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-गोचर भूमि में जबरन कब्जा पर ग्रामीणों ने किया विवाद।. बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से पशुओं के चरने और बांधने के लिए उपयोग में आने वाली गोचर भूमि का अवैध तरीके से किसी दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम पट्टा बना दिया गया है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और कब्जा नहीं होने देने की चेतावनी देते हुए मामले पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन लंबे समय से सार्वजनिक गोचर भूमि के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराते और बांधते हैं। आरोप है कि अब इस भूमि का पट्टा दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पट्टे की जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे और किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने देंगे। फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं। और मामले पर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दे रहे हैं तो वहीं मामले पर बलरामपुर एसडीएम का कहना है कि मामले की जांच करने के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी फिलहाल प्रशासन कार्रवाई की बात तो कर रहा है पर अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

3 hrs ago
user_Vijay Singh
Vijay Singh
बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
3 hrs ago

-गोचर भूमि में जबरन कब्जा पर ग्रामीणों ने किया विवाद।. बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से पशुओं के चरने और बांधने के लिए उपयोग में आने वाली गोचर भूमि का अवैध तरीके से किसी दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम पट्टा बना दिया गया है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और कब्जा नहीं होने देने की चेतावनी देते हुए मामले पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन लंबे समय से सार्वजनिक गोचर भूमि के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराते और बांधते हैं। आरोप है कि अब इस भूमि का पट्टा दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पट्टे की जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे और किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने देंगे। फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं। और मामले पर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दे रहे हैं तो वहीं मामले पर बलरामपुर एसडीएम का कहना है कि मामले की जांच करने के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी फिलहाल प्रशासन कार्रवाई की बात तो कर रहा है पर अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।

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  • -गोचर भूमि में जबरन कब्जा पर ग्रामीणों ने किया विवाद।. बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से पशुओं के चरने और बांधने के लिए उपयोग में आने वाली गोचर भूमि का अवैध तरीके से किसी दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम पट्टा बना दिया गया है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और कब्जा नहीं होने देने की चेतावनी देते हुए मामले पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन लंबे समय से सार्वजनिक गोचर भूमि के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराते और बांधते हैं। आरोप है कि अब इस भूमि का पट्टा दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पट्टे की जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे और किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने देंगे। फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं। और मामले पर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दे रहे हैं तो वहीं मामले पर बलरामपुर एसडीएम का कहना है कि मामले की जांच करने के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी फिलहाल प्रशासन कार्रवाई की बात तो कर रहा है पर अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।
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    -गोचर भूमि में जबरन कब्जा पर ग्रामीणों ने किया विवाद।.
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से पशुओं के चरने और बांधने के लिए उपयोग में आने वाली गोचर भूमि का अवैध तरीके से किसी दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम पट्टा बना दिया गया है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और कब्जा नहीं होने देने की चेतावनी देते हुए मामले पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन लंबे समय से सार्वजनिक गोचर भूमि के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराते और बांधते हैं। आरोप है कि अब इस भूमि का पट्टा दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पट्टे की जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे और किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने देंगे।
फिलहाल इस मामले को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं। और मामले पर निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दे रहे हैं तो वहीं मामले पर बलरामपुर एसडीएम का कहना है कि मामले की जांच करने के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी फिलहाल प्रशासन कार्रवाई की बात तो कर रहा है पर अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • शिक्षक पर अभद्र व्यवहार सहित गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, बलरामपुर शिक्षक पर गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पेंडारी में पदस्थ शिक्षक शिवा यादव पर छात्राओं से अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों ने आयुक्त कार्यालय तक शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। नाराज अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई होने तक वे अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का कहना है कि शिकायत अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आई है।जबकी लिखित में शिकायत इन्हें दी गई है।
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    शिक्षक पर अभद्र व्यवहार सहित गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं,

