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। पुलिस बल ने बाजारों, मुख्य चौराहों एवं संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त करते हुए आमजन को सुरक्षा का संदेश दिया। इस दौरान धंबोला थानाधिकारी देवेंद्र देवल, चौरासी थानाधिकारी भंवर सिंह राठौड़, राम सागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया, कुआं थानाधिकारी मनोज कुमार सहित भारी पुलिस जाब्ता मौजूद रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि रंगों का पर्व होली आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। इसे शालीनता एवं मर्यादा के साथ मनाया जाए। किसी भी प्रकार की हुड़दंग, जबरन चंदा वसूली, शराब पीकर उत्पात मचाने या कानून व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। फ्लैग मार्च के माध्यम से पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में पूरी सतर्कता बरती जा रही है और आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है। फ्लैग मार्च के दौरान कस्बों में लोगों ने पुलिस की उपस्थिति का स्वागत किया और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाने में सहयोग का आश्वासन
सीमलवाड़ा। आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में पैदल मय हथियार फ्लैग मार्च निकाला गया। सीमलवाड़ा पुलिस उप अधीक्षक मदनलाल विश्नोई के सुपरविजन में फ्लैग मार्च धंबोला थाना क्षेत्र के सीमलवाड़ा कस्बा, पीठ कस्बा एवं धंबोला कस्बा सहित प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। पुलिस बल ने बाजारों, मुख्य चौराहों एवं संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त करते हुए आमजन को सुरक्षा का संदेश दिया। इस दौरान धंबोला थानाधिकारी देवेंद्र देवल, चौरासी थानाधिकारी भंवर सिंह राठौड़, राम सागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया, कुआं थानाधिकारी मनोज कुमार सहित भारी पुलिस जाब्ता मौजूद रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि रंगों का पर्व होली आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। इसे शालीनता एवं मर्यादा के साथ मनाया जाए। किसी भी प्रकार की हुड़दंग, जबरन चंदा वसूली, शराब पीकर उत्पात मचाने या कानून व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। फ्लैग मार्च के माध्यम से पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में पूरी सतर्कता बरती जा रही है और आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है। फ्लैग मार्च के दौरान कस्बों में लोगों ने पुलिस की उपस्थिति का स्वागत किया और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाने में सहयोग का आश्वासन
- Post by Rajendra Tabiyar1
- कुशलगढ़ स्थित भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ में भील समाज सुधार समिति केंद्रीय कमेटी की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में समाज सुधार के नियमों की सख्त पालना, संगठन विस्तार और अनुशासन बनाए रखने के अहम निर्णय लिए गए। निर्णय हुआ कि होली के बाद सभी पंचायत समितियों की कार्यकारिणी गठित होगी, जिसकी केंद्रीय इकाई भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ रहेगी। जोगड़ीमल, खजुरा, भरतगढ़, उदयगढ़ वसुनी, बस्सी, मुवाल, नालपाड़ा, घाटा सहित जिन गांवों में नियमों की अवहेलना हुई, वहां पुनर्गठन कर केंद्रीय कमेटी निगरानी करेगी। अध्यक्ष डॉ. वजहीग मइड़ा ने कहा कि समाज की मजबूती अनुशासन और एकता से ही संभव है। बैठक पश्चात पदाधिकारी कुशलगढ़ थानाधिकारी प्रवीणसिंह सिसोदिया से मिले। थानाधिकारी ने डीजे व अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में परिषद अध्यक्ष रूपजी बारिया, पूर्व तहसीलदार देवीलाल डामोर, सरपंच संघ जिला उपाध्यक्ष राकेश मइड़ा, बहादुर सिंह डामोर, दिनेश डिंडोर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- *... कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी भील समाज सुधार समिति की बैठक भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ में सम्पन्न...