जिला बिलासपुर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग का प्लान कारगर साबित हुआ जिला बिलासपुर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग का प्लान कारगर साबित हुआ है। शिक्षा विभाग बिलासपुर द्वारा कमजोर बच्चों को पढ़ाई में मजबूत करने को लेकर एक प्लान तैयार किया था, जिसके साकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इस प्लान के तहत 18 जनवरी से 18 फरवरी तक शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई गई हैं, इसका लाभ इन बच्चों को मिला है। इस नए प्लान को तैयार करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर की उप निदेशक रेणू कौशल की ओर से किए गए प्रयास सराहनीय रहे हैं। वहीं, अब जल्द ही अचीवर बच्चों पर भी फोकस किया जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा बेहतर प्रयासा किए गए हैं। उधर, इस बारे में उच्च शिक्षा उपनिदेशक बिलासपुर रेणु कौशल ने यह जानकारी दी।
जिला बिलासपुर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग का प्लान कारगर साबित हुआ जिला बिलासपुर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग का प्लान कारगर साबित हुआ है। शिक्षा विभाग बिलासपुर द्वारा कमजोर बच्चों को पढ़ाई में मजबूत करने को लेकर एक प्लान तैयार किया था, जिसके साकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इस प्लान के तहत 18 जनवरी से 18 फरवरी तक शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई गई हैं, इसका लाभ इन बच्चों को मिला है। इस नए प्लान को तैयार करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर की उप निदेशक रेणू कौशल की ओर से किए गए प्रयास सराहनीय रहे हैं। वहीं, अब जल्द ही अचीवर बच्चों पर भी फोकस किया जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा बेहतर प्रयासा किए गए हैं। उधर, इस बारे में उच्च शिक्षा उपनिदेशक बिलासपुर रेणु कौशल ने यह जानकारी दी।
- जिला बिलासपुर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा विभाग का प्लान कारगर साबित हुआ है। शिक्षा विभाग बिलासपुर द्वारा कमजोर बच्चों को पढ़ाई में मजबूत करने को लेकर एक प्लान तैयार किया था, जिसके साकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इस प्लान के तहत 18 जनवरी से 18 फरवरी तक शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई गई हैं, इसका लाभ इन बच्चों को मिला है। इस नए प्लान को तैयार करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर की उप निदेशक रेणू कौशल की ओर से किए गए प्रयास सराहनीय रहे हैं। वहीं, अब जल्द ही अचीवर बच्चों पर भी फोकस किया जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा बेहतर प्रयासा किए गए हैं। उधर, इस बारे में उच्च शिक्षा उपनिदेशक बिलासपुर रेणु कौशल ने यह जानकारी दी।1
- Post by Dinesh Kumar1
- जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” कहते थे, आज RDG का कर रहे विरोध - अग्निहोत्री शिमला RDG पर बजट सत्र के दूसरे दिन भी तीखी बहस देखने को मिली. सदन के बाहर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा को घेरते हुए उनका स्पष्ट रुख पूछा है. डिप्टी CM ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार दिए. मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि RDG केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज RDG का विरोध कर रहे हैं. VO -- मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि कंसोलिडेटेड फंड से धन का बंटवारा किस प्रकार होगा. उन्होंने कहा कि देश के नेताओं ने उसी समय इन प्रश्नों का समाधान कर दिया था. उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र सहायता करेगा. रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया. उनका कहना था कि जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब RDG को भी समाप्त करने की बात हो रही है, जो हिमाचल के लिए गंभीर विषय है. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 में से 12 राज्यों में RDG पर निर्भरता केवल 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है, लेकिन हिमाचल के लिए यह अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि नागालैंड की RDG पर निर्भरता 17 प्रतिशत और हिमाचल की 13 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की निर्भरता मात्र 1 प्रतिशत है। पूर्व जयराम सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपये RDG के माध्यम से प्राप्त हुए थे। RDG बंद होने के संदर्भ में जयराम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने वाले बयान का भी उल्लेख किया गया. मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि RDG हिमाचल की आवश्यकता है और इसे बंद करना प्रदेश के साथ फरेब के समान होगा. बाइट -- मुकेश अग्निहोत्री उप-मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश2
- हमीरपुर हमीरपुर जिला के दुग्ध उत्पादक किसानों ने उपायुक्त हमीरपुर को ज्ञापन सौंप कर दुग्ध सबंधी आ रही समस्या से अवगत करवाया है। प्रतिनिधिमंडल के दौरान आए हुए दुग्ध उत्पादकों ने बताया कि दुग्ध उत्पादन के लिए विभाग के द्वारा दिलचस्पी नही दिखाई दे रही है जिसके चलते पिछले कुछ महीनों से दुग्ध उत्पादकों को समस्या हो रही है। इस अवसर पर किसान अनिल कुमार, रंजन सिंह के अलावा अन्य दूध उत्पादक मौजूद रहे। दूध उत्पादकों ने उपायुक्त हमीरपुर गर्धवा राठौर को ज्ञापन सौंपा और जल्द समस्या हल करने की गुहार लगाइ्र है। किसान अनिल कुमार ने बताया कि पिछले लगभग छह माह से पशुपालन विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से विशेषकर हिमफैड की मदद से सोसायटियों का गठन युद्धस्तर पर किया गया था और किसानों को आश्वस्त किया गया था कि घर.