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बेंगलुरु में शनिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) री-एग्जाम के दौरान एक परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ समय पर न पहुँच पाने के कारण कई छात्राओं को परीक्षा में प्रवेश नहीं मिल सका। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें छात्राएँ फूट-फूटकर रोती हुई दिखाई दे रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्राएँ दोपहर 1:32 बजे परीक्षा केंद्र पहुँची थीं, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। गेट बंद मिलने पर छात्राओं ने अंदर जाने की काफी कोशिश की, और कुछ तो रेलिंग पार कर परिसर तक भी पहुँच गईं। हालांकि, अंदर का गेट भी बंद होने के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। परिजनों ने आरोप लगाया कि शहर में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम था, जिससे वे समय पर घर से निकलने के बावजूद परीक्षा केंद्र तक तय समय में नहीं पहुँच सके। अभिभावकों ने प्रशासन पर पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मिनट की देरी ने उनके बच्चों का पूरा साल बर्बाद कर दिया। इस वायरल वीडियो में छात्राएँ परीक्षा केंद्र के बाहर रोती और उनके परिजन अधिकारियों से प्रवेश देने की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर एक बहस छिड़ गई है। एक वर्ग ने परीक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया है, जबकि दूसरे वर्ग ने ऐसी विशेष परिस्थितियों में कुछ मिनट की रियायत देने की माँग उठाई है। NTA की परीक्षा गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता, और इसी सख्त नियम के चलते देर से पहुँचे इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।

9 hrs ago
user_Narendra Ahirwar
Narendra Ahirwar
संपर्क करें. 8839675073 दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
9 hrs ago

बेंगलुरु में शनिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) री-एग्जाम के दौरान एक परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ समय पर न पहुँच पाने के कारण कई छात्राओं को परीक्षा में प्रवेश नहीं मिल सका। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें छात्राएँ फूट-फूटकर रोती हुई दिखाई दे रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्राएँ दोपहर 1:32 बजे परीक्षा केंद्र पहुँची थीं, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। गेट बंद मिलने पर छात्राओं ने अंदर जाने की काफी कोशिश की, और कुछ तो रेलिंग पार कर परिसर तक भी पहुँच गईं। हालांकि, अंदर का गेट भी बंद होने के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। परिजनों ने आरोप लगाया कि शहर में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम था, जिससे वे समय पर घर से निकलने के बावजूद परीक्षा केंद्र तक तय समय में नहीं पहुँच सके। अभिभावकों ने प्रशासन पर पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मिनट की देरी ने उनके बच्चों का पूरा साल बर्बाद कर दिया। इस वायरल वीडियो में छात्राएँ परीक्षा केंद्र के बाहर रोती और उनके परिजन अधिकारियों से प्रवेश देने की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर एक बहस छिड़ गई है। एक वर्ग ने परीक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया है, जबकि दूसरे वर्ग ने ऐसी विशेष परिस्थितियों में कुछ मिनट की रियायत देने की माँग उठाई है। NTA की परीक्षा गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता, और इसी सख्त नियम के चलते देर से पहुँचे इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।

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  • दमोह नगर पालिका ने बारिश के मौसम से पहले शहर में जर्जर भवनों की पहचान का अभियान शुरू कर दिया है। वार्ड प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 233 भवनों को जर्जर के रूप में चिन्हित किया गया है। इन भवनों की सूची आगे की कार्रवाई के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय भेजी गई है, ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके। नगर पालिका अधिकारियों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी की टीम सूची में शामिल भवनों का निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेगी। इसके बाद, जो भवन अत्यधिक खतरनाक पाए जाएंगे, उन्हें गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने आज सोमवार दोपहर 2 बजे बताया कि मई माह में सभी वार्ड प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह 233 भवनों की सूची तैयार हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश के दौरान लगातार पानी गिरने से कमजोर भवनों के ढहने और जनहानि की आशंका रहती है, जिसके चलते एहतियातन यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, इस सूची में कुछ ऐसे गैर-जर्जर दीवार या मकानों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है, जिस पर फिलहाल उच्च न्यायालय (हाइकोर्ट) द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी कर रोक लगा दी गई है।
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    दमोह नगर पालिका ने बारिश के मौसम से पहले शहर में जर्जर भवनों की पहचान का अभियान शुरू कर दिया है। वार्ड प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 233 भवनों को जर्जर के रूप में चिन्हित किया गया है। इन भवनों की सूची आगे की कार्रवाई के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय भेजी गई है, ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके।

