पूरे देश में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर अभियान चल रहा है, लेकिन हजारीबाग की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ कई जल स्रोत अतिक्रमण की जद में आ गए हैं। शहर का एकमात्र प्रमुख तालाब, ओकनी तालाब, अत्यधिक प्रदूषित हो गया है, जिससे वहाँ के जल जीव मर रहे हैं। जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम की टीमों ने क्षेत्र का भ्रमण कर जानकारी जुटाई है। लगभग 14 एकड़ में फैला हजारीबाग का प्रसिद्ध ओकनी तालाब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय निवासियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद, जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम ने इसका निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब से आ रही बदबू के कारण अब आसपास रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कूड़ा फेंकने, मवेशियों को बांधने और उनके अपशिष्ट को तालाब में डालने जैसी गतिविधियों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया। साथ ही, कुछ स्थानीय लोग तालाब में पानी फल सिंघाड़े की खेती भी कर रहे हैं, जिसमें रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी जहरीला हो रहा है और मछली, कछुए सहित अन्य जल जीवों की मौत हो रही है। प्रदूषण विभाग की जाँच टीम ने जल जीवों की मौत के कारणों की विस्तृत जाँच का आश्वासन दिया है और इसकी रिपोर्ट नगर निगम तथा जिला प्रशासन को सौंपने की बात कही है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त बिपिन कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने जाँच शुरू कर दी है और साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि गंदगी फैलाने वालों और तालाब के आसपास अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के मेयर अरविंद कुमार राणा ने कहा कि निगम अपनी सेवा देने के लिए तैयार है, लेकिन आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने लोगों से कूड़ेदान और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि जल जीवों की मौत के कारणों की भी जाँच की जाएगी।
पूरे देश में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर अभियान चल रहा है, लेकिन हजारीबाग की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ कई जल स्रोत अतिक्रमण की जद में आ गए हैं। शहर का एकमात्र प्रमुख तालाब, ओकनी तालाब, अत्यधिक प्रदूषित हो गया है, जिससे वहाँ के जल जीव मर रहे हैं। जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम की टीमों ने क्षेत्र का भ्रमण कर जानकारी जुटाई है। लगभग 14 एकड़ में फैला हजारीबाग का प्रसिद्ध ओकनी तालाब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय निवासियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद, जिला प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों की एक टीम ने इसका निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब से आ रही बदबू के कारण अब आसपास रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कूड़ा फेंकने, मवेशियों को बांधने और उनके अपशिष्ट को तालाब में डालने जैसी गतिविधियों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया। साथ ही, कुछ स्थानीय लोग तालाब में पानी फल सिंघाड़े की खेती भी कर रहे
हैं, जिसमें रासायनिक पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी जहरीला हो रहा है और मछली, कछुए सहित अन्य जल जीवों की मौत हो रही है। प्रदूषण विभाग की जाँच टीम ने जल जीवों की मौत के कारणों की विस्तृत जाँच का आश्वासन दिया है और इसकी रिपोर्ट नगर निगम तथा जिला प्रशासन को सौंपने की बात कही है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त बिपिन कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने जाँच शुरू कर दी है और साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि गंदगी फैलाने वालों और तालाब के आसपास अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के मेयर अरविंद कुमार राणा ने कहा कि निगम अपनी सेवा देने के लिए तैयार है, लेकिन आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने लोगों से कूड़ेदान और कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि जल जीवों की मौत के कारणों की भी जाँच की जाएगी।
- स्थानीय इलाके में अकीदत और एहतराम के साथ मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान, पूरे इलाके में 'या हुसैन' के नारों की गूँज सुनाई दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।1
