फागुन की रात अनोखा फैसला: दो दुल्हों की जिद, चुन्नु बना दुल्हा–मुन्नु बनी दुल्हन बांसवाड़ा जिले के बडोदिया गांव में होली से एक दिन पूर्व, आधी रात को एक बार फिर सदियों पुरानी अनोखी परंपरा का निर्वहन हुआ। गांव में ऐसा अजीब संयोग बना कि, चुन्नु और मुन्नु दोनों ही दुल्हा बनने की जिद पर अड़ गए। ऐसे में गांव के मुखिया नाथजी भाई पटेल व डॉक्टर विवेकानंद महाराज सहित अन्य बुजुर्गों ने विवाह मंडप में बैठकर निर्णय सुनाया कि, चुन्नु दुल्हा बनेगा और मुन्नु दुल्हन। मुखिया के फैसले के बाद युवाओं ने दोनों का हस्तमिलाप कर, विवाह कार्यक्रम शुरू कराया। महिलाओं ने हल्दी लेपन की रस्म निभाई। सात फेरे शुरू होते ही “मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी, फाल्गुन में बाजे शहनाई, आई सजना की बारात और आज मेरे यार की शादी है जैसे गीतों से माहौल गूंज उठा। पंडित ने विधिवत सात फेरे, मांग में सिंदूर और मंगलसूत्र की रस्में पूरी कराईं। हाथीवड़ा छोड़ने व मामेरा की रस्म में, दोनों को नकद राशि के साथ पेन और किताबें भेंट की गईं। बाराती और घराती सेल्फी व वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। फागण गीतों और नारों के बीच, रात एक बजे होने वाला यह आयोजन वर्ष में सिर्फ एक बार, होली पर ही होता है। दरअसल, परंपरा अनुसार गांव में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रांगण में, घरों से बच्चों को उठाकर प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। इस दौरान नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए, तंबाकू उत्पादों का दहन कर अग्नि के समक्ष फेरे दिलाए गए। बताया जाता है कि प्राचीन काल में खेर जाति के लोगों के श्राप के कारण, यह परंपरा शुरू हुई। करीब 90 वर्ष पूर्व एक बार विवाह नहीं हो पाया तो, गांव में 200 से अधिक दुधारू भैंसों की मौत हो गई थी। तब से यह परंपरा बिना खंडित हुए निभाई जा रही है, ताकि गांव आबाद रहे।
फागुन की रात अनोखा फैसला: दो दुल्हों की जिद, चुन्नु बना दुल्हा–मुन्नु बनी दुल्हन बांसवाड़ा जिले के बडोदिया गांव में होली से एक दिन पूर्व, आधी रात को एक बार फिर सदियों पुरानी अनोखी परंपरा का निर्वहन हुआ। गांव में ऐसा अजीब संयोग बना कि, चुन्नु और मुन्नु दोनों ही दुल्हा बनने की जिद पर अड़ गए। ऐसे में गांव के मुखिया नाथजी भाई पटेल व डॉक्टर विवेकानंद महाराज सहित अन्य बुजुर्गों ने विवाह मंडप में
बैठकर निर्णय सुनाया कि, चुन्नु दुल्हा बनेगा और मुन्नु दुल्हन। मुखिया के फैसले के बाद युवाओं ने दोनों का हस्तमिलाप कर, विवाह कार्यक्रम शुरू कराया। महिलाओं ने हल्दी लेपन की रस्म निभाई। सात फेरे शुरू होते ही “मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी, फाल्गुन में बाजे शहनाई, आई सजना की बारात और आज मेरे यार की शादी है जैसे गीतों से माहौल गूंज उठा। पंडित ने विधिवत सात फेरे, मांग में सिंदूर और मंगलसूत्र की
रस्में पूरी कराईं। हाथीवड़ा छोड़ने व मामेरा की रस्म में, दोनों को नकद राशि के साथ पेन और किताबें भेंट की गईं। बाराती और घराती सेल्फी व वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। फागण गीतों और नारों के बीच, रात एक बजे होने वाला यह आयोजन वर्ष में सिर्फ एक बार, होली पर ही होता है। दरअसल, परंपरा अनुसार गांव में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रांगण में, घरों से बच्चों को उठाकर प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। इस
दौरान नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए, तंबाकू उत्पादों का दहन कर अग्नि के समक्ष फेरे दिलाए गए। बताया जाता है कि प्राचीन काल में खेर जाति के लोगों के श्राप के कारण, यह परंपरा शुरू हुई। करीब 90 वर्ष पूर्व एक बार विवाह नहीं हो पाया तो, गांव में 200 से अधिक दुधारू भैंसों की मौत हो गई थी। तब से यह परंपरा बिना खंडित हुए निभाई जा रही है, ताकि गांव आबाद रहे।
- Post by Rajendra Tabiyar1