नगर पालिका अधिकारियों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी की टीम सूची में शामिल भवनों का निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेगी। इसके बाद, जो भवन अत्यधिक खतरनाक पाए जाएंगे, उन्हें गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने आज सोमवार दोपहर 2 बजे बताया कि मई माह में सभी वार्ड प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह 233 भवनों की सूची तैयार हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश के दौरान लगातार पानी गिरने से कमजोर भवनों के ढहने और जनहानि की आशंका रहती है, जिसके चलते एहतियातन यह कदम उठाया जा रहा है।

हालांकि, इस सूची में कुछ ऐसे गैर-जर्जर दीवार या मकानों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है, जिस पर फिलहाल उच्च न्यायालय (हाइकोर्ट) द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी कर रोक लगा दी गई है।
    user_Narendra Ahirwar
    Narendra Ahirwar
    संपर्क करें. 8839675073 दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • आज शहर के चार परीक्षा केंद्रों पर री-नीट परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें गर्ल्स कॉलेज स्थित एक केंद्र पर तीन छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इनमें से दो छात्र निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर सकीं, जबकि तीसरी छात्र के अभिभावक पिछली परीक्षा का ही प्रवेश फॉर्म लेकर पहुंचे थे। समय पर प्रवेश न पा सकने वाली दो छात्राओं की पहचान स्नेहा दुबे (निवासी आरएमपी नगर विदिशा) और रागनी विश्वकर्मा (ग्राम कुला, तहसील कुरवाई) के रूप में हुई है। प्रवेश सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही अनुमत था, लेकिन ये दोनों छात्र 1:30 बजे के 2 मिनट बाद पहुंची थीं, जिसके चलते उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया। इस जानकारी के बाद परीक्षा की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने दोनों छात्रों को केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उनका बायोमेट्रिक सफल नहीं हो सका, जिसके कारण उन्हें परीक्षा दिए बिना ही बाहर आना पड़ा।
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    आज शहर के चार परीक्षा केंद्रों पर री-नीट परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें गर्ल्स कॉलेज स्थित एक केंद्र पर तीन छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इनमें से दो छात्र निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर सकीं, जबकि तीसरी छात्र के अभिभावक पिछली परीक्षा का ही प्रवेश फॉर्म लेकर पहुंचे थे।

समय पर प्रवेश न पा सकने वाली दो छात्राओं की पहचान स्नेहा दुबे (निवासी आरएमपी नगर विदिशा) और रागनी विश्वकर्मा (ग्राम कुला, तहसील कुरवाई) के रूप में हुई है। प्रवेश सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही अनुमत था, लेकिन ये दोनों छात्र 1:30 बजे के 2 मिनट बाद पहुंची थीं, जिसके चलते उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया।

