उधरनपुर विद्यालय के खेल मैदान पर बनी पुलिस चौकी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट और अब जब ➤ मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल हो गई तो सवाल और भी उठे ➤ इस शाहाबाद के उधरनपुर में स्कूल के खेल मैदान में चल रही पुलिस चौकी पर उठे हैं कई सवाल शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। विद्यालय भूमि पर पुलिस चौकी को लेकर उठे सवाल शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। बालिका विद्यालय के खेल मैदान पर पुलिस चौकी का मामला पहुँचा हाईकोर्ट शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। ➤ आरोप—ग्राम पंचायत निधि से बना भवन, बाद में पुलिस ने चौकी के रूप में कर लिया कब्जा ➤ छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस चौकी और असामाजिक गतिविधियों से बढ़ी दहशत ➤ याचिकाकर्ता की मांग—खेल मैदान से हटे पुलिस चौकी, बच्चों को मिले उनका अधिकार
उधरनपुर विद्यालय के खेल मैदान पर बनी पुलिस चौकी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट और अब जब ➤ मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल हो गई तो सवाल और भी उठे ➤ इस शाहाबाद के उधरनपुर में स्कूल के खेल मैदान में चल रही पुलिस चौकी पर उठे हैं कई सवाल शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को
अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। विद्यालय भूमि पर पुलिस चौकी को लेकर उठे सवाल शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। बालिका विद्यालय के खेल मैदान पर पुलिस चौकी का मामला पहुँचा हाईकोर्ट शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे
खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। ➤ आरोप—ग्राम पंचायत निधि से बना भवन, बाद में पुलिस ने चौकी के रूप में कर लिया कब्जा ➤ छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस चौकी और असामाजिक गतिविधियों से बढ़ी दहशत ➤ याचिकाकर्ता की मांग—खेल मैदान से हटे पुलिस चौकी, बच्चों को मिले उनका अधिकार
- 9 मार्च को बघौली पहुंचेंगे शंकराचार्य, तैयारियां तेज बघौली। गौ-प्रतिष्ठा आंदोलन यात्रा के क्रम में 9 मार्च को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ जी महाराज बघौली पहुंचेंगे और धर्मसभा को संबोधित करेंगे। उनके आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शंकराचार्य की टीम पिछले दो दिनों से बघौली और नैमिष क्षेत्र में भ्रमण कर सभा स्थल, टेंट, मंच व अन्य व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है। साथ ही कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार और स्थानीय लोगों को सूचना देने की रणनीति भी बनाई जा रही है। बताया गया है कि बघौली में सभा के बाद शंकराचार्य नैमिषारण्य में भी धर्मसभा को संबोधित करेंगे।1
- शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। विद्यालय भूमि पर पुलिस चौकी को लेकर उठे सवाल शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। बालिका विद्यालय के खेल मैदान पर पुलिस चौकी का मामला पहुँचा हाईकोर्ट शाहाबाद (हरदोई) 6 मार्च। कोतवाली क्षेत्र के उधरनपुर मोहल्ले में स्थित जूनियर हाई स्कूल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में संचालित पुलिस चौकी अब बड़े विवाद का विषय बन गई है। खेल मैदान में बने इस भवन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल के रूप में जनहित याचिका दायर होने की खबर फैलते ही प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और लोग पुलिस चौकी की ओर ऊँगलियां उठाकर पुलिस चौकी की बैठकबाजी और अवैध गतिविधियों की चर्चा करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उधरनपुर में द्वार नंबर दो के पास स्थित इन दोनों विद्यालयों के साझा खेल मैदान में वर्षों पहले एक भवन का निर्माण कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक यह भवन तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत निधि से बनवाया गया था। बाद में उसी भवन को पुलिस ने उस पर