डीजे बजाने वालों के खिलाफ़ कार्यवाही हेतु C.I.प्रवीण सिंह सिसोदिया 24 घंटे तैयार.. संपर्क नंबर जारी....9414105385....आज दिनांक 1 मार्च 2026 को भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ में भील समाज सुधार समिति केंद्रीय कमेटी की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि* *1. होली के बाद सभी पंचायत समितियों की कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा जिसमें केंद्रीय कमेटी भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ रहेंगी । अन्य सभी उप समितियां रहेंगी* । *2. ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले सभी जातियों के परिवारों को भील समाज सुधार समिति के नियमों के अनुसार चलना होगा और कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने का निर्णय लिया गया।* *3. समाज सुधार नियम लागु होने के बाद अभी तक जोगड़ीमल, खजुरा, भरतगढ़, उदयगढ़ वसुनी, बस्सी, मुवाल, नालपाड़ा, घाटा आदि जिन जिन गांवों में समाज सुधार समिति के नियमों का पालन नहीं किया गया है। उनकी कड़े शब्दों में कमेटी द्वारा निन्दा की गई और निन्दा प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया और निर्णय लिया गया कि समाज के नियमों का जिन जिन गांवों में उल्लंघन किया गया है उन गांवों फिर से गांव की समाज सुधार समिति बनाई जाएगी और केंद्रीय कमेटी उसकी देख रेख करेंगी।* *4. आज की समीक्षा बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोई भी सामाजिक कार्यकर्ता , जनप्रतिनिधि, कर्मचारी, समाज सेवी समाज के नियमों का उल्लंघन करने वालों की प्रशासन से पैरवी करता है तो प्रशासन उसका नाम और मोबाइल नंबर सभी के सामने सार्वजनिक करें ।* *समीक्षा बैठक पूरी होने के बाद कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी कुशलगढ़ थानाधिकारी (CAI) प्रवीणसिंह जी सिसोदिया से मिले ओर समाज सुधार के नियमों के पालन में पुलिस प्रशासन कमेटी की मदद करने की अपील की, तब उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी गांव में डीजे बजाते हुए किसी भी समय पाया गया तो उस उसे पर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही की जाएगी। थानाधिकारी महोदय ने बताया कि जब कुशलगढ़ क्षेत्र का भील समाज हमारे साथ है तो समाज सुधार में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि गांव में खुली हुई सैकड़ों शराब की दुकानों को बंद करवाया जा रहा है। अगर लोगों ने शराब की दुकाने बंद नहीं की तो शराब की दूकान चलाने वालों पर भी कानूनी कार्यवाही चल रही है, यातायात नियमों का भी जनता पालन करें। हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाएं, शराब पीकर वाहन नहीं चलाएं।* *कार्यक्रम की अध्यक्षता भील समग्र विकास परिषद के अध्यक्ष रूपजी बारिया , मुख्य अतिथि पूर्व तहसीलदार देवीलाल डामोर, विशिष्ट अतिथि समाज सुधार समिति के अध्यक्ष डॉ वजहीग़ मईडा, सरपंच संघ जिला उपाध्यक्ष राकेश मईडा, वनवासी कल्याण परिषद के बहादुर सिंह डामोर, समाजसेवी दिनेश डिंडोर, जसवंत सिंह भाभोर, केसर सिंह डामोर, वेलजी देवदा, वेस्ताराम वसुनिया,नरसिंह गिरी महाराज, कल्लू महाराज, चतर सिंह महाराज, लालचंद डिंडोर, भूरा दामा, संदीप डामोर, बहादुर मचार, वाल सिंह डामोर,नरसिंह रावत, शंकरलाल भूरिया, देवीलाल भूरिया, रणजीत भाभोर, नारजी डामोर, आदि उपस्थित थे।*4
- सरादीत गांव की सामाजिक आमसभा में महंगाई पर कड़े फैसले, शादी-समारोह और सामाजिक कार्यों के लिए नए नियम लागू1
- नई ग्राम पंचायत जगलावदा का गांव कोटड़ा में मीटिंग का आयोजन रखा गया महादेव जी स्थान पर जिसमें निर्णय लिया गया आदर्श पंचायत बनाने के लिए ग्राम वासियों द्वारा सभी ने समर्थन किया गया वर्तमान सरपंच मनोहर लाल मीणा द्वारा आदिवासी समाज सुधार करना आवश्यक है इस पर विशेष वार्ता की गई होली के पावन त्योहार पर भी हमें सावधानी रखने की चर्चा की गई1
- Post by खुमचद सिगाड ईटानखेडा1
- Post by Rajendra Tabiyar1