द्वार से दुग्ध एकत्रण की व्यवस्था की जाएगी तथा पशुपालकों को चारा और कम रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए इन योजनाओं से प्रेरित होकर अनेक किसानों ने अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन शुरू कर दिया।लेकिन अभी तक जिले में दुग्ध एकत्रण प्रणाली प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाई है जिससे दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान और विपणन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वही अन्य किसानों ने विभाग से मांग की है कि इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि पशुपालकों को राहत मिल सके।प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि विभाग की उद्यमशीलता और सकारात्मक पहल पशुपालकों के लिए वरदान सिद्ध होगी। वहीं किसान रंजन ने बताया कि दुग्ध उत्पादकों के द्वारा दूध की पैदावार तेा की जा रही है लेकिन दूध बेचने के लिए अब समस्या बन रही है इसलिए जिला उपायुकत से आज मुलाकात की जा रही है। उन्हांेने बताया कि दूध उत्पादन में दो सौ लीटर की क्षमता पूरी की जा रही है लेकिन खपत के लिए कोई काम सरकार नही कर रही है जिसके लिए दुध उत्पादकों के द्वारा अब जिला प्रशासन से इस समरूस्या का हल करने के लिए गुहार लगाइ्र है1
- चौकी मन्यार स्कूल में एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित उपमंडल बंगाणा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौकीमन्यार स्कूल में आर.ए.ए. (RAA) के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन बड़े उत्साह और सक्रिय भागीदारी के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव रांगडा की अध्यक्षता में प्रातःकालीन सभा से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने आर.ए.ए. के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों द्वारा गणित एवं विज्ञान विषय के माडल एवं चार्ट बनाने की प्रतियोंगिता के साथ साथ गणित ओलंपियाड एवं विज्ञान प्रश्नोत्तरी का आयोजन करवाया गया। बहीं पर स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव रांगडा ने विद्यार्थियों को अनुशासन, सहयोग और समाज सेवा के महत्व के साथ विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं इस प्रकार की गतिविधियों में बढ़ चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को बाद में सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव रांगडा, कार्यक्रम के अध्यक्ष संजीव कुमार,अशोक कुमार,सीमा देवी विजय शर्मा,अजय शर्मा सहित अन्य स्कूल स्टाफ सदस्य भी मौजूद रहे।2
- रामशहर के प्राचीन शिव मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा का आचार्य नरेंद्र भारद्वाज के मुखारविंद से संपन्न1
- हिमाचल प्रदेश में रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच वित्तीय अधिकारों को लेकर चल रही खींचतान अब नेताओं के तीखे बयानों तक पहुंच गई है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने मंगलवार को ऊना में पत्रकार वार्ता करते हुए भाजपा और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर पर सीधा हमला बोला। रायजादा ने आरोप लगाया कि हिमाचल के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भाजपा नेता चुप्पी साधे हुए हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से आरडीजी बंद करने संबंधी कथित दावों पर सवाल उठाते हुए प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की। बयानबाजी के इस दौर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां वित्तीय सहयोग और राज्य के अधिकारों को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने नजर आ रहे हैं।1
- बागछाल के समीप कुछ दिन पूर्व हुए दर्दनाक सड़क हादसे में टिप्पर चालक कुलदीप सिंह की असमय मृत्यु से क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है। वहीं इस बीच मृतक परिवार के समर्थन में खड़े सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अनिल (गांव भुवाई) व उनके सहयोगियों पर दर्ज एफआईआर ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। ग्रामीणों में इस कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद जब परिवार मुआवजे को लेकर दर-दर भटक रहा था, तब डॉ. अनिल और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उनका कथित तौर पर केवल इतना कहना था कि कंपनी की ओर से लिखित रूप में मुआवजे का स्पष्ट आश्वासन दिया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। ग्रामीणों का दावा है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। प्रदर्शन के दौरान एंबुलेंस को रास्ता दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उद्देश्य कानून व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि शोकाकुल परिवार के हक की लड़ाई लड़ना था। अब राजनीतिक हलकों में भी यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जनहित में आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है? पंचायत प्रतिनिधियों व युवाओं ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि वीडियो फुटेज सार्वजनिक की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी। डॉ. अनिल के समर्थकों का कहना है कि वे वर्षों से सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं और गरीब व जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को वे “जनआवाज को दबाने का प्रयास” बता रहे हैं। इस मामले को लेकर पूर्व जिला इंटक प्रधान विरी सिंह, मँझेड पंचायत के पूर्व प्रधान राम पाल, पूर्व युवा प्रधान राम मूर्ति, पूर्व सचिव ब्लॉक कांग्रेस श्री नयना देवी जी कृष्ण लाल ठाकुर, पूर्व महासचिव ब्लॉक कांग्रेस श्री नयना देवी जी राज पाल, जिला बिलासपुर पूर्व युवा कांग्रेस महासचिव रविंद्र कुमार, ज्योति, सुनीता कुमारी, रानी, उषा देवी, रामकली, तरसेम, राम सिंह, किशोरी लाल सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों व गणमान्य लोगों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है।1