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रामगढ़ जिले के मांडू कोयलांचल में कर्बला की याद में मोहर्रम का जुलूस बहुत ही अक़ीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र कर्बला की याद में गूंज उठा। इस पवित्र अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब का एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया।
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रामगढ़ जिले के मांडू कोयलांचल में कर्बला की याद में मोहर्रम का जुलूस बहुत ही अक़ीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र कर्बला की याद में गूंज उठा। इस पवित्र अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब का एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया।
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- रामगढ़ जिले के मांडू कोयलांचल में कर्बला की याद में मोहर्रम का जुलूस बहुत ही अक़ीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र कर्बला की याद में गूंज उठा। इस पवित्र अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब का एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया।1
- रामगढ़ जिले के कुजू नया मोड़ पर ट्रैफिक जाम के कारण हुए एक हादसे के बाद पुलिस प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सख्त हो गए हैं। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, संबंधित अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है।1
- पूरे देश में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर अभियान चल रहा है, लेकिन हजारीबाग की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ कई जल स्रोत अतिक्रमण की जद में आ गए हैं। शहर का एकमात्र प्रमुख तालाब, ओकनी तालाब, अत्यधिक प्रदूषित हो गया है, जिससे वहाँ के जल जीव मर रहे हैं। जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम की टीमों ने क्षेत्र का भ्रमण कर जानकारी जुटाई है। लगभग 14 एकड़ में फैला हजारीबाग का प्रसिद्ध ओकनी तालाब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय निवासियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद, जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम ने इसका निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब से आ रही बदबू के कारण अब आसपास रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कूड़ा फेंकने, मवेशियों को बांधने और उनके अपशिष्ट को तालाब में डालने जैसी गतिविधियों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया। साथ ही, कुछ स्थानीय लोग तालाब में पानी फल सिंघाड़े की खेती भी कर रहे हैं, जिसमें रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी जहरीला हो रहा है और मछली, कछुए सहित अन्य जल जीवों की मौत हो रही है। प्रदूषण विभाग की जाँच टीम ने जल जीवों की मौत के कारणों की विस्तृत जाँच का आश्वासन दिया है और इसकी रिपोर्ट नगर निगम तथा जिला प्रशासन को सौंपने की बात कही है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त बिपिन कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने जाँच शुरू कर दी है और साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि गंदगी फैलाने वालों और तालाब के आसपास अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के मेयर अरविंद कुमार राणा ने कहा कि निगम अपनी सेवा देने के लिए तैयार है, लेकिन आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने लोगों से कूड़ेदान और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि जल जीवों की मौत के कारणों की भी जाँच की जाएगी।2
- हजारीबाग उपायुक्त ने जिले में लखनऊ के जैसे दावानल की घटना न घटे, इस बात को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, संस्थानों को अपने यहाँ बिजली का असेसमेंट करवाने के लिए कहा गया है।1
- हजारीबाग का ऐतिहासिक ओकनी तालाब गंभीर प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में आ गया है, जिसके कारण इसमें रहने वाली मछलियों, कछुओं सहित कई जलीय जीवों की मौत हो रही है। जल स्रोत में बढ़ते प्रदूषण को एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। इस गंभीर स्थिति की शिकायत मिलने के बाद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और जिला प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने तालाब का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में तालाब में गंदगी, अवैध अतिक्रमण और सिंघाड़ा की खेती में रसायनों के संभावित उपयोग की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी, एक व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा और सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। इसके साथ ही, नगर निगम ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे तालाब में कचरा न फेंकें और इसकी स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।2
- सुल्ताना में मोहर्रम का एक ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। इस जुलूस की मुख्य विशेषता ताजिया की भव्यता और खिलाड़ियों द्वारा प्रदर्शित किए गए हैरतअंगेज करतब थे।1
- स्थानीय इलाके में अकीदत और एहतराम के साथ मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान, पूरे इलाके में 'या हुसैन' के नारों की गूँज सुनाई दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।1
- झारखंड के दनुआ घाटी क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण इसे 'मौत की खाई' बताया जा रहा है। तेज रफ्तार, लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की कमी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है, जिसके चलते आए दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है। इन भयावह परिस्थितियों को देखते हुए, प्रशासन से मांग की गई है कि घाटी क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इसमें चेतावनी बोर्ड लगाने, स्पीड कंट्रोल की उचित व्यवस्था करने और नियमित निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं, ताकि मासूम लोगों की जान बचाई जा सके। यह भी चेताया गया है कि सड़क पर थोड़ी सी भी लापरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन सकती है, और इसलिए वाहनों को सावधानी से चलाने व सुरक्षित रहने की अपील की गई है।2