इस जानकारी के बाद परीक्षा की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने दोनों छात्रों को केंद्र के अंदर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन उनका बायोमेट्रिक सफल नहीं हो सका, जिसके कारण उन्हें परीक्षा दिए बिना ही बाहर आना पड़ा।
    user_नीलेश विश्वकर्मा
    नीलेश विश्वकर्मा
    Voice of people दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • कटनी शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ गांधी स्कूल के समीप रविवार देर रात डायल 112 वाहन में तैनात एक आरक्षक पर तीन युवकों ने हमला कर मारपीट की। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना रविवार देर रात की है जब पूनम बर्मन नामक महिला ने कोतवाली थाने के अंतर्गत डायल 112 को पारिवारिक विवाद की सूचना दी थी, जिसमें उसके भाई को कुछ लोगों द्वारा पीटा जा रहा था। सूचना मिलते ही आरक्षक रूपेश यादव बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुँचे। जब आरक्षक रूपेश यादव ने मुख्य आरोपी गापू बर्मन और उसके दोनों साथियों को रोकने तथा मामले की पूछताछ करने का प्रयास किया, तो तीनों आरोपी भड़क गए और पुलिस की मौजूदगी का खौफ न रखते हुए ऑन-ड्यूटी आरक्षक रूपेश यादव पर ही हमला कर दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान वहाँ मौजूद किसी चश्मदीद ने घटना का वीडियो बना लिया। घटना के तुरंत बाद पीड़ित आरक्षक ने कोतवाली थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। आरोपियों के खिलाफ शासकीय सेवक पर हमला करने, शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने और मारपीट की गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिहा ने इस संबंध में बताया कि पूनम बर्मन की शिकायत और पीड़ित पुलिसकर्मी की रिपोर्ट पर तीन नामजद और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, जिससे जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
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    कटनी शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ गांधी स्कूल के समीप रविवार देर रात डायल 112 वाहन में तैनात एक आरक्षक पर तीन युवकों ने हमला कर मारपीट की। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना रविवार देर रात की है जब पूनम बर्मन नामक महिला ने कोतवाली थाने के अंतर्गत डायल 112 को पारिवारिक विवाद की सूचना दी थी, जिसमें उसके भाई को कुछ लोगों द्वारा पीटा जा रहा था। सूचना मिलते ही आरक्षक रूपेश यादव बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुँचे। जब आरक्षक रूपेश यादव ने मुख्य आरोपी गापू बर्मन और उसके दोनों साथियों को रोकने तथा मामले की पूछताछ करने का प्रयास किया, तो तीनों आरोपी भड़क गए और पुलिस की मौजूदगी का खौफ न रखते हुए ऑन-ड्यूटी आरक्षक रूपेश यादव पर ही हमला कर दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की। इस दौरान वहाँ मौजूद किसी चश्मदीद ने घटना का वीडियो बना लिया।

घटना के तुरंत बाद पीड़ित आरक्षक ने कोतवाली थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। आरोपियों के खिलाफ शासकीय सेवक पर हमला करने, शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने और मारपीट की गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिहा ने इस संबंध में बताया कि पूनम बर्मन की शिकायत और पीड़ित पुलिसकर्मी की रिपोर्ट पर तीन नामजद और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, जिससे जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
    user_Shivcharan Yadav
    Shivcharan Yadav
    Local News Reporter रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • सागर जिले के बामोरा स्थित जलसा होटल के सामने करतार सिंह गुर्जर के घर के किचन में सोमवार सुबह करीब 10 बजे एक जहरीली कोबरा नागिन निकल आई, जिससे परिजनों में दहशत फैल गई। सांप को देखते ही परिवार के सदस्य तुरंत घर से बाहर निकल आए। इस घटना की सूचना तत्काल सर्प विशेषज्ञ बबलू पवार को दी गई। सूचना मिलते ही बबलू पवार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। किचन में छिपी लगभग 3 फीट लंबी इस कोबरा नागिन को सफलतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। बबलू पवार ने बताया कि यह कोबरा प्रजाति की मादा नागिन थी, जो काफी जहरीली होती है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि समय रहते नागिन का रेस्क्यू कर लिए जाने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। रेस्क्यू के बाद नागिन को सुरक्षित जंगल में छोड़ने की तैयारी की गई। बबलू पवार ने इस अवसर पर लोगों से बारिश के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने और अपने घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। उन्होंने समझाया कि बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप और अन्य जीव-जंतु अक्सर रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं।
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    सागर जिले के बामोरा स्थित जलसा होटल के सामने करतार सिंह गुर्जर के घर के किचन में सोमवार सुबह करीब 10 बजे एक जहरीली कोबरा नागिन निकल आई, जिससे परिजनों में दहशत फैल गई। सांप को देखते ही परिवार के सदस्य तुरंत घर से बाहर निकल आए।