- मुहर्रम भाईचारे और सर्वोच्च बलिदान का संदेश देता है। यह संदेश झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमसांडी अंचल स्थित छड़वा डैम परिसर में मुहर्रम के नवमी और दशमी के दौरान स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस ग्रामीण आयोजन में, गगनचुंबी 'निशान' और विभिन्न आकर्षक 'तजिए' अलग-अलग मनमोहक अंदाज़ में देखने को मिलते हैं, जो उत्सव का माहौल बनाते हुए भाईचारे, बलिदान और उत्साह का प्रदर्शन करते हैं।1
- जयराम महतो को मुख्यमंत्री (CM) बनाने के लिए एक 'नया फॉर्मूला' सामने आया है। इस संबंध में एक 'बड़ा फैसला' आगामी 28 जून को लिया जाएगा।1
- श्रावणी मेला 2026 के अवसर पर बाबा अजगैबीनाथ धाम, सुल्तानगंज, बिहार में सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत किया जा रहा है। हर साल की तरह इस वर्ष भी एक भव्य मेले का आयोजन होने जा रहा है, जिसकी अवधि एक महीने तक रहेगी। इस पवित्र अवसर पर, श्रद्धालु सुल्तानगंज से देवघर तक की 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करेंगे। इस वार्षिक मेले में सभी भक्तों का स्वागत है।1
- रामगढ़ जिले के कुजू नया मोड़ पर ट्रैफिक जाम के कारण हुए एक हादसे के बाद पुलिस प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सख्त हो गए हैं। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, संबंधित अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है।1
- छड़वा मैदान में एक ऐतिहासिक मुहर्रम के भव्य संगम का आयोजन किया गया, जिसमें 22 गांवों के हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। यह आयोजन अत्यंत शानदार रहा और इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।1
- झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई है। इस दुखद हादसे में सात लोगों की मौत होने की खबर है।1
- डोमचांच प्रखंड स्थित महेशपुर होल्ट पर रांची जाने वाले यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर रांची के लिए सीमित संख्या में ही टिकट उपलब्ध कराए जाते हैं, जिसके चलते शनिवार सुबह 9 बजे जैसी स्थिति में भी बहुत से यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ता है। यात्रियों ने बताया कि वे रोजाना रोजगार, इलाज और अन्य जरूरी कार्यों से बड़ी संख्या में रांची जाते हैं। टिकट न मिलने के कारण उन्हें हर सफर के दौरान टिकट जांच और जुर्माना भरने का डर सताता रहता है। यात्रियों ने रेलवे के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर रेलवे 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत स्टेशनों के विकास और आधुनिक सुविधाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महेशपुर होल्ट जैसे स्टेशन पर यात्रियों को यात्रा का मूलभूत अधिकार—यानी टिकट—भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति को देखते हुए, यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से माँग की है कि महेशपुर होल्ट पर रांची सहित अन्य प्रमुख गंतव्यों के लिए पर्याप्त संख्या में टिकट उपलब्ध कराए जाएँ और इस व्यवस्था में शीघ्र सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बिना टिकट यात्रा करने की मजबूरी से राहत मिल सके।1
- झारखंड के चतरा जिले में स्थित द्वारी रेलवे साइडिंग क्षेत्र शनिवार दोपहर रणक्षेत्र में बदल गया, जहाँ वर्चस्व की लड़ाई को लेकर दो गुटों के बीच भीषण हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे और पत्थर चलने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जिसमें दोनों तरफ से कई लोग घायल हुए। घायलों में एक जनप्रतिनिधि के भी शामिल होने की सूचना है, जबकि पास से गुजर रहे कई राहगीर भी इस मारपीट में चोटिल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रेलवे साइडिंग का संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती तौर पर कुछ हाइवा से कोयला रैक पहुंचा था। इसी दौरान द्वारी गांव के दो गुट किसी बात को लेकर आमने-सामने आ गए, और उनका विवाद देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गया। बताया जा रहा है कि रेलवे साइडिंग में दो कांटा घर बनाए गए हैं, जिनमें से एक का संचालन गांव के युवाओं द्वारा किया जा रहा है, जबकि दूसरे कांटा घर का संचालन तीन प्रभावशाली लोगों के हाथों में है। इसी वर्चस्व और संचालन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा तनाव शनिवार को हिंसक झड़प में बदल गया। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। समाचार लिखे जाने तक द्वारी बाजार में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे हुए थे। किसी भी बड़ी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस बल के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा था।1