अवैध कब्जा कर उसको पुलिस चौकी के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस मैदान में विद्यालय के बच्चे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां करते थे, वहीं अब पुलिस चौकी के कारण छात्र - छात्राओं में इसलिए और भी भय व्याप्त हैं क्योंकि जहाँ बर्दी वहीं शराबियों की गतिविधियाँ भी दिखाई देतीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बीच असामाजिक तत्वों के कारण विशेष रूप से छात्राएं उस मैदान की ओर जाने से भी कतराती हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि खेल मैदान में भवन का निर्माण ही नियमों के विपरीत है और उस पर पुलिस चौकी संचालित करना भी अवैध है। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस चौकी हो और आसपास शराब पीने वालों का जमावड़ा लगता हो, वहां बच्चों और खासकर बालिकाओं का खेलना स्वाभाविक रूप से असंभव हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद मैदान को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और विद्यालय के छात्र-छात्राएं फिर से निश्चिंत होकर अपने खेल मैदान में खेल सकेंगे। शाहाबाद(हरदोई) 6 मार्च। छात्र - छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस द्वारा किए गए अवैध कब्जे के परिणामस्वरूप सवाल यह हैं कि • विद्यालय के खेल मैदान में भवन निर्माण की अनुमति किसने दी? • ग्राम पंचायत निधि से भवन निर्माण का आखिर उद्देश्य क्या था? • यदि यह खेल मैदान है तो उस पर पुलिस चौकी कैसे संचालित हो रही है? • क्या बच्चों के खेल अधिकारों की अनदेखी हो रही है? इसी के साथ लोगों का कहना है कि यदि इसे जनहित की नजर से देखें तो पुलिस चौकी से जरूरी है खेल मैदान और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास आखिर इसलिए यह बेहद जरूरी है कि खेल मैदान से पुलिस चौकी हटाई जाए अन्यथा यदि विद्यालय का मैदान ही अतिक्रमण और अन्य गतिविधियों की भेंट चढ़ जाए तो छात्रों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस मामले में अदालत के फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। ➤ आरोप—ग्राम पंचायत निधि से बना भवन, बाद में पुलिस ने चौकी के रूप में कर लिया कब्जा ➤ छात्राओं के खेल मैदान में पुलिस चौकी और असामाजिक गतिविधियों से बढ़ी दहशत ➤ याचिकाकर्ता की मांग—खेल मैदान से हटे पुलिस चौकी, बच्चों को मिले उनका अधिकार3
- Post by सुधांशू रंजन श्रीवास्तव1
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- #हरदोई में DM अनुनय झा और SP अशोक कुमार मीणा ने रिजर्व पुलिस लाइन में पुलिस होली मिलन कार्यक्रम में भाग लिया और सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। #sadantak #HardoiPolice #hardoi_city #hardoi #NewsUpdate #hardoinews #highlight #holi #DMHardoi #Holi20261
- Post by मोनू शुक्ला1
- बघौली के शारदा रिसॉर्ट में साण्डी विधानसभा के भाजपा विधायक प्रभाष कुमार द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और सम्भ्रान्तजन शामिल हुए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विधायक पुत्र आभाष वर्मा की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली जिन्होंने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण बनाया। समारोह में भाजपा नेता सुधीर श्रीवास्तव, ब्लॉक प्रमुख धर्मवीर सिंह पन्ने, पूर्व मण्डल अध्यक्ष सुनील बाजपेयी, विधायक प्रतिनिधि गौरव ठाकुर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य ओम प्रकाश मिश्रा, डॉ. नीरज त्रिपाठी, उद्योग व्यापार संगठन अध्यक्ष बघौली सोमेंद्र गुप्ता, निर्भय सिंह, सालिकराम वर्मा, वीरपाल सिंह, पारुल कनौजिया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। हरदोई से भाजपा उपाध्यक्ष प्रीतेश दीक्षित व जिला पंचायत सदस्य सचिन मिश्रा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विधायक प्रभाष कुमार ने कहा कि होली का पर्व प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है तथा इस तरह के होली मिलन समारोह आगे भी आयोजित किए जाते रहेंगे।1