बलरामपुर 
शिक्षक पर गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं,
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पेंडारी में पदस्थ शिक्षक शिवा यादव पर छात्राओं से अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों ने आयुक्त कार्यालय तक शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। नाराज अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई होने तक वे अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का कहना है कि शिकायत अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आई है।जबकी लिखित में शिकायत इन्हें दी गई है।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • रंका के बूथ संख्या 355-356 में वॉलिंटियर नसीम अंसारी ने घर-घर जाकर किया एसआईआर फॉर्म भरने के लिए जागरूक रंका प्रखंड के कटरा पंचायत अंतर्गत बूथ संख्या 355 एवं 356 पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत आज बुधवार दो बजे दिन को वॉलिंटियर नसीम अंसारी द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को एसआईआर फॉर्म भरने के लिए जागरूक किया गया। अभियान के दौरान उन्होंने प्रत्येक परिवार से संपर्क कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की जानकारी दी तथा समय पर फॉर्म जमा करने की अपील की। नसीम अंसारी ने लोगों को बताया कि एसआईआर फॉर्म भरना प्रत्येक पात्र मतदाता के लिए आवश्यक है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर फॉर्म जमा नहीं किया गया तो भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना एसआईआर फॉर्म शीघ्र भरकर जमा करें। अभियान के तीसवें दिन भी उन्होंने बूथ क्षेत्र के विभिन्न टोले और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों को मतदान के अधिकार के महत्व से अवगत कराया तथा मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने में सहयोग करने की अपील की। इस दौरान ग्रामीणों ने भी अभियान में रुचि दिखाई और समय पर फॉर्म भरने का भरोसा दिलाया। वॉलिंटियर नसीम अंसारी ने कहा कि सभी पात्र मतदाताओं का नाम सही रूप से मतदाता सूची में दर्ज रहे, इसके लिए जनसहयोग और जागरूकता बेहद जरूरी है।
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    रंका के बूथ संख्या 355-356 में वॉलिंटियर नसीम अंसारी ने घर-घर जाकर किया एसआईआर फॉर्म भरने के लिए जागरूक