- सीमलवाड़ा। आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देश पर विभिन्न थाना क्षेत्रों में पैदल मय हथियार फ्लैग मार्च निकाला गया। सीमलवाड़ा पुलिस उप अधीक्षक मदनलाल विश्नोई के सुपरविजन में फ्लैग मार्च धंबोला थाना क्षेत्र के सीमलवाड़ा कस्बा, पीठ कस्बा एवं धंबोला कस्बा सहित प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। पुलिस बल ने बाजारों, मुख्य चौराहों एवं संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त करते हुए आमजन को सुरक्षा का संदेश दिया। इस दौरान धंबोला थानाधिकारी देवेंद्र देवल, चौरासी थानाधिकारी भंवर सिंह राठौड़, राम सागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंचारिया, कुआं थानाधिकारी मनोज कुमार सहित भारी पुलिस जाब्ता मौजूद रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि रंगों का पर्व होली आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है। इसे शालीनता एवं मर्यादा के साथ मनाया जाए। किसी भी प्रकार की हुड़दंग, जबरन चंदा वसूली, शराब पीकर उत्पात मचाने या कानून व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। फ्लैग मार्च के माध्यम से पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में पूरी सतर्कता बरती जा रही है और आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है। फ्लैग मार्च के दौरान कस्बों में लोगों ने पुलिस की उपस्थिति का स्वागत किया और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाने में सहयोग का आश्वासन1
- Post by Parmeshvar redash1
- Post by Mukesh Kumar1
- उदयपुर। अपना घर आश्रम में सीटेट और एमपीयुएटी के छात्रों ने होली पर्व बड़े ही हर्षोल्लास एवं भावनात्मक वातावरण में मनाया। इस अवसर पर सीटेट और एमपीयुएटी के 30 विद्यार्थियों के ग्रुप ने आश्रम का अवलोकन किया तथा प्रभुजी के साथ रंगों से होली खेलकर खुशियाँ साझा की। विद्यार्थियों द्वारा होली के पारंपरिक गीतों को गाकर रंगो की होली मनाई और प्रभुजी संग नृत्य कर उत्सव को यादगार बना दिया। ग्रुप लीडर वृत्तिका दाधीच एवं प्रियंका चौधरी ने बताया कि प्रभुजी के साथ होली खेलने का अनुभव अत्यंत भावुक एवं आनंददायक रहा और यहां आकर सेवा का वास्तविक अर्थ समझ में आया जिससे आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई। कार्यक्रम के प्रारंभ में आश्रम अध्यक्ष गोपाल कनेरिया द्वारा विद्यार्थियों को आश्रम की गतिविधियों, कार्य प्रणाली एवं सेवाभाव की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम की डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाकर संस्था के कार्यों से अवगत कराया। इस अवसर पर आश्रम संरक्षक सुरेश विजयवर्गीय, उपाध्यक्ष राजेश गर्ग, सह सचिव सुनील चौहान, वित्त सचिव प्रकाश जोशी, सदस्य अल्पना गर्ग, प्रभारी सुल्तान सिंह, प्रखर कपूर, निखिल अरोड़ा , तनिष्का गोयल, बुलबुल मालव, प्रियंका कुलहरी,वीरेंद्र सिंह तंवर, रूपम शर्मा आदि विद्यार्थी और सेवा साथी उपस्थित थे। सभी ने विद्यार्थियों के इस सेवा भाव की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।3
- दो हजार से ज्यादा बम गिराया1
- बांसवाड़ा जिले के बडोदिया गांव में होली से एक दिन पूर्व, आधी रात को एक बार फिर सदियों पुरानी अनोखी परंपरा का निर्वहन हुआ। गांव में ऐसा अजीब संयोग बना कि, चुन्नु और मुन्नु दोनों ही दुल्हा बनने की जिद पर अड़ गए। ऐसे में गांव के मुखिया नाथजी भाई पटेल व डॉक्टर विवेकानंद महाराज सहित अन्य बुजुर्गों ने विवाह मंडप में बैठकर निर्णय सुनाया कि, चुन्नु दुल्हा बनेगा और मुन्नु दुल्हन। मुखिया के फैसले के बाद युवाओं ने दोनों का हस्तमिलाप कर, विवाह कार्यक्रम शुरू कराया। महिलाओं ने हल्दी लेपन की रस्म निभाई। सात फेरे शुरू होते ही “मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी, फाल्गुन में बाजे शहनाई, आई सजना की बारात और आज मेरे यार की शादी है जैसे गीतों से माहौल गूंज उठा। पंडित ने विधिवत सात फेरे, मांग में सिंदूर और मंगलसूत्र की रस्में पूरी कराईं। हाथीवड़ा छोड़ने व मामेरा की रस्म में, दोनों को नकद राशि के साथ पेन और किताबें भेंट की गईं। बाराती और घराती सेल्फी व वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। फागण गीतों और नारों के बीच, रात एक बजे होने वाला यह आयोजन वर्ष में सिर्फ एक बार, होली पर ही होता है। दरअसल, परंपरा अनुसार गांव में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रांगण में, घरों से बच्चों को उठाकर प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। इस दौरान नशे के खिलाफ अभियान चलाते हुए, तंबाकू उत्पादों का दहन कर अग्नि के समक्ष फेरे दिलाए गए। बताया जाता है कि प्राचीन काल में खेर जाति के लोगों के श्राप के कारण, यह परंपरा शुरू हुई। करीब 90 वर्ष पूर्व एक बार विवाह नहीं हो पाया तो, गांव में 200 से अधिक दुधारू भैंसों की मौत हो गई थी। तब से यह परंपरा बिना खंडित हुए निभाई जा रही है, ताकि गांव आबाद रहे।4
- Post by Rajendra Tabiyar1
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