इस घटना की सूचना तत्काल सर्प विशेषज्ञ बबलू पवार को दी गई। सूचना मिलते ही बबलू पवार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। किचन में छिपी लगभग 3 फीट लंबी इस कोबरा नागिन को सफलतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया।

बबलू पवार ने बताया कि यह कोबरा प्रजाति की मादा नागिन थी, जो काफी जहरीली होती है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि समय रहते नागिन का रेस्क्यू कर लिए जाने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

रेस्क्यू के बाद नागिन को सुरक्षित जंगल में छोड़ने की तैयारी की गई। बबलू पवार ने इस अवसर पर लोगों से बारिश के मौसम में विशेष सतर्कता बरतने और अपने घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। उन्होंने समझाया कि बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप और अन्य जीव-जंतु अक्सर रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं।
    user_Gajendra Thakur Khabar Ka Asar
    Gajendra Thakur Khabar Ka Asar
    Court reporter सागर नगर, सागर, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बिहार में भारत तिवारी का एनकाउंटर हुआ है, जिसे लोगों ने गलत बताया है। जनता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह घटना अनुचित है, और उन्होंने भारत तिवारी द्वारा जनता के लिए किए गए बेहतरीन कार्यों का उल्लेख किया है। लोगों का कहना है कि भारत तिवारी ने जनहित में बहुत अच्छा काम किया था। इस घटना से 'बिहार का लाल' खो गया है, और इस कार्य के लिए निश्चित रूप से सज़ा मिलनी चाहिए।
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    बिहार में भारत तिवारी का एनकाउंटर हुआ है, जिसे लोगों ने गलत बताया है। जनता ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह घटना अनुचित है, और उन्होंने भारत तिवारी द्वारा जनता के लिए किए गए बेहतरीन कार्यों का उल्लेख किया है। लोगों का कहना है कि भारत तिवारी ने जनहित में बहुत अच्छा काम किया था। इस घटना से 'बिहार का लाल' खो गया है, और इस कार्य के लिए निश्चित रूप से सज़ा मिलनी चाहिए।
    user_Devendra Rathore
    Devendra Rathore
    Voice of people Sagar, Madhya Pradesh•
    10 hrs ago
  • बीना नगर के शिव वार्ड, शास्त्री वार्ड और अन्य क्षेत्रों में रेलवे द्वारा किए गए ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के समर्थन में सोमवार को कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर सागर, एसडीएम बीना और रेलवे अधिकारियों को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत, पुनर्वास, मुआवजा और भविष्य में बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बेदखली और अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रावधान है, जिसका पालन नहीं किया गया, जिससे गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे जीवनयापन को मजबूर हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव ने भाजपा सरकार पर लोगों को आवास उपलब्ध कराने के बजाय बेघर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई नियम-कानूनों और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर की गई है, जहाँ गरीबों के मकान तोड़े गए, जबकि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जिससे कार्रवाई भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है। नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दिया गया, तो कांग्रेस पार्टी और स्थानीय जनता एक व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी। विनोद पोरिया ने भी कहा कि यदि रेलवे प्रशासन ने कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और पीड़ित परिवारों को राहत नहीं दी तो उग्र जनसंघर्ष खड़ा होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की होगी। ओमप्रकाश पंजाबी ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, दलितों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया ने क्षेत्रीय विधायक पर पीड़ितों की पीड़ा न सुनने का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों रुपये के मकान, घरेलू सामान और गृहस्थी नष्ट हो गई, और सरकार की ओर से केवल नगण्य सहायता की बात की जा रही है, जबकि कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत, पुनर्वास, मुआवजा, यथास्थिति संरक्षण और पुनः बसाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी, प्रभावित परिवार और स्थानीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन की होगी। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹2 लाख की अंतरिम आर्थिक सहायता, आवास निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री, संपत्ति क्षति का सर्वे कर पूर्ण क्षतिपूर्ति, प्रत्येक परिवार को ₹20 लाख का मुआवजा, अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखना, रेलवे के भूमि अभिलेख सार्वजनिक करना, और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना शामिल है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव, नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय, विनोद पोरिया, ओमप्रकाश पंजाबी, एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया, एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया सहित बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार और कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
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    बीना नगर के शिव वार्ड, शास्त्री वार्ड और अन्य क्षेत्रों में रेलवे द्वारा किए गए ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों के समर्थन में सोमवार को कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर सागर, एसडीएम बीना और रेलवे अधिकारियों को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत, पुनर्वास, मुआवजा और भविष्य में बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बेदखली और अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों में पर्याप्त नोटिस, सुनवाई का अवसर, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रावधान है, जिसका पालन नहीं किया गया, जिससे गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे जीवनयापन को मजबूर हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव ने भाजपा सरकार पर लोगों को आवास उपलब्ध कराने के बजाय बेघर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई नियम-कानूनों और न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर की गई है, जहाँ गरीबों के मकान तोड़े गए, जबकि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जिससे कार्रवाई भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है।

नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दिया गया, तो कांग्रेस पार्टी और स्थानीय जनता एक व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी। विनोद पोरिया ने भी कहा कि यदि रेलवे प्रशासन ने कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और पीड़ित परिवारों को राहत नहीं दी तो उग्र जनसंघर्ष खड़ा होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की होगी। ओमप्रकाश पंजाबी ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, दलितों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

जिला अध्यक्ष महिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया ने क्षेत्रीय विधायक पर पीड़ितों की पीड़ा न सुनने का आरोप लगाते हुए कहा कि लाखों रुपये के मकान, घरेलू सामान और गृहस्थी नष्ट हो गई, और सरकार की ओर से केवल नगण्य सहायता की बात की जा रही है, जबकि कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सात दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत, पुनर्वास, मुआवजा, यथास्थिति संरक्षण और पुनः बसाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी, प्रभावित परिवार और स्थानीय नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन की होगी। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹2 लाख की अंतरिम आर्थिक सहायता, आवास निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री, संपत्ति क्षति का सर्वे कर पूर्ण क्षतिपूर्ति, प्रत्येक परिवार को ₹20 लाख का मुआवजा, अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखना, रेलवे के भूमि अभिलेख सार्वजनिक करना, और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना शामिल है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इंदर यादव, नगर पालिका प्रतिपक्ष नेता प्रशांत राय, विनोद पोरिया, ओमप्रकाश पंजाबी, एडवोकेट महेंद्र कुमार नवैया, एडवोकेट उमा महेंद्र नवैया सहित बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार और कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
    user_RAJESH BABELE
    RAJESH BABELE
    Court reporter सागर नगर, सागर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बेंगलुरु में शनिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) री-एग्जाम के दौरान एक परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ समय पर न पहुँच पाने के कारण कई छात्राओं को परीक्षा में प्रवेश नहीं मिल सका। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें छात्राएँ फूट-फूटकर रोती हुई दिखाई दे रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्राएँ दोपहर 1:32 बजे परीक्षा केंद्र पहुँची थीं, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। गेट बंद मिलने पर छात्राओं ने अंदर जाने की काफी कोशिश की, और कुछ तो रेलिंग पार कर परिसर तक भी पहुँच गईं। हालांकि, अंदर का गेट भी बंद होने के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। परिजनों ने आरोप लगाया कि शहर में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम था, जिससे वे समय पर घर से निकलने के बावजूद परीक्षा केंद्र तक तय समय में नहीं पहुँच सके। अभिभावकों ने प्रशासन पर पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मिनट की देरी ने उनके बच्चों का पूरा साल बर्बाद कर दिया। इस वायरल वीडियो में छात्राएँ परीक्षा केंद्र के बाहर रोती और उनके परिजन अधिकारियों से प्रवेश देने की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर एक बहस छिड़ गई है। एक वर्ग ने परीक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया है, जबकि दूसरे वर्ग ने ऐसी विशेष परिस्थितियों में कुछ मिनट की रियायत देने की माँग उठाई है। NTA की परीक्षा गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता, और इसी सख्त नियम के चलते देर से पहुँचे इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।
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    बेंगलुरु में शनिवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) री-एग्जाम के दौरान एक परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जहाँ समय पर न पहुँच पाने के कारण कई छात्राओं को परीक्षा में प्रवेश नहीं मिल सका। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें छात्राएँ फूट-फूटकर रोती हुई दिखाई दे रही हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्राएँ दोपहर 1:32 बजे परीक्षा केंद्र पहुँची थीं, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नियमों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। गेट बंद मिलने पर छात्राओं ने अंदर जाने की काफी कोशिश की, और कुछ तो रेलिंग पार कर परिसर तक भी पहुँच गईं। हालांकि, अंदर का गेट भी बंद होने के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली। परिजनों ने आरोप लगाया कि शहर में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम था, जिससे वे समय पर घर से निकलने के बावजूद परीक्षा केंद्र तक तय समय में नहीं पहुँच सके। अभिभावकों ने प्रशासन पर पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ मिनट की देरी ने उनके बच्चों का पूरा साल बर्बाद कर दिया।