- बांसवाड़ा जिले के बडोदिया गांव में होली से एक दिन पूर्व, आधी रात को एक बार फिर सदियों पुरानी अनोखी परंपरा का निर्वहन हुआ। गांव में ऐसा अजीब संयोग बना कि, चुन्नु और मुन्नु दोनों ही दुल्हा बनने की जिद पर अड़ गए। ऐसे में गांव के मुखिया नाथजी भाई पटेल व डॉक्टर विवेकानंद महाराज सहित अन्य बुजुर्गों ने विवाह मंडप में बैठकर निर्णय सुनाया कि, चुन्नु दुल्हा बनेगा और मुन्नु दुल्हन। मुखिया के फैसले के बाद युवाओं ने दोनों का हस्तमिलाप कर, विवाह कार्यक्रम शुरू कराया। महिलाओं ने हल्दी लेपन की रस्म निभाई। सात फेरे शुरू होते ही “मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी, फाल्गुन में बाजे शहनाई, आई सजना की बारात और आज मेरे यार की शादी है जैसे गीतों से माहौल गूंज उठा। पंडित ने विधिवत सात फेरे, मांग में सिंदूर और मंगलसूत्र की रस्में पूरी कराईं। हाथीवड़ा छोड़ने व मामेरा की रस्म में, दोनों को नकद राशि के साथ पेन और किताबें भेंट की गईं। बाराती और घराती सेल्फी व वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। फागण गीतों और नारों के बीच, रात एक बजे होने वाला यह आयोजन वर्ष में सिर्फ एक बार, होली पर ही होता है। दरअसल, परंपरा अनुसार गांव में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रांगण में, घरों से बच्चों को उठाकर प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। इस दौरान नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए, तंबाकू उत्पादों का दहन कर अग्नि के समक्ष फेरे दिलाए गए। बताया जाता है कि प्राचीन काल में खेर जाति के लोगों के श्राप के कारण, यह परंपरा शुरू हुई। करीब 90 वर्ष पूर्व एक बार विवाह नहीं हो पाया तो, गांव में 200 से अधिक दुधारू भैंसों की मौत हो गई थी। तब से यह परंपरा बिना खंडित हुए निभाई जा रही है, ताकि गांव आबाद रहे।4
- वांकल नदी–अरावली पर्वतमाला के आंचल में बसे प्राकृतिक खजाने को संवारने की मांग, फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा अपवाह क्षेत्र बना आकर्षण का केंद्र दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्र में बहने वाली वांकल नदी अपने स्वच्छ जल, हरित तटों और रमणीय पहाड़ी भू-आकृतियों के कारण क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है। प्राचीन अरावली पर्वतमाला की गोद से निकलकर यह नदी आसपास के गांवों, खेतों और वन क्षेत्रों को सिंचित करते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखती है। वर्षा ऋतु में इसका प्रवाह और आसपास का प्राकृतिक दृश्य विशेष रूप से मनमोहक हो उठता है। वांकल नदी का अपवाह क्षेत्र फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा हुआ है, जो जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों, औषधीय पौधों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। यहां की घनी हरियाली, झरने, पथरीली पहाड़ियां और शांत वातावरण पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पर्यावरण प्रेमी धनराज गरासिया ने बताया कि क्षेत्र में टीलेश्वर मुक्तिधाम आश्रम, भोलेश्वर महादेव मंदिर, राम कुंडा, लंगोटिया, खांचण पुल, कूकड़ी माता जी, नगाधिराज बावजी, रीछ पहाड़ियां, कटावली झरना और भांडेर बावजी झरना जैसे धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। यदि इन स्थलों का योजनाबद्ध और पर्यावरण अनुकूल विकास किया जाए तो यहां सतत पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। उन्होंने जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी से आग्रह किया कि वन विभाग और जनजाति विभाग के माध्यम से विकास प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति दी जाए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे और क्षेत्र का समग्र विकास भी सुनिश्चित हो सके। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण और संतुलित विकास की मांग लगातार उठ रही है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत प्राकृतिक संपदा का लाभ उठा सकें।1