जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर ताला मोड़ के पास स्थित अरावली रिसॉर्ट में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ निर्माण कार्य के दौरान एक विशाल दीवार अचानक ढह गई। इस घटना में मलबे के नीचे दबने से बिहार के मूल निवासी सविता (39), रामजी (40) और रिंकू (35) सहित तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिसॉर्ट परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या नाले के निर्माण के लिए गहरी खुदाई की जा रही थी। इस दौरान सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, जिससे अत्यधिक गहराई तक खुदाई के कारण पास की निर्माणाधीन दीवार का आधार कमजोर हो गया और वह सीधे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दुर्घटना के लिए निर्माण में बरती गई लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो इन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा राहत दल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे से निकाले गए घायल मजदूरों को नजदीकी निम्स (NIMS) और जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घटना स्थल पर पहुँचे जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिसॉर्ट प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम और निर्माण विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशासनिक जाँच के आदेश दिए गए हैं, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट साक्ष्य जुटाने के बाद अगले 3 से 7 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है। इसके बाद दोषियों पर सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर ताला मोड़ के पास स्थित अरावली रिसॉर्ट में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ निर्माण कार्य के दौरान एक विशाल दीवार अचानक ढह गई। इस घटना में मलबे के नीचे दबने से बिहार के मूल निवासी सविता (39), रामजी (40) और रिंकू (35) सहित तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिसॉर्ट परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या नाले के निर्माण के लिए गहरी खुदाई की जा रही थी। इस दौरान सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, जिससे अत्यधिक गहराई तक खुदाई के कारण पास की निर्माणाधीन दीवार का आधार कमजोर हो गया और वह सीधे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दुर्घटना के लिए निर्माण में बरती गई लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो इन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा राहत दल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे से निकाले गए घायल मजदूरों को नजदीकी निम्स (NIMS) और जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घटना स्थल पर पहुँचे जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिसॉर्ट प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम और निर्माण विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशासनिक जाँच के आदेश दिए गए हैं, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट साक्ष्य जुटाने के बाद अगले 3 से 7 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है। इसके बाद दोषियों पर सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- तालामोड़ क्षेत्र में एक निर्माणाधीन स्थल पर दीवार और मिट्टी धंसने से एक दर्दनाक हादसा हो गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में कई मजदूर मलबे में दब गए, जिनमें से कई की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचा और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से शवों को बाहर निकाला। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और पूरे इलाके में मातम का माहौल छा गया। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है, हालांकि मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या का अभी इंतजार है।2
- कोटपुतली-बहरोड़ जिले में सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 'नया सफर योजना' के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें ट्रक एवं बस यूनियन के पदाधिकारियों, बहरोड़, बानसूर, नीमराना के ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन कार्यालयों के प्रतिनिधियों और जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के संचालकों ने भाग लिया। एडीएम ओमप्रकाश सहारण और डीटीओ सुनील कुमार सैनी ने योजना के तहत मिलने वाले लाभों और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान की। जिला कलक्टर ने बताया कि 'नया सफर योजना' का मुख्य उद्देश्य बीएस-4 और उससे कम मानकों वाले पुराने वाहनों को नए बीएस-6, इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका लक्ष्य अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करके स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। योजना के अंतर्गत, बीएस-4 ट्रक और बसों को बेचने या बीएस-3 तथा निम्नतर मानक के ट्रक और बसों को पंजीकृत स्क्रैप सेंटर पर स्क्रैप करवाकर नए वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में छूट का प्रावधान है। साथ ही, वाहन ऋण पर 5 वर्ष तक 5 प्रतिशत की ब्याज छूट, अधिकतम 4800 रुपये तक के प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र शुल्क में छूट, पुराने वाहन पर बकाया कर में छूट और वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा वाहन की कीमत में 8 प्रतिशत तक की छूट भी प्रदान की जाएगी। डीटीओ ने जानकारी दी कि उनके कार्यालय क्षेत्राधिकार में पंजीकृत 230 एलजीवी/एमजीवी/एचजीवी भार वाहन, 85 यात्री वाहन और 131 स्कूल बसें (बीएस-4 एवं निम्नतर श्रेणी के) इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीएस-4 वाहनों का प्रतिस्थापन एनसीआर क्षेत्र और नॉन अटेनमेंट सिटीज को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। बैठक में शिक्षण संस्थानों के संचालकों को बताया गया कि वे अपनी पुरानी बसों को नई और सुरक्षित बसों से बदलकर योजना का लाभ ले सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला कलक्टर अपर्णा गुप्ता ने 'नया सफर योजना' को स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और संस्थानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक वाहन स्वामियों और हितधारकों तक इस योजना की जानकारी पहुंचाएं, ताकि पात्र लोग इसका लाभ उठाकर पुराने वाहनों के स्थान पर आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल वाहनों को अपना सकें। बैठक में जिला रसद अधिकारी शशि शेखर शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद, जिला परिवहन निरीक्षक पवन कुमार, तकनीकी शिक्षक रवि अश्विनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के संचालक व संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।1
- अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने हेतु प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इच्छुक अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आज ही 9829802933 और 9636241144 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।1
- यमुना जल समझौते के बाद, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उनके एक पुराने बयान की याद दिलाई। राठौड़ ने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग कल तक किसी काम को 'मुमकिन नहीं' बताते थे और पानी के मुद्दे पर राजनीति करते थे, आज वही इतिहास की गवाही और किए गए वादों की सच्चाई को देख रहे हैं। राठौड़ ने गहलोत के उस सार्वजनिक बयान को दोहराया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि यमुना जल समझौता हो जाता है, तो वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को माला पहनाकर उनका अभिनंदन करेंगे। इस बयान को याद दिलाकर राठौड़ ने एक तरह से गहलोत को अपने कहे पर अमल करने की चुनौती दी है।1
- पुलिस ने एक बड़े नकल रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें परीक्षाओं को पैसों में बेचा जा रहा था। इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा 45 छात्रों की एक सूची, लाखों रुपये के लेनदेन के हिसाब और व्हाट्सऐप चैट के माध्यम से हुआ, जिसने नकल के इस काले खेल की पूरी सच्चाई सामने ला दी।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अजीतपुरा कला में स्थानीय लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जलवा पूजन, जिसे कुआं पूजन भी कहा जाता है, मनाते हैं। इस प्रथा के साथ ही, राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर यहाँ विशेष रूप से 'जलवा तेरा जलवा' कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।1
- जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर ताला मोड़ के पास स्थित अरावली रिसॉर्ट में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ निर्माण कार्य के दौरान एक विशाल दीवार अचानक ढह गई। इस घटना में मलबे के नीचे दबने से बिहार के मूल निवासी सविता (39), रामजी (40) और रिंकू (35) सहित तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिसॉर्ट परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या नाले के निर्माण के लिए गहरी खुदाई की जा रही थी। इस दौरान सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, जिससे अत्यधिक गहराई तक खुदाई के कारण पास की निर्माणाधीन दीवार का आधार कमजोर हो गया और वह सीधे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दुर्घटना के लिए निर्माण में बरती गई लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो इन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा राहत दल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे से निकाले गए घायल मजदूरों को नजदीकी निम्स (NIMS) और जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ घायलों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। घटना स्थल पर पहुँचे जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिसॉर्ट प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम और निर्माण विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशासनिक जाँच के आदेश दिए गए हैं, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट साक्ष्य जुटाने के बाद अगले 3 से 7 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है। इसके बाद दोषियों पर सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।1