इस वायरल वीडियो में छात्राएँ परीक्षा केंद्र के बाहर रोती और उनके परिजन अधिकारियों से प्रवेश देने की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर एक बहस छिड़ गई है। एक वर्ग ने परीक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया है, जबकि दूसरे वर्ग ने ऐसी विशेष परिस्थितियों में कुछ मिनट की रियायत देने की माँग उठाई है। NTA की परीक्षा गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित समय के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाता, और इसी सख्त नियम के चलते देर से पहुँचे इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।
    user_Narendra Ahirwar
    Narendra Ahirwar
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    9 hrs ago
  • लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला भवन में हुए भीषण अग्निकांड में कोचिंग सेंटर के 10 छात्रों सहित कुल 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग भवन में फंस गए थे, जबकि अपनी जान बचाने के लिए एक छात्र को ऊंचाई से छलांग लगानी पड़ी। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं, और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों से जानकारी ली। इस त्रासदी को महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन वाले भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे? क्या भवन निर्माण के मानकों का पालन किया गया था, और यदि नहीं, तो इसका जिम्मेदार कौन है? हर बड़े हादसे के बाद जाँच, निलंबन और कार्रवाई की बातें तो होती हैं, लेकिन यह गंभीर सवाल बना हुआ है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जाते। निर्दोष छात्रों और अन्य लोगों की जान जाने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज़ हो गई है।
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    लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला भवन में हुए भीषण अग्निकांड में कोचिंग सेंटर के 10 छात्रों सहित कुल 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग भवन में फंस गए थे, जबकि अपनी जान बचाने के लिए एक छात्र को ऊंचाई से छलांग लगानी पड़ी। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल और राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं, और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों से जानकारी ली।

इस त्रासदी को महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन वाले भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे? क्या भवन निर्माण के मानकों का पालन किया गया था, और यदि नहीं, तो इसका जिम्मेदार कौन है?

हर बड़े हादसे के बाद जाँच, निलंबन और कार्रवाई की बातें तो होती हैं, लेकिन यह गंभीर सवाल बना हुआ है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जाते। निर्दोष छात्रों और अन्य लोगों की जान जाने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज़ हो गई है।
    user_सच के साथ पूरी खबर मेरे साथ
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    Media house मड़ावरा, ललितपुर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
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