रंका प्रखंड के कटरा पंचायत अंतर्गत बूथ संख्या 355 एवं 356 पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत आज बुधवार दो बजे दिन को वॉलिंटियर नसीम अंसारी द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को एसआईआर फॉर्म भरने के लिए जागरूक किया गया। अभियान के दौरान उन्होंने प्रत्येक परिवार से संपर्क कर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की जानकारी दी तथा समय पर फॉर्म जमा करने की अपील की।
नसीम अंसारी ने लोगों को बताया कि एसआईआर फॉर्म भरना प्रत्येक पात्र मतदाता के लिए आवश्यक है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर फॉर्म जमा नहीं किया गया तो भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना एसआईआर फॉर्म शीघ्र भरकर जमा करें।
अभियान के तीसवें दिन भी उन्होंने बूथ क्षेत्र के विभिन्न टोले और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों को मतदान के अधिकार के महत्व से अवगत कराया तथा मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने में सहयोग करने की अपील की। इस दौरान ग्रामीणों ने भी अभियान में रुचि दिखाई और समय पर फॉर्म भरने का भरोसा दिलाया। वॉलिंटियर नसीम अंसारी ने कहा कि सभी पात्र मतदाताओं का नाम सही रूप से मतदाता सूची में दर्ज रहे, इसके लिए जनसहयोग और जागरूकता बेहद जरूरी है।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • सावन पर्व की तैयारियां तेज, शंकरघाट सेवा समिति ने जेसीबी से कराई मंदिर परिसर की साफ-सफाई अंबिकापुर। भगवान शिव के पावन श्रावण (सावन) मास के शुभारंभ को लेकर शंकरघाट सेवा समिति द्वारा तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। इसी क्रम में समिति के तत्वावधान में शंकरघाट मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र की जेसीबी मशीन लगाकर व्यापक साफ-सफाई कराई गई, ताकि सावन माह में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सावन मास का प्रारंभ 30 जुलाई 2026 से माना जा रहा है। सफाई अभियान के दौरान समिति के अध्यक्ष एवं मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम गुप्ता, उपाध्यक्ष शिव राम, कृष्णा यादव, सचिव राजशेखर पांडेय तथा संरक्षक विधेश्वर शरद सिंहदेव (बिंकी बाबा) सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए शंकरघाट पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
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    सावन पर्व की तैयारियां तेज, शंकरघाट सेवा समिति ने जेसीबी से कराई मंदिर परिसर की साफ-सफाई
अंबिकापुर। भगवान शिव के पावन श्रावण (सावन) मास के शुभारंभ को लेकर शंकरघाट सेवा समिति द्वारा तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। इसी क्रम में समिति के तत्वावधान में शंकरघाट मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र की जेसीबी मशीन लगाकर व्यापक साफ-सफाई कराई गई, ताकि सावन माह में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सावन मास का प्रारंभ 30 जुलाई 2026 से माना जा रहा है।
सफाई अभियान के दौरान समिति के अध्यक्ष एवं मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम गुप्ता, उपाध्यक्ष शिव राम, कृष्णा यादव, सचिव राजशेखर पांडेय तथा संरक्षक विधेश्वर शरद सिंहदेव (बिंकी बाबा) सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए शंकरघाट पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
    user_Himanshu raj Raj
    Himanshu raj Raj
    Social Media Manager अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • मेटा ने PM की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी क्या मोदी जी आपका वीडियो भी सुरक्षित नहीं है क्या मेटा ने PM की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी क्या मोदी जी आपका वीडियो भी सुरक्षित नहीं है क्या
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    मेटा ने PM की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी क्या मोदी जी आपका वीडियो भी सुरक्षित नहीं है क्या
मेटा ने PM की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी क्या मोदी जी आपका वीडियो भी सुरक्षित नहीं है क्या
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • ग्राम पंचायत चंद्रनगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल? नाममात्र मुरम, अभिलेखों में 1320 ट्रैक्टर का बिल होने का आरोप; पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल बलरामपुर। जिले की ग्राम पंचायत चंद्रनगर में सड़क मुरमीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के दौरान ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से कराए गए इस कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर बेहद कम मात्रा में मुरम डाली गई, जबकि पंचायत के अभिलेखों में लगभग 1320 ट्रैक्टर मुरम का बिल तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर वास्तविक रूप से केवल 100 से 150 ट्रैक्टर मुरम अथवा मिट्टी डालकर कार्य पूरा दर्शा दिया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से कागजों में अधिक मात्रा में मुरम दर्शाई गई। पहली ही बारिश में बह गई मुरम ग्रामीणों का कहना है कि मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता पहली ही बारिश में उजागर हो गई। सड़क पर डाली गई मुरम और मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह गई, जिससे पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहन फिसलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि जिस सड़क से बरसात में राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब दुर्घटनाओं का कारण बनती जा रही है। ग्रामीणों के लिए बढ़ी मुश्किलें ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार कीचड़ और जलभराव के कारण वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे समय पर उपचार और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका लाभ दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया गया होता तो पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति नहीं होती। पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं तथा विकास कार्यों के संबंध में ग्रामीणों की राय नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंचायत के सचिव, सरपंच के पुत्र तथा कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की जानकारी भी आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंचती। यदि कार्यों का प्रस्ताव, स्वीकृत राशि और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी। प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज ग्रामीणों के अनुसार जब कथित अनियमितताओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित मुरमीकरण कार्य की भुगतान राशि पर रोक लगा दी। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल भुगतान रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि कार्य में प्रयुक्त सामग्री, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान अभिलेख, परिवहन संबंधी दस्तावेज तथा अन्य रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी मात्रा में मुरम डाली गई और सरकारी धन का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं। उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, सड़क मुरमीकरण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा पंचायत के सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल इस मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में विकास कार्यों में होने वाली संभावित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क मुरमीकरण कार्य में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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    ग्राम पंचायत चंद्रनगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल? नाममात्र मुरम, अभिलेखों में 1320 ट्रैक्टर का बिल होने का आरोप; पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल
बलरामपुर। जिले की ग्राम पंचायत चंद्रनगर में सड़क मुरमीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के दौरान ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से कराए गए इस कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर बेहद कम मात्रा में मुरम डाली गई, जबकि पंचायत के अभिलेखों में लगभग 1320 ट्रैक्टर मुरम का बिल तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर वास्तविक रूप से केवल 100 से 150 ट्रैक्टर मुरम अथवा मिट्टी डालकर कार्य पूरा दर्शा दिया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से कागजों में अधिक मात्रा में मुरम दर्शाई गई।
पहली ही बारिश में बह गई मुरम
ग्रामीणों का कहना है कि मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता पहली ही बारिश में उजागर हो गई। सड़क पर डाली गई मुरम और मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह गई, जिससे पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहन फिसलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि जिस सड़क से बरसात में राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब दुर्घटनाओं का कारण बनती जा रही है।
ग्रामीणों के लिए बढ़ी मुश्किलें
ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार कीचड़ और जलभराव के कारण वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे समय पर उपचार और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका लाभ दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया गया होता तो पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति नहीं होती।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं तथा विकास कार्यों के संबंध में ग्रामीणों की राय नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंचायत के सचिव, सरपंच के पुत्र तथा कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की जानकारी भी आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंचती। यदि कार्यों का प्रस्ताव, स्वीकृत राशि और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों के अनुसार जब कथित अनियमितताओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित मुरमीकरण कार्य की भुगतान राशि पर रोक लगा दी। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल भुगतान रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि कार्य में प्रयुक्त सामग्री, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान अभिलेख, परिवहन संबंधी दस्तावेज तथा अन्य रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी मात्रा में मुरम डाली गई और सरकारी धन का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, सड़क मुरमीकरण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा पंचायत के सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल इस मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में विकास कार्यों में होने वाली संभावित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क मुरमीकरण कार्य में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • विश्रामपु मैं माइंस खुलने वाला था इस कारण गांव की एक कट्ठा होकर पुलिस वाले को लाठी चार्ज करें विश्रामपुर में माइंस खुलने वाला था इस कारण गांव वाली इकट्ठा होकर पुलिस के ऊपर रिचार्ज किया
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    विश्रामपु मैं माइंस खुलने वाला था इस कारण गांव की एक कट्ठा होकर पुलिस वाले को लाठी चार्ज करें
विश्रामपुर में माइंस खुलने वाला था इस कारण गांव वाली इकट्ठा होकर पुलिस के ऊपर रिचार्ज किया
    user_गांव के जवान
    गांव के जवान
    Vegetable Farmer शंकरगढ़, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
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